मामीजी के घर मौसी को बजाया–2

Mamaji ke ghar Mausi ko Bajaya-2

मैं और मामीजी हम दोनों मौसी को चुदाने के लिए तैयार कर रहे थे लेकिन मौसी तैयार हो ही नहीं रही थी।खैर फिर बहुत देर बाद हम दोनों चुदाई करके फ्री हुए और बाहर आ गए। बाहर आते ही मामीजी मौसी को पटाने में लग गई।
मामीजी– अरे दीदी आप भी आ जाती ना,तीनों मिलकर खूब मज़ा लेती।
मौसी–अरे नहीं भाभी ,बस आप ही मज़ा लो।
मामीजी– सच में रोहित का बहुत तगड़ा लंड है।वो आपके जिस्म के कतरे कतरे को हिला देगा।बस आप एकबार उसका लेकर तो देखिए।
मौसी– नहीं भाभी।
मामीजी– शरमाओ मत दीदी।कभी कभी मज़ा लेने के ज्यादा नहीं सोचना चाहिए।और वैसे भी रोहित तो अपना ही है। किसी को कुछ पता भी नहीं चलेगा।

मौसी– नहीं दीदी मुझे नहीं मरवाना।
मामीजी– दीदी फिर भी एकबार अच्छी तरह से सोचना।
मामीजी मौसी को मेरे लन्ड के नीचे लाने के लिए बहुत ज्यादा कोशिश कर रही थी लेकिन मौसी लंड लेने के लिए तैयार ही नहीं हो रही थी। अब मौसी को पेलने के लिए मुझे ही कुछ करना था। अब मैं मौका मिलते ही मौसी के जिस्म को टच करने लगा।फिर तरीके से मै मौसी के बूब्स पर भी हाथ फेरने लगा।लेकिन फिर भी मौसी चूत देने के लिए तैयार नहीं हो रही थी।
अब अगले दिन सुबह होने के बाद सब चले गए। अब मैं मौसी के साथ फिर चालू हो गया– मौसी क्या दिक्कत है आपको? दे दो ना यार।

मौसी– तू भाभी की मार रहा है वो ही बहुत है।
मैं– मै तो अब आपकी भी मारना चाहता हूं।
मौसी– लेकिन मै तो दूंगी नहीं।
मैं– अरे मौसी आप भी कितनी बेवकूफ हो।आपको इतना फ्रेश मोटा तगड़ा लंड मिल रहा है और आप मना कर रही हो। आपकी चूत तो कितनी पुरानी है फिर भी मै आपको लंड दे रहा हूं।
मौसी– नहीं मुझे नहीं लेना।
तभी मैंने तुरंत लंड बाहर निकाला और मौसी के हाथ में दे दिया।
मैं– लो देखो मेरा लन्ड।खुश कर देगा आपको।
मौसी– अरे यार ये क्या कर रहा है अंदर कर इसे।

मामीजी– अब दीदी आप भी इतने नखरे क्यो दिखा रही हो? बेचारा लड़का इतनी कोशिश कर रहा है और आप फिर भी नहीं मान रही हो।
मौसी– भाभी यार लेकिन………………..
मामीजी– अब कोई लेकिन वेकिन नहीं दीदी।आप चुपचाप रोहित का लंड लीजिए।
मौसी– लेकिन भाभी……….
मामीजी– मैंने कहा ना अब कोई लेकिन नहीं।
मौसी– रुको मै थोड़ा सोचकर बताती हूं।
मामीजी– चलो ठीक है फिर तो।
अब मैंने लंड वापस पजामे में डाल लिया। अब थोड़ी देर बाद मौसी नहाने लगी और मामीजी रोटियां बनाने लगी।फिर कुछ देर बाद मौसी नहाकर वापस आ गई।उनके जिस्म से पानी की बूंदे टपक रही थी।

मामीजी– मै कुछ देर के लिए पड़ोस में जा रही हूं।तब तक तुम दोनों आराम से काम निपटा लेना।
मैं– हां मामीजी।
मामीजी– रोहित ज्यादा तोड़ फोड़ मत करना।आराम आराम से करना।और दीदी आप आराम से दे देना यार।थोड़े बहुत नखरे ज़रूर दिखा लेना।
अब मामीजी पड़ोस में चली गई। अब मैंने अंदर से गेट बंद कर लिया। अब घर में हम दो जिस्म ही बचे थे।मेरा लन्ड ज़ोर से तन चुका था।मौसी मेरे सामने ही कपड़े सूखा रही थी।लंड और चूत के सभी खिलाड़ियों को मेरा प्रणाम। मैं रोहित आप सबके बीच एक और नई कहानी लेकर हाजिर हूं। मैं 26 साल का नौजवान लौंडा हूं।मेरा लन्ड 7 इंच लम्बा है जो किसी भी चूत को फाड़ सकता है। मेरा लन्ड अब तक कई चूत का पानी निकाल चुका है।मेरे लन्ड को चूत का नमकीन पानी बहुत ज्यादा पसंद है।

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मैं अब तक कई शानदार मालों को मेरे लन्ड के नीचे ला चुका हूं।मैंने इन शानदार मालों को चोदकर खूब मज़ा लिया है।
मैंने मेरी पिछली कहानी “सरसो के खेत में मामीजी को नंगी कर बजाया” में आपको बताया था कि किस तरह से मैंने मेरी गायत्री मामीजी को चोदा था। गायत्री मामीजी को बजाकर मैंने मेरे लन्ड की प्यास बुझाई थी।उस टाइम मै लगभग 18 साल का था। मेरी सर्दियों की छुट्टिया चल रही थी और मै मामाजी के यहां गायत्री मामीजी की चूत का खूब मज़ा लेे रहा था।खैर फिर कुछ दिनों बाद मुझे वापस घर आना पड़ा।

घर आने के बाद मेरा पढ़ाई में बहुत कम दिमाग लग रहा था और मुझे मामीजी को चोदने की बहुत ज्यादा याद आ रही थी।मेरा लन्ड मामीजी को चोदने के लिए कुलबुला रहा था।इसी बीच मैंने मामीजी से फोन पर बात की और उनको मेरे लन्ड की दास्तान सुनाई।तो मामीजी ने कहा– मकर संक्रान्ति आ रही है। तू आ जाना और तेरे हथियार को ठंडा कर लेना।
मुझे मामीजी का आइडिया बहुत अच्छा लगा और मैं कुछ दिन बाद फिर से मामाजी के यहां पहुंच गया।लेकिन उसी दिन मेरी आशा मौसी भी मामाजी के यहां पहुंच गई। अब मामीजी को बजाने का मेरा सारा प्लान चौपट हो गया। मैं दो दिन तक लंड को ऐसे ही मसलते रहा लेकिन मेरे लन्ड को मामीजी की चूत नसीब नहीं हुई।
अब मकर संक्रान्ति के दूसरे दिन मैंने मौका देखा और गायत्री मामीजी को घर में खींच लिया।मामीजी बहुत ज्यादा डर गई।

मामीजी– रोहित मरवाएगा क्या? तेरी मौसी यही है।
मैं– मामीजी अभी वो नहा रही है।तब तक तो मै काम कर लूंगा।
मामीजी– नहीं यार अभी नहीं।
मैं– नहीं मामीजी।बस मेरे पास यही मौका है।
मामीजी की डर के मारे गांड़ फट रही थी और मेरा लन्ड मामीजी की चूत में घुसने के लिए ज़ोर लग रहा था।तभी मैंने मामीजी को तुरंत पलंग पर पटक दिया और फटाफट मामीजी पर चढ़ाई कर दी। अब मैं तुरंत नंगा हो गया और मामीजी की चूत में लंड ठोक दिया। अब मैं बमाबम मामीजी को बजाने लग गया।आह! बहुत दिनों बाद मेरे लन्ड को ठंडक मिली थी।
अब मैं ज़ोर ज़ोर से मामीजी को चोदने लगा जिससे मामीजी भी ज़ोर ज़ोर से आह आह ऊंह आह आह ओह आईईईई करने लगी। मैं मौसी के डर को भूलकर पूरी शिद्दत से मामीजी को चोदने में लगा हुआ था।मामीजी बहुत ज्यादा डर रही थी।

मामीजी– रोहित अब बस हो गया ना रहने दे।
मैं– नहीं मामीजी। अभी तो और।
मामीजी मुझे बार बार रोक रही थी लेकिन मै मामीजी की सुन नहीं रहा था और मामीजी की ठोककर चुदाई कर रहा था। फिर बहुत देर बाद मैंने मेरे लन्ड का पूरा माल मामीजी की चूत में भर दिया और लंड की प्यास बुझाई।लंड का पानी निकलते ही मामीजी तुरंत भागकर बाहर आ गई।जैसे ही उन्होंने घर का गेट खोला तो आशा मौसी सामने थी।वो नहाकर बरामदे में खड़ी थी।
मौसी को देखते ही मामीजी के चेहरे की चमक उड़ गई और वो पानी पानी हो गई।फिर जैसे तैसे करके मामीजी ने खुद को सम्हाला और मौसी से बात करने लगी।
मामीजी– नहा ली क्या आप?

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मौसी– हां अभी थोड़ी देर पहले ही नहाकर निपटी हूं।
मामीजी– मै भी अंदर कुछ काम रही थी।
मौसी– हां भाभी।
इतना कहकर मामीजी दूसरे काम करने में बिजी होने का नाटक करने लगी लेकिन अंदर से उनकी गांड़ फटकर हाथ में आ चुकी थी। अब आशा मौसी घर के अंदर आ गई और खुद के कपड़े ढूंढने लगी। मैं वहीं पलंग पर लेटा हुआ था।मौसी ने कुछ नहीं कहा और उनके कपड़े लेकर बाहर आ गई। शायद मौसी सबकुछ जान चुकी थी लेकिन वो खुद कुछ नहीं कहना चाहती थी।
अब धीरे धीरे ऐसे ही दिन निकल गया लेकिन मामीजी अभी भी बहुत ज्यादा डरी हुई थी।फिर मैंने उनको समझाया– मामीजी अगर मौसी को सबकुछ पता भी चल गया होगा तब भी वो किसी को कुछ नहीं बताएगी।आप चिंता मत करो।ऐसे खुद के घर की बात कोई नहीं बाहर बताता।मामीजी– चल ठीक है लेकिन अब आगे से ध्यान रखना।
मैं– हां मामीजी।

अब अगले दिन बच्चो के स्कूल जाने के बाद घर में मै मौसी और मामीजी ही बचे थे। अब मेरा लन्ड फिर से उछाला मारने लगा। मैं जान चुका था कि मौसी को सबकुछ पता चल गया है। अब मैं मामीजी को फिर से बजाना चाहता था लेकिन मौसी के यहां होते हुए मै मामीजी को कैसे बजा पाता? अब मैं मौसी से इधर उधर की बातें करने लगा।फिर मैंने बातो ही बातो में मौसी से कहा– मौसी आप थोड़ी देर के लिए बाहर चली जाओ ना।
मेरी बात सुनकर मौसी मुस्कुरा पड़ी।
मौसी– अच्छा बच्चे।ज्यादा समझदार हो गया है तू।
मैं– ज्यादा तो नहीं बस थोड़ा सा।
मौसी– ठीक है मै थोड़ी देर बाद जा रही हूं।
कुछ देर बाद जैसे ही मौसी घर से बाहर मौहल्ले में गई तो मैंने तुंरत मामीजी को तुरंत पलंग पर पटक दिया और झमाझम उनकी चूत में लंड ठोकने लगा।फिर मैंने मामीजी को अच्छी तरह से बजाकर लंड की प्यास बुझा ली।
फिर अगले दिन भी मैंने मामीजी को ऐसे ही मौसी की हेल्प से पेल दिया।

अब उस दिन जैसे ही आशा मौसी नहाकर आई और साड़ी पहनने लगी तो मेरी नजर उनके बड़े बड़े बूब्स पर पड़ गई।उनके बूब्स को देखते ही मेरा लन्ड अचानक तन गया।फिर जैसे ही मौसी साड़ी पहनकर इधर उधर हिलने लगी तो मौसी की गांड ने मेरे लन्ड में आग लगा दी।फिर मैंने मौसी को निहारकर देखा तो पाया कि आशा मौसी चोदने के लिए एक मस्त माल है। अब मुझसे रहा नहीं गया और मैंने तुरंत लंड को मसल लिया। अब मेरा पूरा ध्यान आशा मौसी के जिस्म पर चढ गया।
आशा मौसी उस टाइम लगभग 36 साल की थी।आशा मौसी एकदम कड़क गौरी चिकनी माल है।उनके जिस्म का कतरा कतरा यौवन से भरा हुआ है।आशा मौसी के बूब्स लगभग 34 के थे।मौसी के बूब्स को देखकर कोई भी मौसी को चोदने के लिए तड़प उठे।

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आशा मौसी की चिकनी कमर लगभग 32 साइज की थी।साड़ी में से मौसी की चिकनी कमर अच्छी तरह से दिखती थी।मौसी की सुन्दर सेक्सी गांड़ लगभग 34 साइज की थी।उनकी गांड़ की कसावट साड़ी में से बाहर झलकती थी।मौसी की गौरी चिकनी कलाइयां अब मेरे लन्ड को बहुत ज्यादा तड़पा रही थी।आशा मौसी चोदने के लायक एकदम कड़क माल थी।
अब आशा मौसी के जिस्म को निहारने के बाद मैंने सोच लिया था कि अब आशा मौसी को कैसे भी करके मसलना है। अब मैं मौसी के जिस्म के ऊपर मेरी पैनी नजर रखने लगा। अब अगले दिन सबके चले जाने के बाद घर में वापस हम तीनों ही बचे थे।

अब मेरा लन्ड फिर से पजामे में तूफान मचाने लगा लेकिन आज मामीजी के लिए नहीं मौसी की चूत बजाने के लिए। अब मेरे दिमाग़ में कुछ और ही चल रहा था।चोदने से पहले मै मौसी को मेरे लन्ड का दर्शन करवाना चाहता था।
अब मैं मौसी से बाते करने का दिखावा करने लगा लेकिन मेरा ध्यान मौसी के चूचों और उनके जिस्म पर ही था।इधर मेरा लन्ड बहुत ज्यादा तूफान मचा रहा था।फिर मैंने मौसी से नहाने जाने के लिए कहा तो मौसी थोड़ी देर बाद नहाने चली गई।
अब जैसे ही मौसी नहाने गई तो मैंने मामीजी को घर में खींच लिया और उनके ताबड़तोड़ बल्लेबाजी करते हुए बजाने लगा। आज मैंने जानबूझकर गेट बंद नहीं किया ताकि मौसी चुदाई का नज़ारा अच्छी तरह से देख सके। अब इधर मै मामीजी को बजा रहा था और उधर मौसी नहा रही थी। आज तो मै मामीजी को पूरी नंगी कर चुका था।मामीजी बहुत ज्यादा डर रही थी।

मामीजी– रोहित आज तो तू पक्का मरवाएगा।
मैं– मामीजी,अब क्या डरना? जब मौसी को सबकुछ पता है तो।
मामीजी– हां तो उनके सामने मेरी कुछ तो इज्जत कर।
मैं– मामीजी,अगर मै इतना डरूंगा ना तो चूत ही नहीं मिलेगी।
मैं जल्दी जल्दी मामीजी को पेल रहा था। अब मैं सोचने लगा अगर मौसी नहा कर जल्दी आ गई तो इसका मतलब मौसी की चूत में भी खलबली मची हुई है।बस अब मुझे यही देखना था। मैं मौसी का इंतजार करते हुए मामीजी की चूत की बखिया उधेड़ रहा था।आज मै मामीजी कुछ ज्यादा ही बुरी तरह से पेल रहा था।

मामीजी– आज क्या तूने घोड़े का लंड लगा लिया क्या?
मैं – हां मामीजी कुछ ऐसा ही समझ लीजिए।
तभी थोड़ी देर में ही मौसी नहाकर बरामदे में आ गई। अब मैं उनके सामने मामीजी को ज़ोर ज़ोर से चोदने लगा। मौसी को चुदाई का नज़ारा साफ साफ दिख रहा था लेकिन मौसी कुछ नहीं कह रही थी। मैं जानबूझकर मौसी को चुदाई का लाइव टेलीकास्ट दिखा रहा था। मौसी चुपचाप चुदाई का मज़ा ले रही थी।
कहानी जारी रहेगी…………………. आपको मेरी कहानी कैसी लगी मुझे मेल करके जरूर बताएं– [email protected]

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