किरायेदार आंटी को अच्छी तरह चोदा-1

Kirayedar aunty ko acchi tarah choda-1

हैल्लो दोस्तों, में आज आप सभी चाहने वालों के लिए अपनी एक नई मस्त सच्ची कहानी लिख रहा हूँ और यह कहानी मेरे घर में किराए से रह रही एक आंटी की है और इस कहानी में मैंने अपनी उस हॉट सेक्सी आंटी को बहुत अच्छी तरह प्यार किया है और उनकी चुदाई के मज़े लिए.

में उनकी चुदाई के पिछले कुछ दिनों से सपने देख रहा था और वो सब मैंने पूरा किया. दोस्तों मेरी उस आंटी का नाम कला है, जो 30 साल की है और उनकी गांड थोड़ी सी मोटी और बूब्स बहुत मस्त गोरे बाहर की तरफ निकले हुए है. उन्होंने अपने पूरे बदन को बहुत अच्छी तरह से सम्भालकर रखा है, इसलिए उनका हर एक अंग बहुत आकर्षक है.

उस दिन मैंने जब सुना कि अंकल का एक्सिडेंट हो गया तो मैंने आंटी को इस बारे में बताया, तो आंटी यह बात सुनकर बेहोश हो गयी. फिर में जल्दी से रसोई से एक गिलास में पानी लेकर आया और मैंने आंटी को अपनी बाहों में लेटाया और आंटी को पानी पिलाया और फिर आंटी को लेकर में हॉस्पिटल चला गया, जहाँ पर अंकल भर्ती थे, जल्दी से हम दोनों उस हॉस्पिटल में पहुंच गए.

डॉक्टर हमसे कहने लगे कि इनका ऑपरेशन करना होगा, उसके लिए बहुत पैसे की जरूरत होगी, उसमें करीब 50,000 रूपये का खर्चा आएगा. अब यह बात सुनकर आंटी रोने लगी, क्योंकि वो एक बार में उसी समय कैसे और कहाँ से इतने पैसे लेकर आती?

मैंने कहा कि अंकल आप पैसों की बिल्कुल भी टेंशन ना ले, आप ऑपरेशन शुरू करें, में पैसों का इंतजाम कर दूंगा और फिर आंटी ने वो फार्म भर दिया, जिसके बाद अंकल का ऑपरेशन शुरू हो गया और वो ऑपरेशन कुछ घंटो तक चलने के बाद एकदम ठीक रहा और फिर अंकल को कुछ दिन वहीं पर रखने के बाद जल्दी ही घर के लिए छुट्टी करके भेज दिया गया.

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अब में अंकल को घर ले आया. पहले में कभी भी आंटी के घर नहीं जाता था, में बस दूर से ही उनके लटकते झूलते बूब्स को देखता और उनकी मटकती हुई गांड के मज़े लेता था और अब में आंटी के घर पर जाने लगा था और घर जाने के साथ साथ अब में आंटी के घर के कामों में उनकी मदद भी करने लगा था, अंकल को डॉक्टर ने आराम के लिए कहा था, इसलिए वो पूरा दिन एक पलंग पर पड़े आराम करते और वो ज्यादातर समय दवाईयों के नशे में रहते थे. अब में आंटी के हर एक काम में उनकी मदद करवाता, जैसे कि दवाईयाँ लाना, बाजार से सामान लाना और भी बहुत सारे काम में उनके करता था.

एक दिन आंटी किचन में ऊपर से कुछ निकाल रही थी, लेकिन ऊंचाई ज्यादा होने की वजह से आंटी का हाथ अच्छी तरह से वहां पर नहीं पहुंच रहा था, में जैसे ही रसोई में गया और मैंने आंटी को देखा तो आंटी बहुत कोशिश कर रही थी, लेकिन उनका हाथ वहां तक नहीं पहुंच रहा था, जैसे ही वो थोड़ा सा और ऊपर हुई तभी वो उस टेबल से फिसल गई और आंटी मेरी गोद में आ गई. मैंने उनको गिरने से बचा लिया.

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फिर आंटी ने मुझसे धन्यवाद कहा, अगर आज तुम नहीं होते तो आज में भी अंकल के साथ बेड पर आराम कर रही होती. फिर मैंने आंटी को धीरे से अपनी गोद से नीचे उतारा और मैंने आंटी के कूल्हों के ऊपर हाथ फेरा, लेकिन आंटी ने मुझसे कुछ नहीं बोली और वो चुपचाप रसोई में काम करने लगी और उस समय मेरी माँ बाथरूम में नहाने गई थी. फिर में अपने कमरे में आकर कंप्यूटर पर अपना काम करने लगा. तभी कुछ देर बाद आंटी मेरे रूम में आ गए और वो मुझसे कहने लगी कि संदीप तुमने हमारी बहुत मदद की है, तुम्हारे इस काम को हम कभी नहीं भुला सकते और तुम्हारा जितना भी पैसा है, में वो सब तुम्हें वापस कर दूंगी.

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फिर मैंने उनसे कहा कि कोई बात नहीं आंटी जी यह तो मुझे करना था और फिर वो कुछ देर बाद चली गई और शाम को में आंटी के घर चला गया और एकदम से मुझे देखकर वो पलटी, जिसकी वजह से आंटी की साड़ी का पल्लू उनके ब्लाउज से हट गया.

फिर आंटी ने जल्दी से अपनी साड़ी का पल्लू ठीक किया और वो खड़ी हो गयी. मैंने जल्दी से आंटी की वजह से नीचे गिरी अंकल की गोलियों को उठाकर टेबल पर रख दिया और में बाहर जाकर खड़ा हो गया और एक सप्ताह तक मैंने जानबूझ कर आंटी के शरीर को किसी ना किसी बहाने से में छूता रहा, लेकिन आंटी भी कुछ नहीं बोली और मज़े लेती रही.

एक दिन में अपने कंप्यूटर पर काम कर रह था और तब में मन ही मन सोचने लगा कि शाम को जब आंटी मेरे घर पर आएगी तो में जानबूझ कर उनके सामने नंगा खड़ा हो जाऊंगा और फिर में पांच बजने का इंतजार करने लगा, शाम को जब आंटी मेरे कमरे में आई तो मैंने उस समय टी-शर्ट पहन रखी थी और मैंने अपनी अंडरवियर को खोल दिया, जिसकी वजह से मेरा लंड अब खड़ा होने के मूड में आ गया और जानबूझ कर मैंने अपनी पेंट को हाथ से पकड़कर में उसको ठीक करने लगा. तभी आंटी अंदर आई और वो मुझे बिना पेंट के देखकर मेरे खड़े लंड को अपनी चकित नजरों से देखकर हंसती हुई तुरंत बाहर निकल गई.

फिर मैंने भी जल्दी से पेंट को पहन लिया और में भी उनके पीछे पीछे बाहर आ गया और मैंने उनसे पूछा कि आंटी जी आपको क्या काम था? आंटी हंसने लगी. फिर मैंने उनसे पूछा कि आप इस तरह से क्यों हंस रही हो? तो आंटी ने कहा कि कुछ नहीं, में जल्दी से उनके पीछे गया और मैंने आंटी के कंधे पर अपना हाथ रख दिया और आंटी को घुमाकर अपनी तरफ सीधा किया और अब में उससे दोबारा पूछने लगा कि आप क्यों हंस रही थी?

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आंटी ने कुछ नहीं बोला और उससे पहले में खुद ही बोल पड़ा, अच्छा तो आपने मुझे नंगा देख लिया, मुझे याद नहीं रहा कि इस वक़्त आप मेरे कमरे में आ गई हो, इसलिए मेरे साथ ऐसा हुआ और यह बात कहते हुए मैंने अपने दोनों हाथों को आंटी की गोरी कमर पर रख दिया, जिसकी वजह से वो मेरी बाहों में थी और में आंटी से बातें करने लगा, लेकिन आंटी जल्दी ही मेरी तरफ मुस्कुराती हुई चली गयी और में दो दिन तक आंटी के घर नहीं गया.

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