मेरे दोस्त की माँ की चुदाई पार्ट 2

(Mere dost ki ma ki chudai part 2)

मैं फिर से उसकी चुद मारना शुरू कर दिया मिशनरी स्थिति उसके स्तन गेंदों की तरह चलते हैं मैंने उससे पूछा कि मेरा होने वाला है है उसने कहा अपना माल चुद में ही गिरा दो मेने 10 से 15 शार्ट और मारे और उसकी चुद में ही झर गया हम कुछ देर के लिए सोते रहे थोड़ी देर के बाद फिर से उसको चोदने के लिए बोला मगर उसने मना कर दिया मेरा मन नही भरा था उसने मेरी मनोदशा समझी और कल रात के लिए बोला क्यो की मेरा दोस्त किसी जरूरी काम से बहार जाने वाला था

अब आगे…
फिर हमने अपने कपड़े पहने और अपने अपने घर आगये घर आकर शीना का मैसेज आया मोहित थैंक्स मेने कहा किस लिए उसने कहा तुमने मेरी जो सेक्स की प्यास बुझाई और मुझे समझा मेने कहा वो में तो हर खूबसूरत लेडी की सेवा करना अपना सौभाग्य समझता हूं मगर आप सब मेसे बहुत खाश हो मेरे लिए और मुझे तो आप को अछि तरह से प्यार करना है शीना ने कहा कल वो दिन भी आएगा तब तक थोड़ा सबर करो फिर थोड़ी देर बाद मेने राहुल से बात की तो बोला कल मुझे एक शादी अटेंड करने गांव जाना है तू चलेगा क्या मगर कल रात का प्रोग्रामिंग की वजह से मना कर दिया क्यो की शादी वो अटेंड करेगा और शुहागरात में मनाऊँगा उसकी ममी के साथ फिर कल का दिन भी आगया और राहुल घर से निकल गया उसके पापा भी यहां नही थे में सीथा उसके घर गया और दरवाजे की घंटी बजाई तो उसकी माँ ने दरवाजा खोला उन्होंने एक जालीदार मैक्सी पहन रखी थी जिसमे उसके तन के खूबसूरत अंग की साफ झलक दिख रही थी में तो वही उनकी खूबसूरती को निहारने लगा।

उन्होंने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे अंदर लिया और कहा सब कुछ बहार ही करने का इरादा है क्या में मुस्कुरा दिया और उसको अपनी बाहों में लेकर किस करने लगा मगर उसने मुझे रोकते हुए कहा पहले पेट पूजा फिर सेक्स पूजा भी करेंगे हमारे पास बहुत टाइम है फिर खाने बैठ गए और खाने के बाद मेरी उनके साथ शुहागरात शुरू होने वाली थी। रूम के अंदर घुसते ही उसने दरवाज़ा लॉक किया और फिर से मेरे साथ किस करना शुरू कर दिया। मैं भी पूरी तरह से उसका साथ दे रहा था।
मैंने उसको बाहों में उठाया और बिस्तर पर ले आया।

अब उसकी हवस की आग बुझाने का समय था।वो पागलों की तरह मुझे चूम रही थी, मैंने उसका ब्लाऊज़ खोलना शुरू कर दिया, पेटीकोट उसने खुद से उतार दिया!
अब वो सिर्फ ब्रा और पेंटी में थी। उसको देख कर मैं पागल हुए जा रहा था, मेरा लण्ड इतना टाइट था मानो सातों आसमानों को चोदने जा रहा हो!
मैंने उसको बाहों में भरा और उसकी ब्रा को होंठों से उतारना शुरू कर दिया।
पर जो मैंने देखा, उसने मुझे सब कुछ भुला कर अपना आशिक़ बना लिया।

उसके गुलाबी निप्पल जैसे आज तक अनछुए हों, उसके चूचे ज्यादा बड़े तो नहीं थे पर जितने भी थे, वो ऐसे लग रहे थे जैसे मुझसे कह रहे हों कि आज मेरा सारा रस चूस जाओ। मैं भी बिना समय गवाएँ चूचों पर टूट पड़ा, वो निढाल होकर बिस्तर पर पड़ी थी मानो इसी दिन के इन्तजार में थी। चूचियों को चूसते चूसते मेरा एक हाथ उसकी चूत की वादियों में कब दाखिल हो गया, मुझे पता भी नहीं चला पर उसको जरूर पता चल गया।जैसे ही मेरा हाथ उसकी चूत की वादियों में पहुँचा, वो सिहर उठी उसकी चूत में पहले ही नदी बह चुकी थी। वो बिस्तर पर पड़ी तड़प रही थी और मैं उसकी चूत और चूचियों के साथ तरह तरह के खेल खेल रहा था। अब उससे रहा नहीं जा रहा था, उसने मेरे कपड़े उतारे और मेरा लण्ड पकड़ा और मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया, साथ ही साथ वो अपनी चूचियों को भी दबा रही थी, उसका एक हाथ उसके चूत के दाने के साथ खेल रहा था, कमरे में उसके लण्ड चूसने के अलावा कोई आवाज़ नहीं थी, पूरा कमरा लण्ड चुसाई की आवाज़ से भरा हुआ था।

अब वो मेरे ऊपर आ गई और चुदने क लिए तैयार थी, उसने मेरा लंड अपने हाथ से पकड़ कर चूत के मुख पर रखा और अंदर एक ही बार मे पूरा डाल दिया जिससे उसकी आँखों में आँसुओं के साथ चुदने की ज़िद भी थी, वो लण्ड को बाहर निकलती और तेजी से चूत के मुह पर रख कर झटके से बैठ जाती…अब मैंने उसको नीचे आने के लिए कहा, वो मान गई और बिस्तर पर लेट गई। मैंने उसके दोनों पैर अपने कंधों पर रखे और चूत पर लण्ड का निशाना लगाया। एक जोर का झटका ही था कि आधे से ज्यादा लण्ड उसकी चूत की गहराई में चला गया… इसी के साथ उसकी एक चीख से कमरा गूँज गया।

मेरा लण्ड अंदर ही था और मैं उसकी चूचियों को दबाते हुए उसको किस कर रहा था। थोड़ी देर बाद मैंने एक और जोरदार झटका लिया और पूरा लण्ड उसकी चूत में समां गया। उसकी आँख से जैसे आंसुओं की नदी बह गई हो…ये आँसू गैर मर्द से चुदने के अफ़सोस या दर्द के नहीं थे, ये आँसू उसकी चूत चुदने की खुशी के थे। उसके बाद जो उसने जो चुदना शुरू किया उसको देख कर मैं दंग रह गया। उसकी चुदाई की आवाज़ से पूरा कमरा भरा हुआ था ‘खच् खच् फ़च्च फच्च’ जैसी आवाज़ जो लण्ड और चूत के मिलन से निकल रही थी, माहौल को सुरूर से भर रही थी, साथ में उसक मुँह से निकलती हुई सिसकारियाँ ‘आह्ह ह्ह्ह्ह ओह्ह ह्ह्ह्ह् चोदोओओ ओओओ फाड़ड़ दो… मुझे आज चोद चोद के मार डालो… मुझे और भी शक्ति दे रही थी।उसक गोल गोल उछलते हुए चूचे जैसे पनाह मांग रहे हो चुदाई से…उसकी सेक्सी आवाज़ें सच में मेरे अंदर चुदाई के लिए उत्तेजना डाल रही थी। यह चुदाई काफी देर तक चली, अब उसका शरीर अकड़ रहा था जो बता रहा था कि वो झड़ने वाली है।

उसने खुद को ढीला कर दिया पर मैं रुकने वाला नहीं था, काफी देर तक यूँ ही चोदने क बाद मैंने अपना सारा माल उसके चूचों पर निकाल दिया।
हम दोनों काफी देर तक एक दूसरे की बाहो में नंगे पड़े रहे, मैं उसकी चूचियों से खेलता रहा। वो भी काफी खुश दिखाई दे रही थी। फिर हमने शावर लेते समय चुदाई करी और शाम तक चुदाई का खेल खेलने के बाद हम थक गए थे फिर उसको बाहों लेकर चुम लिया मगर उसके असली पति का तो पता नहीं पर चुदाई के लिए उसको एक नया पति मिल गया था।
हम रोज नई तरीके से चुदाई का आनंद लेते थे। तो दोस्तो कहानी केसी लगी।
आप अपनी राय मुझे मेल कर सकते हैं.. आपके मेल्स का इन्तजार रहेगा..
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