मकान मालिक की बेटी को ठोका-1

Makan malik ki beti ko thoka-1

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम आसिफ़ है और में पिछले बहुत सालों से  सेक्सी कहानियों को पढ़कर बहुत मज़े लेता आ रहा हूँ और ऐसा में लगातार करता आ रहा हूँ. मैंने अब तक जितनी भी कहानियाँ पढ़ी, वो सभी मुझे बहुत अच्छी लगी है और मुझे उनको पढकर बड़ा मज़ा आया. दोस्तों एक दिन मैंने मन ही मन सोचा कि क्यों ना में भी आप सभी चाहने वालों के साथ अपना पहला सेक्स अनुभव मेरी अपनी एक सच्ची घटना आपको सुनाऊँ? और इसलिए में आज अपनी कहानी को लेकर आप लोगों के पास आया हूँ.

दोस्तों इस कहानी में मैंने अपने मकान मालिक की बेटी को चोदकर उसकी कुंवारी चूत के मज़े लिए और उसकी सील को मैंने बहुत खुश होकर तोड़ दिया और बहुत मज़े किए. उसको बहुत अच्छा अनुभव अपनी अच्छी मस्त चुदाई का दिया, जिसको वो अपनी पूरी जिंदगी याद रखेगी, लेकिन में सबसे पहले अपना परिचय आप लोगों से करवा देता हूँ. उसके बाद में कहानी की तरफ आगे बड़ता हूँ. दोस्तों में 22 साल का एक अच्छा दिखने वाला गोरा गठीले बदन का लड़का हूँ और मेरी लम्बाई 6 फिट और मेरे लंड का आकार 5 इंच है और मुझे बचपन से ही सेक्स करने में बहुत रूचि रही है और यह काम करना मुझे बहुत अच्छा लगता और मुझे उसमें बड़ा मज़ा आता है.

दोस्तों चलो अब हम कहानी की तरफ आते है, यह दो साल पहले की बात है, जब में अपनी आगे की पढ़ाई के लिए अपने गाँव से पास के शहर में आया था, क्योंकि हमारे यहाँ पर कॉलेज नहीं था और में कुछ दिन तो अपने अंकल के घर पर ही रहा, लेकिन फिर मैंने वहां पर रहकर महसूस किया कि में वहाँ पर रहकर अच्छी तरह से अपनी पढाई नहीं कर सकता, इसलिए मैंने अपने लिए एक अलग घर किराए पर ले लिया और में वहां पर रहने चला लगा, वहाँ पर मेरा रूम ऊपर की मंजिल पर था और नीचे की मंजिल पर मेरा मकान मालिक भी रहता था.

दोस्तों मेरा मकान मालिक का नाम रशीद था और उनके एक ही बेटी थी, उसका नाम राबिया था, वो भी एक अच्छे से कॉलेज में अपनी पढ़ाई कर रही थी, वो अंकल और आंटी दोनों ही बहुत अच्छे थे और उनका व्यहवार मुझसे हंसकर बड़े प्यार से बात करने का तरीका मुझे अच्छा लगता और इस वजह से में भी कुछ ही दिनों में उन सभी घर वालों में बहुत अच्छी तरह से घुल मिल गया और वो लोग भी मुझे बहुत अच्छा लड़का समझते थे और इसलिए में उनके घर में अक्सर आता जाता रहता था और वैसे मेरा ज्यादा ध्यान अपनी पढ़ाई में ही रहता था, इसलिए अंकल और आंटी मेरा बहुत ध्यान रखते थे, वहां पर उनकी वजह से मुझे किसी भी चीज़ की कोई कमी नहीं थी, इसलिए में भी लगातार अपनी पढ़ाई में लगा रहता, मुझे और किसी काम से कोई मतलब नहीं था. दोस्तों में हर रविवार के दिन बहुत देर तक सोता था.

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उस दिन में अपने रूम में लेटा हुआ था कि तभी अंकल की बेटी जिसका नाम राबिया है, वो ऊपर छत पर कपड़े धूप में डालने आई तो मैंने ध्यान से उसको देखा तो वो पानी में एकदम भीगी हुई है, वो क्या मस्त कमाल की दिख रही थी, उसके फिगर का आकार करीब 36-32-38 था, लेकिन वो बहुत आकर्षक था, जिसको में अपनी चकित नजरों से लगातार देखे जा रहा था और उसने उस समय अपने कपड़ो के अंदर ब्रा नहीं पहनी थी, जिसकी वजह से उसके सफेद रंग के कपड़ो में से उसके गोरे बूब्स और उनकी हल्के भूरे रंग की निप्पल कुछ कुछ नज़र आ रही थी.

में दूर से अपनी ललचाई नजर से उसके बूब्स को देखकर मज़े ले रहा था. तभी अचानक से उसकी नज़र मुझ पर पड़ गई और उसने मुझे देख लिया कि में उसके झूलते लटकते हुई बड़े आकार के आकर्षक बूब्स को अपनी भूखी नजरों से देख रहा हूँ, तो वो घबराकर नीचे चली गई और में कुछ टेंशन में आ गया. फिर मैंने मन ही मन में सोचा कि कहीं यह किसी को बता ना दे, इसलिए जब वो दोबारा आई.

फिर मैंने उसको अपनी उस गलती के लिए माफ़ करने के लिए बोला, तो उसने कहा कि हाँ ठीक है, लेकिन अब उसके सर पर दुपट्टा था. उसके बाद में रोज़ाना उसका फिगर याद कर करके मुठ मारा करता था. फिर एक दिन अचानक अंकल ने मुझे सुबह सुबह बुला लिया और कहा कि राबिया को तुम इसके कॉलेज तक अपनी बाईक पर ले जाकर छोड़ देना, क्योंकि आज अंकल की बाईक पंचर थी.

फिर मैंने राबिया को अपने पीछे अपनी गाड़ी पर बैठा लिया. तब मैंने महसूस किया कि वो मुझे अपनी अजीब नजरों से देख रही थी और में बाईक भी डर की वजह से धीरे चला रहा था. फिर अचानक राबिया ने मुझसे कहा कि उसको देर हो रही है आप अपनी इस बाईक को थोड़ा तेज़ चलाओ. फिर मैंने हिम्मत करके उसको कह दिया कि तुम गिर जाओगी, तुम मुझे ज़रा मज़बूती से पकड़ लो.

फिर क्या था उसने मुझे मेरे कहने पर अपने एक हाथ से मज़बूती से पकड़ लिया, जिसकी वजह से उसके गोल मटोल उभरे हुए बूब्स मेरी कमर से दब रहे थे, में कुछ ज्यादा ही स्पीड में अपनी गाड़ी को चलाने लगा.

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फिर उसने मुझसे पूछा कि तुम्हारी क्या कोई गर्लफ्रेंड है? में अचानक से उसके इस तरह के सवाल से घबरा गया और मैंने उससे कहा कि नहीं मेरी कोई भी गर्लफ्रेंड नहीं है. फिर उसने कहा कि तभी तुमने कहीं भी ब्रेक नहीं लगाया और फिर मैंने उसी समय ब्रेक लगाया, क्योंकि अब उसका कॉलेज आ गया और वो मेरी तरफ हंसती हुई अपने कॉलेज के दरवाजे के अंदर चली गई और फिर जब में वापस घर पर आया तो अंकल ने मुझसे पूछा कि तुम्हें कोई परेशानी तो नहीं हुई? मैंने उनसे हंसते हुए कहा कि जी नहीं और फिर में उसको दोपहर के समय उसके कॉलेज से लेने भी गया, लेकिन अब भी मैंने अपनी गाड़ी को बिना मतलब के कोई ब्रेक नहीं लगाया, उसने घर पर पहुंचकर मुझसे धन्यवाद कहा और वो अपने रूम में चली गई और में अपने कमरे में जाकर अपनी पढ़ाई करने लगा.

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फिर उसी शाम को वो मेरे पास मेरे लिए चाय लेकर आई और अब उसने हंसते हुए मुझसे कहा कि तुम गाड़ी बहुत अच्छी तरह से देखभाल करके चलाते हो, इसलिए मेरा दिल करता है कि में तुम्हें अपना ड्राईवर रख लूँ. दोस्तों उसकी वो बातें सुनकर मैंने मन ही मन सोचा कि मेरा रास्ता अब साफ है, फिर इसलिए मैंने उससे कहा कि हाँ जरुर मुझे उसमें किसी भी तरह की कोई आपत्ति नहीं है, में हमेशा आपका एक ड्राईवर भी बनकर रहने के लिए तैयार हूँ, वो मेरी बात को सुनकर शरमाते हुए तुरंत नीचे भाग गई.

फिर अचानक उसी समय नीचे से मुझे अंकल ने आवाज़ दी और मैंने नीचे झांककर देखा कि वो सब लोग बहुत टेंशन में थे और में डरने लगा और मैंने मन ही मन सोचा कि शायद राबिया ने मेरी हरकतों बातों के बारे में अपने मम्मी, पापा से जरुर कुछ कहा होगा, इसलिए वो मुझे इतनी जल्दी ज़ोर से आवाज लगाकर नीचे बुला रहे है, लेकिन मेरे डरते हुए नीचे चले जाने के बाद अंकल ने मुझे बताया कि गाँव में उनके भाई की अचानक मौत हो गई है और इसलिए अंकल को बहुत जल्दबाजी में अपने गाँव जाना होगा और फिर अंकल ने मुझसे आंटी और राबिया का ध्यान रखने के लिए बोला और कहा कि में इनके पास ही नीचे आकर सो जाया करूँ, तो मैंने उनको सही काम के लिए उनसे हाँ कह दिया और फिर में अंकल को स्टेशन तक अपनी गाड़ी से छोड़ने चला गया और वापस आते समय मुझे शाम का समय होने लगा था और आते समय आंटी ने मुझे सर दर्द बंद होने और नींद की गोलियां बाजार से लाने के लिए बोला और में उनके लिए वो ले आया.

दोस्तों तब मैंने महसूस किया कि आज वो बहुत टेंशन में थी, इसलिए आंटी मेरे घर पर पहुंचने के कुछ देर बाद ही नींद की कुछ गोलियाँ खाकर गहरी नींद में सो गई. उसके बाद राबिया और में बहुत देर तक छत पर बैठकर इधर उधर की बातें कर रहे थे और तब मैंने महसूस किया कि राबिया उस समय मुझे अपनी अजीब सी नज़रों से देख रही थी. मैंने मुस्कुराते हुए उससे पूछ लिया क्या कत्ल करने का इरादा है? तो वो हंसती हुई हाँ करके नीचे भाग गई और फिर में भी उसके पीछे पीछे नीचे चला गया और मैंने नीचे जाकर देखा कि वो उस समय अपने रूम में थी और में भी उसके रूम में चला गया. अब वो मुझे देखकर अचानक से घबरा गई और वो मुझसे पूछने लगी कि तुम यहाँ पर कैसे? मैंने हिम्मत करके उससे कह दिया कि आज रात में यहाँ पर ही तुम्हारे रूम में रहूंगा, क्योंकि अंकल ने मुझसे कहा है.

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फिर उसने कहा कि मेरे रूम में ही क्यों तुम पास वाले दूसरे रूम में चले जाओ? में आज वहीं पर तुम्हारा बिस्तर लगा देती हूँ. फिर मैंने उससे कहा कि नहीं में तो तुम्हारे पास यहीं पर सोऊंगा. फिर उसने कहा कि नहीं कोई हमें देख लेगा. अब मैंने उससे कहा कि आंटी ने जो मैंने उनको नींद की दवाई लाकर दी है, वो उन्होंने खा ली है, इसलिए वो अब कल सुबह से पहले नहीं उठ सकती और वैसे मैंने उनके कमरे का दरवाजा भी बाहर से बंद कर दिया है. फिर वो मेरी पूरी बात को सुनकर मेरी तरफ देखकर मुस्कुराने लगी और मैंने तभी अच्छा मौका देखकर उसका हाथ तुरंत पकड़ लिया और उसी समय मैंने बिना देर किए उसको अपनी बाहों में ले लिया और में उसको किस करने लगा.

पहले तो वो मेरे यह सब करने से थोड़ा सा शरमाने लगी, लेकिन फिर कुछ देर बाद मैंने महसूस किया कि उसको भी इसमें मज़ा आने लगा और वो भी मेरा साथ देने लगी और उसको लाजशर्म छोड़कर मेरा साथ देते हुए देखकर में तुरंत समझ गया कि अब तो मेरा काम बन गया है. फिर मैंने ज्यादा देरी ना करते हुए उसको चूमना सहलाना छोड़कर तुरंत बेड पर लेटा दिया और में करीब बीस मिनट तक उसको लगातार किस करता रहा. तब मैंने महसूस किया कि वो अब बहुत हॉट हो चुकी थी और मैंने उसके बूब्स को दबाना शुरू किया, जिसकी वजह से वो तो एकदम काँपने लगी और वो मुझसे चिपक गई.

फिर मैंने अपनी शर्ट को उतार दिया और सही मौका देखकर उसकी कमीज़ को भी मैंने उतार दिया. उसके बाद मैंने उसकी ब्रा को थोड़ा सा ऊपर करके उसके उन दोनों कबूतरों को मैंने उस केद से आजाद कर दिया और वो तुरंत बाहर आकर मेरे सामने उछल कूद करने लगे, वो बहुत आकर्षक थे और में उनको देखकर पागल हुआ जा रहा था और अब में उसके बूब्स को अपने एक हाथ से दबा रहा था.

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