मकान मालकिन की भतीजी को चोदा उसकी मर्जी से-2

(Makan Malkin Ki Bhatiji Ko Choda Uski Marji se-2)

वो मेरा सर अपने सीने पर दबाए जा रही थी और लगातार मादक आवाज़ निकाल रही थी।
मैंने अब उसकी जीन्स का बटन खोल दिया। उसने तुरंत ही खड़े होकर उसे उतार दिया। अब वो मेरे सामने केवल एक छोटी सी पैंटी में खड़ी थी।

मैंने भी तुरन्त उसे उतार दिया।
क्या बताऊँ… एकदम से मेरी आँखें खुली रह गईं।
पहले तो ब्लू फिल्मों में बहुत देखा था पर आज एक असली चूत पहली बार देख रहा था।
गुलाबी रंग की चूत पर हल्के हल्के बाल थे।

वो मेरे सामने बिल्कुल नंगी खड़ी थी, उसने कहा- तुमने मुझे तो देख लिया और खुद पैंट पहने खड़े हो। शर्म नहीं आती?
इस पर हम दोनों ही हंसने लगे।

मैंने कहा तो वो तुरंत मेरी पैंट का बटन खोलने लगी। अगले ही पल उसने पैंट और अंडरवियर दोनों ही निकाल दिए।
मेरा हथियार पहले से ही खड़ा था, एक झटके में लहराकर उसके मुंह के पास आ गया, वो उसे देखती ही रह गई।
फिर इससे पहले कि मैं कुछ बोलता, उसने गप्प से पूरा लौड़ा अपने मुंह में ले लिया।

मैंने सोचा कि ये तो पूरी मजी हुई खिलाड़ी लगती है, और अभी थोड़ी देर पहले झूठ मूठ के नखरे दिखा रही थी। अब मैं भी जन्नत में था और मज़ा ले रहा था।

थोड़ी देर बाद उसने मेरा लौड़ा अपने मुंह से निकाला, मैंने पूछा- पहले भी ले चुकी हो क्या?
तो उसने कहा- नहीं।
मैंने फिर पूछा- इतना अच्छा चूसना कहाँ से सीखा, वो भी पहली ही बार में?
मुझे आश्चर्य हो रहा था।

तो उसने कहा- मेरी सहेली अपने बॉयफ्रेंड से चुदती रहती है। उसके साथ कभी कभी लेस्बियन सेक्स कर लेती हूँ। कभी कभी तो उसकी चुदाई के वीडियो भी देखे हैं।

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अब मेरी बारी थी, मैंने अब उसकी चूत पर नज़र घुमाई। पहली बार होने के बाद भी मुझे सेक्स का काफ़ी ज्ञान था। वैसे भी मैं कई सालों से HotSexStory.xzy पढ़ रहा हूँ।

उसकी गुलाबी चूत पर हल्के हल्के बाल थे, बिल्कुल फूली हुई और चुदने को तैयार थी पर मैंने जल्दबाज़ी नहीं दिखाई।
मैं उसकी चूत चाटना चाहता था, उसको बिस्तर पर पीठ के बल लिटाकर मैंने उसकी टांगें फैलाई, अगले ही पल मैंने उसकी चूत पर मुंह लगा दिया।
मेरी जीभ छूते ही वो सिसकारियां लेने लगी।

एक अजीब सा लेकिन मज़ेदार स्वाद था उसके पानी में…
मैं चूत चाटते हुए उसके चूतड़ भी दबा रहा था।
लगभग पाँच मिनट ऐसा करते करते उसने पानी छोड़ दिया। पर मैं अभी भी चाट रहा था। अब वो अपनी कमर को धक्का देने लगी, शायद उस पर चुदास हावी हो गई थी, उसने कहा- अब और देर मत करो राहुल, वैसे भी बाकी सब कभी भी आ सकते हैं। अब नहीं रह जाता।

मैंने भी यही ठीक समझते हुए उसके छेद पर अपने लौड़े का टोपा घिसना शुरू किया।
उसने कहा- आराम से करना।
मैं- चिंता मत करो जान मैं हूँ ना!
वो मुस्कुरा दी।

अगले ही पल मैंने हल्का सा धक्का लगाया तो उसके मुंह से एक आह निकली। उसने अपने दांतों से अपने होंठ को दबा रखा था।
मैंने उसे चूमना शुरू कर दिया, चूमते हुए एक तेज़ धक्का मारा तो लगभग 2 इंच लौड़ा अंदर चला गया।

वो दर्द से हाथ पैर पटकने लगी।
मैंने कहा- जान, बस थोड़ा सा दर्द सहना है, फिर तो मज़े होंगे।
करीब दो मिनट तक मैं उसे चूमता रहा, जब उसे कुछ आराम मिला तो मैंने पूछा- आगे बढूं?
तो उसने हल्के से सिर हिलाया।

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उसके होंठों को अपने होंठों में दबाकर मैंने एक ज़ोरदार धक्का मारा तो पूरा लौड़ा अंदर चला गया। एक पल को ऐसा लगा जैसे उसकी आंखें बाहर आ जाएंगी।
आखिर साढ़े चार इंच का लौड़ा घुसा था।

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मैंने वापस उसके चूचे चूसना शुरू कर दिया, दो मिनट में वो सिसकारियां लेने लगी ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’
अब मैंने धीरे धीरे धक्के लगाने शुरू किए, वो भी मेरा साथ दे रही थी। इस बार करीब 20-25 धक्कों के बाद उसका बदन अकड़ने लगा।
अगले ही पल वो झड़ गई… वो बिल्कुल निढाल होकर पड़ गई।
पर मेरा अभी तक नहीं हुआ था तो मैं धक्के मारता रहा।

जल्दी ही वो फिर से गर्म हो गई।
इस बार वो और जोर से सिसकारियां ले रही थी। हम दोनों बीच बीच में एक दूसरे को चूम रहे थे।
लगभग 20 धक्कों के बाद उसने कहा- राहुल, ये मेरा पहली बार है, मैं चाहती हूँ तुम मेरे अंदर झड़ो, मैं तुम्हें अपने अंदर महसूस करना चाहती हूँ। मेरे साथ ही झड़ना।

उसकी बात सुनकर मैंने अपनी रफ्तार तेज कर दी, 10-12 धक्कों के बाद हम दोनों ही तेज आवाज़ के साथ झड़ गए।
अब उसकी चूत से मेरा और उसका रस एक साथ बह रहा था।

नीचे देखा तो बिस्तर पर खून लगा था… मैंने कहा- अब तुम कुंवारी नहीं रही।
तो उसने कहा- हाँ, अब मैं तुम्हारी हूँ, आई लव यू राहुल!
मैंने भी उसे ‘आई लव यू टू…’ कहा और उसके होंठ चूम लिये।

घर वाले कभी भी आ सकते थे, तो मैंने उसे सहारा देकर उठाया, उसे थोड़ी दिक्कत हो रही थी। फिर बाथरूम में ले जाकर उसकी चूत और उसका बदन साफ किया और उसे कपड़े पहनाए।

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अपने कमरे में आकर मैंने बिस्तर की चादर बदल दी और पिछली वाली को धुलने के लिए डाल दिया।
उसके बाद मैं पास के मेडिकल गया और वहां से उसे एक आई-पिल और एक दर्द की दवा दी।

फिर मैं अपनी रसोई में चाय बनाने लगा। उसके बाद हमने साथ चाय पी।

करीब आधे घंटे बाद जब सभी लोग आए तो वो अपने कमरे में लेटी थी बुखार का बहाना करके!
उसकी मम्मी ने पूछा तो उसने कहा कि मैं उसके लिये दवा लाया और उसे चाय भी पिलाई।

उसकी मम्मी काफ़ी खुश हुईं और मेरी मम्मी से मेरी तारीफ करने लगीं।
जब मम्मी ने मुझसे चादर के बारे में पूछा तो मैंने बोल दिया कि चाय गिर गई थी।
और फिर सब सामान्य हो गया।

काजल यहां एक हफ्ते रही और मैंने दो बार उसे और चोदा। मैं उसकी गांड भी मारना चाहता था पर उसने मना कर दिया।

उसके जाने से पहले हम दोनों ने एक दूसरे के व्हाट्सएप्प नम्बर भी लिये।

अगली कहानी में बताउंगा कि कैसे मैंने काजल की गांड मारी, और उसकी सहेली को भी चोदा।

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