मेरे सामने माँ की चुदाई 1

(Mere samne ma ki chudai 1)

दोस्तों आज में आप लोगो को ऐसी स्टोरी बताने जा रहा हूँ जिसे पढ़कर आप लोग को ये पता चलेगा कि कैसे एक बेटे की गलतियों से उसकी मम्मी चुद गयी। दोस्तों मेरे घर में में, मेरे पापा, मेरी मम्मी और मेरी एक दीदी है। मेरी दीदी का नाम प्रिया है और वो बेंगलोर के एक इंजिनियरिंग कॉलेज में पढ़ती है लेकिन पहले में आपको अपनी मम्मी के बारे में बता देता हूँ। मेरी मम्मी का नाम वर्षा है और वो
दिखने में बहुत ही सुंदर है.. उनका फिगर बहुत ही हॉट और सेक्सी है.. उनकी गांड बिल्कुल गोल और बड़ी है। मम्मी घर में मेक्सी पहनती है और बाहर जाती है तो सलवार सूट या साड़ी पहनती है मेरी मम्मी सलवार सूट बहुत ही टाईट पहनती है फिर जब भी मम्मी बाहर जाती है तो सारे पड़ोस के अंकल उन्हें घूर घूर कर देखते रहते है और उनकी सलवार से उनकी पेंटी का आकार दिखता रहता है और कई बार मेरे मोहल्ले के सारे लड़के मेरी मम्मी के बारे में गंदी गंदी बातें भी करते रहते है।

मुझे अच्छी तरह से याद है एक बार में एक दुकान पर समान खरीदने गया हुआ था। वहाँ पर पास में कुछ लड़के थे जो सिगरेट पी रहे थे.. उन्ही में से एक का नाम असलम था.. उसने मेरी तरफ अपने दोस्तों को दिखा कर कहा कि पता है इसकी मम्मी बहुत गरम है.. इतनी टाईट सलवार पहनती है कि मन करता है उसकी सलवार यहीं पर फाड़ दूँ और उसकी गांड मारूं। में उस समय छोटा था तो मुझे इतनी बातें समझ में नहीं आती थी और मुझे उनसे बहुत डर भी लगता था कि कहीं वो लोग मुझे पीट ना दें। फिर एक दिन मैंने मम्मी को ये बात बताई तो मम्मी ने मुझसे कहा कि तुम उनकी बातें मत सुना करो.. वो लोग गंदे है मैंने कहा कि ठीक है। फिर मैंने कहा कि मम्मी वो लड़के हमेशा मुझे देखकर मुझसे कहते थे कि क्या घर पर तेरी मम्मी अकेली है और अगर में कहता हाँ अकेली है तो वो लोग मुझसे कहते थे कि ठीक है आज तेरी मम्मी को चोदने में जाता हूँ। फिर मुझे बहुत बुरा लगता था।
तभी एक दिन उन्होंने मुझसे कहा कि अगर तू मुझे अपनी मम्मी की चूत दिलवाएगा तो हम तुझे एक क्रिकेट बॉल खरीद कर देंगे। फिर मैंने कुछ नहीं कहा और में रोता हुआ घर पर चला आया तो मम्मी ने मुझसे पूछा कि क्या हुआ? मैंने कहा कि कुछ नहीं और में अपने कमरे में चला गया.. लेकिन मुझे उस समय तक इतना भी नहीं पता था कि चूत का मतलब क्या होता है? मुझे बस इतना समझ में आता था कि वो लोग मेरी मम्मी के बारे में बहुत गंदी गंदी बातें करते है और इस बात को करीब 6 महीने हो गये और ऐसा ही चलता रहा और वो लोग हमेशा मेरी मम्मी के बारे में गंदी गंदी बातें करते थे और में चुपचाप सुनता रहता था। फिर एक दिन की बात है हमारे सामने के फ्लेट में एक 30 साल का आदमी रहने आया.. उसका नाम राणा था वो बांग्लादेश से इंडिया बिजनेस के सिलसिले में आया था। मेरी उससे उस समय कोई जान पहचान नहीं थी। एक दिन एक लड़का मुझे मेरी मम्मी के बारे में छेड़ रहा था और मैंने उसे पलट कर गाली दे दी तो वो मुझे मारने लगा और कहने लगा कि साले तेरी मम्मी है ही रंडी इसलिए में तेरी मम्मी के बारे में गंदी बातें बोलता हूँ और मुझे मारने लगा।
फिर अचानक से वो आदमी जिसका नाम राणा था.. वो आया उसने उस लड़के को पहले रोका और बोला कि ये बच्चा है इसे क्यों मार रहे हो.. लेकिन जब उसने मुझे फिर से मारा तो राणा ने उस लड़के को मारा और वहाँ से भगा दिया और मुझे लेकर वो घर आ गया। वो पहले मुझे अपने घर ले गया और उसने मुझे बोला कि पहले अपना चहरा साफ कर लो फिर घर चले जाना और फिर मैंने ऐसा ही किया और में घर पर चला गया। वो मुझे बहुत अच्छा लगने लगा। मैंने अभी तक मम्मी को ये बात नहीं बताई थी। फिर में अगले दिन उसके पास गया और मैंने उसे थेंक्स बोला और फिर धीरे धीरे हमारी बहुत अच्छी दोस्ती हो गयी। फिर हम रोज़ मिलते थे और बातें करते थे एक दिन में और वो छत पर खड़े होकर बातें कर रहे थे कि नीचे मुझे मेरी मम्मी नज़र आई.. मैंने उसे दिखाया और कहा कि ये मेरी मम्मी है। मैंने देखा कि वो घूर घूर कर मेरी मम्मी के तरफ देख रहा था।
फिर में लगातार उसके घर आने जाने लगा तो वो मुझसे मेरी मम्मी के बारे में पूछता था.. जैसे क्या कर रही है? क्या पहना है? यही सब। एक दिन में उससे बातें कर रहा था तो उसने मुझसे पूछा कि अच्छा वो लड़के तुझे क्या बोलते थे? तभी मैंने सारी बातें उसे बताई.. फिर मैंने उससे पूछा कि चूत का मतलब क्या होता है? तभी वो हंसने लगा और बोला कि क्या तुझे नहीं पता? मैंने कहा कि नहीं पता है इसलिए ही तो पूछ रहा हूँ। तभी उसने कहा कि जिससे तू निकला है। फिर मैंने कहा कि क्या मतलब? तभी उसने कहा कि जहाँ से तेरी मम्मी सू सू करती है वही चूत है।

फिर एक दिन उसने मुझसे कहा कि विक्की क्या तू मुझे अपने घर नहीं बुलाएगा? मैंने कहा कि क्यों नहीं ज़रूर बुलाऊंगा.. अभी चलो.. मम्मी, पापा भी घर पर है और तुम मिल लेना मेरे मम्मी-पापा से। उसने कहा कि नहीं जब तेरी मम्मी घर पर नहीं हो तब बुलाना। मैंने कहा कि ठीक है। में उस समय समझ नहीं पा रहा था कि उसके मन में क्या चल रहा है अगले दिन मेरी मम्मी मंदिर गयी थी और मैंने उसे कॉल किया और बोला कि आ जावो। फिर वो मेरे घर पर आया हम बैठ कर बातें करने लगे उसने मुझसे पूछा कि विक्की में तुम्हे कैसा लगता हूँ? मैंने कहा कि आप बहुत अच्छे है। फिर उसने मुझसे कहा कि विक्की क्या तुम चाहते हो कि आज से वो लड़के तुम्हे नहीं चिड़ायें? मैंने कहा कि हाँ.. क्या ये हो सकता है? तभी उसने कहा कि हाँ.. क्यों नहीं हो सकता है? लेकिन तू मेरी कुछ बातें मान ले तभी ऐसा हो सकता है। फिर मैंने कहा कि हाँ बोलिए में आपकी हर बात मानूँगा। उसने कहा कि विक्की तू मुझे दिखा ना तेरी मम्मी कैसी पेंटी पहनती है। मुझे कुछ समझ में नहीं आया मैंने कहा क्यों आप ऐसा क्यों पूछ रहे हो? उन्होंने मुझसे कहा कि तू नहीं समझेगा तू अभी बच्चा है.. तू जाकर ले आ और हाँ अपनी मम्मी से कुछ मत कहना.. नहीं तो में तेरी मदद नहीं कर पाउँगा। मैंने कहा कि ठीक है और में गया और मम्मी जितनी पेंटी और ब्रा पहनती थी वो सब ले आया। उसमे से एक पेंटी ब्रा भीगी हुई थी जो आज ही मम्मी ने धोया था। मैंने देखा कि उसने वो पेंटी उठाई और उसे सूंघने लगा। मैंने उससे पूछा कि आप ये क्या कर रहे हो? तभी उसने कहा कि कुछ नहीं.. तुम गेम खेलो मैंने कहा कि ठीक है और में गेम खेलने लगा ऐसा कुछ दिन तक चलता रहा। में भी चुपचाप सब देखता था और वो मेरी मम्मी की पेंटी लगभग रोज़ सूंघता था।
फिर एक दिन जब मम्मी घर पर नहीं थी वो मेरे घर आया और हर दिन की तरह मेरी मम्मी की पेंटी को सूंघ रहा था। तभी थोड़ी देर बाद उसने मुझसे पूछा कि विक्की क्या मुझे अपनी मम्मी से नहीं मिलवाओगे? तभी मैंने कहा कि क्यों नहीं.. अपने ही मुझसे कहा था कि आप घर पर तब आओगे जब मम्मी नहीं रहेगी। फिर उसने कहा कि ठीक है अब में कहता हूँ कि तुम अपनी मम्मी से मेरा परिचय करवा दो। मैंने कहा कि ठीक है। फिर उस दिन जब मम्मी घर आई तो मैंने मम्मी से राणा का परिचय करवाया फिर हम लोग बैठ कर बातें करने लगे। थोड़ी देर बाद मम्मी ने कहा कि में चाय बनाती हूँ और मम्मी उठकर जाने लगी और वो मेरी मम्मी को घूरकर देख रहा था। मम्मी ने सफेद सलवार सूट पहन रखा था और मम्मी की काली कलर की ब्रा दिख रही थी और साईड से उनकी सलवार के अंदर से काली पेंटी भी दिख रही थी।
फिर मम्मी ने चाय लाकर हमारे सामने रखी। हम लोगों ने चाय पी और मैंने मम्मी से कहा कि में गेम खेलने जा रहा हूँ और में दूसरे रूम में जाकर गेम खेलने लगा और मम्मी और राणा बैठकर बातें करने लगे। कुछ देर बाद मुझे मम्मी की ज़ोर से हंसने की आवाज़ आई और इस तरह मम्मी की उससे दोस्ती हो गयी। दो महीने इसी तरह चलता रहा और फिर एक दिन पापा ऑफीस से आए उन्होंने मम्मी से कहा कि में 15 दिन के लिए बेंगलोर जा रहा हूँ मेरी एक जरूरी मीटिंग है और वो वहाँ पर दीदी से भी मिल लेंगे। मम्मी ने कहा कि ठीक है उन्होंने मम्मी से और मुझसे कहा कि तुम लोग भी चलो। मम्मी तो तैयार हो गयी लेकिन मैंने मम्मी से कहा कि मेरा स्कूल है.. में नहीं जा सकता हूँ और मैंने मम्मी से कहा कि में अंकल के यहाँ पर रह लूँगा.. आप लोग जाओ। लेकिन मम्मी को मुझे अकेले छोड़ने में डर लग रहा था और उन्होंने कहा कि आप जाईये.. में विक्की के साथ रहूंगी। शायद वो मेरी जिंदगी की सबसे बड़ी ग़लती हो गयी थी। फिर पापा अगले दिन बेंगलोर चले गये और अंकल का धीरे धीरे मेरे घर आना जाना बढ़ गया और वो मुझसे अब कम बातें करने लगे और मेरी मम्मी से ज्यादा। मेरे स्कूल जाने के बाद भी वो मेरी मम्मी से मिलने मेरे घर आने लगे और मुझे अपनी मम्मी में भी बहुत से बदलाव दिखने लगे.. पहले वो किसी और आदमी से बातें नहीं करती थी लेकिन अब वो उनके साथ घुल मिलकर बातें करने लगी.. लेकिन में इन सब बातों को अपने दिमाग से निकालता रहा.. क्योंकि मुझे ये नहीं पता था कि उसके मन में क्या है। दोस्तों ये कहानी आप HotSexStory.xyz पर पड़ रहे है।

फिर एक दिन में नीचे से कुछ सामान खरीद रहा था कि वही लड़के जो मुझे परेशान किया करते थे.. उन्होंने मुझसे कहा कि यार हममे क्या कमी थी जो तेरी मम्मी राणा का बिस्तर गरम करने लगी है। फिर उन्होंने कहा कि चल तू एक काम कर.. अपनी मम्मी से कह कि जैसे उसका बिस्तर गरम करती है हमारा भी कर दे और बोलना हम उसे पैसे भी देंगे और मुझे बहुत गुस्सा आया। मैंने कहा कि तुम लोग झूठ बोल रहे हो.. मेरी मम्मी ऐसी नहीं है उन्होंने कहा कि अच्छा ठीक है तू जाकर पूछ ले राणा से। तभी में वहाँ से चला आया और फिर एक दिन में उससे बातें कर रहा था तो मैंने उनसे कहा कि वो लड़के ऐसा बोल रहे थे। वो मेरी तरफ देखने लगा और उसने कहा कि ये बिल्कुल सच है मैंने उससे कहा कि आप झूठ बोल रहे हो। तभी उसने कहा कि नहीं में बिल्कुल सच कह रहा हूँ मैंने कहा कि ठीक है में जब तक विश्वास नहीं करूँगा.. जब तक में खुद ना देख लूँ।