मेरे बाप का पाप-1

Mere baap ka paap-1

दोस्तों आज, में अपने जीवन की एक सच्ची घटना को आप तक पहुँचाने के लिए यहाँ पर आई हूँ. वैसे में में अब पूरी बीस साल की हो चुकी हूँ और में एक औरत मर्द के बिच बने हर एक रिश्ते को भी बहुत अच्छी तरह से समझती थी, क्योंकि अब मुझ में वो समझ पूरी तरह से आ चुकी थी.

अब मेरी आप बीती को सुनकर थोड़े मज़े आप भी ले लीजिए. दोस्तों एक बार जब मैंने पहली बार अपने पापा को मेरी मम्मी की दमदार मस्त चुदाई करते हुए देखा तो मुझे वो सब इतना अच्छा मुझे उसको देखकर इतना मज़ा आया कि में अब हर दिन चोरीछिपे उनका वो खेल देखने लगी थी आप यह भी मान सकते है कि मेरी एक आदत सी हो गई थी ऐसा करने के लिए मुझसे मेरी प्यासी चूत कहती थी.

अब में धीरे धीरे इतनी पागल हो चुकी थी कि मुझे अब चुदाई सेक्स के अलावा और कुछ भी नजर नहीं आ रहा था और में भी अब अपनी इस चूत की चुदाई करवाकर कैसे भी करके उसको वो मज़े देकर शांत करना चाहती थी. में उसके लिए नये नये विचार बनाने लगी थी और फिर में पापा की वो बहुत देर तक लगातार चुदाई को देखकर इतना मस्त हो गई थी कि में अब अपने पापा को फँसाने का वो जाल बुनने लगी और आख़िर एक दिन मुझे वो कामयाबी मिल ही गयी, मैंने अपने पापा को उसमे फँसा ही लिया.

दोस्तों अब जब भी मुझे कोई अच्छा मौका मिलता में अपने पापा की गोद में बैठकर उनसे अपने बूब्स को दबवा दबवाकर मज़े लेने लगी थी, लेकिन अभी तक केवल में अपने बूब्स को ही उनसे दबवा पाई थी और मैंने उनके साथ चुदाई का वो पूरा मज़ा अब तक नहीं लिया था, लेकिन मुझे उस पल का बहुत बेसब्री से इंतजार था. में जानबूझ कर ऐसे काम करती जिसकी वजह से मुझे मज़े मिले और वो मेरी तरफ ज्यादा आकर्षित हो जाए और फिर मेरी किस्मत का ताला उस दिन खुल गया. दोस्तों उन दिनों मेरे मामा की शादी थी इसलिए मेरी मम्मी अपने मायके जा रही थी और रात के समय पापा ने मुझे अपनी गोद में अपने खड़े लंड पर बैठाकर मुझसे कहा कि नेहा बेटी कल तेरी मम्मी तेरे मामा के घर पर चली जाएगी फिर तुझे कल में पूरा मज़ा देकर जवान होने का सही मतलब बताऊंगा.

दोस्तों में पापा की वो बात सुनकर और उसका सही मतलब तुरंत समझकर बहुत खुश हो गयी थी. अब हमेशा पापा अपने बेडरूम की कोई ना कोई खिड़की को जानबूझ कर खुली रखते थे. उस वजह से में पापा को अपनी मम्मी को चोदते हुए आराम से देख सकूँ और उनको ऐसा करने के लिए मैंने ही कहा था. फिर उस रात को पापा ने मम्मी को एक कुर्सी पर बैठाकर उनकी चूत को चाटकर पापा ने दो बार झड़ने के लिए मजबूर कर दिया और फिर उसके बाद पापा ने उनको तीन बार बहुत जमकर चोदा.

उसके बाद वो दोनों थककर सो गये, लेकिन मेरा जोश चुदाई का वो नशा उसके बाद पहले से ज्यादा बढ़ गया, जिसकी वजह से में बिल्कुल पागल हो चुकी थी और उसके अगले दिन मेरी मम्मी को भी शादी में जाना था, लेकिन में अपनी पढ़ाई का बहाना बनाकर अपने घर रुक रही थी. फिर उस दिन मम्मी जा रही थी और पापा ने मेरे कमरे में आकर मेरे बूब्स को पकड़कर दो तीन बार मेरे नरम रसीले होंठो को चूमा और मुझे अपनी बाहों में भरकर अपने लंड से मेरी चूत को दबाकर मुझसे कहा कि में अभी थोड़ी देर में तुम्हारी मम्मी को स्टेशन तक छोड़कर आता हूँ.

फिर उसके बाद आज रात को में तुमको पूरा मज़ा दूंगा. में उनके मुहं से यह बातें सुनकर बड़ी खुश थी. अब पापा चले गये तो में उनके जाने के बाद घर में बिल्कुल अकेली रह गयी थी और में अपनी पेंटी को उतारकर अपने पापा की वापसी का इंतज़ार कर रही थी. मैंने मन ही मन में सोचा कि जब तक पापा नहीं आते तब तक में अपनी चूत को पापा के लंड के लिए अपनी उंगली से फैलाकर तैयार कर लेती हूँ.

तभी कुछ देर बाद किसी ने दरवाज़ा खटखटाया, मैंने अपनी चूत में उंगली को आगे पीछे करते हुए पूछा कौन है? तब बाहर से आवाज आई में हूँ उमेश और फिर उमेश का नाम सुनकर में गुदगुदी से भर गई और मेरे पूरे शरीर में ना जाने कहाँ से वो जोश भर गया. में मन ही मन बहुत उत्साहित हो चुकी थी. दोस्तों उमेश मेरा बीस साल का पड़ोस में रहने वाला एक सुंदर दमदार लड़का था और वो भी मुझे पिछले कुछ दिनों से अपने जाल में फंसाना चाहता था, लेकिन में ही उसको जानबूझ कर अपनी तरफ से लाइन नहीं दे रही थी वो हर रोज़ जब भी मुझे देखता अपनी तरफ से गंदे गंदे इशारे किया करता था और वो कभी कभी तो मेरे पास में आकर मेरे बूब्स को भी दबा देता था और कभी वो सही मौका देखकर मेरी गांड पर भी अपना हाथ घुमा देता और वो हमेशा मुझसे कहता था कि रानी बस एक बार तुम मुझे चखा दो, तुम मुझे एक बार वो मौका दे दो. दोस्तों आज में अपनी प्यासी चूत में उंगली डालकर इतनी जोश से भरकर बेताब हो गयी थी कि आज उसके आने पर में इतनी मस्ती में भर गई कि मैंने बिना पेंटी पहने ही उठकर तुरंत दरवाज़ा खोल दिया.

फिर मुझे उसके उन इशारो से तुरंत पता चल चुका था कि वो मुझे आज चोदना चाहता है और आज में भी ज्यादा जोश में होने की वजह से अपने पूरे होश खोकर उससे अपनी चुदाई करवाने के लिए बिल्कुल तैयार थी और आज सुबह ही मैंने देखा था कि पापा ने मम्मी को एक कुर्सी पर बैठाकर उनकी चूत को अपनी जीभ से चाटकर उनको चोदा था और अब मेरी मम्मी के भाई की शादी थी इसलिए वो पूरे एक सप्ताह के लिए बाहर गई हुई थी और कुछ देर पहले मुझसे मेरे पापा ने कहा था कि आज वो मुझे पूरा मज़ा देंगे और इसके पहले पापा ने कई बार मेरे गदराए बूब्स को दबाकर मुझे बहुत मज़ा दिया था. अब में घर में बिल्कुल अकेली होने के साथ साथ मैंने अपनी पेंटी को उतारकर अपनी चूत में एक उंगली को डालकर में मज़ा ले रही थी जिससे कि जब पापा का मोटा लंड मेरी इस कामुक चूत में जाए तब मुझे उतना दर्द ना हो.

दोस्तों पापा के आने से पहले उमेश के आ जाने पर मैंने सोचा कि जब तक पापा नहीं आते तब तक क्यों ना में इसी से एक बार अपनी चूत को चुदवाकर इसके साथ भी वो मज़ा ले लूँ? मैंने अपने मन में यही बात सोचकर दरवाज़ा खोल दिया था. फिर मैंने जैसे ही दरवाज़ा खोला उमेश तुरंत अंदर आ गया और वो मुझे उस हालत में देखकर खुश हो गया. वो मेरे बड़े आकार के बूब्स को पकड़कर मुझसे बोला कि हाए मेरी रानी आज हमारे पास यह एक बहुत अच्छा मौका है और क्यों ना आज हम इसका पूरा पूरा फायदा उठाकर थोड़े मज़े मस्ती कर लें.

अब में उसकी उस हरकत पर एकदम से सनसना गई और उसने उसी समय मेरे बूब्स को छोड़कर पलटकर दरवाज़ा बंद किया और फिर उसने मुझे अपनी गोद में उठा लिया और वो मेरे दोनों बूब्स को मसलते हुए मेरे गुलाबी होंठो को चूसने लगा और वो मुझसे कहने लगा कि मेरी रानी तुम्हारे बूब्स तो बहुत टाईट है उफ्फ्फ इन्होने मुझे हमेशा बहुत तड़पाया है, मेरी रानी आज में तुम्हें ज़रूर चोदूंगा. फिर में उससे बोली आह्ह्हह्ह हाए भगवान तुम यह क्या कर रहे हो, प्लीज अब जल्दी से चोद दो मुझे वरना पापा आ जाएँगे? तो वो कहने लगी कि तुम बिल्कुल भी मत डरो मेरी जान, क्योंकि में तुम्हे बहुत जल्दी से चोदकर मज़े दूंगा और वैसे भी मेरा लंड थोड़ा छोटा है इसलिए तुम्हे इतना दर्द भी नहीं होगा और अब वो मेरी गांड को सहलाते हुए बोला कि वाह आज तुमने पेंटी भी नहीं पहनी है यह तो बहुत अच्छा है.

फिर मैंने उससे कहा कि में तो आज अपने पापा से अपनी चुदाई करवाने के जुगाड़ में नंगी बैठी थी, लेकिन यह एक सुनहरा मौका तेरी अच्छी किस्मत से तुझे मिल गया. दोस्तों में तो पापा से अपनी चुदाई करवाने के लिए पहले से ही बहुत गरम थी और जब उमेश अंदर आकर मेरे मुलायम बूब्स और गोरे गालों को मसलने लगा तो में अब पापा के आने से पहले ही उमेश के साथ वो मज़ा लेने को बिल्कुल बेकरार हो गयी. मुझे उसकी उस छेड़छाड़ में बड़ा मज़ा आ रहा था और मेरी चूत अब पापा का लंड खाने से पहले ही उमेश का लंड खाने को बहुत बेताब हो चुकी थी. अब में अपनी गोरी पतली कमर को लचकाकर बोली उह्ह्ह्ह उमेश तुम्हे जो करना हो जल्दी से कर लो, कहीं पापा ना आ जाए और मैंने अपनी चुदाई के लिए पागल होते हुए उससे यह बात कही.

यह कहानी आप HotSexStory.xyz में पढ़ रहें हैं।

फिर उमेश ने तुरंत मेरा इशारा पाकर मुझे बेड पर लेटा दिया और वो अपनी पेंट को भी उतारने लगा. वो झट से पूरा नंगा होकर बोला कि रानी आज तुम्हे बड़ा मज़ा आएगा और तुम एकदम मस्त सेक्सी माल हो, देखो मेरा लंड छोटा है ना? उसने मेरे हाथ में अपने लंड को रख दिया. फिर में उसके चार इंच के खड़े लंड को पकड़ मस्त हो गयी और मन ही मन सोचने लगी कि इसका तो मेरे पापा के लंड से आधा है और फिर में उसके लंड को सहलाती हुई उससे बोली हाए राम जो भी करना है जल्दी से कर लो.

दोस्तों उमेश के लंड को पकड़ते ही मेरा बदन कांपने लगा और पहले में थोड़ा सा डर रही थी, लेकिन अब में उसका लंड पकड़कर मचल उठी और मेरे कहने पर वो मेरे दोनों पैरों के बीच में आ गया और मेरी कसी हुई कुँवारी चूत पर अपना छोटा लंड रखकर उसने धक्का मार दिया, जिसकी वजह से उसके लंड का टोपा कुछ अंदर चला गया और फिर उसने तीन चार धक्के मारकर अपना पूरा लंड मेरी चूत के अंदर डाल दिया और कुछ देर के बाद उसने मुझे धीरे धीरे धक्के देकर चोदते हुए मुझसे पूछा, मेरी जान तुम्हे ज्यादा दर्द तो नहीं हो रहा है ना, क्यों मज़ा आ रहा है ना? उफ्फ्फफ्फ्फ़ हाँ आह्ह्हह्ह तुम ऐसे ही ज़ोर से धक्के मारो, मुझे बहुत मज़ा आ रहा है. फिर मेरी बात को सुनकर वो तेज़ी से धक्के मारने लगा और में उससे अपनी चुदाई करवाते हुए बहुत मस्त हो रही थी. उसकी चुदाई मुझे जन्नत की सेर करवा रही थी और में नीचे से अपनी गांड को उचकाती हुई सिसकियाँ लेती हुई उससे बोली उफफ्फ्फ्फ़ उमेश ज़ोर ज़ोर से चोदो तुम्हारा लंड बहुत छोटा है, ज़रा ताक़त से चोदो मेरे राजा.

फिर मेरी बात को सुनकर उमेश अब मुझे ज़ोर ज़ोर से धक्के देकर चोदने लगा था. उसका छोटा सा लंड सरकता हुआ मेरी चूत में अंदर बाहर हो रहा था और में पहली बार चुद रही थी इसलिए मुझे उमेश के छोटे लंड से भी बहुत मज़ा आ रहा था और वो इसी तरह मुझे धक्के देकर चोदते हुए मुझे जन्नत का मज़ा देने लगा. फिर करीब दस मिनट के बाद वो मेरे बूब्स पर लुढ़क गया और कुत्ते की तरह हांफने लगा और उसके लंड से बाहर निकलकर उसका वो गरम, गरम पानी मेरी चूत में गिरने लगा था. में पहली बार चुदी थी और पहली बार मेरी चूत में किसी के लंड की मलाई गिरी थी इसलिए मज़े से भर में उससे चिपक गयी और मेरी चूत भी अब टपकने लगी, कुछ देर बाद हम लोग अलग अलग हुए. फिर वो मेरे पापा के आ जाने की बात से डरकर जल्दी से उठकर अपने कपड़े पहनकर चला गया.

तब मैंने अपने एक हाथ से छूकर महसूस किया कि अब मेरी चूत उस वीर्य की वजह से चिपचिपा गयी थी और उमेश मुझे वैसे ही छोड़कर चला गया था, लेकिन उसकी इस हिम्मत भरी हरकत से में बहुत खुश थी और उसने आज मुझे चोदकर बता दिया था कि चुदवाने में कितना और कैसा मज़ा आता है? उमेश मुझे ठीक से चोद नहीं पाया था और वो बस ऊपर से ही मेरी चूत को रगड़कर चला गया था, लेकिन में आज बहुत अच्छी तरह से जान गई थी कि चुदाई में बड़ा ही अनोखा मज़ा है और उसके चले जाने के बाद मैंने अपनी पेंटी को पहन लिया था.

अब में मन ही मन में सोच रही थी कि जब उमेश के छोटे लंड से मुझे अपनी चुदाई करवाने में इतना मज़ा आया है तो जब पापा उनका मोटा, लंबा, तगड़ा लंड मेरी इस चूत में डालेंगे तब मुझे कितना मज़ा आएगा? फिर उमेश के जाने के 6-7 मिनट बाद ही पापा स्टेशन से वापस आ गये. वो अंदर आते ही मेरे बूब्स के खड़े खड़े निप्पल को फ्रॉक के ऊपर से पकड़ते हुए बोले कि आओ बेटी अब में तुमको जवान होने का सही मतलब बताऊंगा. फिर मैंने उनसे कहा ओहह पापा आपने तो कहा था कि आप मुझे रात को वो सब बताएँगे, अब वो कहने लगे अरे अब तो मम्मी चली गयी है अब हर समय रात ही है तुम अपनी मम्मी के कमरे में ही आ जाओ और वो क्रीम भी लेती आना, पापा मेरे बूब्स को मसलते हुए यह सब बोले.

दोस्तों में उमेश से चुदवाकर पहले ही जान चुकी थी कि उस क्रीम का क्या होगा, लेकिन में उनसे बिल्कुल अंजान बनकर पूछने लगी कि पापा क्रीम क्यों? अरे तुम लेकर तो आओ तब में बताऊंगा और पापा मेरे बूब्स को इतने ज़ोर से कसकर मसल रहे थे कि जैसे वो मेरे बूब्स को आज उखाड़ ही लेंगे. अब में क्रीम और टावल लेकर मम्मी के बेडरूम में पहुंची में उस समय बहुत खुश थी क्योंकि में जानती थी कि पापा ने वो क्रीम मुझसे क्यों मंगवाई है? में उमेश से चुदने के बाद क्रीम का मतलब समझ गयी थी और अब पापा मुझे लड़की से औरत बनाने के लिए बेकरार थे और में भी अपने पापा का मोटा केला खाने को तड़प रही थी.

फिर में कमरे में पहुँची तो पापा मुझसे बोले कि बेटी क्रीम टेबल पर रखकर बैठ जाओ और में गुदगुदाते हुए मन से कुर्सी पर बैठ गयी तो पापा मेरे पीछे आ गए और वो अपने दोनों हाथ मेरी खड़ी निप्पल पर ले आए और दोनों को वो बहुत प्यार से दबाने लगे. पापा के हाथ से अपने बूब्स को दबवाने में मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था. तभी पापा ने अपने एक हाथ को गले के ऊपर से मेरी फ्रॉक के अंदर डाल दिया और वो मेरे नंगे बूब्स को दबाने सहलाने लगे.