लिंग की आत्मकथा-5

(Ling Ki Aatmkatha-5)

सच तो यह है कि लिंग का आकार बड़ा करने का कोई साधन या उपचार है ही नहीं। अगर होता तो कोई भी अमीर पुरुष छोटे लिंग वाला नहीं होता। आप सोचें कि क्या कोई ऐसा उपचार या साधन है जिससे आप अपनी ऊँगली या नाक या कान बड़े कर सकते हों? प्रकृति ने जो आकार दे दिया सो दे दिया। हाँ, इंसान अपने पूरे शरीर के आकार को पौष्टिक आहार और उचित व्यायाम के द्वारा बढ़ा या घटा सकता है जैसा कि अनेकों खिलाड़ी और पहलवान करते आये हैं। पर किसी एक अंग को निशाना बनाकर केवल उसके आकार को बड़ा करना संभव नहीं है। यह केवल सर्जरी द्वारा संभव है पर इसके कई दुष्परिणाम हो सकते हैं।

शेखर को मेरे से दो शिकायतें और रहती हैं। कभी कभी वह सम्भोग करना चाहता है पर मैं कड़क नहीं हो पाता हूँ। इसे स्तम्भन-दोष (erectile dysfunction) कहते हैं। यह अक्सर अस्थाई और आकस्मक घटना होती है जो कि कई कारणों से हो सकती है जैसे शारीरिक थकान, मानसिक चिंता, उत्तेजना की कमी, सम्भोग में रूचि ना होना, कोई रोग या पीड़ा इत्यादि। इसे अस्थाई स्तम्भन-दोष कहते हैं और यह लगभग सभी मर्दों को कभी न कभी होता है। यह चिंता का विषय नहीं है। ऐसी हालत में सम्भोग को कुछ देर के लिए टालना सबसे उचित उपाय है और इन कारणों को दूर करके सम्भोग का प्रयास करना चाहिए। इसमें स्त्री बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उसे अपने आदमी के पौरुष का मजाक नहीं उड़ाना चाहिए बल्कि उसे स्तंभन दिलाने में कामुक स्पर्श और मुख-मैथुन द्वारा मदद करनी चाहिए।

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कुछ पुरुषों में यह दोष स्थाई होता है जो कि किसी अंग, ग्रंथि या अव्यय विफलता के कारण हो सकता है। इस दोष से ग्रस्त पुरुष कभी भी अपने लिंग को स्तंभित नहीं कर पाते पर यह दोष बहुत कम मर्दों में पाया जाता है। इसके उपचार के लिए डाक्टरी सलाह की ज़रूरत होती है। कुछ हद तक यह दोष उम्र के साथ भी पनपता है जिसके लिए दवाइयाँ उपलब्ध हैं जो कि डॉक्टर की सलाह के बाद ही लेनी चाहिए।

शेखर को दूसरी शिकायत यह होती है कि कभी-कभी मैं जल्दी वीर्य-स्खलन (premature ejaculation) कर देता हूँ। अगर सम्भोग की तैयारी में मेरे योनि प्रवेश के पहले या फिर प्रवेश के तुरंत बाद (एक मिनट के अंदर) वीर्य-स्खलन हो जाता है तो इसे शीघ्र-पतन कहते हैं। इससे शेखर को ही नहीं अंजलि को भी काफी निराशा होती है, दोनों ही यौन-तृप्ति से वंचित रह जाते हैं। यह दशा भी लगभग सभी पुरुषों कभी न कभी झेलनी पड़ती है। अब इसमें गलती मेरी नहीं बल्कि शेखर के मस्तिष्क की होती है पर कसूरवार मुझे ठहराया जाता है। इसके कई कारण होते हैं जैसे :

– कुछ अरसे के बाद सम्भोग

– सम्भोग से पहले अत्याधिक उत्तेजना

– अति सुन्दर, प्रतिष्ठित या दुर्लभ लड़की

– दुर्लभ या प्रतीक्षित स्थान या आसन

– पकड़े जाने का डर

– प्रतिबंधित स्त्री

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– वर्जित क्रिया … इत्यादि।

अगर शीघ्र-पतन का कारण इन में से है, जो सभी मानसिक और संयोगवश हैं, तो इसे हँस कर टाल देना ही अच्छा है। स्त्री को चाहिए कि ऐसी हालत में अपने साथी की मर्दानगी पर कटाक्ष या टिप्पणी ना करे बल्कि उसकी झेंप को कम करने में सहायता करे। फिर कुछ विराम के बाद दोबारा सम्भोग का प्रयास करें। अक्सर, शीघ्र-पतन के बाद पुनः स्तम्भन होने में ज्यादा देर नहीं लगती और सम्भोग की अवधि भी संतोषप्रद होती है। बस शीघ्र-पतन से निबटने की तरतीब स्त्री-पुरुष दोनों को आनी चाहिए।

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कुछ पुरुषों को यह दोष हमेशा रहता है। वे हर बार जल्दी ही स्खलित हो जाते हैं जिससे पुरुष में असंतोष से ज्यादा ग्लानि-भाव होता है और स्त्री को तृप्ति से वंचित रहना पड़ता है। इसका कारण भी प्रायः मनोवैज्ञानिक ही होता है। पुरुष के बचपन की कोई घटना या फिर उसकी अपने प्रति गहरी हीन भावना इस दोष का कारण होते हैं। इसके लिए स्त्री के सहयोग और अनुकंपा के अलावा मनोवैज्ञानिक परामर्श सहायक सिद्ध हुए हैं।

मैं शेखर के उन अंगों में से एक हूँ जो शायद कभी भी रोग-ग्रस्त नहीं होते। बहुत कम ऐसे मौके होते हैं जब लिंग में कर्क-रोग हो जाता है पर आजकल इसका सुचारू उपचार उपलब्ध है। अगर मुझे चोट ना लगे तो मैं जिंदगी भर साथ निभाता हूँ … बस मुझे नियमित रूप से साफ़ रखा जाये, अनखते लिंग की ऊपरी खाल में मैल जमा ना होने दिया जाये और मुझे तंग कपड़ों में जकड कर नहीं रखा जाये।

अब और अपने बारे में क्या बताऊँ … मुझे स्पर्श, सम्भोग और हस्तमैथुन तो अच्छे लगते ही हैं पर मुझे लड़कियों द्वारा मुखमैथुन में बहुत मज़ा आता है और जब गुदा-मैथुन का अवसर मिल जाता है तो मेरे वारे-न्यारे हो जाते हैं। शेखर अभी 36 साल का है। मुझे अगले 30-40 साल और उसको यौन-सुख भोगने में साथ देना है। योनि की भांति मुझ में कभी रजोनिवृत्ति जैसा कुछ नहीं होता।

मैं यही चाहता हूँ कि हर स्त्री-पुरुष मेरे बारे में गलत धारणाओं से मुक्त हो, मेरे आकार का आदर करे और मेरी क्षमतानुसार मेरा उपयोग करे। मैं सिर्फ रति-प्रेम की बारिश करूँ और कोई पुरुष मेरा देह शोषण जैसे दुष्कर्मों के लिए प्रयोग ना करे।

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शेखर का लिंग

आपको यह लेख कैसा लगा? मैं कोई डॉक्टर नहीं हूँ। मैंने यह लेख इस विषय पर शोध करके तथा सामान्य-ज्ञान से लिखा है। इसमें जानबूझकर कोई गलत बात या अपनी राय नहीं लिखी गई है।

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