माँ की चुदाई देख मज़ा आ गया: भाग 3

Ma ki chudai dekh maza aa gaya: Part 3

हेल्लो! दोस्तों मैं रोहन राय फिर से आज आप लोगों को इस कहानी का तीसरा भाग बताने जा रहा हूँ , जो की काल्पनिक कहानी था , पर मैं सोचा नहीं था की ये किसी ना किसी दिन होगा, तो मैं आज आप लोगों को अपने काल्पनिक कहानी बताऊंगा ।
असलमें ये बात गणेश चतुर्थी के दिन का था और मेरे कॉलोनी में कोई भी तेहवार हो , सभी धूम धाम से मानते है आस्था: के साथ , तो मेरे पापा भी उस दिन थे पर रात में जाने वाले थे ।
तो उस दिन मेरी माँ एक मस्त सी पिंक रंग की पारदर्शी साड़ी पहनी हुई थी और स्लीवलेस ब्लाउज रस्सी वाली , करीब संध्या के 4 बजे पंडाल से लोगों को सूचित किया गया की ,

” थोड़ी देर में प्राथना सभा आरम्भ होगा , लोगों से अनुरोध है की वो जल्द से जल्द पंडाल में आएं ।”

तो मैं , मेरी माँ और पापा तीनो घर से निकल गए और पंडाल के तरफ बढ़ने लगे , मेरे पापा को उनके कुछ दोस्त मिल गए तो वो हमें आगे जाने के लिए बोले ।
तो मेरी माँ को भी उनकी कुछ सहेलियां मिल गई और मैं थोड़ा इधर–उधर होने लगा , तभी मैं एक आदमी को कहते हुए सुना ,

” आज रेखा भाभी कुछ ज्यादा ही टंच मल लग रही हैं , ज़रा बात करके आता हूँ ।”

तो जब वो आदमी मेरी माँ के पास गया तो मैं देखा की वो आदमी कोई और नहीं बल्कि मेरे पडोसी शर्मा अंकल थे , और वो हमारे कॉलोनी के रंडीबाज थे ।
लेकिन तब भी मेरी माँ शर्मा अंकल से हंस–हंस कर बात कर रही थी , फिर कुछ देर बाद प्राथना सभा आरम्भ हुआ और मेरे पापा पता नहीं कहाँ चलेगए थे दिखाई ही नहीं दिए ।
और मैं देखा की प्राथना के समय भी , शर्मा अंकल ठीक मेरी माँ के पीछे थे और मेरी माँ की गांड नाप रहे थे और लालसा की रस उनके मुँह से साफ पता चल रहा था ।
पठान सभा के बाद शर्मा अंकल मेरी माँ से फिर से बात करने लगे , और मेरी माँ का नंबर मांगे और मेरी माँ भी शर्मा अंकल को नंबर दे दी और वो अपनी सहेलिओं के साथ व्यस्त हो गई ।
हालाँकि उस दिन तो कुछ नहीं हुआ था उन दोनों के साथ , पर मेरे मान में एक अजीब सा हवस जाग उठा था , तो मैं कुछ देर तक अपने दोस्तों के साथ घूमने गया था ।
तो संध्या के बजे थे और मैं अपने दोस्तों के साथ हिंदी मीडियम हाई स्कूल के ग्राउंड में बैठा था और तभी शर्मा अंकल कार में आया , और शराब पिने के लिए ही आया था ।
तो शर्मा अंकल के बारे मेरे दोस्तों को कुछ ज्यादा ही पता था , तो मेरे एक दोस्त नितिन ने बताया की ,

नितिन : अरे ये बहुत बड़ा रंडी बाज़ हैं , गोलू की माँ को यही चोदता है ।
मैं : कौन? वही ना जिसका बाप फौज में खाना बनता है?
नितिन : हाँ! वही…मादरचोदो का लंड भी मोटा और लंबा है ।

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तो मेरा एक और दोस्त अशोक ऐसा बात बोला की मैं तो चौंक गया , अशोक ने हमें बताया की ,

अशोक : मैंने तो इसे उसके नए घर में , योगेश की माँ को लेजाते हुए देखा था ।

योगेश हमारा ही दोस्त था और हम सब अस पास के कॉलोनी , बस्ती के ही थे , पर उस समय योगेश नहीं था ,तो मैं बोला की ,

मैं : तभी तो उसकी माँ की जिस्म इतनी गदरा गई है ।

तो शर्मा अंकल शराब पिने के बाद पेशाब के लिए कार से उतरे थे और वो एक दम से अपने पजामा से 7.5 इंच का लंड निकल कर पेशाब करने लगे ,तब नितिन बोला ,

नितिन : मादरचोदो का लंड देख रहा है , रंडी लोग को पेल–पेल के टेड़ा हो गया है ।
अशोक : लौड़ा , ये तो औरतों का चींख निकल देगा ।

मुझे उनके बातों से बहुत अजीब लगने लगा था , और मैं घर जाते समय सोच रहा था की , कैसा होता अगर मेरी माँ शर्मा अंकल से चुदवती?तो मैं घर पहुंचा और फिर शाम से रात हुई ।
मेरे पापा घर थोड़े देर से आये क्यों की वो अपने दोस्तों के साथ पिने गए थे , उनके आते ही हम खाना खाए और फिर अपने–अपने कमरे में गए , रात को करीब 12 बजे मैं उठ गया था ।
क्यों की उस समय मेरे पापा काम के लिए निकल गए थे और मेरी माँ दरवाज़ा बंद कर रही थी , ठीक उसी समय मुझे किसी दूसरे आदमी का आवाज़ सुनाई दिया और मुझे वो आवाज़ जाना पहचान सा लगा ।
तो मैं उठा और अपने कमरे से बहार निकल कर देखा , देखा तो पता चला की सचमें कोई आया था और वो एक आदमी था और वो आदमी कोई और नहीं बल्कि शर्मा अंकल ही थे ।
मुझे बहुत अजीब लगा की वो इतनी रात को मेरे घर में क्या कर रहे है? तो शर्मा अंकल सोफे में बैठे थे और मैं अपने कमरे से छुप कर देख रहा था और ठीक तभी मेरी माँ शर्मा अंकल के लिए व्हिस्की लेकर आई ।
और मैं अपनी माँ को जब देखा तो वो एक काली रंग की पारदर्शी नाईट में थी , जिसमें से मेरी माँ की ब्रा और पेंटी साफ झलक रही थी , मैं अपनी माँ को उस अवतार में कभी नहीं देखा था , उनकी सर की बाल खुली हुई थी और होंटों में लाली थी ।
मेरी माँ शर्मा अंकल को व्हिस्की पकड़ा के खुद उनके सामने के सोफे में बैठ गई और शर्मा अंकल मेरी माँ को देख–देख कर व्हिस्की पिए जा रहे थे , और थोड़ी देर बाद शर्मा अंकल का गिलास खली भी हो गया ।
तो गिलास खली होते ही शर्मा अंकल ने मेरी माँ को एक और पैग के लिए इशारा किया और मेरी माँ उठ कर शर्मा अंकल के पास गई और गिलास लेकर किचन के तरफ गई और तभी शर्मा अंकल भी पीछे–पीछे गए ।
और मैं शर्मा अंकल के पीछे , ये देखने के लिए की आखिर क्या होने वाला है , और मैं जैसे ही किचन के तरफ गया तो देखा की शर्मा अंकल मेरी माँ के पीछे खड़े थे और उनके ट्रॉउज़र में टेंट बना हुआ था ।
और शर्मा अंकल मेरी माँ की गांड में अपने पैंट में खड़े लंड को मेरी माँ की गांड में रगड़ रहे थे और मेरी माँ मज़े लेते हुए अंकल के लिए पैग बना रही थी , मेरा लंड तो वैसे ही खड़ा हो गया था ।
और मैं सोच रहा था अब क्या होने वाला है? , फिर मेरी माँ मुड़ी और शर्मा अंकल को गिलास दी और शर्मा अंकल उस पैग को एक झटके में पिने के बाद गिलास को स्लैब में रखे और मेरी माँ को अपने बाँहों में भर कर चूमने लगे ये कहते हुए ,

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“ईईईसस…उउमम…उउममहह…आह! जयंती भाभी क्या मस्त माल हो आप ।”

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और शर्मा अंकल मेरी माँ की दोनों चूचियों को एक दम से पकडे और माँ की चूचियों को दबाते , मसलते हुए मेरी माँ को गर्म करने लगे और मेरी माँ तो पूरा मज़ा ले रही थी और सिसक रही थी ,

“ईईईसस…आह!…आह!…ईईईसस उउउहह…शर्मा जी आहिस्ता से… ईईईसस ”

और तभी शर्मा अंकल मेरी माँ की नाईटी को पूरा चिर देते है और मेरी माँ की ब्रा को भी , जिससे मेरी माँ की दोनों चूचियों बहार आ जाती है और शर्मा अंकल पूरा टूट पड़ते है ।
मेरी माँ की चूचियों को दबाते हुए शर्मा अंकल , माँ की चूचियों को चूसने लगते हैं और मेरी ऐसे चूसने लगते हैं जैसे की मेरी माँ की चूचियों को खा जाएंगे ।
मेरी माँ की चूचियों , शर्मा अंकल के थूक से लटपट होने लगा था और ठीक उसी समय शर्मा अंकल मेरी माँ की बूर में अपना हाथ दाल कर मेरी माँ की बूर में ऊँगली करने लगते हैं , जिससे मेरी माँ बोखला जाती है ।

माँ : आह!…ईईईसस…उउउहह…ईईईसस…अअआह ।
शर्मा अंकल : ईईईसस…क्या मस्त गर्म बूर है भाभी आपकी…ईईईसस ।

और शर्मा अंकल मेरी माँ की चूचियों को चूसते चाटते हुए अपने घुटनो पर आ जाते हैं और मेरी माँ की नाभि को देखते है और अपना गंदा जीभ लगा कर चाटने लगते हैं ,

“लललममम…उउउममम…ईईईसस…स्लूप–स्लूप–स्लूप–स्लूप ”

और मेरी माँ उस समय पूरा आनंद ले रही थी और खूब सिसक रही थी ,

“ईईईईईससससस…अअअहहह…ईईईसस… ऊऊऊऊहह”

फिर शर्मा अंकल मेरी माँ की नाभि चाटते हुए मेरी माँ की पेंटी उतरने लगे और साथ ही मेरी माँ की झांटों को सूंघते हुए मेरी माँ की पेंटी उतरे और अपने कंधे में माँ की एक तंग को उठा कर लाद दिए ।
और मेरी माँ की बूर को चाटने लगे , मेरी माँ उस समय बहुत ही कामुक लग रही थी और वो एक हाँथ से अपनी चूचियां दबा रही थी और दूसरे से शर्मा अंकल के सर को सेहला रही थी ।

माँ : अअअहहह…ईईईसस…ऊऊऊऊहह… उउफफफ
शर्मा अंकल : लललममम…उउउममम…उउमम… ईईईसस

और शर्मा अंकल मेरी माँ की बूर और उनकी झांटों तक को अपने थूक से लटपट कर चुके थे , और फिर शर्मा अंकल उठे और मेरी माँ के सामने अपने ट्रॉउज़र को नीचे किये ।
और मेरी माँ को घुटनों पर ले आये और जबरजस्ती मेरी माँ की मुँह में अपना लंड पेल दिए , माँ की मुँह में लंड जाते ही उनका असली रंग सामने आने लगा ।
मेरी माँ खूब बौखलाई हुई थी और शर्मा अंकल के लंड को पेशेवर पोर्न स्टार की तरह चूसने लगी और शर्मा अंकल मेरी माँ की बाल पकड़ कर अपना लंड को पेले जा रहे थे मेरी माँ की मुँह में ।

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शर्मा अंकल : उउफफफ…ईईईसस… अअआह…भाभी क्या मस्त लंड चुस्ती है रे तू…उउफफफ

मेरी माँ शर्मा अंकल के लंड को खूब चूसी–चाटी और फिर शर्मा अंकल मेरी माँ को खड़ा किये और मेरी माँ को अपने बाँहों में भर कर उठा लिए ।
उस समय मेरी माँ की दोनों तंग फैला हुआ था और शर्म अंकल अपने लंड को बिना पकडे एडजस्ट कर रहे थे और लुंड एडजस्ट भी हो जाता है ।
और फिर शर्मा अंकल आहिस्ते–आहिस्ते मेरी माँ की बूर में अपना लंड पेलना शुरू करते है और मैं उन दोनों को देखता रह जाता हूँ ।
शर्मा अंकल मेरी माँ की बूर में खूब लंड मर रहे थे और वैसे ही गोद में उठा कर माँ को चोदते हुए वो किचन से बहार आते हैं ।
लेकिन उनकी नज़र मुझ पर नहीं जाता है और ना ही मेरी माँ की , शर्मा अंकल मेरी माँ को सीधा सोफे में लेटा देते है ।
और मेरी माँ की दोनों टांग शर्मा अंकल के कंधे पर होता है और शर्मा अंकल का लंड माँ की बूर में और वो माँ को जम कर चोद रहे होते हैं ।
और मैं उन दोनों को छुप कर देख रहा होता हूँ , शर्मा अंकल मेरी माँ की बूर में लंड पेले जा रहे थे जम कर ।
ओर ठीक तभी शर्मा अंकल मेरी माँ की बूर से अपना लंड निकलते हैं और मेरी माँ की झांटों वाली बूर में अपना मुठ चुवा देते है ।
और तभी एक भजन की आवाज़ होती है और मैं नींद से जाग जाता हूँ , मैं देखता हूँ की सुबह हो गया है और मैं उतने देर से सपना ही देखा रहा था ।
और मेरा लंड मेरे पैंट से बहार निकल गया था और मुठ भी , मैं तुरंत उठा और बाथरूम गया और बाथरूम से आने के बाद मुझे दोनों लोगों के बात करने का आवाज़ आया ।
तो मैं अपने कमरे के दरवाज़े को खोला और देखा तो , शर्मा अंकल आये हुए थे चाय पिने , और मैं उन्हें पहली बार अपने घर में देख रहा था ।
लेकिन पहली बार के बाद भी मैं शर्मा अंकल को उस दिन के बाद अक्सर देखने लगा , खाश तौर पर पापा के गैरहाजरी में आते थे शर्मा अंकल ।
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