लण्ड की प्यास चाची की चूत में बुझाई–2

Lund ki pyas Chachi ki Chut me Bujhaai-2, चाची फिर से चुप हो गई।आज मैं मौके को हाथ से गवाना नहीं चाहता था।अब मैं चाची की पीठ को अच्छी तरह से मसलने लगा।अब धीरे धीरे मैं हाथों को चाची के कंधो से होते हुए उनके बोबो की ओर ले जाने लगा।चाची बोबो को ढक रही थी।अब मैं चाची के हाथों को बोबो पर से हटाने लगा लेकिन चाची बोबो को छोड़ने के लिए तैयार नहीं हो रही थी ।अब वो मेरा इरादा जान चुकी थी।
चाची– रोहित अब आगे कुछ मत कर।
मैं– अरे करने दो ना चाची।
चाची– नही ये अच्छी बात नहीं है।मुझे अच्छा नहीं लग रहा है।

मैं– अरे चाची आप पहले वहां से हाथ तो हटाओ, फिर आपको सब अच्छा ही अच्छा लगेगा।
चाची– नहीं रोहित।
मैं– अरे चाची आप भी बच्चो की तरह नखरे कर रही हो।इसमें क्या है,हटाओ ना हाथ।
तभी मैंने चाची के हाथों को पकड़ा और उन्हें बोबो पर से हटा दिया।अब चाची के बोबे नंगे हो चुके थे।मैं जिंदगी में पहली बार बोबो के दर्शन कर रहा था। चाची के नंगे बोबो को देखते ही मेरे मुंह में पानी आ गया और मेरा लंड और ज्यादा घायल हो गया।अब मैं चाची के बोबो पर साबुन लगाकर उन्हें मसलने लगा।आह! क्या शानदार मज़ा होता है बोबो को दबाने का! ये मुझे आज समझ में आ रहा था।

इधर मैं पीछे से मेरा लण्ड चाची पर दबाव बना रहा था और आगे से मै चाची के बोबो को मसल रहा था।अब जल्दी से चाची की सांसें तेज़ चलने लगी।वो गर्म हो रही थी।अब मैं धीरे धीरे स्पीड बढ़ाते हुए चाची के बोबो को मसल रहा था।मुझे चाची के बोबो को मसलने में बहुत ज्यादा मज़ा आ रहा था।अब लोहा गर्म हो चूका था,बस अब हथौड़ा मारने की बारी थी।
अब मैंने फटाफट चाची को वही पटक दिया और मैं तुरंत चाची के ऊपर चढ़ गया।अब चाची मुझे दूर हटाने की कोशिश करने लगी लेकिन मैं चाची को बुरी तरह से दबोच चूका था।अब मैंने तुरंत चाची के होंठो को भीच लिया और भूखे शेर की तरह चाची के होंठो को चूसने लगा।मुझे चाची के होंठो को चूसने में गजब का मज़ा आने लगा।इधर चाची अभी भी नखरे करते हुए हाथ पैर मार रही थी।मैं सकासक उनके होंठो को चुस रहा था।चाची खुद को बचाने की पूरी कोशिश कर रही थी लेकिन आज उनका मुझसे बच पाना मुश्किल था।

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मैंने फटाफट चाची के होंठो को चुस डाला।अब मैं चाची के रसीले बोबो पर टूट पड़ा और झमाझम उन्हें चूसने लगा।आह! कितना मस्त टेस्ट होता है बोबो का!आह कसम से मज़ा आ गया था यारो! चाची अब मुझे ये सब नहीं करने के लिए कह रही थी।
चाची– रोहित ये सब मत कर यार।ये सब गलत है।मै तेरी चाची हूँ।
मैं चाची की बात का कोई जवाब नहीं दे रहा था।मैं तो कसकर चाची के बोबो को चुस रहा था।
चाची– ओह रोहित यार छोड़ मुझे, उन्ह किसी को पता चल जायेगा तो बहुत बदनामी होगी। मत कर यार।
इधर मेरा लण्ड चाची की चूत के किले को भेदने को तैयार हो रहा था।अब मैं भी ज्यादा ििनतज़ारे करने के मूड में नहीं था।अब मैं जल्दी से नीचे सरका और चाची के पेटिकोट के नाड़े को खोलने लगा लेकिन तभी चाची ने पेटिकोट का नाडा पकड़ लिया।अब चाची पेटिकोट को बचाने के लिए कोशिश करने लगी।
चाची– रोहित अब तू आगे मत बढ़।बहुत हो गया।

मैं– चाची आज मत रोको मुझे।आज तो मैं सबकुछ करके रहूँगा।
तभी मैं चाची के हाथों को दूर हटाने लगा लेकिन चाची पेटिकोट का नाडा खोलने को तैयार नहीं हो रही थी।फिर मैंने ज़ोर का झटका देकर चाची के हाथों को दूर हटा दिया और झट से चाची के पेटिकोट का नाडा खोल दिया।अब मैंने तुरंत चाची के गीले पेटिकोट को उनकी टांगो से नीचे खिंचने लगा लेकिन चाची ने पेटिकोट पकड़ लिया।
मैं– चाची, अब ज्यादा नखरे मत करो।खोलने दो इसे।
चाची– नहीं रोहित मत खोल इसे।
मैं– चाची आज तो खुलेगा ही।
तभी मैंने चाची को ज़ोर का झटका दिया और चाची का पेटिकोट खोलकर फेंक।दिया।चाची पेटिकोट को देखती रह गई।अब चाची के जिस्म पर एकमात्र पेंटी ही बाकी बची थी। फिर क्या था? अब मैं चाची की पैटी भी खोलने लगा लेकिन साला तभी मेरे लंड पर गज़ब की चोट पड़ी और गेट के बहार मम्मी मम्मी की आवाज़े आने लगी।तभी मेरी पकड़ ढीली पड़ गई और चाची मुझे धक्का देकर खड़ी हो गई।अब चाची ने तुरंत पेटिकोट पहन लिया और फिर ब्लाऊज़ भी पहन लिया।
अब चाची ने गेट खोला तो बच्चे स्कूल से आ चुके थे।अब आज का मेरा सारा प्लान फ़ैल हो चूका था।अब मै लंड लटकाकर चुपचाप बैठ गया।अब चाची नहाने लगी।अब मै बच्चो के घर से बाहर जाने का ििनतजा करने लगा लेकिन दोनों बच्चे घर पर जमे हुए थे।फिर चाची नहा चुकी थी।अब चाची बच्चो के साथ बीज़ी हो गई और फिर मुझे लंड लटकाकर घर आना पड़ा।
साला आज तो चाची की चूत में लंड घुसते घुसते रह गया था।मुझे बहुत ज्यादा अफ़सोस हो रहा था। फिर जैसे तैसे रात निकली और अगले दिन फिर से मैं चाची के घर पहुँच गया लेकिन आज छुट्टी होने की वजह से बच्चे घर पर ही थे।साला आज भीेे मेरे लंड को चाची की चूत मिलने वाली नहीं थी। अब मै चाची से इधर उधर की बाते करने लगा लेकिन चाची अच्छी तरह से जान चुकी थी कि मैं उनसे क्या लेना चाहता हूँ।वो बार बार खुद को मुझसे दूर रखने की कोशिश कर रही थी लेकिन मैं तो चाची से ही चिपक रहा था।

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अब मौका मिलने पर मैने चाची को कमरे के अंदर दबोच लिया और उनके राशिले बोबो को दबाने लगा।चाची आज फिर से मुझे छोड़ने के कहने लगी।
चाची– रोहित ये क्या कर रहे हो? बच्चे यहाँ ही है।
मैं– बच्चे तो टीवी देख रहे है।आप बच्चों की चिंता मत करो।
तभी मैंने चाची की साड़ी का पल्लू नीचे गिरा दिया और उनके बोबो को कसकर मसलने लगा।चाची की डर के मारे गांड फट रही थी।वो मुझे दूर हटाने की कोशिश कर रही थी लेकिन मैं उनकी कोशिश को कामयाब नहीं होने दे रहा था।
चाची– रोहित छोड़ मुझे।
मैं– नहीं चाची, थोड़ा सा तो मज़ा लेने दो।

तभी मैंने एक हाथ चाची के पेटिकोट में घुसा दिया और चाची की चूत को कसने लगा।अब चाची मेरे हाथ को बाहर निकालने की कोशिश करने लगी लेकिन मैं कसकर चाची की चूत मसल रहा था।चाची की चूत में आग की भट्टी जल रही थी। अब चाची की सबसे कीमती चीज़ मेरे कब्जे थी।चाची बार बार छोड़ने के लिए कह रही थी।इधर मेरा लण्ड चाची की चूत फाड़ने को बेताब हो रहा था।तभी चाची के छोटे बच्चे की अंदर आने की आवाज़ आई और फिर मुझे चाची को छोड़ना पड़ा।
अब चाची ने पल्लू ठीक किया और तुरंत कमरे के बाहर निकल गई।मैं आज फिर लंड मसलता ही रह गया।अब चाची मुझे अजीब सी नज़रो से देख रही थी।मै भी चाची को हवस भरी नज़रो से देख रहा था।
खैर आज फिर मुझे खाली हाथ ही वापस लौटना पड़ा।अब मैं कल फिर से चाची के घर पहुँच गया।आज चाची अकेली ही थी।वो बरामदे में झाड़ू लगा रही थी।उनकी गांड को देखकर मेरा लण्ड एकदम से तन गया।
मैं– चाची, आप खुद अंदर चलोगी या फिर मुझे ही आपको ले जाना पड़ेगा।
चाची– यार तू रोहित ज़िद्द छोड़ दे।

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मैं– ज़िद्द तो मै आज पूरी करूँगा चाची।बहुत दिन हो गए आपके लिए तड़पते हुए।आज तो मैं आपकी चूत का रस पीकर ही रहूँगा।
चाची– मैं नहीं पिलाऊंगी।
अब मैंने सोचा चाची ऐसे तो अंदर जायेगी नहीं।इन्हें मुझे ही कमरे में ले जाना पड़ेगा।अब मैंने चाची का हाथ पकड़ा और उन्हें कमरे के अंदर ले जाने लगा।चाची के हाथ में झाड़ू था।वो बार बार अंदर नहीं जाने के लिए मना कर रही थी।लेकिन मैं नहीं माना और मैं चाची को कमरे के अंदर ले गया और गेट बंद कर लिया।अब मैंने तुरंत चाची को पलंग पर पटक दिया और मैं चाची के ऊपर चढ़ गया।
कहानी जारी रहेगी………………….
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