मर्द के लंड के लिए बेताब जवानी

(Mard Ke Lund Ke Liye Betab Jawani)

नमस्कार दोस्तो, मैं लव आपका दोस्त आज अन्तर्वासना पर फिर से एक न्यू सेक्स स्टोरी के साथ हाजिर हुआ हूं. मेरी यह कहानी एक ऐसी चुत की चुदाई की है जो आजकल हर बड़े घर की परेशानी बन गयी है.
चलिए छोड़िए आप मेरी कहानी को पढ़ेंगे तो आपको खुद पता चल जाएगा कि प्रॉब्लम क्या है और क्यों है.

मैं जहाँ रहता हूं, वो एक बहुत ही वी आई पी कॉलोनी है, जहाँ बहुत बड़े बड़े घर के लोग रहते हैं. हमारे घर के पास ही एक पार्क है, जहाँ बहुत सी औरतें सुबह के टाइम घूमने टहलने आती थीं. मैं भी वहाँ अपने कुत्ते को अपने साथ ले जाता था. वो वोडाफोन वाला कुत्ता है तो सबको बहुत पसंद आता था. कुछ बच्चे उसके साथ मस्ती करते थे.

उन्हीं बच्चों में एक लड़का था अक्षत, वो बहुत खूबसूरत बच्चा था. मैं जब भी उसको देखता था तो ये ही सोचता था कि जब ये इतना खूबसूरत है तो इसकी मां कितनी खूबसूरत होगी. खैर वो जब भी पार्क आता था तो उसको उसकी दादी ले कर आती थी, कभी उसकी माँ के दर्शन नहीं हुए.

ऐसे ही कुछ दिन बीत जाने के बाद मैंने एक दिन उस बच्चे को कार से जाते हुए देखा, जिसमें एक बहुत ही खूबसूरत पर थोड़ी मोटी औरत अपने साथ ले कर जा रही थी. शायद वो उसको घर ले कर जा रही थी. मैंने सोचा इसका घर देखा जाए तो मैं अपनी बाइक स्टार्ट करके पीछे पीछे चल दिया, पर ये क्या.. वो तो हमारे यहाँ के एक क्लब में चली गयी. जहाँ शाम के टाइम बच्चे स्वीमिंग, बैटमिंटन या क्रिकेट खेलने जाते हैं.

यह क्लब हमारे यहाँ का बहुत महंगा क्लब है. इससे मुझे ये पता चल गया कि ये बच्चा किसी बड़े घर का है. फिर मैं क्लब के बाहर निकलने का इंतज़ार करने लगा. कुछ देर बाद उसकी माँ बाहर आई जिसको देख कर मेरा लौड़ा एकदम टाइट हो गया क्योंकि वो थी ही ऐसी.. थोड़ी मोटी, पर बला की खूबसूरत थी. जिसको देख कर किसी का भी पानी निकल जाए. मैं बता नहीं सकता, वो इतनी खूबसूरत आइटम थी.

तभी मेरा ध्यान तब टूट गया, जब देखा उसके साथ एक बहुत ही मोटा सा इंसान उसको कार में लेकर जाने लगा. कार स्टार्ट हुई और वो सभी जाने लगे. मैं भी उसके पीछे हो लिया. वो कार मेरे घर के एकदम पास ही एक कॉलोनी में गयी, जहाँ बहुत से मारवाड़ी रहते हैं. वहाँ में कभी नहीं गया था क्योंकि उस वक़्त तक मेरा कोई भी मारवाड़ी दोस्त नहीं था.

कुछ ही देर बाद मैं उसका घर देख लेने के बाद अपने घर के पास सड़क पे आ गया और एक सिगरेट ले कर पीने लगा. फिर कुछ देर बाद वो कार मेरे सामने से ग़ुज़री, पर उसमें उस मोटे आदमी के अलावा कोई नहीं था. मैंने सोचा कि अब घर चला जाये क्योंकि अब पता नहीं वो कब निकलेगी. वो तभी मेरा एक दोस्त आ गया और हम वहीं सड़क पे ही खड़े खड़े बात करने लगे.

तब ही कुछ देर बाद वो औरत एक एक्टिवा बाइक से जाने लगी, तो मैं अपने दोस्त से बहाना कर के वहां से निकल गया. मैं उसके पीछे पीछे चल दिया. फिर क्या, वो फिर से उसी क्लब में पहुँच गयी, लेकिन इस बार उसने अपनी एक्टिवा के बैक मिरर से मुझे उसके पीछे आते हुए नोटिस कर लिया था. वो क्लब में घुस गई. उसके बाद मैं वहीं बाहर उसका वेट करने लगा और वो जैसे ही आयी, तो उसका बच्चा मुझे देख कर हैलो बोला और मम्मी को रुकने के लिए बोलने लगा.

तो वो माल मैडम मेरे करीब रुक गई. उसने मम्मी को बताया कि उस डॉगी, जिसके साथ मैं पार्क में खेलता हूं, वो इन्हीं अंकल का है.
उसने मेरा नाम पूछा और मेरी तरफ हाथ बढ़ाया. मैंने भी अपना नाम बताया और हाथ मिला लिया. उसके हाथ बहुत कोमल थे, मुझे तो छोड़ने का मन ही नहीं कर रहा था.

फिर मैंने हाथ मिलाये हुए ही उनका नाम पूछा, तो उन्होंने अपना नाम अंकिता (काल्पनिक) बताया.

हम दोनों ने थोड़ी देर बात की, फिर वो अपने घर की तरफ निकल गयी. मैंने अक्षत के लिए जल्दी से चॉकलेट का पैकेट लिया और घर के बाहर पहुँचने तक उसको दे दिया, जिसको देख कर अंकिता मुस्कुरा दी.

इसके बाद फिर अगले ही दिन वो अपने बच्चे के साथ टहलने पार्क में आयी, तो मुझे देख कर मुस्कुराई और मेरे पास आ कर बैठ गयी. उसका बच्चा मेरे डॉगी के साथ खेलने में लग गया और मैं उसकी माँ के साथ बातें करने लगा.

अब मैं और वो वहाँ रोज आकर मिलने लगे. फिर कुछ ही हफ़्तों में वो मेरी बहुत अच्छी दोस्त बन गयी. हमारा फ़ोन नम्बर एक्सचेंज हुआ. फिर एक दिन उन्होंने मुझे कॉल किया और बताया कि उनकी बाइक स्टार्ट नहीं हो रही, क्या मैं उनके बच्चे को क्लब से घर पे लेकर आ सकता हूं.

मैं इतना सुनते ही खुश हो गया और बोला कि क्यों नहीं, जरूर लेते आऊंगा.

मैं गया और उसके बच्चे को ले कर आ गया. उसके बाद मैं उसके घर पहुँचा तो देखा वो एक झीनी सी नाइटी में थी. वो मुझे देख कर मुस्कुरा रही थी. उसके कपड़ों ने उसके शरीर को नाम के लिए ही सिर्फ ढका था.

उसने मुझे बिठाया और बताने लगी कि उसकी सासू माँ अमरनाथ यात्रा पे गयी हैं… और उसके हजबेंड का अपना व्यापार है, जिस वजह से उसके पति भी कुछ काम से दिल्ली गए हुए हैं.

मैं सोफे पर बैठ कर उससे बात कर रहा था, वो मेरे सामने खड़ी थी, फिर उसने मुझे कॉफी ला कर दी, जब वो कॉफी देने के लिए झुकी, तो उनके दूध जैसे गोरे मम्मों के आधे दर्शन हो गए. आप इस कहानी को HotSexStory.Xyz में पढ़ रहे हैं.

अब मैं और वो साथ में बैठ कर बात करने लगे और उसका बच्चा टीवी पे गेम खेलने लगा.

मैंने कहा कि कॉफी बहुत अच्छी है, पर दूध कम है.
उसने कहा- क्या और डाल दूँ दूध?
मैंने यूं ही झोंक में कह दिया- हां डाल दो.. पर अपना वाला.

इस बात का मुझे अंदाज नहीं था कि आगे क्या होने वाला था.

उसने कहा कि मैं अपने हाथ से निकाल कर नहीं डाल सकती, तुम खुद ही निकाल लो न.

फिर क्या मैं समझ गया, आग दोनों तरफ लगी है.. बस हवा देना बाकी था. पर यहाँ कुछ कर नहीं सकता था क्योंकि उसका बच्चा था तो वो इशारे में रूम में आने को बोल कर वहाँ से चली गयी. उसके बाद मैं उसके बच्चे से छुप कर पीछे पीछे चला गया. मैं जैसे ही रूम के अन्दर पहुँचा, वो तुरंत रूम बंद करके मेरे ऊपर टूट पड़ी और मुझे चूमने चाटने लगी. मैं भी उसको चोदू लड़का लगा. मैं कभी उसके गाल पे तो कभी गले के नीछे कान के पास और सबसे खास उसके होंठों को अपने होंठों से चूसने लगा.

इससे वो बहुत ज्यादा गर्म हो गयी और बोली- जल्दी से चोद दो मुझे लव.. क्योंकि मेरा पति तो मुझे जल्दी शांत कर नहीं पाता.
उसके बाद मैंने अपने कपड़े उतार दिए और उसकी नाइटी की तरफ हाथ बढ़ाया.

तभी उसका बच्चा आ गया और दरवाजा खोलने के लिए बोलने लगा. मेरी तो फट गई पर उसने अन्दर से ही बोला- क्या बात है बेटा?
तो उसने बोला- मम्मी जो अंकल आये थे वो पता नहीं, कहां चले गए?
तो उसने बोला कि जाने दो तुम रूम बन्द कर लो और आराम से वीडियोगेम खेलो, मैं अभी नहा कर आ रही हूँ.

फिर वो चला गया, उसके बाद मैंने उसकी नाइटी को निकाल दिया और उसको लिटा कर उसकी एक चूची को मुँह में लेकर चूसने लगा.
वो मस्त होकर बोलने लगी- आह.. चूस लो मेरी जान.. ये जवानी कब से बेताब थी किसी मर्द के लिए..
मैं उसकी बॉडी को चूसते हुए नीचे की तरफ आ गया और उसकी चुत पे अपना मुँह रख दिया.

वो तो पागलों की तरह मेरे सर को अपने चुत के अन्दर डालने लगी और कहने लगी- आज तक कोई ने भी इस चुत को नहीं चाटा.. आह.. तुम पहले हो.
ये बोलते ही वो ‘आआह आअह उम्म्ह… अहह… हय… याह… ईई इससस्स..’ करते हुए झड़ गयी. उसने इस दौरान मुझे कस कर जकड़ लिया था और झड़ते ही वो निढाल हो गयी.

पर मेरा लंड तो अभी खड़ा था, तो मैं अपना 7 इंच का लंड उसके मुंह के पास ले गया. लंड को देख कर उसने कहा कि ये हुई न बात.. इसको कहते है मर्द का लंड.. मेरे पति का तो मुश्किल से 4 या 5 इंच का होगा, पर ये बहुत मस्त है. आज तो मेरी चुत का बहाव नहीं रुके लव.. ऐसी चुदाई करना.

फिर इतना कह कर वो मेरे लंड को गप से मुँह में ले कर चूसने लगी. जब मेरा निकलने लगा, तो मैंने उसके मुँह में लंड का पानी खाली कर दिया. मेरे लंड का रस बहुत गाढ़ा था क्योंकि काफी टाइम से मैंने सेक्स नहीं किया था.

वो भी मेरे पानी को को चूस चूस कर पी गयी और हम दोनों निढाल हो कर कुछ पल के लिए अलग हुए.

लेकिन मेरा लंड झड़ने के बाद भी खड़ा था. जिसको देख कर अंकिता ने कहा कि वाह क्या बात है, ये तो सोने का नाम ही नहीं ले रहा.. एक मेरे पति का है कि अगर एक बार गिर गया तो पूरी रात खड़ा नहीं होता.
तो मैंने कहा मेरी जान ये तेरे पति का लंड नहीं.. तेरे आशिक का है, जो अब बस तुझे दिन रात चोदेगा.

इतना कहने के बाद मैं उसके ऊपर आ गया और उसकी चुत पे अपना लंड सैट करके हल्का सा अन्दर डाला ही था कि वो चिल्लाने लगी और लंड निकलवाने के लिए रोने लगी.

फिर मैं उसके होंठों को चूसने लगा और एक हल्का पर.. अचानक वाला शॉट मारा. इस बार उसकी आँखों में आँसू आ गए और वो बहुत जोर से करहाने लगी. मैं उसके होंठों और चूची को चूसने लगा और उसकी तरह पड़ा रहा.

कुछ देर में ही वो अपनी कमर उठा कर मेरा साथ देने लगी और कहने लगी- साले पहले क्यों नहीं मिला रे.. मैं कितना पागल हो रही थी चुदवाने के लिए.. अब मिल गया है तो फाड़ दे मेरी चुत और बना दे इसका भोसड़ा.. मैं हमेशा तेरी रंडी बन कर रहूंगी.. आआह आआह आआह मेरे राजा..

इतना कह कर वो मुझे लगभग नोंचते हुए अपनी ठरक मिटवाने लगी. कुछ देर की चुदाई के बाद वो झड़ गयी, पर मेरा तो अभी निकला ही नहीं था, तो मैं अपने काम में चालू था.

उसके कुछ देर बाद मैं भी अपने मुकाम पे पहुँच गया और पूछा- कहां निकाल दूँ?
उसने बोला- मेरी चुत में निकाल दो.. मैं गोली खा लूँगी.

फिर जब मैंने अपना लंड बाहर निकाल कर देखा तो उसमें हल्का सा खून लगा था. ये मैं समझ नहीं पा रहा था कि ऐसा कैसे हो सकता है.

मैंने उससे पूछा तो उसने बताया कि ये लड़का मेरे पति के पहली बीवी से है, मैं इनकी दूसरी बीवी हूं. पैसों की वजह से इनसे शादी की, पर इनको सिर्फ पैसा दिखता है और कुछ नहीं. मैं तो सिर्फ एक दाई बन गई हूं, जिसको सब कुछ मिलता है.. पर पति का प्यार नहीं मिल पाता. पर लव तुम मिल गए हो न अब मुझे किसी चीज की फिक्र नहीं. अब तुम मेरे हमेशा रहना, तुमको जो चाहिए वो दूंगी.. पर ये बात किसी को बताना मत और मेरी प्यास बुझाते रहना.

फिर मैं वहां उसको एक राउंड और चोदा और निकलने लगा तो उसने मुझे कुछ पैसे दिए और फिर अपनी बात दोहराई कि किसी को पता न चले.
मैं वहाँ से वापस आ गया.

उसके बाद जब भी हम दोनों को मौका मिलता है, हम अक्सर चुदाई करते रहते हैं. अब मैं उसके बच्चे को क्लास देने उसके घर जाता हूं और मौका मिलते ही उसकी भी क्लास ले लेता हूं. ऐसा करते हुए किसी को शक भी नहीं होता और हम दोनों की प्यास भी बुझ जाती है.

आपको मेरी न्यू सेक्स कहानी कैसी लगी.. जरूर बताना, ये सच्ची कहानी है. आप मुझसे उसका नम्बर या कोई भी सवाल मत पूछना.. बाकी आपको कहानी कैसी लगी, ये जरूर बताना.
धन्यवाद, आपका लव.

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