कामुकता पैदा करने वाला काला जादू–2

Kamukta Paida karne wala kaala Jaadu-2

आप लोगों ने मेरी इस कहानी का पहला भाग तो पढ़ ही चुके होंगे कामुकता पैदा करने वाला काला जादू–1 , अब मैं आगे की कहानी बताने जा रही हूँ।

हैलो दोस्तों!
मैं रुपाली सिंह आप लोगों को आगे की कहानी बताने जा रही हूँ , तो जिस दिन मेरे पति अपने ससुराल से गए , उसी शाम की बात है ।
मैं मेरी चाची के साथ शाम में बाजार गई थी फल खरीदने और मुझे उस रात की चिंता हो रही थी , जिस रात मैं उस तांत्रिक के पास जाने वाली थी ।

तो मैं मेरी चाची से बोली की ,” चाची मुझे तो बहुत अजीब लग रही है उस तांत्रिक के पास रात में जाने के लिए ।”
तो मेरी चाची मुझे बोली की ,” अजीब तो लगेगा रुपाली , लेकिन तू बस ये सोच की , तुझे एक बेटा चाहिए , वरना दामाद जी तुझे भी घर से निकल देंगे।”
तो मैं मेरी चाची से बोली की ,” हाँ!… चाची तुम ठीक बोल रही हो , मैं कुछ ज्यादा ही सोच रही हूँ ।”

और फिर हम घर आ गए , उसके बाद जैसे–जैसे सूरज की रोशनी कम होती जा रही थी , वैसे–वैसे मेरी बेचैनी बढ़ती जा रही थी ।
फिर शाम हुई और शाम से रात , मैं रात का खाना खाने के बाद अपने कमरे में चली गई थी और कुछ देर के लिए आंख बंद कर के लेटी हुई थी ।
तभी मुझे वही सपना फिर से आया जो सुबह में आया था , जिसमें मैं उस तांत्रिक के बाहों में लिपटी हुई हूँ पूरी नंगी ।

और वो तांत्रिक मुझे चोद भी रहा था , मेरी बेचैनी इतनी बढ़ गई थी की , मैं अकबकाते हुए उठ गई और फिर मैं उठ कर समय देखि ।
उस समय रात के 10:30 बजे थे और मैं सोचने लगी , वो क्या था? बहुत ही अजीब सा सपना था , फिर मैं उठ कर साड़ी पहनने लगी ।
और उसके बाद मैं रसोई में गई और थाली में केला , अंगूर और सेब लेकर उस तांत्रिक के घर के लिए रवाना हो गई ।

उतनी रात में तो गाँव का कोई भी आदमी दिखाई नहीं दे रहा था , जो की बहुत अच्छी बात थी और मैं 20 मिनट के बाद पहुँच गई ।
और उस तांत्रिक के दरवाज़े पर दस्तक दी और फिर वो तांत्रिक दरवाज़ा खोला और वो मुझे अंदर आने के लिए बोला ।
मैं अंदर आयी और फिर उस तांत्रिक ने दरवाज़ा बंद करते हुए मुझे बैठने के लिए कहा , और वो तांत्रिक एक अजीब सा धुआँ वाला अगरबत्ती जलाया ।

और उस तांत्रिक ने मुझे सुंघाया , पता नहीं किस चीज का अगरबत्ती था उसे सूंघते ही मुझे नाश सा छ गया था ।
और तब उस तांत्रिक ने मेरे हांथों से फल वाली थाली लेते हुए कहा ,” अब अपने सारे कपड़े मेरे सामने खोलो।”
मेरे मन में हज़ारों सवाल उठ रहे थे , जैसे; मैं क्यों खोलूं कपड़े? वो भी तुम्हारे सामने? लेकिन तब भी मैं अपनी साड़ी खोल रही थी और ब्लाउज ।

मैं अपनी साड़ी , ब्लाउज खोल कर ब्रा , पेटीकोट और अपनी पेंटी भी उतार दी और पूरी नंगी हो गई , जो की मैं होना नहीं चाहती थी ।
जब मैं पूरी तरह नंगी हो गई थी , तब वो तांत्रिक केला और सेब खा रहा था और वो भी मुझे देखते हुए , बहुत अजीब लग रही थी ।
और फिर वो तांत्रिक केला और सेब खा कर खड़ा हुआ और मेरे पास आते हुए बोला ,” अब मेरा तौलिया उतरो और मेरे लिंग राज को प्यार करो ।”

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तब मैं उस तांत्रिक से नशे की हालात में बोलने लगी ,” क्या? मैं ऐसा क्यों करूँ? आप मुझसे क्या करवाना चाहते हैं?”
मैं ये बोलते जा रही थी और अपने घुटनो पर आ रही थी और मैं तांत्रिक के तौलिया को खोलने लगी थी और मैं तांत्रिक के तौलिया को खोल दी ।
तौलिया खोलते ही उस तांत्रिक का मोटा और भारी लंड मेरी मुँह के सामने आ गया , जिसे देख मैं बौखला कर मेरी मुँह खुल गई थी ।

और उसी समय उस तांत्रिक ने अपना लंड पकड़ा और मेरी मुँह में अपना मोटा और भारी लंड घुसा और मेरी बाल पकड़ के चुसवाने लगा ।
उस समय वो तांत्रिक मुझे बोले जा रहा था ,” ईईईसस… चूस मेरे लोवडे को , पूरा चूस–चूस के गिला कर दे ।”
मैं चाह कर भी उस तांत्रिक के लंड को चूसना नहीं छोड़ रही थी और मैं चूसे जा रही थी , जैसे की मैं को चोकोबार चूस रही हूँ ।

8–10 मिनट तक मैं उस तांत्रिक के लंड को चुस्ती रही और फिर उस तांत्रिक ने मेरी मुँह से अपना चिपचिपा लंड निकलते हुए लंड को ऊपर उठाया ।
और फिर उस तांत्रिक ने मुझे अपने भरी टट्टों को दिखते हुए बोला ,” अब इन्हें भी चूस–चाट और गिला कर दे ।”
तांत्रिक ये बोलते हुए मेरे चेहरे को अपने टट्टों से लगा कर रगड़ने लगा और मज़बूरन मुझे उस तांत्रिक के टट्टों को चूसना , चाटना पड़ा ।

बहुत शर्मनाक पल था वो मेरे लिए , क्यों की मैं किसी और के टट्टों को चूस रही थी और वो भी ऐसे जैसे कोई आम का गुठली हो ।
और वो तांत्रिक मज़े से सिसक रहा था ये बोलते हुए की ,” ईईईसस… अअआह… मस्त चुस्ती है रे तू , चुस्ती रह ईईईसस… ।”
मैं लगभग मिनट तक खूब चुस्ती रही और फिर उस तांत्रिक ने मुझे एक गद्दा बिछाया हुआ था , तो उसने मुझे वहां लेटा दिया ।

और फिर वो तांत्रिक मेरी टांगों को फैलाते हुए मेरी झाटों वाली चूत को चाटने लगा अअअईईई… ईईईसस… उउफफफ… ।
मैं तो पूरी बावरी होने लगी थी और उस तांत्रिक से नशे में बोलने लगी ,” ईईईसस… नहीं–नहीं रुक जाइये ना अअआह!…
लेकिन वो बदमाश तांत्रिक मेरी एक भी ना सुना और मेरी दोनों टांगों को फैलाए हुए मेरी चूत के दाने को चूसे जा रहा था ।

और वो तांत्रिक मेरी चूत को चाट–चाट के अपने लार से गिला करता जा रहा था और मैं अअआह… उउउहह… ईईईसस… करते हुए सिसकती जा रही थी ।
और फिर तांत्रिक मेरी चूत चाट कर घुटनो में आया और मेरी बाएं टांग को पकड़े हुए ऊपर उठाया और मेरी चूत में लंड रगड़ने लगा ।
ईईईसस… उउफफफ… उस तांत्रिक के उस हरकत से मैं पागल हुए जा रही थी और सिसक रही थी ईईईसस…।

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और तभी उस तांत्रिक ने मेरी चूत में अपने लंड को धक्का देते हुए पूरा घुसा दिया‌ अअआह… ईईईसस… और वो मुझे चोदने लगे ।
मैं अअअईईई… अअआह… ईईईसस… करते हुए सिसकती जा रही थी और तांत्रिक पुरे जोश के साथ मेरी चूत में लंड पेले जा रहे थे ।
ऐसा लग रहा था की , मैं कोई चुदाई की गुड़िया हूँ और मैं सिर्फ इस्तेमाल होने के अलावा कुछ कर नहीं सकती , ईईईसस…ईईईसस… अअआह…।

वो तांत्रिक मेरी एक टांग तो उठाया हुआ ही था और उसने दूसरा टांग भी उठा लिया और साथ में जोड़ के मेरी चूत में लंड धकेले जा रहा था ।
और उसके घर के अंदर उस तांत्रिक के टट्टों के थपेड़े से थप थप थप की आवाज़ सुनाई दे रही थी और मेरी अअआह… ईईईसस… सिसकने की ।
फिर उस तांत्रिक ने मेरी चूत में लंड पेले हुए ही मेरी चूचियों को दबाने लगा और मैं आह!… आह!… ईईईसस… करते हुए सिसका रही थी ।

एसा लग रहा था , जैसे की वो तांत्रिक मेरी चूचियों को पूरा निचोड़ देना चाहता था और तभी वो तांत्रिक मेरी दोनों टांगों को छोड़ा ।
और मेरे ऊपर चढ़ आया और अपने लंड को मेरी चूचियों के बिच रखते हुए पेलन शुरू कर दिया और मैं उस तांत्रिक को क्या ही बोलती ।
लेकिन वो तांत्रिक मुझे बोलने लगा की ,” ईईईसस… आह!… लड़का ही पैदा करवाना है न , उसके लिए तुझे भी पतुरिया की तरह मज़ा लेना होगा ।

तो मैं उस तांत्रिक से बोलने लगी की ,” क्या सचमें मुझे लड़का होगा? क्या मैं सचमें एक बेटे को जनम दे पाऊँगी?
तो उस तांत्रिक ने मुझे कहा की ,” हाँ , देख मेरी काली ज़ुबान , मैं एक डॉम हूँ जिसे वरदान मिला है , मैं कुछ भी कर सकता हूँ , करवा सकता हूँ।”
और फिर वो तांत्रिक मेरे ऊपर से उठा और मुझे अपने गोद में बैठते हुए , मेरी चूत में अपने लंड को घुसा दिया ।

अअअईईई… ईईईसस… उउफफफ… और फिर मुझे उछलते हुए चुदवाने लगा और मेरी गांड पर थापड़ मारे जा रहा था ।
जिससे मैं आह!… आह!… करते हुए दर्द में उछाल रही थी और उस तांत्रिक के गोद में अपनी गांड पटके जा रही थी और चूत में लंड अंदर–बहार हो रही थी।
और फिर वो तांत्रिक मुझे देर तक उसी आसान में मेरी चूत चोदता रहा और फिर वो तांत्रिक मुझे चटाई पर लेटा दिया ।

और मैं अपनी सर पकड़ कर बौराई जा रही थी , पता नहीं उस समय मुझे भी कुछ–कुछ होने लगी थी और मैं अपनी चूत को सहलाने लगी थी ।
तो वो तांत्रिक उठ कर अंगूर का गुच्छा लेकर आया और अपने लंड में लटका कर मेरे मुँह के पास लगा और मुझे खाने के लिए बोला ।
और मैं अंगूर खाने लगी और साथ ही वो तांत्रिक मेरी मुँह में अपना लंड पेल देता था और मैं चूसने लग जाती थी , तो उस तांत्रिक को लगा की मैं जोशिया रही हूँ ।

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तो उस तांत्रिक ने क्या किया की , कुछ अंगूर को उस तांत्रिक ने हाँथ मेरी लिया और मेरी चूत में मसल दिया ।
मेरी चूत मीठे रास से पूरा गिला हो गया और तब वो तांत्रिक मेरे ऊपर चढ़ा 69 पोज़ में , जिसमें मैं नीचे थी और वो ऊपर था ।
मैं उस तांत्रिक के लंड को चूस रही थी और वो तांत्रिक मेरी चूत को ऐसे ही चूसा–चाटी देर तक चला , मैं तांत्रिक के लंड को चूस चूस के लतपत कर दी थी।

और तब तक उस तांत्रिक ने मुझे एक दम मस्त कर दिया था , लंड चुसवा–चुसवा के और फिर मुझे उस तांत्रिक ने घोड़ी बनाया ।
और मेरी चूत में ज़ोर–ज़ोर से ऊँगली करने लगे ईईईसस… अअआह… ईईईसस… ऐसा लग रहा था की , मेरी चूत से पानी निकल जाएगी ।
और मैं सिसकते ही जा रही थी और बोले जा रही थी ,” ईईईसस… अअआह… नहीं–नहीं रुक जाइये न अअआह…उफ्फ्फ…”

तो वो तांत्रिक मुझे बोलने लगा ,” ईईईसस… चूत को पूरा गरम करने के बाद चोदन में जो मज़ा हैं ऊफ्फ… मज़ा आ जाएगा तुझे ।”
और एक दम से वो तांत्रिक मेरी चूत की छेद में अपने लंड को सेट किये और पूरा लंड धकेल के ज़ालिम चोदन चोदना शुरू कर दिया ।
और मैं पूरी दर्द से बोलने लगी ,” अअअईईई… अअआह… ईईईसस… मर गई रे अअआह… ईईईसस…”

और वो तांत्रिक मेरी चूत पेलते समय मेरी गांड की छेद में ऊँगली किये जा रहा था जिससे मैं और ईईईसस… उउउहह… ईईईसस… सिसक रही थी ।
तांत्रिक ने मेरी चूत में लंड के ज़ोरदार शॉट लगाए जा रहा था , वो भी पुरे अंदर तक और मेरी हालात ख़राब कर दे रहा था ।
फिर वो पल आया जब तांत्रिक मेरे ऊपर चढ़ गया और मेरी चूत में पुरे अंदर तक लंड पेले रहा और दो तीन बार धक्का दिया ।

और उस धक्के से मैं पूरी लेट गई और तब मैं तांत्रिक के गरम मुठ को अपनी चूत में महसूस की और तब मैं चैन की साँस ली ।
उस रात मैं बजे तांत्रिक के घर से गई थी और वो भी बड़ी मुश्किल से , क्यों की मैं सही से चल भी नहीं पा रही थी ।
लेकिन फिर भी मैं उस तांत्रिक के घर दशहरा तक जाती रही , हर रात वो तांत्रिक मुझे पेलता था और मेरी पेट में बीज छोड़ता था ।

और उसी तांत्रिक के वजह से आज मैं गर्भवती हुई हूँ और डॉक्टर ने पुष्टि की है कि बच्चा लड़का है।

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