लिंग की आत्मकथा-4

(Ling Ki Aatmkatha-4)

प्रकृति ने मुझे मूल रूप से सम्भोग के लिए बनाया है। मूत्रपात के लिए लिंग ज़रूरी नहीं है वरना स्त्रियों के पास भी लिंग होता!!। सम्भोग के समय मैं योनि में प्रवेश करता हूँ … स्त्री और पुरुष, दोनों को, पूर्ण संतुष्टि तब तक नहीं मिलती जब तक मैं पूरा-का-पूरा, अपने मूठ तक, योनि के अंदर ना चला जाऊं। स्त्री-पुरुष का समागम तभी पूरा होता है जब लिंग पूर्णतया योनि में समा जाये। परन्तु स्त्री की योनि की औसतन गहराई 4.5 से 5.5 इंच की ही होती है जिसके आगे उसकी मर्मशील ग्रीवा (cervix) की दीवार होती है। सम्भोग के समय मैं इस दीवार तक तो अंदर जा सकता हूँ पर इसे भेद नहीं सकता। लिंग की ग्रीवा से बारबार टक्कर स्त्री को पीड़ा देती है और उसे सम्भोग का आनंद नहीं आता। अगर लिंग बहुत बड़ा होगा तो ना तो मर्द उसे मूठ तक अंदर डाल पायेगा और ना ही स्त्री को पूरा लिंग भोगने और पुरुष के नज़दीकी स्पर्श का आनंद मिलेगा। मतलब दोनों का आनंद कम हो जायेगा। यूं समझो कि अगर लिंग दो फीट का होता तो स्त्री-पुरुष के बीच कोई स्पर्श ही नहीं होता।

अत्यधिक बड़े लिंग के और भी नुकसान हैं … उसको स्त्री अपने मुँह में पूरी तरह नहीं ले पाती और गुदा-मैथुन में भी उसे ज्यादा तकलीफ होती है। अर्थात, ज्यादा बड़े लिंग का स्वामी यौन-सुख को पूर्णतया भोग नहीं पाता है और उसकी पत्नि / प्रेमिका की कामाग्नि भी ठीक तरह से नहीं बुझ पाती। सम्भोग एक सामान्य क्रिया है और इसके लिए सामान्य आकार के गुप्तांग ही पर्याप्त हैं। शेखर को मैं छोटा क्यों लगता हूँ? इसके कई कारण हैं :

1. मैंने पहले कहा था कि शेखर का लिंग उसके अलावा उसकी पत्नि ने ही देखा है। इसी तरह बाकी मर्दों के लिंग भी अक्सर छिपे या ढके रहते हैं और उनका असली आकार एक गुप्त रहस्य होता है। मर्दों के बाकी बाहरी अंग जैसे नाक, कान, उँगलियाँ इत्यादि गुप्त नहीं होते और सबको उनके आकार का पता होता है। एक मैं ही ऐसा अंग हूँ जिसका आकार सबसे छिपा रहता है … ऐसी हालत में किसी भी आदमी के लिए यह कहना आसान होता है कि उसका लिंग कितना बड़ा है। इस मसले पर अक्सर मर्द बढ़ा-चढ़ा कर ही बात करते हैं। जबसे लड़कों में यौन-उत्सुकता जागती है वे हर किसी से बड़े लिंग की बात ही सुनते हैं और कहानियों तथा सेक्स-फिल्मों में भी बड़े लिंग के चुनिन्दा मर्द ही होते हैं। ऐसे वातावरण में हर आदमी को ऐसा लगता है कि सिर्फ उसका लिंग ही छोटा है।

2. जब शेखर मुझे देखता है तो उसका दृष्टिकोण ऊपर से नीचे की ओर होता है जिससे वह मेरी पूरी लम्बाई नहीं देख पाता; जब वह सामने खड़े किसी और मर्द का लिंग देखता है तो उसका दृष्टिकोण ऐसा होता है कि वह उसकी पूरी लम्बाई देख पाता है। इस कारण उसे दूसरे मर्दों के लिंग बड़े नज़र आते हैं।

3. आम मर्द की तरह शेखर को भी औपचारिक रूप से यौन शिक्षा नहीं मिली है। उसे मेरे बारे में जो भी पता है वह या तो दोस्तों से जाना है, जो उसकी ही तरह अनभिग्य हैं, या फिर सेक्स कहानियां पढ़ी हैं जहाँ रोमांच बनाने के लिए लिंगों का बखान बढ़ा-चढ़ा कर किया जाता है। ऐसी कहानियों में लिंग हमेशा 8 से 12 इंच का होता है जो 1 से 2 घंटे तक सम्भोग करता है। मैं जानता हूँ ये दोनों बातें कितनी गलत हैं। मुझे मालूम है कि सामान्य सम्भोग की अवधि 1.5 से 3 मिनटों की होती है और एक बार वीर्योत्पात के बाद दोबारा सम्भोग करीब 8 से 10 मिनटों तक किया जा सकता है। इससे ज्यादा अवधि ना तो आनंद देती है और ना ही इसकी ज़रूरत है बल्कि इससे स्त्री-पुरुष के गुप्तांगों को क्षति हो सकती है।

4. पुराने ज़माने में यौन ज्ञान बहुत कम था और ज़्यादातर स्त्री-पुरुष एक दूसरे को शादी के बाद सुहाग-रात पर ही पहली बार नंगा देखा करते थे। लज्जा-वश स्त्री तो अकसर आँखें बंद ही रखती थी और अँधेरे के कारण वैसे भी कुछ ज्यादा नहीं दिखता था। पर आधुनिक ज़माने में इन्टरनेट के कारण बिरला ही कोई ऐसा लड़का या लड़की होगी जिसने नग्न स्त्री-पुरुष या फिर हर तरह की यौन क्रियाएँ ना देखी होंगी। सब जानते हैं कि सेक्स-फिल्मों में काम करने वाले मर्द खास तौर से उनके बड़े लिंग के आधार पर लिए जाते हैं। ये लोग उन 2% में होते हैं जिनके लिंग औसत से बड़े होते हैं या फिर सर्जरी द्वारा बढ़वाए होते हैं जिससे उनका व्यवसाय तो अच्छे से चलता है पर जिन्हें बाद में तकलीफ हो सकती है।

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5. सेक्स-फिल्मों में ना केवल मर्दों के लिंग बड़े दिखाए जाते हैं … स्त्रियों के स्तन और चूतड़ भी बड़े और मनमोहक दिखाए जाते हैं। सम्भोग की अवधि भी लंबी और निरंतर दिखाई जाती है। असलियत में ऐसा नहीं होता। फिल्म की शूटिंग रोक-रोक कर की जाती है पर दिखाया ऐसे जाता है मानो सम्भोग निरंतर चल रहा है।

इन कारणों के चलते स्वाभाविक है कि शेखर मेरे आकार से मायूस सा रहता है। उसकी कल्पना में उसका लिंग और सम्भोग-काबलियत किसी पोर्न-स्टार की भांति होनी चाहिए। जहाँ एक तरफ सेक्स-फिल्में और कहानियां मनोरंजन करती हैं वहीं ये मर्दों में अपने लिंगों के प्रति मायूसी और हीन भावना भी पैदा करती हैं। अगर कोई कहता है उसका लिंग 8, 10 य 12 इंच का है तो समझ लो या तो उसे यह नहीं पता कि एक इंच कितना होता है, या लिंग नापना नहीं आता या फिर वह शेखी बखार रहा है। अगर उसका लिंग वाकई 8 इंच से बड़ा है तो वह उन 2% मर्दों में से है जो संपूर्ण यौन-आनंद से वंचित रहते हैं या फिर जिनकी पत्नी या प्रेमिका को कष्टदायक सम्भोग सहना पड़ता है। मानव-जाति के मर्दों को तो खुश होना चाहिए कि सम्पूर्ण वानर-जाति में उनका लिंग सबसे बड़ा है। बाकी जानवरों में भी शरीर के अनुपात से बहुत कम जानवरों का लिंग मानव लिंग से बड़ा होता है।

लिंग को बड़ा करना:

क्योंकि लगभग सभी मर्द अपने लिंग के आकार को लेकर मायूस रहते हैं तो सभी किसी ना किसी तरह उसको बड़ा करने की तरतीब सूझते रहते हैं। पुरुष की इस ला-इलाज अभिलाषा को पूरा करने के लिए कई ढोंगी डॉक्टर, साधू, हकीम और वैद्य बाजार में दूकान लगाये बैठे हैं। क्योंकि यह एक गुप्त और मर्दानगी का मसला होता है, इन ढोंगियों को अपने मासूम शिकार को ठगने का मौक़ा आसानी से मिल जाता है। वे जानते हैं कोई भी मर्द उनकी शिकायत नहीं कर सकेगा।

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