माँ जी का पेटीकोट उठाया-1

अब ये बात साफ थी की काम करके पैसा कमाने से अच्छा था मन्दाकिनी से धंधा कराके पैसा कमाना। जब मन्दाकिनी 8 घण्टे की ड्यूटी बजती थी इस अकॉउंट फर्म में तब उसे 5 हजार मिलते थे। जबकि धंधा करके हम दोनों खूब पैसा कुछ ही देर में कमा लेता था। दिन में मैं ट्यूशन पढता था। रात को मन्दाकिनी से धंधा कराता था। 10 हजार मुझे मन्दाकिनी देती थी हर महीने। इस तरह 16 17 हजार मैं अब कमाने लगा था हर महीने।

मैं अब रजनीगंधा मसाला चबाता था और महंगी सिगरेट पिता था। पर अब भी ये पैसे कम थे। मुझे बढ़िया लाइफ जीने के लिए कम सनम 40 हजार हर महीने कमाते थे। मन्दाकिनी के पैसो को मैं ही सम्हालता था। बैंक से निकलना, जमा करना सब मैं ही करता था। मन्दाकिनी को बैंक जाना जरा भी पसंद नही था। पढाई लिखाई वाले काम में वो कच्ची थी। सब मैं ही सम्हालता था। मैं मन्दाकिनी से बिना पूछे भी उसके पैसा निकाल लेता था, चोरी कर लेता था।

एक दिन मन्दाकिनी नें कहा की वो प्रकाश और गीता के साथ के साथ शौपिंग पर जाएगी। मैंने मना किया। मैं उस दिन कानपुर अपने चच्चा को देखने गया था। वो बहुत बीमार थे और मरने वाले थे। मैंने मन्दाकिनी को मना किया शौपिंग जाने से और कहा की जब मैं आऊंगा तो खुद उसे ले जाकर शॉपिंग करवाऊंगा। पर रण्डी मानी नही और शॉपिंग चली गयी। जब मैं लखनऊ पंहुचा तो मन्दाकिनी ने मुझे अपनी नई ड्रेसेस, जेवेलरी, इयरिंग ,सैंडल्स दिखाई।

मुझे गुस्सा आ गया। मैंने रांड को थप्पड़ ही थप्पड़ लगाये। लात घुसे मार मार कर उनका मुँह बिगाड़ दिया। मन्दाकिनी के सारे बाल बिखर गए।
मादरचोद! आज के बाद तू मुझसे बिना पूछे कही गयी तो जान ले लूंगा तेरी ! मैं चीख कर बोला।
मुझे रह रह कर गुस्सा आ रहा था। मैंने फिर से रण्डी के गाल पर चामाचे जड़ दिया। मन्दाकिनी डर गयी। वो कापने लगी। मैं इस सोने के अंडे देने वाली चिड़िया को हाथ से नही निकलने देना चाटता था। मैं उसे अपने वस में रखना चाहता था। इसलिए उसे डरा धमकाकर रखता था।

सब मिलाकर मन्दाकिनी ने 1 लाख 10 हजार रुपए अपनी माँ को दिए थे पर अब भी हमारे पास पैसा था। डॉक्टर्स ने कहा था की 2 लाख एडवांस जमा करने पर मन्दाकिनी के पापा के कीमोथेरेपी सेशन शूरु होंगे। मन्दाकिनी साइड में अपनी 5 हजार वाली अकाउंटेंट वाली नौकरी भी करती रहती थी।

अभी भी हम लोगो के पास 90 हजार कम थे। मैं लगबघ हर दूसरे दिन साम को मंददकिनी के घर पहुच जाता था। उसके पापा तो हमेशा अपने कमरे में बीएड पर लेते रहते थे और टीवी से ही अपनी लाइफ काटते थे। मैं मन्दाकिनी के छोटे भाई बहनों को भी कभी 2 पढ़ा दिया करता था। मन्दाकिनी की माँ मुझसे बड़ी प्यार ने बात करती थी। वो अभी 40 की ही थी पर सामान ठीक थी। मैं यही सोचता था की ये सामान तो अभी जवान है इन्हें कौन चलाता होगा।

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एक दिन मैं मन्दाकिनी के घर था। साम को 6 बजे थे। मन्दाकिनी अपनी जॉब पर थी। मैं उसके छोटे भाई बहनों को पढ़ा रहा था। उसकी माँ चाय लेकर आई। आज मुझे वो बड़ी घूरकर देख रही थी। मैंने भी उसको भरपूर निगाहों से देख लिया। कुछ महीने में मैं साफ 2 जान गया की उसकी माँ जो आज भी हेममैलिनी जैसी लगती है मुझे पसंद करती है। एक दिन माँ जी चाय लेकर आई। मुझे घूरकर देखने लगी। वो बहर गयी। मैं भी उनके पीछे गया और माँ जी माँ मैंने हाथ पकड़ लिया।

ये क्या कर रहे हो तुम रशीद? माँ जी ने ऐतराज किया
वही जो मुझे करना चाहिए मैंने उनका हाथ मजबूती से पकड़े हुए कहा
नही मेरा ऐसा कोई मतलब नही है वो किसी सती सावित्री की तरह बोली
ये सब बाते छोड़ो माँ जी, ये बताओ दोगी?? मैं माँ जी की आँखों में आँखे डालते हुए पूछा।
माँ जी दीवानी हो गयी। वो सब काम भूल गयी। मेरी निगाहों ने उनको बाँध लिया। वो पूरी तरह से मेरी आँखों में दुब गयी।

दोस्तों, मैं बता नहीं सकता। 20 25 मिनट तक माँ जी ने मुझे, और मैंने उनको नजरों ही नजरों में खूब चोदा। अब माँ जी अपनी चूत खुद देंगी मैंने ताड़ लिया।
जब देना हो बता देना और ध्यान रहे मन्दाकिनी को हमारे चक्कर के बारे में पता ना चले मैंने माँ जी से फुसफुसाकर कहा और वापिस पढाई के कमरे में आ गया।

बुद्ववार को माँ जी ने फ़ोन किया।
हलो रशीद! उन्होंने कहा धीरे से और चुप हो गयी।
इंडियन औरत मरते मर जाएगी पर कभी खुलके नही कहेगी की मुझे चुदवाना है। कभो नही कहेगी की ममैं चुदासी हूँ मुझे लण्ड चाहिए।
माँ जी कैसी को?? मैंने पुछा इस माँ बेटी दोनों को कसके चोदूंगा। मैंने मन ही मन सोचा।
अच्छी हूँ! वो बोली
माँ जी ई लव यू मैंने कहा
आप आज भी बड़ी हसीन हो मैंने कहा। मेरा लण्ड फनफनाने लगा। जवान औरत को देखते ही मेरे लण्ड में ताव आ जाता है। चोदने का मन करने लग जाता है।

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माँ जी 10वी पास थी। वो ई लव यू का मतलब जान गयी थी। शाम 5 बजे मैं बाइक लेकर मन्दाकिनी के घर पंहुचा। सबसे बढ़िया बात थी की मेरी छिनार रात 8 बजे घर आती थी। इसलिए शाम के वक़्त मैं मन्दाकिनी की माँ शोभा देवी की चूत मार सकता था। बच्चों को मैं पढता भी थी पर आज तो किताब देखने का मन ही नही कर रहा था। मैं जानता था आज शोभा देवी की चूत मिलने वाली है।

मैं बाइक चलाकर मन्दाकिनी के घर जा रहा था पर बीके पर भी मेरा लण्ड उफान मार रहा था। पता नही कैसी बुर होगी माँ जी की। 2 साल ने तो मन्दाकिनी के पापा बीमार ही है। झांटे वाटे पता नही बानी होगी या नही। मैं घर पंहुचा और बच्चों को पढ़ाने लगा। माँ जी देखने के लिए मैं मरा जा रहा था। मन्दाकिनी को चोद चोदकर मैं बोर हो गया था। कुछ नही चूत मारने का मन था।

थोडी उदासभरी शाम थी। हमेशा की तरह मन्दाकिनी के पापा अपने कमरे में थे। वो सो रहे थे। उनकी तबियत ठीक नही थी। वो सो रहे थे। बीच 2 में जोर 2 से खासते थे। काफी देर तक माँ जी नही आई। मैंने सोचा की जादा सपने नही देख़ने चाहिए। मैं ये भी सोचने लगा की कहीं माँ जी का मुझसे चुदवाने का इरादा तो नही बदल गया। मैं थोडा निरास हो गया। और उनको चोदने की उम्मीद भी मैंने छोड़ दी।

बड़ा इंतजार करने के बाद माँ जी चाय दालमोट की ट्रे लेकर आई। नयी साड़ी पहन रखी थी। माँ जी ने मुझे ध्यान से देखा। मैंने अल्लाह का सुक्रिया किया की माँ जी मुझसे पट गयी थी। माँ जी मेरे पास ही सोफे पर बैठ गयी। मन्दाकिनी के भाई बहन को मैंने काम दे दिया। और माँ जी से बात करने लगा। माँ जी ने मन्दाकिनी के पापा के कमरे की सिटकनी लगा दी थी। जिससे कहीं ऐसा ना हो की वो हम लोगों को चुदाई करते पकड़ ले।

बच्चे अपना काम करने लगे। माँ जी मुझे ताड़ने लगी। मेरी पास ही बैठ गयी। मैं भी माँ जी को ताड रहा था। मन तो कर रहा था यहीं गिराकर पढाई वाले कमरे में ही माँ जी को चोद लूँ। पर बच्चे थे। माँ जी को और मुझे, दोनों को मजा आने लगा। माँ जी शांत थी और लगातार मेरी आँखों में देखी जा रही थी। लग रहा था माँ जी शराब पी रही है। मुझे भी कुछ ऐसा ही लग रहा था।

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माँ जी ने पीले कलर की नई साड़ी पहन रखी थी। थोड़ मेकअप भी किया था। माँ जी आज भी जवान थी। चोदने लायक थी। अच्छा ख़ासा भरा बदन था। मैंने माँ जी के हाथ को अपने हाथ में ले लिया। माँ जी बिलकुल रेडडी थी। पर अभी कम से कम 1 घण्टा चुदाई नही हो सकती थी। बच्चों को होमवर्क कराना था। मैंने माँ जी के दायें हाथ को पकड़ लिया एयर सेक्सी अंदाज से अपने आंगुदे से सहलाने लगा। माँ जी को मजा आ गया। वो मेरे वस में हो गयी।

बच्चों की नजर से बचकर मैं माँ जी की जांघ पर भी हाथ रख देता था। माँ जी को पूरा मजा आ रहा था। किसी तरह 1 घण्टा बीता। मैंने बच्चों का होमवर्क करवा दिया। और उनको बाहर भेज दिया। कमर लॉक कर लिया। और माँ जी पर टूट पड़ा। मैंने माँ जी की कमर में हाथ दाल दिया उसके ब्लाउज के निचे। और सीधे उसके ओंठ पिने लगा। माँ जी के ओंठ पतले 2 थे पर काम चलाऊ थे।
माँ जी दोगी?? मैंने फिर पूछा
मैं जानता था की चूत तो उनकी मिलेगी ही आज। मैं तो थोड़ा मजा ले रहा था।
माँ जी चुप थी। ओंठ पिने से माँ जी गरम हो गयी। किसी भी औरत को गरम करके चोदने में ही मजेदारी है, फोर्पल्ये के बिना मजा नही आता है। मैंने माँ जी के मम्मे दाबने शूरु किये। क्या मस्त मम्मे थे। बिलकुल मन्दाकिनी के जैसे बड़े 2 गोल गोल थे। थोड़े ढीले थे पर आज भी माँ जी आकर्षक थी।

दोस्तों, लण्ड बुर नही चोदता, लण्ड तो हमेशा चेहरा ही चोदता था। हर लौण्डिया या औरत की बुर तो एक ही तरह होती है। काली 2 फर्क सिर्फ इतना है की चेहरा अलग होता है। मन्दाकिनी को 3 4 सालों से चोदने के बाद ये नया शिकार मैं कर रहा था। मैं माँ जी के मम्मो को जोर 2 से दाबने लगा। माँ जी की सिसकारियाँ निकलने लगी।
जरा धीरे करो…रशीद दर्द हो रहा है माँ जी धीरे से बोली।

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