मेरा प्यारा देवर-2

Mera Pyara Devar- 2

मैं उसको हर रोज ऐसे ही सताती रहती जिसका कुछ असर भी दिखने लगा क्योंकि उसने चोरी चोरी मुझे देखना शुरू कर दिया, मैं जब भी उसकी ओर अचानक देखती तो वो मेरी गाण्ड या मेरी छाती की तरफ नजरें टिकाये देख रहा होता और मुझे देख कर नजर दूसरी ओर कर लेता। मैं भी जानबूझ कर उसको खाना खिलाते समय अपनी छाती झुक झुक कर दिखाती, कई बार तो बैठे बैठे ही उसकी पैंट में तम्बू बन जाता और मुझसे छिपाने की कोशिश करता।

मैं तो उसका लौड़ा अपनी चूत में घुसवाने के लिए बेक़रार थी, अगर सास-ससुर घर पर ना होते तो अब तक मैंने ही उसका बलात्कार कर दिया होता।

मगर जल्दी मुझे ऐसा मौका मिल गया। एक दिन हमारे रिश्तेदारों में किसी की मौत हो गई और मेरे सास ससुर को वहाँ जाना पड़ गया।

मैंने आपने मन में ठान ली थी कि आज मैं विकास से चुद कर ही रहूंगी।

सास-ससुर के जाते ही विकास भी मुझसे बचने के लिए बहाने की तलाश में था, पहले तो वो काफी देर तक घर से बाहर रहा, एक घंटे बाद जब मैंने उसके मोबाइल पर फोन किया और खाना खाने के लिए घर बुलाया तब जाकर वो घर आया।

मैं अपना और उसका खाना अपने कमरे में ही ले गई और उसको अपने कमरे में बुला लिया, मगर वो अपना खाना उठा कर अपने कमरे की ओर चल दिया, मेरे लाख कहने के बाद भी वो नहीं रुका तब मैं भी अपना खाना उसके कमरे में ले गई और बिस्तर पर उसके साथ बैठ गई।

हिंदी सेक्स स्टोरी :  Bhabhi ko aulad ka sukh Diya

वो फिर भी मुझसे शरमा रहा था, मैंने अपना दुपट्टा भी अपनी छाती से हटा लिया मगर वो आज मुझसे बहुत शरमा रहा था, उसको भी पता था कि आज मैं उसको ज्यादा परेशान करूंगी।

मैंने उससे पूछा- विकास.. मैं तुम को अच्छी नहीं लगती क्या…?

तो वो बोला- नहीं भाभी, आप तो बहुत अच्छी हैं…

मैंने कहा- तो फिर तुम मुझसे हमेशा भागते क्यों रहते हो…?

वो बोला- भाभी, मैं कहाँ आपसे भागता हूँ?

मैंने कहा- फिर अभी क्यों मेरे कमरे से भाग आये थे, शायद मैं तुम को अच्छी नहीं लगती, तभी तो तुम मुझसे ठीक तरह से बात भी नहीं करते।

“नहीं भाभी, अभी तो मैं बस यूँ ही अपने कमरे में आ गया था.. आप तो बहुत अच्छी हैं..”

मैंने कहा- झूठ मत बोलो ! मैं तुम को अच्छी नहीं लगती, तभी तो मेरे पास भी नहीं बैठते। अभी भी देखो कैसे दूर होकर बैठे हो? अगर मैं सच में तुम को अच्छी लगती हूँ तो मेरे पास आकर बैठो….

मेरी बात सुन कर वो थोड़ा सा मेरी ओर सरक गया।

यह देख कर मैं बिलकुल उसके साथ जुड़ कर बैठ गई जिससे मेरी गाण्ड उसकी जांघ को और मेरी छाती के उभार उसकी बाजू को छूने लगे….

मैंने कहा- ऐसे बैठते हैं देवर भाभियों के पास…. अब बोलो ऐसे ही बैठो करोगे या दूर दूर…?

वो बोला- भाभी, ऐसे ही बैठूँगा मगर मुझे मौसी गुस्सा तो नहीं होगी? क्योंकि लड़कियों के साथ ऐसे कोई नहीं बैठता।

मैंने कहा- अच्छा अगर तुम अपनी मौसी से डरते हो तो उनके सामने मत बैठना। मगर आज वो घर पर नहीं है इसलिए आज जो मैं तुम को कहूँगी वैसा ही करना।

हिंदी सेक्स स्टोरी :  मेरी भाभी की चुदास-1

उसने भी शरमाते हुए हाँ में सर हिला दिया…

अब हम खाना खा चुके थे, मैंने उसे कहा- अब मेरे कमरे में आ जाओ…

वो बोला- भाभी, आप जाओ, मैं आता हूँ।

यह कहानी आप HotSexStory.xyz में पढ़ रहें हैं।

उसकी बात सुन कर जब मैंने उसकी पैंट की ओर देखा तो मैं समझ गई कि यह अब उठने की हालत में नहीं है।

मैंने बर्तन उठाये और रसोई में छोड़ कर अपने कमरे में आ गई।

थोड़ी देर बाद ही विकास भी मेरे कमरे में आ गया और बिस्तर के पास पड़े स्टूल पर बैठ गया।

मैंने टीवी चालू किया और बिस्तर पर बैठ गई और विकास को भी बिस्तर पर आने के लिए कहा।

वो बोला- नहीं भाभी, मैं यहाँ ठीक हूँ।

मैंने कहा- अच्छा तो अपना वादा भूल गये कि तुम मेरे पास बैठोगे…?

यह सुन कर उसको बिस्तर पर आना ही पड़ा, मगर फिर भी वो मुझसे दूर ही बैठा। मैंने उसको और नजदीक आने के लिए कहा, वो थोड़ा सा और पास आ गया।

मैंने फिर कहा तो थोड़ा ओर वो मेरे पास आ गया, बाकी जो थोड़ी बहुत कसर रहती थी वो मैंने खुद उसके साथ जुड़ कर निकाल दी।

टीवी में जब भी कोई गर्म नजारा आता तो वो अपना ध्यान दूसरी ओर कर लेता… मगर उसके लौड़े पर मेरा और उन सीनों का असर हो रहा था, जिसको वो बड़ी मुशकिल से अपनी टांगों में छिपा रहा था।

मैंने अपना सर उसके कंधे पर रख दिया और बोली- विकास आज तो बहुत गर्मी है…

उसने भी हाँ में जवाब दे दिया…

हिंदी सेक्स स्टोरी :  Bhabhi aur behan ki chudai ek sath

फिर मैंने अपना दुप्पटा अपने गले से निकाल दिया, जिससे मेरे मम्मे उसके सामने आ गये, वो कभी कभी मेरे मम्मों की ओर देखता और फिर टीवी देखने लगता। उसके पसीने छुटने शुरू हो गये थे।

मैंने कहा- विकास, तुमको तो बहुत पसीना आ रहा है, तुम अपनी टी-शर्ट उतार लो।

यह सुनकर तो उसके और छक्के छुट गये, बोला- नहीं भाभी, मैं ऐसे ही ठीक हूँ।

मैंने उसकी टी-शर्ट में हाथ घुसा कर उसकी छाती पर हाथ रगड़ कर कहा- कैसे ठीक हो, यह देखो, कितना पसीना है?

और अपने हाथ से उसकी टी-शर्ट ऊपर उठाने लगी…

वो अपनी टी-शर्ट उतारने को नहीं मान रहा था, तो मैंने उसकी टी-शर्ट अपने दोनों हाथों से ऊपर उठा दी।

वो टी-शर्ट को नीचे खींच रहा था और मैं ऊपर.. इसी बीच मैं अपने मम्मे कभी उसकी बाजू पर लगाती और कभी उसकी पीठ पर… और कभी उसके सर से लगाती…

जब वो नहीं माना तो मैंने उसे बिस्तर पर गिरा दिया और…

बाकी की कहानी अगले भाग में !

आपकी भाभी कोमल प्रीत

आपने HotSexStory.xyz में अभी-अभी हॉट कहानी आनंद लिया लिया आनंद जारी रखने के लिए अगली कहानी पढ़े..
HotSexStory.xyz में कहानी पढ़ने के लिये आपका धन्यवाद, हमारी कोशिश है की हम आपको बेहतर कंटेंट देते रहे!