मकान मालिक की लड़की की जरुरत

Makan malik ki ladki ki jarurat

हैल्लो दोस्तों, ये एक अलग कहानी है और अब आप मेरा एक नया अनुभव भी सुन लो. दोस्तों हम लोग शहर की गलियों वाली बस्ती में रहते थे, वो मकान हमारा नहीं था, वो पापा ने किराए पर ले रखा था. मैंने जब से बाबू भाई से चुदाई के पाठ पड़ा, तब से में हर औरत और लड़की को सेक्स के नज़रिये से ही देखता था और अब मेरी हिम्मत भी खुल गई थी.

हमारे मकान की मालकिन विधवा थी और उनके चार बेटियाँ थी, जिसमें से एक की शादी हुई थी और दूसरी भाग गई थी और बाकी दो पढ़ रही थी. उसमें से एक थी भारती, जो कॉलेज के दूसरे साल में थी और में स्कूल में था, वो खूब पढ़ती थी और सब काम करके पढाई करती थी. में भी पढ़ने में आगे था तो उसको मुझसे थोड़ी हमदर्दी रहती और मुझे कोई प्रोब्लम हो तो वो हल कर देती या गाइड करती थी. उसके दो भाई थे, लेकिन वो दोनों बदमाश और पढ़ने लिखने में बिल्कुल ध्यान नहीं देते थे इसी वजह से वो मुझसे ज़्यादा फिलिंग रखती थी.

फिर उस दौरान मेरे एक दोस्त ने मुझे मास्टर की चुदाई की कहानियों वाली किताब दी, जो में छुपकर पढ़ता था. अब में ऐसे ही एक किताब में पढ़ रहा था और मेरा पढ़ने क़ा तरीका भी क्या था? ऊपर मेरी बुक और अंदर ये छोटी किताब. फिर अचानक से दीदी आई और मेरे पीछे से झुककर वो किताब देखी और फिर मुझे डांटा कि ये क्या कर रहा है? तो में घबरा गया, तो उसने वो किताब ले ली और वहाँ से चली गई. अब मुझे वो किताब वापस तो चाहिए थी, नहीं तो मेरा दोस्त भी मुझे डाटेगा.

फिर 2-3 घंटे के बाद जब वो अपने रूम में पढ़ रही थी, तो तब में वहाँ गया और दीदी को सॉरी बोलकर किताब माँगी, क्योंकि मुझे वो किताब लौटानी थी.

फिर वो बोली कि ठीक है दे दूँगी, लेकिन मुझे पढ़नी है और में पढ़कर वापस करूँगी. तो में चौंक गया, लेकिन में कुछ कर भी नहीं सकता था. फिर उसने बोला कि तू बैठ अभी पढ़कर दे देती हूँ, तो वो पढ़ने लगी और फिर जब किताब ख़त्म हुई, तो मुझे लगा कि वो भी थोड़ी हॉट हो गई थी. फिर वो बोली कि एक शर्त पर वापस मिलेगी, तो मैंने कहा कि क्या? तो वो बोली कि जब भी तू ऐसी किताब लाए तो मुझे पढ़ने देगा, ये वादा कर, तो मैंने हाँ कर दी.

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फिर 3-4 दिन के बाद में मेरे दोस्त से दूसरी किताब लाया, तो मैंने उनको बता दिया कि में किताब लाया हूँ, लेकिन जल्दी वापस करनी पड़ेगी तो वो बोली कि साथ में पढ़ेंगे और बोली कि तेरी किताब लेकर मेरे रूम में आ जा, तो में चला गया. फिर उन्होंने मेरी ही स्टाइल में किताब रखी और फिर हम पढ़ने लगे.

अब पढ़ते-पढ़ते मेरा लंड तो खड़ा हो गया था, तो वो अपनी तिरछी नज़र से मेरे लंड को देखने लगी. अब उसका और मेरा फेस उत्तेजना के मारे बिल्कुल सेक्सी हो गया था, लेकिन कोई कुछ बोल ही नहीं सकता था और हमारे मुँह से जैसे लार टपक रही हो. फिर अचानक से मुझे पता नहीं क्या सूझा? तो मैंने पूछा कि दीदी तुम्हें ये सब पढ़कर कुछ नहीं होता? तो वो बोली कि क्या होगा?

मैंने कहा कि मेरा लंड खड़ा हो गया है और अब में टॉयलेट में जाकर हिलाकर निकाल दूँगा, लेकिन तुम क्या करोगी? तो वो बोली कि में भी ऐसा ही करूँगी. फिर वो बोली कि क्यों ना हम साथ-साथ यही कर ले. फिर हम दोनों ने सेक्स किया और एक दूसरे की जरुरत को पूरा किया.

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