माँ की चुदाई देख मज़ा आ गया: भाग 5

Ma Ki Chudai Dekh Maza Aa Gaya: Part 5

हैल्लो दोस्तों मैं रोहन राय आज आप लोगों को इस कहानी का पांचवां भाग बताने जा रहा हूँ , और इस भाग में आप लोगों को बहुत मज़ा आएगा जैसा मुझे आया था ।
तो जिस दिन मैं शर्मा अंकल और मेरी माँ को उस क्वाटर में चुदाई करते देखा , मुझे पक्का यकीं हो गया की ये फिर से होगा ।
इसीलिए मैं अपनी माँ पर नज़र रखने लगा , लेकिन माँ पर नज़र रखते–रखते मेरा नज़र कहीं और चला जाता था ।
कभी माँ की बड़ी चूचियों पे तो , कभी माँ की गांड में फंसी नाईटी में , तो शायद रविवार का दिन था और मैं , पापा घर पर थे ।
तो मैं अपने कमरे में था और मुझे पनि प्यास लगा था वीडियो गेम खेलते–खेलते तो मैं रसोई के तरफ गया जाने लगा , उसी समय मुझे मेरी माँ की नटखट आवाज़ आई ।

“ऐसा मत कीजिये ना जी , रोहन घर पर ही है…ईईईसस…उउउहह”

ऐसा लग रहा था , जैसे की पापा कुछ शरारत कर रहे है माँ के साथ और पापा माँ को बोलने लागे ,

पापा : अरे…रोहन अपने कमरे में है , तुम अब खड़ी रहो , मुझे अपना काम कराने दो ।

अब ऐसे मौके पर भूख क्या , प्यास क्या , मैं एक दम चुपके से देखा और जो नज़ारा देखा उसे देख मज़ा तो आया पर मुझे पापा के लिए दुःख लग रहा था ।
पापा मेरी माँ को झुकाए हुए थे और मेरी माँ की चुदावल गांड को फैला कर चाट रहे थे , लंड तो मेरा माँ की गदराई गांड देख के खड़ा हुआ था ।
और मेरे पापा तो माँ की गदराई गांड को अपने चेहरे पर पूरा रगड़ दे रहे थे और चाट रहे थे , मैं सोचा आज देख ही लेता हूँ , पापा का कमाल ।
पापा , माँ की गांड चाट कर खड़े हुए और अपने पजामा से अपने 6 इंच के लंड को निकले जो उस समय पूरा टाइट और खड़ा था ।
पापा , माँ की गांड को फैलाए और माँ की गांड की छेद में अपना लंड लगाए और पेलने लगे थे , पर पापा का लंड अंदर नहीं जा रहा था , तो माँ , पापा से बोलने लगी की ,

माँ : एजी…थूक लगा कर कीजिए वरना मुझे बहुत दर्द होगी ।
पापा : अरे मेरे मुँह में तो थूक ही नहीं जमता, तो थूक कहाँ से लगाऊंगा ।

तो पापा भी कोशिश में थे पर पापा का घुस नहीं रहा था , तो ठीक माँ के आगे तरल वाला विम बार था और पापा उसी विम बार को माँ की गांड में लगाए ,तो माँ बोलने लगी की ,

माँ : एजी ये आप क्या कर रहे है?
पापा : बस अपना निशान छोड़ रहा हूँ ।

पापा , माँ की गांड में लिक्विड वाला विम बर लगते साथ अपना लंड सेट किए और माँ की कमर को दोनों हाथों से पकड़ कर एक दम से धक्का दिए , और माँ सिसक गई ,

माँ : आईईईई …ईईईसस…उउउहह
पापा : ईईईसस…मज़ा…आह!… आ गया…आह!

पापा पुरे जोश में लग रहे थे और जो ज़ोरदार धक्का दे रहे थे माँ को की ,माँ की गांड भी थिरक जा रही थी और माँ अपने मुँह में हाँथ लगाई हुए चुदवा रही थी ।
मैं मान ही मान बोल रहा था ,” हाँ पापा ऐसे ही पेलो माँ को , तभी ये बहार मरवाने नहीं जाएगी ” ,लेकिन मैं भी कितना गलत था , पापा जितने जोश के साथ पेल रहे थे , उससे जल्दी ही उनका निकल गया ।
मेरा लंड से मुठ भी नहीं निकला था और पापा का निकल गया , तो मेरी माँ , पापा को बोलने लगी ,

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माँ : लो जी… हो गया आपका , अब साफ कीजिए ।
पापा : अरे! कोई बात नहीं नाराज़ मत हो , रात में अच्छे से करूँगा ।

और पापा मेरी माँ की गांड साफ करने लगे ऊँगली करते हुए , मैं उस समय मान में बोला ,” बस यही करते रहिये पापा , असली पेलाई तो कोई और करता है माँ की ।”
मेरा उस समय प्यास तो मर गया था और लंड भी सो गया था , मैं सोचा रात में तो कुछ खास होगा और मैं रात होने का इंतज़ार किया ।
तो हर शाम की तरह मेरी माँ मंदिर के लिए अपनी सहेलिओं के साथ निकली और मैं अपने दोस्तों के साथ खेलने , तो मैं खेलने उसी मैदान में गया था , जहाँ से मंदिर पास होता था ।
तो मैं ये भूल गया था की मुझे मेरी माँ पर नज़र रखना है , और मैं क्रिकेट खेलने में लगा हुआ था , वो तो सही समय पर शर्म अंकल मैदान से होते हुए गुज़रे तब मुझे याद आया ।
पर शर्म अंकल मैदान में नहीं रुके , वो सीधा अपने नए घर की तरफ निकल गए , मैं सोचा शायद आज अंकल का मूड नहीं होगा ।
तो मैं खेलता रहा और ठीक भजन , कीर्तन ख़तम होने के कुछ देर बाद मेरी माँ की सहेलिओं को मैदान से गुज़रते देखा ।
पर माँ को उनके साथ नहीं देखा और मैं समझ गया की माँ कहाँ गई होगी , मैं तुरंत मेरे दोस्तों को अलविदा बोल कर मैदान से भागा ।
और मैं भाग कर सीधे शर्मा अंकल के नए घर के तरफ गया शॉर्टकट रस्ते से और मैं चुपके से शर्मा अंकल के घर के पीछे गया ।
खिड़की खुला था और मैं चुपके से घर के अंदर देखा , देखा तो शर्मा अंकल बिस्तर पर एक दम नंगा लेटे हुए है और अपने लंड से खेल रहे है ।
पर मेरी माँ वहां नहीं थी , इसीलिए मैं वहां रुका नहीं और जाने ही वाला था की , दरवाज़े पर किसीने दस्तक दिया और मैं देखा आखिर कौन हो सकता है?
तो शर्मा अंकल एक टॉवल लपेट कर दरवाज़ा खोलने गए और दरवाज़ा खोलते ही मैं मेरी माँ को देखा , शर्मा अंकल मेरी माँ से पूछे ,

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शर्मा अंकल : मुझे लगा शायद आप नहीं आओगी ।
माँ : कैसी बात कर रहे है शर्मा जी , आप बुलाए और मैं ना आऊं ऐसा नहीं हो सकता ।

शर्मा अंकल दरवाज़ा बंद करते हुए मेरी माँ को अपने बाँहों में भर कर चूमने लग जाते हैं और मेरी माँ भी बेशरम की सरे हदें पर कर देती है ।
मेरी माँ , शर्मा अंकल के टॉवल को ही खोल देती है और अंकल के लंड को पकड़ कर सहलाने लगती है , शर्मा अंकल मेरी माँ की पल्लू सरका देते है ।
और मेरी माँ की चूचियों को दबाते हुए चूमने लगते हैं , और मेरी माँ सिसकने लगती है और कहती है ,

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माँ : उउफफफ ईईईसस आपके साथ एक अलग ही मज़ा आता है शर्मा जी ।
शर्मा अंकल : उउममहह…ईईईसस…और मुझे आपके साथ जयंती जी , उउफफफ…ईईईसस…क्या मस्त चीज हो आप ।

शर्मा अंकल मेरी माँ को पुरे जोश के साथ चूमते , चाटते हुए बेडरूम ले आते हैं और मेरी माँ की साड़ी को खोलने लगते हैं ।
और फिर माँ की ब्लाउज की हुक खोलने लगते है , वो भी माँ की पीठ चाटते हुए , शर्मा अंकल मेरी माँ की ब्लाउज खोलते ही ब्लाउज को पूरा निकल ही फेंकते है ।
और मेरी माँ की चूचियों को दबाने और मसलने लगते हैं पीछे से , मेरी माँ सिसकने लगती है ,

माँ : ईईईसस…अअआह…शर्मा जी ,आज आपको मैं ज्यादा समय नहीं दूंगी , मेरे पति घर पर है ।
शर्मा अंकल : तो क्या हुआ? बोल दीजिएगा दोस्तों के साथ व्यस्त हो गई थी और क्या ।

और शर्मा अंकल माँ की पेटीकोट का नाडा खोल देते है और मेरी माँ पेंटी में आ जाती है , शर्मा अंकल मेरी माँ की बड़ी गांड में अपना लंड रगड़ने लगते हैं ।
और साथ ही माँ की चूचियों को दबाते हुए , माँ की पीठ को चूमते , चाटते हुए घुटनो पर आ जाते है और माँ की गांड को चूमने लगते हैं ।
मेरी माँ हवस की आग में जाल रही थी , इसीलिए वो शर्मा अंकल की बात मान जाती है और फिर शर्मा अंकल मेरी माँ की पेंटी को उतर कर माँ को नंगी कर देते हैं ।
और शर्मा अंकल मेरी माँ को अपने तरफ घूमते हुए माँ की रसीली होंठ को फिर से चूमने लगते हैं और मेरी शर्मा अंकल , माँ के साथ बिस्तर पर लेट जाते हैं ।
शर्मा अंकल मेरी माँ के ऊपर थे और मैं देख रहा था की शर्मा अंकल कैसे अपने वासना को बहार निकलना चाहते थे ।
शर्मा अंकल मेरी माँ की दोनों टांगों को उठाए हुए थे और वो माँ की चूचियों को चूसते , चाटते नीचे आ रहे थे , और मेरी माँ वो तो मदहोश हो गई थी ।
शर्मा अंकल मेरी माँ की दोनों टांगों को उठाए हुए थे और वो माँ की नाभि चाटते हुए माँ की बूर को चाटने लगते हैं और मेरी माँ सिसकने लगी है माज़े से ,

माँ : उउफफफ… ईईईसस… अअआह… शर्मा जी आप तो इसी फिराक में रहते हैं …ईईईसस ।
शर्मा अंकल : हाँ जयंती जी , अब तो ऐसा लगता है , आपकी लिए बगैर मुझे नींद नहीं आता है ।

शर्मा अंकल मेरी माँ की बूर को चाट–चाट कर अपने लार से लटपट कर देते है और फिर शर्मा अंकल खड़े होते है और माँ की बूर में लंड पेलने से पहले ।
शर्मा अंकल मेरी माँ की दोनों टांगों को अपने कन्धों पर लाद लेते हैं और अपने बड़े होते लंड को माँ की बूर में रगड़ते हुए अपना लंड को सेट करते है ।
शर्मा अंकल अपने लंड को माँ की बूर में सेट करने के बाद खुद भी बिस्तर पर चढ़ जाते हैं , और तब मैं मेरी माँ की गांड की छेद को पूरा अच्छे से देख पा रहा था ।
शर्मा अंकल अपने लंड को माँ की बूर में पेलना शुरू करते है आहिस्ता–आहिस्ता से और मेरी माँ के लिए वो पोजीशन शायद नया था ।
इसीलिए मेरी माँ की सिसक निकलने लगती और वो सिसकते हुए शर्मा अंकल से बोलने लगती है ,

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माँ : ईईईसस…अअआह…उउउहह…ईईईसस… शर्मा जी ये कौनसा पोजीशन में कर रहें है आप?…अअअईई
शर्मा अंकल : इसे लांगटा सियार पोजीशन कहते हैं , क्या हुआ? पसंद नहीं आ रहा क्या?
माँ : बहुत मज़ा आ रहा है शर्मा जी , पूरा अंदर तक घुस रहा है आपका ।

तो शर्मा अंकल मेरी माँ की ये बात सुन कर पुरे जोश में नहीं आ जाएंगे , पुरे जोश में आ गए और उसी पोजीशन में ज़ोरदार धक्का देने लग गए ।
शर्मा अंकल का लंड मेरी माँ की बूर बाज़ा रहा था, तो वहीं शर्मा अंकल के बड़े टट्टे माँ की गांड में थपड वर्षा रहे थे ।
शर्मा अंकल मेरी माँ की बूर जैसे बाज़ा रहे थे , मैं देखा की माँ की बूर से सफ़ेद लसीला मुठ निकलने लगा है और मेरी माँ की दोनों तंग भी कांपने लगी थी ।

माँ : अअआह…ईईईसस…अअआह… धीरे–धीरे शर्मा जी… अअअहहह
शर्मा अंकल : ईईईसस…अअआह… बस थोड़ी देर और जयंती जी ईईईसस…बस थोड़ी देर और ।

दोनों के दोनों पसीने से तरबतर हो गए थे और मेरी माँ की बूर से सफ़ेद लसीला मुठ पिघलते हुए आइसक्रीम जैसे बूर से निकलते हुए गांड से होते हुए बिस्तर पर टपक रहा था ।
उसके बाद शर्मा अंकल जैसे ही मेरी माँ की बूर से अपना लंड निकले , वैसे ही वो एक और पोजीशन में आ गए ।
जिसे हम पोज़ कहते हैं , पर उस पोज़ में शर्मा अंकल मेरी माँ के ऊपर थे और माँ नीचे ।
माँ , शर्मा अंकल के मुठ लगे लंड को चूस रही थी और शर्मा अंकल मेरी माँ की मुठ से लटपट बूर और गांड को ।
मेरी माँ का हो गया था , पर शर्मा अंकल का नहीं हुआ था , इसीलिए वो मेरी माँ की चूचियों के बिच अपना लंड फंसा कर पेल रहे थे और मुठ भी चूचियों पर निकाले थे ।
और वो नज़ारा मेरा भी मुठ निकला था , मैं उन दोनों की दो और चुदाई देखा था , जिसे मैं बताऊँ या नहीं ये आप लोग ज़रूर बताना।
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