कज़न बहन कंचन और चाचा के दोस्तों की चुदाई -2
पढ़ें कज़न बहन कंचन और श्याम की रातभर की चुदाई की गर्म कहानी। साड़ी खोलने से लेकर चूत फाड़ने तक की वासना भरी स्टोरी, जो आपको मदहोश कर देगी। भाग 2 में जानें पूरी रात का रोमांच!
आज मैं अपने पुराने वादे को पूरा करने के लिए आया हूँ। जैसा कि मैंने अपनी पिछली कहानी में बताया था कि मेरी कज़न कंचन अपनी माँ के साथ जाकर श्याम के साथ सेक्स करती थी। आज मैं उस कहानी को आगे बढ़ाते हुए आपको एक रात की कहानी सुनाता हूँ। उस दिन मैं और कंचन वहाँ किसी काम से आए हुए थे। शाम को कंचन ने मुझसे मेरे प्लान के बारे में पूछा, तो मैंने बताया कि मैं अपने दोस्त के यहाँ चला जाऊँगा। कंचन ने कहा, “मैं भी अपने दोस्त के यहाँ चली जाऊँगी।” मैंने कहा, “ठीक है।”
मैं अपने दोस्त के यहाँ गया, लेकिन वहाँ कोई नहीं था। जब मैं वापस आने लगा, तो मैंने कंचन को श्याम के यहाँ जाते हुए देखा। मुझे समझ आ गया कि कंचन आज रातभर के लिए कहाँ जा रही थी। वहाँ जाकर मैं अपनी जगह पर बैठ गया। उस समय अंधेरा हो चुका था, तो मैं आराम से बैठ गया। उस रात कंचन ने खाना कुछ जल्दी ही खा लिया था। दोनों लोगों ने खाना खाया। मैं ऊपर बरामदे पर चला गया और अपने बेड को ऐसी जगह पर लगाया, जहाँ से मैं कंचन के कमरे को आसानी से देख सकूँ।
कुछ देर बाद मैंने देखा कि जब कंचन ने अपने सारे काम खत्म करके उसी कमरे में गई, श्याम ने कंचन की साड़ी को पकड़कर खींचना शुरू किया। कंचन वहीं खड़ी मुस्कुरा रही थी। जब श्याम ने कंचन की साड़ी खोल दी, तो वो उसके पास आए। कंचन के पास आने के बाद श्याम ने उसे अपनी बाहों में कस लिया और उसकी दोनों चूचियों को मसलने लगा। साथ ही अपनी कमर को हिलाने लगा। कंचन कुछ देर तक वैसे ही खड़ी रही। श्याम ने कंचन का ब्लाउज़ खोल दिया और जैसे ही उसने कंचन के साये का नाड़ा खोला, कंचन ने खुद को उसकी बाहों से आज़ाद कर लिया। कंचन का साया ज़मीन पर गिर चुका था। श्याम ने भी अपना तौलिया खोलकर बेड पर रख दिया।
अब कंचन के तन पर एक भी कपड़ा नहीं था और श्याम भी बिल्कुल नंगे थे। कंचन बाहर का दरवाज़ा बंद करने के लिए जाने लगी, तो श्याम भी उसके पीछे-पीछे चल पड़े। मैंने देखा कि जब कंचन दरवाज़ा बंद करने के लिए खड़ी हुई, तो श्याम ने कंचन की गांड में अपना लंड घुसा दिया और उसे वहीं पेलने लगे। कंचन ज़ोर-ज़ोर से सिसकियाँ ले रही थी। पाँच-छह मिनट तक पेलने के बाद, जब कंचन ने दरवाज़ा बंद किया, तो उसने खुद को श्याम की पकड़ से आज़ाद किया।
मैंने देखा कि श्याम कंचन के पीछे-पीछे उस कमरे में गया, जहाँ कंचन सरसों का तेल लेने गई थी। जैसे ही कंचन तेल का डिब्बा उठाने के लिए झुकी, श्याम ने अपने लंड को उसकी गांड में घुसाकर वहाँ भी पेलना शुरू कर दिया। वहाँ भी कंचन ने उसके लंड को अपनी गांड से निकालकर खुद को अलग किया। अब कंचन अपने कमरे में गई। जैसे ही कंचन ने तेल का डिब्बा पास की खिड़की पर रखकर बेड पर चढ़ी, श्याम ने कंचन को बेड के कोने पर उसकी कमर पकड़कर वैसे ही रुकने को कहा। कंचन वैसे ही झुकी रही।
अब श्याम ने अपने लंड को कंचन की गांड पर रगड़कर उसे उसकी गीली गांड के अंदर ले जाने के लिए ज़ोर से अंदर किया और अपनी कमर को हिलाने लगा। कंचन के मुँह से “आआह्ह्ह… ऊऊऊऊ… आआह्ह्ह…” की आवाज़ निकल रही थी। कंचन अपनी गरदन को पीछे करते हुए श्याम की आँखों में देखकर मुस्कुरा रही थी। अब श्याम कंचन की गांड को ज़ोर-ज़ोर से पेलने लगे। कंचन को भी मज़ा आ रहा था। कुछ देर में मैंने देखा कि कंचन की गांड में उनका पूरा लंड चला गया था। अब कंचन अपनी कमर को पीछे की तरफ हिला रही थी।
कभी-कभी जब श्याम ज़ोर के झटके मारते, तो कंचन ज़ोर से सिसकी के साथ आहें भरती और श्याम का हौसला बढ़ाती थी। कुछ देर बाद श्याम कंचन के ऊपर ढेर हो गए। थोड़ी देर बाद वो कंचन के ऊपर से हटे और अपने लंड को निकाला। कंचन भी उठकर उनके साथ बाथरूम में गई। वहाँ श्याम ने कंचन की चूत पर पेशाब किया। कंचन ने बैठकर पेशाब किया और अपनी चूत को पानी से धोया। फिर कंचन ने उनके लंड को अपने हाथों में लेकर उसकी टोपी को खोलकर पानी से साफ किया।
अब कंचन उनके साथ कमरे में वापस आई। कमरे में आने के बाद श्याम ने कंचन का हाथ पकड़कर अपने लंड को पकड़ा दिया और उसे चूसने को कहा। कंचन ने उसे मुँह में ले लिया और चूसने लगी। कंचन कुछ देर तक उनके मोटे और लंबे लंड को चूसती रही। जब उनका लंड पूरी तरह तैयार हो गया, तो श्याम ने कंचन को बेड पर पटक दिया और उसके दोनों पैर फैलाकर उसकी चूत पर तेल लगाया। फिर अपने लंड को कंचन की चूत में डालकर ज़ोर के झटके के साथ कमर हिलाई। कंचन ने ज़ोर से सिसकी ली। मैंने साफ आवाज़ सुनी— “आआह्ह्ह्ह… आआह्ह्ह्ह… आआह्ह्ह… नहीं…”
श्याम ने अपनी कमर को ज़ोर-ज़ोर से झटके मारना शुरू किया। लगभग एक मिनट तक झटके मारने के बाद श्याम ने कंचन की दोनों चूचियों पर पाँच-पाँच बूँद तेल डाला और अपनी दोनों हथेलियों से मसलना शुरू कर दिया। अब श्याम एक तरफ कंचन की चूत में अपने लंड को अंदर ले जाने के लिए ज़ोर-ज़ोर से झटके मार रहे थे, तो दूसरी तरफ उसकी चूचियों को बुरी तरह मसल रहे थे।
कुछ देर बाद कंचन ने सिसकते हुए पूछा, “और कितना बाहर है?” श्याम ने बताया, “अभी थोड़ा-सा बाहर है।” कंचन बोली, “डाल दीजिए, फाड़ दीजिए मेरी चूत को।” इतना सुनते ही श्याम ने अपने लंड को थोड़ा-सा बाहर निकाला और ज़ोर से झटका मारा। कंचन पूरी तरह काँप उठी। अब कंचन की चूत में श्याम का पूरा आठ इंच का लंड चला गया था। कंचन “आऊऊऊ… आह्ह्ह्ह…” की आवाज़ निकाल रही थी।
कंचन ने अपनी दोनों जाँघों को पूरी तरह फैला रखा था। उसकी चूत में लंड का आना-जाना साफ दिख रहा था। अब कंचन भी श्याम का पूरा साथ दे रही थी। कंचन मुस्कुराते हुए बोली, “आज की तरह मैंने चुदाई का मज़ा कभी नहीं लिया था। सही रूप में मेरी सुहागरात तो आज है। फाड़ दीजिए मेरी चूत को।” मैंने देखा कि श्याम अपनी कमर को पूरी filmy स्टाइल में हिला रहे थे और कंचन भी उनकी कमर को ज़ोर-ज़ोर से हिलाकर उनका साथ दे रही थी।
अब श्याम कंचन के होंठों को चूसने लगे। कंचन भी अपनी गरदन उठाकर अपने होंठ चुसवा रही थी। ये सिलसिला आधे घंटे तक चलता रहा। फिर दोनों धीरे-धीरे शांत पड़ गए। श्याम कंचन के ऊपर दस मिनट तक लेटे रहे और उसकी दोनों चूचियों को मसलते रहे। फिर श्याम उठे और अपने लंड को निकाला। मैंने कंचन की चूत की तरफ देखा— उसकी चूत पूरी तरह फूल गई थी। श्याम ने पूछा, “कैसी लगी चुदाई?” कंचन श्याम को देखकर मुस्कुराते हुए बोली, “मज़ा आ गया।”
अब श्याम ने अपना तौलिया पहना और पास पड़ी चटाई पर बैठ गए। कंचन कुछ देर तक वैसे ही चटाई पर लेटी रही। पाँच मिनट बाद कंचन उठी और अपनी नाइटी पहन ली। अब मैंने सोचा कि मुझे नीचे जाना चाहिए। मैं वापस नीचे उतर गया। कंचन ने जैसे ही मुझे देखा, बोली, “कब आए?” मैंने कहा, “अभी just आया हूँ।” श्याम दरवाज़ा खोलकर बाहर चले गए और छत पर जाकर अपने कमरे में सो गए।
सुबह जब मैं उठा, तो श्याम जाने के लिए तैयार हो रहे थे। मैंने पूछा, तो उन्होंने बताया कि वो अपने काम से जा रहे हैं। मैंने देखा कि कंचन बहुत खुश थी।