मेरे मॉम-डैड की चुदाई-2

(Mere Mom Dad ki chudai-2)

डैड- यार, जगह नहीं मिल रही एक बार पकड़ के लगा लो ना !

मॉम- रुको …!!!

और फिर ऐसा लगा कि मॉम ने अपना हाथ अपनी जांघों के बीच में से ले जाकर डैड का लंड पकड़ के अपनी योनि के मुँह पे लगा लिया… और फिर मॉम हल्के से बोली- …चलो !

और फिर मुझे महसूस हुआ कि मॉम को मेरी तरफ हल्का सा धक्का लगा।

मॉम- उह्ह.. गया क्या पूरा?

डैड- हाँ गया पूरा का पूरा !

मॉम- थोड़ा धीरे करना… शीनू बिल्कुल साथ लेटी हुई है..!!

डैड- चिंता मत करो.. इतनी चिकनी हुई हो कि अभी निकलवा दोगी मेरा…!!!

और फिर बेड पर हल्की हल्की हलचल महसूस होने लगी।

डैड- ऊपर वाली टांग थोड़ी सी उठाओ…थोड़ा सा तो तेज़ करूं…!!!

मॉम- यार मान जाओ शीनू जाग जाएगी… रहने दो…

और फिर मुझे लगा कि डैड ने जबरदस्ती मॉम की ऊपर वाली टांग थोड़ी सी उठाई और धक्के तेज़ कर दिए।

मॉम- धीरे…! …अहह… उफ़…म्मम्मम हाय माँ…!!! यार धीरे करो…

डैड तेज़ सांस लेते हुए- क्यों, मज़ा नहीं आ रहा क्या… लाओ ब्लाउज भी खोल लो… कम से कम मुझे तो देख लेने दो इन चूचों को !

मॉम- इतने साल से देख रहे हो ! अभी भी मन नहीं भरा तुम्हारा…कोई भी जगह हो, ये ज़रूर खुलवाते हो… रुको पल्लू पे पिन लगी हुई है… अरे बाबा रुको, मैं ही खोलती हूँ ब्लाउज के हुक तो तुम ब्रा का हुक खोल लेना…

हे भगवान्….!!!!!! यह मैं क्या सुन रही हूँ… मेरे मॉम-डैड मेरे साथ एक ही बेड पर हैं और मेरी ही उपस्थिति में चुदाई का प्रोग्राम चल रहा है और ये लोग यह सोच रहे हैं कि मैं सो रही हूँ… लेकिन एक बात माननी पड़ेगी मेरे मॉम-डैड की… कि अभी तक बड़े ही शालीन ढंग से काम चल रहा था… कोई गाली-वाली नहीं, कोई चूत लंड जैसा शब्द उनके मुंह से नहीं निकला था। सिर्फ मेरे डैड ने ‘चोद’ शब्द ही बोला था।

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मॉम- सुनो ..!! मैं फिर से होने वाली हूँ… अब कर ही रहे हो तो 5-6 झटके थोड़ी जोर से मार दो… या फिर ऐसा करते हैं कि बाथरूम में चलते हैं…

डैड- नहीं सविता…!!! बस मेरा भी निकलने वाला है…..यहीं रुको !!!

मॉम धीरे से- अरे यार यहाँ कहाँ करोगे सब कुछ भर जायेगा… कंडोम भी नहीं लगाया हुआ आपने !!!

डैड- यार एक मिनट रुको !

और फिर ऐसा लगा कि वो दोनों अलग हुए।

डैड- तुम्हारी कच्छी कहाँ है?

मॉम- हे भगवान्… कच्छी में करोगे?

डैड- यार दे दो ना…

मॉम- मुझे नहीं पता तुमने ही उतारी थी रजाई में ही होगी।

डैड- हाँ मिल गई… चलो सीधी लेट जाओ !

और मॉम शायद कमर के बल लेट गई

डैड- ला यार चूची ही चूस लूँ थोड़ी तुम्हारी !

और फिर मुझे छोटी-छोटी चुस चुस की आवाजें आने लगी।

मॉम- सारा मोशन तोड़ दिया कच्छी के चक्कर में !

डैड- सिर्फ 20 झटकों में अपना और तुम्हारा दोनों का निकलवा दूंगा… और फिर चैन से सो जाना… बस एक बात मान लो !

मॉम- क्या?

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डैड- मेरे ऊपर आ जाओ मैं नीचे से करता हूँ तुम्हें..

मॉम- यार क्या कर रहे हो आप… यह स्टाइल बदल बदल के करने की जगह नहीं है, बस ऐसे ही कर लो ! घर जाते ही जो कहोगे वो कर दूँगी…लेकिन यहाँ नहीं।

डैड ने शायद मॉम की चूची मुँह में ली और फिर से मॉम को चोदना शुरू कर दिया।

मॉम- अह्ह अम्म… अहह ! अह !

और शायद 20-25 धक्कों के बाद डैड ने कहा- सविता, कितनी देर लगेगी तुमको?

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मॉम- बस.. बस… अहह… बस… 2-3 जोर से… अह्हह्म्म… गई…गयी… ऊऊओ…ह्ह्ह्हह… गई… गई मैं…

डैड- मेरी जान, मेरा भी आ गया.. अह्ह्ह… मम्म…

मॉम शायद जल्दी से हिली और डैड का लंड बाहर निकलवा दिया और बोली- कच्छी में.. कच्छी में… मेरे अन्दर नहीं और रजाई के अन्दर तेज़ हलचल हुई और शायद डैड ने सारा वीर्य मॉम की पैन्टी में निकाल दिया।

डैड उठ कर बाथरूम चले गए, मॉम शायद अपने कपड़े ठीक करने लग गई।

दो मिनट बाद जब डैड बाथरूम से बाहर आये तो मॉम ने पूछा- अन्दर तो नहीं किया ना?

डैड- नहीं यार… सारा का सारा तुम्हारी कच्छी पी गई… तुम्हारी गरमागर्म और तपती हुई चूत के साथ लगी रहती है ना हरदम ! इसलिए उसी ने सारा सोख लिया। अब रखूँ कहाँ इसको?

मॉम- धत्त…!!! शरारती कहीं के… अपने तकिये के नीचे रख लो, रात को नींद अच्छी आएगी !

और फिर वो दोनों सो गए।

सुबह जब मेरी आँख खुली तो मॉम मुझे जगा रही थी।

मॉम- शीनू… बेटे जल्दी से उठो ! छः बज गए हैं, विदाई का टाइम हो रहा है… मैं और तुम्हारे डैड नीचे जा रहे हैं, चाचा के साथ सारा सामान गाड़ी में रख लो !

मैंने उठ कर देखा तो सारे सामान के साथ तैयार थे।

चाचा ने कहा- शीनू, मैं सामान कार में रख कर 2 मिनट में आ रहा हूँ… तैयार मिलना !

जैसे ही सारे कमरे से गए मैंने झट से डैड की तरफ के तकिये के नीचे देखा तो… मॉम अपनी कच्छी पहनना भूल गई थी… ओह्ह गॉड ! गुलाबू पैंटी पर छोटे छोटे लाल फूल बने हुए थे, बिल्कुल मुचड़ी हुई एक छोटी सी गेंद जैसी दबी हुई थी।

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मैंने झट से मॉम की कच्छी उठाई और हाथ में लेकर देखी जो कि कुछ जगह से एकदम कड़क थी… शायद मेरे डैड के वीर्य की वजह से !

तभी मुझे याद आया कि चाचा बोल के गए हैं कि तैयार मिलना ! मैंने जल्दी से वो कच्छी वैसे ही तकिये के नीचे छुपा दी, मैं बाथरूम में चली गई। वापिस आई तो चाचा कमरे में थे, बोले- चलें?

मैंने कहा- जी चाचा चलो !

जैसे ही कमरे का दरवाज़ा खोला मॉम खड़ी थी, वो बोली- एक मिनट ! अभी आई !

और बिना सोचे समझे कि मैं और चाचा खड़े हैं, डैड की साइड वाला तकिया उठाया और मैं, यह सोच कर कि मॉम हमारे सामने अपनी कच्छी ले रही हैं, कि मेरी फट गई, उस तकिये के नीचे कुछ नहीं था !

मॉम ने इधर उधर देखा और परेशान सी दिखने लगी।

तभी चाचा बोले- भाभी अब क्या रह गया..??

मॉम सकपकाते- कुछ नहीं एक चाबी थी, शायद तुम्हारे भैया ले गए।

नीचे आकर मैंने देखा कि मॉम सीधी डैड के पास गई और कुछ पूछा।

डैड ने ना में सर हिलाते हुए कुछ कहा और दोनों हैरान-परेशान से दिखने लगे।

मॉम की कच्छी न मेरे पास… ना डैड के पास, न खुद मॉम के पास तो फिर बचा कौन?

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मैंने कनखियों से देखा तो चाचा की पैंट की जेब कुछ उभरी थी !

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