कड़ाके की सर्दी में मौसी और मामीजी को सरसो के खेत में पेला–2

Kadake ki shardi me mausi aur mamiji ko sarso ke khet me pela-2

घने कोहरे के आगोश में हम मामीजी के खेत की तरफ बढ़ते जा रहे थे।खेत की मेड़ पर पानी की बूंदे जमी हुई थी। अब हम खेतो में से निकलकर मामीजी के खेत पर पहुच चुके थे। अब मौसी और मामीजी की चूत मेरे लन्ड के नीचे आने से कुछ ही पल दूर थी।
मामीजी– लेे पहुंच गए अब खेत पर, ले जा तेरी मौसी को और तेरे लंड की प्यास बुझा ले।
मैं– मामीजी साथ में आप भी आओ ना।
मामीजी– नहीं नहीं मै तो यहां बैठकर थोड़ा सा काम कर लूंगी।तब तक तुम दोनों मज़े लो।
मैं– अरे मामीजी चलो ना यार।

मामीजी– अरे नहीं,मै कबाब में हड्डी नहीं बनूंगी। अगर मै साथ में चलूंगी तो तुम दोनों अच्छे से मज़ा नहीं ले पाएंगे।
मेरे बहुत समझाने के बाद भी मामीजी हमारे साथ सरसो के खेत में चलने के लिए तैयार नहीं हुई क्योंकि मामीजी अच्छी तरह से जानती थी कि उनके साथ में होने से मौसी अच्छी तरह से चुदवा पाने में शर्म करती। अब मैंने मौसी का हाथ पकड़ा और उनके सरसों के खेत में ले जाने लगा।सरसो के पौधे ओस की बूंदों से भीगे हुए थे।सरसो के पौधे आपस में बहुत ज्यादा उलझे हुए थे। मैं मौसी को खेत के बीचबीच लेे जाने की कोशिश कर रहा था लेकिन आज मौसी को चोदने में कोई रिस्क नहीं थी इसलिए मैंने सरसो के खेत में कुछ ही दूरी पर चुदाई का बिस्तर लगाने की सोची।

अब मैंने जल्दी से मौसी के जिस्म से साल उतार कर फेंक दी और मौसी को जल्दी से नीचे गिरा दिया। घने कोहरे में भीगे हुए सरसो के पौधे मौसी के लिए तुरंत बिस्तर बन गए और मौसी सरसो के पौधों के बिस्तर पर लेट गई।
अब मौसी पर चढ़ गया और मौसी के गुलाबी होंठो पर टूट पड़ा। मैं ताबड़तोड़ बल्लेबाजी करते हुए मौसी के होंठो पर लगी हुई लिपस्टिक को चूसने लगा।मुझे मौसी की लिपस्टिक चूसने में बहुत ज्यादा मज़ा आ रहा था।सरसो के खेत में अब पुच्छ पुच्छ आउच पुच्छ पुच्छ आउच पुच्छ पुच्छ की आवाजे गूंजने लगी। मैं दे दना दन मौसी के होंठो को चूस रहा था।मौसी चुपचाप सरसो के बिस्तर पर लेटी हुई थी।फिर मैंने थोड़ी देर में ही मौसी के होंठो को रगड़ डाला।
अब मैंने तुरंत मौसी के स्वेटर के बटन खोल दिए और फिर मौसी के ब्लाउज को ऊपर खिसका कर मौसी के बूब्स को बाहर निकाल लिया। कड़ाके की सर्दी में मौसी के बूब्स बाहर निकल आए थे। अब मैं मौसी के बूब्स को ज़ोर ज़ोर से दबाने लगा।मौसी दर्द से तड़पते हुए चेहरे को इधर उधर पटकने लगी।
मौसी– ओह रोहित धीरे धीरे दबा यार।
मैं– मौसी मै तो ज़ोर ज़ोर से ही दबाऊंगा।

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मौसी– बहुत दर्द हो रहा है यार।
मैं– होने दो मौसी दर्द को।
मैं ज़ोर ज़ोर से मौसी के बूब्स की हवा निकाल रहा था।मुझे मौसी के बूब्स दबाने में बहुत ज्यादा मज़ा आ रहा था।मौसी दर्द से कराह रही थी।
मौसी– ऊंह आह आह ओह आह ओह ऊंह आह ओह।
मैं– मौसी बहुत मज़ा आ रहा है।
फिर थोड़ी देर मौसी के बूब्स कसने के बाद मैंने मौसी के बूब्स को मुंह में भर लिया और अच्छी तरह से मौसी के बूब्स चूसने लगा।आह! वहीं मस्त टेस्ट जो मैंने कल ही चखा था। मैं मौसी के बूब्स को दबा दबा कर चूसने लगा।आह! बहुत ही शानदार टेस्ट आ रहा था मौसी के बूब्स का। भयंकर कड़ाके की सर्दी में मै मौसी के गरमा गर्म बूब्स को चूस रहा था।ये मेरे लिए बहुत ही खूबसूरत पल था। मैं लबालब मौसी के बूब्स को चूसते हुए जा रहा था।
मौसी– और चूसो,आह आह ओह बहुत अच्छा लग रहा है रोहित।
मैं– हां चूस रहा हूं मौसी।
मौसी– आह बहुत सालों बाद कोई मेरी प्यास बुझाने वाला मिला है।आह।

मैं– अब मैं आपको कभी प्यासी नहीं रहने दूंगा मौसी।
अब मैं और ज्यादा जोश से लबरेज होकर मौसी के बूब्स को चूसने लगा। अब मैं बीच बीच में बूब्स को काटने भी लगा। मौसी आज बहुत ज्यादा चुदासी होकर बूब्स चुसवा रही थी।
अजब गजब नज़ारा था यारो जिस आशा मौसी ने कभी मुझे बचपन में दूध पिलाया होगा आज उसी मौसी के बूब्स को मै जवान होकर चूस रहा था। कड़ाके की सर्दी में मै मेरी और मौसी की प्यास बुझाने की कोशिश कर रहा था।हम दोनों चुदाई के सागर में गोते लगा रहे थे।
फिर मैंने बहुत देर तक मौसी के बूब्स चूसे।चूस चूस कर आज तो मैंने मौसी के बूब्स को बहुत ज्यादा लाल कर दिया था।

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मौसी के बूब्स चूसने के बाद मै सीधा मौसी की टांगो पर आ गया और जल्दी से मौसी की टांगों को हवा में लहरा कर एक ही झटके में मौसी की पैंटी को चूत पर से हटा दिया। अब मैंने जल्दी से मौसी की साड़ी और पेटीकोट को ऊपर सरका दिया। अब मौसी की नंगी चूत मेरे लन्ड के सामने थी।मौसी की चूत देखते ही मेरा लन्ड ज़ोर से तन गया। अब मैंने मौसी की एक टांग को मेरे कंधे पर रखा और मौसी की चूत में तुरंत उंगली डाल दी।
अब मैं मौसी की चूत को सहलाने लगा। कड़ाके की सर्दी में मौसी की चूत बहुत ज्यादा गरम हो रही थी। अब मैं ज़ोर ज़ोर से मौसी की चूत को खुजाने लगा। अब मौसी धीरे धीरे सिसकारियां भरने लगी।
मौसी– ऊंह आह आह ओह आह आह ऊंह।
मैं– ओह मौसी ,चूत तो बहुत गर्म हो रही है।
मौसी– हां रोहित,अब नहीं रहा जा रहा है जल्दी से तेरा लंड डाल दे।
मैं– डालूंगा मौसी।बाद थोड़ी सी रुक जाओ।
मौसी– ओह रोहित,आह ओह बस कर यार, डाल दे। ना लंड।

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मैं– थोड़ा सा सब्र रखो मौसी।
मौसी की चूत अब लंड के लिए बहुत ज्यादा तड़प रही थी।उन्हें अब लंड की सख्त जरूरत होने लगी थी। मैं मौसी की चूत को अंदर से अच्छी तरह से सहला रहा था।कड़क सर्दी में मौसी बहुत ज्यादा गर्म हो चुकी थी।फिर मैंने थोड़ी देर मौसी की चूत सहलाने के बाद मौसी की दोनो टांगो को फैला दिया और मेरा मुंह तुरंत मौसी की चूत पर पंहुच गया।
अब मैं लबालब मौसी की चूत चाटने लगा।मौसी अब फिर से तड़पने लगी।
मौसी– ओह रोहित,मेरी चूत का मत तड़पा ना।

तभी मौसी ने कसमसा कर सरसो के पत्तो को मुट्ठियों में कस लिया और उन्हें निचोड़ने लगी। मैं मौसी की दोनो टांगो को पकड़कर अच्छी तरह से मौसी की चूत चाट रहा था। कुछ ही देर में मैंने मेरी जीभ मौसी की चूत में अंदर घुसा दी और मै मौसी की चूत के दाने को सहलाने लगा। अब तो मौसी बहुत बुरी तरह से इधर उधर हाथ पैर फेंकने लगी।
मौसी– ओह रोहित, मत कर ना यार।आह मै झड़ जाऊंगी।
मैं लगातार मौसी की चूत को रगड़ें जा रहा था।
मौसी– ओह आह आह आह ऊंह मर गई।ओह रोहित लंड डाल दे ना।
मौसी अब लंड की आग में बुरी तरह से जल रही थी। मैं मौसी को बहुत बुरी तरह से पिघला रहा था।
मौसी– ऊंह आह ओह ऊंह आईईईई मै तो गई अब।

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तभी मौसी की चूत में से गरमा गर्म लावा बाहर निकल आया। अब मैंने तुरंत मौसी का लावा चाटना शुरू कर दिया। मौसी कड़ाके की सर्दी में सरसो के खेत में पसीने से लथपथ हो चुकी थी। अब मैं आराम से मौसी का रस पी रहा था।इधर अब मेरा लन्ड भी मौसी की चूत के लिए तड़प रहा था।
अब मैंने तुरंत मेरी जीन्स अंडरवियर खोल दी और मौसी को पेलने के लिए लंड बाहर निकाल लिया।मेरा लन्ड फुफकार मारता हुआ बाहर निकल आया।अब मैंने तुरंत मौसी की टांगो को फोल्ड कर दिया और जल्दी से लंड को मौसी की चूत में सेट कर दिया।

मौसी– क्यो इतना तड़पाया? पहले ही चूत में डाल देता ना?
मैं– मौसी , तड़पाकर चोदने में ही तो मज़ा आता है।
अब मैंने ज़ोर से शॉट मारा और मेरा लन्ड झट से मौसी की चूत की दरारो को चीरता हुआ चूत में अंदर तक घुस गया।लंड चूत में घुसते ही मौसी की सिसकारियां फुट पड़ी।

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