माँ की गांड की गोलाई नापी अपने लंड से-2

Maa Ki Gaand Ki Golai Napi Apne Lund Se-2

मैं अपने आप के ऊपर कंट्रोल नहीं कर पा रहा था, मन कर रहा था कि अभी सलवार को फाड़ दूँ और माँ की गांड पर अपने होंठों से अपनी मोहर लगा दूँ।

अब मैं झुका और सलवार के ऊपर से ही माँ के दोनों चूतड़ पर चूम लिया और एक बार फिर से दोनों चूतड़ को हाथ से दबाया और अपने बेड पर आकर लंड को हिला कर सो गया।

अब वो दिन आ गया था, जब मुझे माँ की गांड के दर्शन होने वाले थे। मैं सुबह उठा और खेलने चला गया लेकिन खेलने में बिल्कुल मन नहीं लग रहा था, मैं तो बेसब्री से दोपहर होने का इंतज़ार कर रहा था जब माँ नहाने जाएगी।                                  “Maa Ki Gaand Ki Golai”

मैं जल्दी ही घर लौट आया, अभी 11 ही बजे थे, मैं मूवी देखने लग गया टाइम काटने के लिए!
अब एक बज रहा था, तभी मुझे आँगन का दरवाजा बंद होने की आवाज़ आई।

बस मैं तो इसी पल का इंतज़ार कर रहा था, मैं झट से उठा और रूम में गया और बाहर झाँका, बाहर का सब कुछ बिल्कुल साफ दिख रहा था, अभी माँ नहाने नहीं आई थी।                                                     “Maa Ki Gaand Ki Golai”

मैं वहाँ बैठा इंतज़ार कर रहा था और 5 मिनट बाद मेरा इंतज़ार ख़त्म हुआ, माँ आई, उसने डार्क चॉकलेट रंग का सलवार सूट पहना हुआ था और उनके हाथ में टॉवल था।

माँ ने टॉवल हैंगर पर टांग दिया जो खिड़की की साइड में था।
माँ का चेहरा मेरी साइड था।

अब माँ ने कपड़े उतरने शुरू किए, पहले वो शर्ट उतार रही थी, जैसे जैसे शर्ट ऊपर उठ रहा था मेरी आँखें फटी जा रही थी और धीरे धीरे उनका गोरा पेट मेरे सामने आता जा रहा था। मैं उस टाइम अपनी पलकें भी नहीं झपका रहा था क्योंकि मैं एक भी पल को मिस नहीं करना चाहता था।                                                            “Maa Ki Gaand Ki Golai”

शर्ट उठते उठते ब्रा तक पहुँच गया था, माँ का पेट कसा हुआ था और किसी हिरोइन के जैसा लग रहा था। अब शर्ट बूब्स के ऊपर गले तक जा चुका था और मैं आँखें फाड़ फाड़ फाड़ कर माँ की चुची घूर रहा था। माँ शर्ट निकाल चुकी थी और हैंगर पर टाँग रही थी और मेरी नज़र माँ के चूचों से नहीं हट रही थी, छोटे संतरा जैसे टाइट बूब्स काले रंग की ब्रा में क़ैद थे।

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अब माँ सलवार का नाड़ा खोल रही थी और मेरी नज़रें उनके पेट पर टिकी हुई थी। माँ ने जैसे ही नाड़े से हाथ हटाया तो सलवार एकदम से नीचे गिर गई।                                                                       “Maa Ki Gaand Ki Golai”
माँ मेरे सामने सिर्फ़ काले रंग की ब्रा और पेंटी में थी, उनके दूधिया जिस्म पर काली रंग की पेंटी बहुत अच्छी लग रही थी जैसे कि उनके खूबसूरत जिस्म को नज़र लगने से बचा रही हो।

अब माँ ने ब्रा का हुक खोला और ब्रा को निकाल दिया। उनके बूब्स अब आज़ाद पंछी की तरह हवा में आ गये थे और पूरा सख्ती के साथ खड़े हुए थे जैसे जता रहे हों कि वो ही बॉस हैं उस जगह के!

उनके चूचुक गहरे गुलाबी रंग के थे और उठे हुए थे। मेरा तो अब बुरा हाल हो रहा था, मेरी पैंट के अंदर तंबू बन चुका था। अब मैं इंतज़ार में था कि कब पेंटी उतरे!
लेकिन माँ ने पेंटी नहीं उतारी और नहाने बैठ गई।                                    “Maa Ki Gaand Ki Golai”

वो मेरी तरफ ही मुँह कर के बैठी हुई थी और अपने पैरों को धो रही थी। उनके पैर बहुत ही चिकने लग रहे थे जैसे कि पूरा तेल लगा दिया गया हो।
मैंने अपना लंड पैंट से बाहर निकाल लिया था और धीरे धीरे हिलाने लग गया था।

अब माँ ने पानी गर्दन के नीचे गिराया जो माँ के बूब्स पर से होते हुए उनकी पेंटी को गीला कर रहा था।
थोड़ी धूप होने के कारण माँ के दूधिया जिस्म पर गिरी हुई पानी की बूंदें मोती के जैसे चमक रही थी और मेरे हाथ की स्पीड मेरे लंड पर बढ़ रही थी।                                                                                                        “Maa Ki Gaand Ki Golai”

अब माँ ने कमर के ऊपर तक और पैरों पर साबुन लगाया और अपने शरीर को मसलने लगी। पहले गर्दन के नीचे से और अब बूब्स तक हाथ आ गये थे।
माँ अब बूब्स को रग़ड़ रही थी, कुछ अलग ही तरीके से वो गोल गोल घुमा रही थी। शायद तभी उनके बूब्स अभी भी गोल और सख़्त थे।
वो बीच बीच में बूब्स को दबा भी रही थी और बूब्स हाथों की पकड़ से फिसल जा रहे थे जैसे जता रहे हों कि इतनी आसानी से हाथ नहीं आएँगे।

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अब माँ ने अपनी जाँघों को मसला और साबुन उठा कर पेंटी के अंदर घुसा दिया। अब माँ खड़ी हो गई और उनकी कमर मेरी तरफ की तो उनकी गोल गांड मेरे सामने थी जो उनकी पेंटी में पूरी समा नहीं पा रही थी और उनकी गांड की गोलाई पूरी पेंटी से बाहर थी।     “Maa Ki Gaand Ki Golai”

मेरे तो होश उड़ गये थे और मेरे हाथ की रफ़्तार तेज़ हो गई थी जिस गांड के लिए मैं पागल था वो आज मेरे सामने थी, वो भी आधी नंगी।

अब माँ ने पेंटी के इलास्टिक में हाथ डाला और नीचे सरकाने लगी, मैं तो पागल हो उठा, मुझे माँ के चूतड़ की दरार दिखना शुरू हो गई थी और वो दरार बढ़ती जा रही थी।
और कुछ सेकिंड के बाद माँ की नंगी गांड मेरे सामने थी और वो भी दो कदम की दूरी पर!

उम्म्ह… अहह… हय… याह… मैंने महसूस किया कि मेरा लंड आज तक इतना कभी टाइट नहीं हुआ, आज मेरा लंड गर्म लोहे की रॉड बन गया था और मेरा हाथ तो जैसे बिजली की रफ़्तार से चल रहा था।
माँ की गांड बिल्कुल गोल थी और एक भी दाग नहीं था माँ की गांड पर!                                           “Maa Ki Gaand Ki Golai”

अब माँ साबुन उठाने के लिए झुकी तो मेरे होश उड़ गये मेरा सारा खून मालूम नहीं कितनी रफ़्तार से दौड़ रहा था। यह पहली बार था जब मैं माँ की गांड का छेद देख रहा था।
माँ की गांड का छेद गहरे गुलाबी रंग का था और पाँच रुपये के सिक्के के जितना था। अब माँ चूत पर साबुन लगा रही थी। अब उन्होंने गांड पर साबुन लगाया गांड की दरार से साबुन को रगड़ते हुए।

अब माँ चूत को रगड़ रही थी फिर अपने चूतड़ रगड़े, फिर माँ अपने पैर रगड़ने के लिए झुकी, मुझे फिर से माँ की गांड का छेद दिखाई देने लगा।
माँ के झुकने के कारण उनकी गहरे गुलाबी रंग चूत भी मुझे दिख रही थी।

माँ की चूत की फांकें खुली हुई थी और मुझे छेद साफ नज़र आ रहा था।                          “Maa Ki Gaand Ki Golai”
मैंने पहली बार माँ की चूत और माँ की गांड को देखा था। माँ पैर रगड़ते हुए ऊपर नीचे हो रही थी जिससे माँ की गांड का छेद खुल और बंद हो रहा था जैसे मुझे बुला रहा हो।

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मैं बिल्कुल पागल हो गया था, मन कर रहा था कि अभी चला जाऊँ माँ के पीछे और अपने होंठ माँ की चूत और गांड पर रख दूँ और चाट चाट कर सारा रस पी जाऊँ और फिर अपना पूरा लंड माँ की गांड में उतार कर माँ की चीखें निकाल दूँ।
लेकिन मैं अपने हाथ से लंड हिलने के सिवा कुछ नहीं कर सकता था।

माँ अब अपने ऊपर पानी डाल रही थी और मैं ज़ोर ज़ोर से लंड हिला रहा था, मेरी साँसें काफ़ी तेज़ हो चुकी थी।
माँ अब नहा चुकी थी वो खड़ी हुई और अपने ऊपर एक डिब्बा पानी डाला, फिर दूसरा डिब्बा पानी लेने के लिए जैसे ही झुकी, फिर से माँ की गांड का छेद मेरे सामने था।                                                             “Maa Ki Gaand Ki Golai”

और तभी मुझे सिहरन सी हुई और मेरे लंड से पिचकारी निकलने लगी।
आज मेरा लंड पानी छोड़े ही जा रहा था, आज तक कभी भी मेरा इतना पानी नहीं निकला था।

मैं निढाल सा पड़ गया था और पसीने से लथपथ हो गया था और ऐसे ही पड़े हुए माँ को देख रहा था।
माँ टॉवल से अपने गोरे जिस्म को पोंछ रही थी, सारा जिस्म पोंछने के बाद टॉवल अपने जिस्म से लपेटा और फिर माँ अपनी गोल गोल मखमली गांड को हिलाते हुए वहाँ से चली गई।

अब मैं जब भी मौका मिलता, माँ को नहाते हुए देखने लग गया और देख देख कर अपना लंड हिलाने लग गया और रातों में माँ की गांड पर हाथ फिराने और दबाने लग गया।                                                 “Maa Ki Gaand Ki Golai”

ऐसे लम्बे अरसे तक चलता रहा, माँ को शायद थोड़ा शक़ ज़रूर हो गया था मेरी हरकतों का… लेकिन अभी तक कुछ कहा नहीं था।

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