जीजा जी ने सोफे पे बैठा के मेरी चूत चोदी-2

Jija Ji Ne Sofe Pe Baitha Ke Meri Chut Chodi-2

जैसे ही मैंने लौड़ा हाथ में लिया, जीजा की आँख खुल गई और वो बोले- कोमल, क्या कर रही है?

मैं- कुछ नहीं जीजा जी, आप के कपड़े खोल रही थी. आप नींद में थे और आपने जूते वगैरह कुछ नहीं उतारे थे।

जीजा- मुझे पता है कि तू क्या कर रही थी। मैं सोया था लेकिन तूने हाथ लगा कर सहलाया तब मेरी नींद उड़ गई थी और फिर मैं सिर्फ आँखें बंद करके लेटा हुआ था।                                                                          “Jija Ji Ne Sofe Pe Baitha Ke Meri Chut Chodi”

मैं डर गई कि कहीं जीजा दीदी को ना बता दें।

लेकिन उसके बाद जीजा जो बोले, वो बहुत ही अलग और आश्चर्यजनक था।

जीजा- इतना ही लौड़ा लेने का शौक है तो कपड़े उतार दे देता हूँ।

मैं क्या बोलती, मुझे लौड़ा सिर्फ देखना था लेकिन अब जीजा थोड़े ही मानने वाला था। मुझे कभी ना कभी तो नथ उतरवानी थी, फिर आज क्यों नहीं, मैं कुछ नहीं बोली।

लेकिन जीजा के हाथ अब मेरे चूचों के ऊपर थे और वो उन्हें जोर से दबा रहे थे। मैंने आँखें बंद कर ली।

जीजा सोफे से खड़े हुए और शर्ट उतारने लगे। वो बिल्कुल नंगे हो गए और उसने मुझे कंधे से पकड़ के मेरी नाईटी उतारने के लिए हाथ ऊपर करवा दिए। मैं अगले ही मिनट में उसके सामने नंगी हो गई।

जीजा मेरे चूचों को अपने मुँह में लेकर चूसने लगे। उनके गरम गरम होंठ का अहसास जान निकाल देने वाला था। मुझे अजीब सी खुमारी छा रही थी। मैंने देखा कि जीजा के हाथ अब कमर के ऊपर होते हुए मेरे चूतड़ों तक पहुँचे और मुझे अपनी तरफ खींचा।

जीजा का लौड़ा मेरी चूत वाले हिस्से के बिल्कुल नजदीक आ गया और मुझे जैसे 1000 वाट का करंट लगा हो। जीजा ने अपने होंठ मेरे होंठों से लगाये और मेरे मुँह में व्हिस्की की गन्ध भर गई। वो मुझे चूसते हुए सोफे के ऊपर बैठ गये। मैं अब जीजा की दोनों टांगों के बीच में थी, उन्होंने मेरे हाथों को दोनों तरफ से पकड़ा और मेरा चेहरा लौड़े की तरफ ले गया !                              “Jija Ji Ne Sofe Pe Baitha Ke Meri Chut Chodi”

मैं प्रश्न के अंदाज से उन्हें देखने लगी। जीजा ने मेरा मुँह अपने सुपाड़े पर लाकर मुझे छोड़ दिया। मैंने लौड़ा हाथ में लिया और उसकी गर्मी का अहसास लेने लगी। जीजा ने पीछे से मुँह को धकेला और मेरे मुँह खोलते ही उसका लौड़ा आधा मेरे मुँह के अंदर चला गया। ओह माय गॉड ! यह तो बिल्कुल मुँह फाड़ रहा था मेरा ! उसकी तीन इंच की मोटाई मेरे मुँह के लिए बहुत ज्यादा थी. लेकिन फिर भी मैंने आधे लौड़े को चूसना चालू कर दिया। जीजा ने लंड के झटके मुँह में देने चाहे लेकिन मैंने उनकी जांघें थामे उन्हें नाकाम कर दिया।

जीजा अब सोफे से उठ खड़े हुए और मेरे मुँह को जोर जोर से चोदना चालू कर दिया।

उनका लौड़ा मेरे मुँह से ग्ग्ग्ग.. ग्ग्ग्ग.. गी.. गी.. गी.. गों.. गों.. गोग जैसी आवाजें निकाल रहा था। थोड़़ी देर में मुझे भी लंड चूसने में मजा आने लगा, ऐसे लग रहा था कि चोकलेट वाली आइसक्रीम खा रही थी।

जीजा ने अब मेरे मुँह से लौड़ा बाहर निकाला और मेरी टाँगें फैला कर मुझे सोफे में लिटा दिया, उसके होंठ मेरी चूत के होंठों से लग गए और वो मुझे सीधा स्वर्ग भेजने लगे- आह इह्ह ओह्ह ओह जीजा जी ! आह.. ह्ह्ह.. इह्ह.. ..!

मेरे लिए यह चुसाई का आनन्द मार देने वाला था। जीजा ने चूत के अंदर एक उंगली डाली और वो चूसने के साथ साथ उंगली से मुझे चोदने लगे- आह ह ह ह ह्हीईई आअह्ह्ह्ह के आवाज के साथ मैं झड़ गई।

जीजा ने अब मुँह हटाया और अपना लौड़ा मेरी चूत के ऊपर टिकाया। चूत काफी गीली थी और मुझे पता था कि अब तो फाईट होगी लौड़े और चूत के बीच ! जीजाजी ने हाथ में थूक लिया और लौड़े के आगे लगा दिया, एक झटका देकर उन्होंने आधा लंड मेरी चूत में दे दिया-

“आह्ह.. ह्ह.. आऊ.. ऊऊ.. ऊउइ ..ऊई ..उईईई.. मरर गई रे !”

जीजा ने मेरे मुँह पर हाथ रख दिया और एक और जोर का झटका देकर पूरा लौड़ा मेरी चूत में पेल दिया। मुझे ऐसे लग रहा था कि सारी चमड़ी जल रही हो, मानो किसी ने चूत में लोहे की गरम सलाख घुसा दी हो।                             “Jija Ji Ne Sofe Pe Baitha Ke Meri Chut Chodi”

जीजा थोड़़ी देर हिले नहीं पर अब धीरे धीरे से लंड को हिलाना चालू किया। ऐसा अहसास हो रहा था जैसे कि चमड़ी लौड़े के साथ साथ निकल रही थी चूत की !

मेरे आँखों से आँसू की धार निकल कर जीजा के हाथों को लगने लगी। उन्होंने मेरे कान के पास आते हुए कहा- घबरा मत ! अभी ठीक हो जाएगा सब !

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और सच में मुझे 2 मिनट के बाद लौड़ा सुखदायी लगने लगा। जीजा के झटकों के ऊपर अब मैं भी अपने कूल्हे हिलाने लगी।

जीजाजी ने हाथ मुँह से हटा कर चूचों पर रख दिया और चूत ठोकने के साथ साथ आगे से चूचे मसल रहा था। मैं सुखसागर पर सवार हो गई थी और लौड़ा मुझे ठक ठक ठोक रहा था। जीजा के झटके दो मिनट में तो बहुत ही तीव्र हो गए और वो एकदम स्पीड से मुझे चोदने लगे।

“आह.. आह.. ओह.. ओह.. ओह !” जीजा कुत्ते के जैसे फास्ट हुआ और मुझे थोड़़ी देर बाद जैसे की मेरी चूत के अंदर उन्होंने पेशाब किया हो, ऐसा लगा लेकिन वो मूत नहीं बल्कि उसका पिंघला हुआ लोहा यानि वीर्य था। उन्होंने लंड को जोर से चूत में दबाया और सारा के सारा पानी अंदर छोड़ दिया।

मैं उनसे लिपट कर लेट गई और मेरी आँख कब लग गई पता ही नहीं चला।                          “Jija Ji Ne Sofe Pe Baitha Ke Meri Chut Chodi”

मैं सो गई, लेकिन जब मैंने दीदी की चीखें सुनी तो मेरी आँख खुल गई। मैंने उठ कर देखा कि जीजा कपड़े पहन रहे थे और बेबी दीदी उसकी माँ बहन एक कर रही थी।

हम लोग पकड़े गए थे, रात के करीब डेढ़ बजे दीदी पानी पीने के लिए उठी और उसने हमें पकड़ लिया।

काश मैंने दीदी के रूम में पानी की बोतल पहले रख दी होती…!

दीदी जीजा से लड़ रही थी और जैसे उसने मुझे देखा उठते हुए, उसने मेरे पास आके मेरे दोनों गालों पर एक एक तमाचा लगा दिया।

मैं कुछ बोलने की अवस्था में नहीं थी।

दीदी- तू यहाँ बहन बन कर आई थी या सौतन? तेरा जीजा ठरकी बन गया तेरी कुँवारी चूत देख कर लेकिन तू तो उसे रोक सकती थी। लेकिन नहीं ! मैडम पड़ी थी जीजा की बाहों में ! तू मुझे कल इस घर में नहीं दिखनी चाहिए ! तू अभी अपनी बैग उठा और निकल और जिन्दगी में कभी यहाँ मत आना ! अगर तू अभी नहीं निकली तो मैं पापा को फोन करती हूँ।

जीजा ने बेबी को समझाने के बहुत कोशिश की लेकिन वो नहीं मानी, वो बोली कि अगर वो कुछ बोले तो वो उससे तलाक ले लेगी। मेरे पास कोई चारा था नहीं ! सुबह होते ही मैंने अपनी सहेली रचना को फोन लगाया जो चण्डीगढ़ में ही रहती थी और उसके घर टेक्सी करके चली गई।

 

दीदी ने सच में मुझे कभी अपने घर में नहीं आने दिया। कभी कभी हम लोग किसी फंक्शन में मिल जाएँ तो भी वो उखड़ी उखड़ी रहती हैं।

जीजा का लौड़ा मुझे महंगा तो पड़ा लेकिन ऐसा लौड़ा मिलना भी एक बड़ी बात है। अब तो बस एक ख्वाहिश है कि मेरे भावी पति का लौड़ा भी ऐसा तगड़ा ही हो।                                                                                           “Jija Ji Ne Sofe Pe Baitha Ke Meri Chut Chodi”