बचपन की सहेली ने चूत दिलवाई-1

(Bachpan Ki Saheli Ne Choot Dilwayi-1)

मैं लव कुमार फ़िर से अपनी कहानी को लेकर आया हूँ. मैं आपको याद तो हूँ ना? अरे वही जिसको आपने बहुत सारे मेल किये थे मेरी कहानी
बचपन की सहेली
पढ़ने के बाद!
अब आगे की कहानी पर आता हूँ, इस बार भी मेल करना!

मैं सीमा को 8-9 बार चोद चुका था. फिर एक दिन उसको ले गया था चोदने! काम शुरु हुआ और वो मेरा लण्ड चूत में ले रही थी, बोल रही थी- आअह्ह लव! चोदो जोर से आआ आआह्ह्ह!

ऐसा करते करते उसने मुझसे पूछा- किसी की मदद कर सकते हो मेरे लिए?

मेरा लंड उसकी फ़ुद्दी में घुसा हुआ था, वो बहुत मजे में ले रही थी, मैं भी उसे चोदते हुए बोला- हाँ, तुम्हारे कहने से मदद करूँगा, बोलो क्या मदद चाहिये, किसको चाहिए?

तो उसने बताया कि उसकी एक सहेली है जिसका पति किसी दूसरे देश में काम करता है और पिछले एक साल से घर नहीं आया. वो सहेली चुदाई के लिए तरस रही है, उसे लंड चाहिये पर वो बहुत डरती है. इसलिए मैं तुमसे मदद मांग रही हूँ.

मैंने कहा- इसमें मैं क्या मदद कर सकता हूँ?
उसने कहा- तुमको उसे भी अपना लंड देना होगा!
मैंने उसे कहा- क्या मैं सिर्फ़ सेक्स करने के लिए ही हूँ?
तो उसने कहा- मेरे लिए उसकी मदद कर दो!
और कहा- मुझे तुम पर विश्वास है इसलिए तुमसे मदद मांगी!

मैंने भी सोचा कि एक और चूत का इंतजाम हो रहा है तो मैं क्यों मना करूँ, इसलिए मैंने हाँ कर दी.
अगले दिन सीमा का फ़ोन आया, उसने मुझे कहा- दो दिन के बाद मिलना!
मैंने ओके कहा.

दो दिनों के बाद मैं सीमा से मिलने गया. हम पुराने वाले कमरे में मिलने वाले थे.
जैसे ही मैं वहाँ पहुँचा तो सीमा ने कहा- आज मैं कुछ नहीं करुँगी!
मुझे गुस्सा आया कि मुझे बुला लिया और कुछ नहीं करने को बोल रही है.
मैंने उस पर गुस्सा करना शुरू किया तो उसने कहा- मैं नहीं करुँगी पर कोई और है जो तुम्हारे साथ रहेगी!

तभी वो एक लड़की को अंदर से लाई. वो एक सुन्दर औरत थी, 28 साल उम्र होगी, वो ज्यादा गोरी नहीं थी और उसके दूध भी बड़े नहीं थे लेकिन मुझे वो बहुत पसंद आई क्योंकि उसके छोटे दूध एकदम नुकीले खड़े थे जो मुझे हर लड़की में आकर्षित करते थे. फिर उसकी आँखें बहुत सुंदर थी, पतले पतले गुलाबी होंठ और एकदम शरीफ सा चेहरा मुझे भा गया.

तभी सीमा ने मुझे तन्द्रा से जगाया- देखते रहोगे या कुछ करोगे भी? यही आज तुम्हारी साथी है!
और वो हमको अलविदा कह कर वहाँ से निकल गई.
तब मैंने उसका नाम पूछा, उसने बताया कि उसका नाम रीना है.
मैंने कहा- जैसे तुम्हारा नाम अच्छा है, वैसे ही तुम भी बहुत सुंदर हो!

वो मेरी बातों से शरमा रही थी और चुप थी.
मैंने बहुत कोशिश की कि वो बात करे मगर वो कुछ ना बोली. तब मैंने गुस्से में कहा- चलो अगर कुछ करना ही नहीं है, तो चलते हैं. उसने बोला- मुझे शर्म आ रही है, मैं अपने पति की ही रही हूँ आज तक!

मैंने कहा- आज मेरी भी बन जाओ!
तभी मैंने ठान लिया कि इतना गर्म कर दूँगा इसे कि को खुद बोलेगी- लव चोदो मुझे!

इतना सोचते ही मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए. पहले तो उसने कोई रिस्पांस नहीं दिया लेकिन मैं उसके होंठ चूसता रहा, एक हाथ उसकी कमर पर रख दिया, दूसरे हाथ से उसके हाथ को पकड़ लिया. अब उसे भी अच्छा लगने लगा, उसने धीरे धीरे अपने लबों को हिलाना शुरू किया. मैं रीना को चूमता रहा, वो भी मेरा साथ दे रही थी!

मैं उसके साथ प्रगाढ़ चुम्बन कर रहा था कि तभी वो अपने होंठ मेरे मुँह पर दबाये हुए मुझे धक्का देते हुए दीवार तक ले गई और फिर वो जोर शोर से मेरे होंठ चूसने लगी.
‘ऊऊ ऊऊम्म्म म्मा आअ ऊऊ ऊउम्म्म्म्माआ आआ!’
जैसे पता नहीं क्या हो गया था उसे!

उसको ऐसा करता देख मुझे भी जोश आ गया, मैंने उसको पकड़ा और पलट कर दिवार पर सटा दिया और अब उसकी गर्दन को चूमना शुरू कर दिया. मैं करते करते दोनों हाथों को कमर पर फ़िराते हुए उसके वक्ष पर ले आया और अब मेरे हाथ उसके स्तनों पर थे. उसके मुँह से एकदम च्च्च्च्च निकल पड़ी.

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जैसे मैंने बताया कि उसके दूध नुकीले थे, मैं उसको पकड़ कर बहुत खुश था. मैंने उसके दोनों दूध पूरे मसल दिए.
उसकी आँखें बंद थी, वो सिर्फ मजे ले रही थी, आह ओओह्ह् आआह्ह ओओह्ह्ह्ह आआह्ह्ह ओओओह्ह कर रही थी. तभी मैंने उसका हाथ पकड़ा और उसे बिस्तर पर गिरा दिया, उसके ऊपर आकर उसको चूसना शुरू कर दिया.
मैंने उसको पूछा- कैसा लग रहा है?
वो कुछ नहीं बोली!
मैं उसका जवाब चाहता था इसलिए एकदम उसको छोड़ दिया. उसने मुझे देखा और सर हिला कर पूछा- क्या हुआ?
तो मैंने कहा- तुम कुछ बोल नहीं रही, तुमको मजा नहीं आ रहा!
उसने जवाब में कहा- मुझे ऐसा मजा कभी नहीं मिला इसलिए बातों में समय बर्बाद नहीं करना चाहती!
मुझे ऐसा जवाब मिलेगा, पता नहीं था.

तभी मैं फिर उसके ऊपर आया, उसका कमीज उतरना शुरू कर दिया और उसने अपने दोनों हाथ उठा दिए. मैंने उसकी कमीज उतार दी तो अब वो मेरे सामने लाल रंग की ब्रा में थी. ओओहओ! क्या मस्त लग रही थी वो!

वैसे मैंने सीमा के दूध ऐसे ब्रा में कई बार देखे पर ये नुकीले दूध ब्रा के ऊपर से बहुत बढ़िया दिख रहे थे जैसे दो नुकीले पहाड़ियाँ!
मैंने तो एक को दबाना शुरू कर दिया. दोनों बूब्स मेरे हाथों में कैद थे और मैंने जब उनको एकदम जोर से भींचा तो वो सीई ईईईईईईइ सीईईईईइ करने लगी, उसके मुँह से जोरदार आह्ह्ह निकल गई. उसकी आँखें बंद थी. मैंने बूब्स मसलते हुए उसके होंठों को फिर से चूसना शुरू कर दिया. वो भी मेरे होंठ चूसती रही, साथ ही मेरे हाथों से जो उसके दूध दब रहे थे, उसका मजा ले रही रही थी- आ आआ आअम्म आ आह्ह्ह! किये जा रही थी.

अब मैंने उसके बदन को चूमना शुरू किया, पहले उसकी गर्दन, फिर बूब्स के ऊपर, फिर उसके पेट पर उसकी नाभि पर आकर रुक गया. मैंने उसकी नाभि में उंगली डाली और थोड़ा कुरेदा, उसको शयद गुदगुदी हुई, वो एकदम पूरी काम्प गई, मैंने उसमें जीभ घुसा दी, वो आआम्म्म्म्म करती रही ओओह्ह्ह्ह आआआअह स्स्सीईई आआआम्म्म्म्म ही किये जा रही थी.

फिर मैं थोड़ा नीचे हुआ और उसकी सलवार को खोलने लगा और इजारबन्द खुलते ही मैंने एक झटके में उसकी सलवार पूरी निकाल दी. वो लाल रंग की ही पेंटी में थी. उसकी पेंटी चूत से चिपकी हुई थी और पेंटी का भीगा हुआ भाग पूरा चमक रहा था!
मैंने उसको पास जाकर सूंघा, हम्म! क्या महक थी! किसी को भी दीवाना बना दे!

लेकिन अभी मैंने बहुत कुछ करना था, मैंने उसकी जाँघ पर किस करना शुरू किया और ऐसे करते हुए दूसरी जांघ पर गया, मैं उसको बहुत तड़पाना चाहता था इसलिए उसकी चूत तक गया ही नहीं!
वो तड़प रही थी.

मैंने अपने सारे कपड़े हटा दिए, सिर्फ अंडरवियर में था मैं! वो मुझे देख रही थी! तभी मैंने उसका हाथ पकड़ा और अंडरवियर के ऊपर ही अपने लंड पर रख दिया. मुझे लगा था कि वो हाथ हटा लेगी लेकिन वो उसको सहला कर देखने लगी और एकदम लंड को पकड़ लिया. उसने ऊपर से ही मेरा खड़ा हुआ लंड हिलाना शुरू किया, मुझे मजा आ ही रहा था.

उसने मेरा अंडरवियर निकाल दिया और अब मेरा लंड उसके कब्जे में था. मैंने पूछा- कैसा लगा?
उसने कुछ नहीं कहा, मेरी ओर देखा और बस लंड हिलाती रही. वो थोड़ी देर तक मेरा लंड हिलती रही, मैं आअह ओह्ह करता रहा, मुझे लगा कही मेरा निकल ना जाये इसलिए उसको हटाया फिर उसके होंठ चूसने शुरू कर दिए.

फिर मैं उसके दूध दबाता हुआ उसकी टाँगों के बीच में आ गया, अब मैंने सीधे उसकी चूत पर मुँह रखा और जोर से किस करना शुरू किया, उसकी चूत को मुंह में ही घुसा चुका था. वो पूरी सिहर उठी, उसकी घुटी घुटी सांसें निकल रही थी.