मेरी अधूरी जवानी की बेदर्द चुदाई-6

Meri Adhuri Jawani Ki Bedard Chudai-6

मैं काफी कुछ करीना की तरह लगती ही हूँ, ऐसा कई लोगो ने मुझे कहा था,
जीजाजी की तारीफें सुन कर मुझे ख़ुशी हो रही थी और मैं शरमा भी रही थी।
99 प्रतिशत औरतें तारीफ पर खुश होती हैं, भले ही झूठी ही हो, वैसे मेरी
तो वो सच्ची तारीफ ही कर रहे थे।
वो अवाक से थे सलवार कुर्ती में मेरी जवानी देख कर !
और हम बाज़ार में चल रहे थे मुझे लग रहा था कि अकेले होते तो वो मुझे मसल
देते। सारे समय उनकी निगाहें मुझ से हट नहीं रही थी।
होटल पहुँचे तो वहाँ साहब भी आये हुए थे, वो होटल के लॉन में कई लोगों से
घिरे हुए बैठे थे।
मैं सीधे होटल के अन्दर आ गई और जीजाजी के साथ कुर्सी पर बैठ गई।
होटल वाले ने आकर कहा- मैडम जी, साहब भी आये हुए हैं।
मैंने कहा- मैंने देख लिया है और उन्होंने भी हमें देखा है।
थोड़ी देर में साहब भी अन्दर आ गए और मेरे जीजाजी से हाथ मिला कर अपना
परिचय दिया। जीजाजी ने भी अपना परिचय दिया और वे बातें करने लगे, मैं
सिर्फ सुन रही थी। आज मुझे पता चला कि जीजाजी बोलने में कितने होशियार
हैं। उन्होंने साहब को भी प्रभावित कर दिया, मैं भी उनकी तरफ प्रशंसात्मक
दृष्टि से देखती रही।

तब होटल वाले ने कहा- आप सब खाना खा लीजिए।
तो साहब बोले- मैंने खाना अपने बंगले में बनवा लिया है, आप भी चलो, वहीं
खाना खाते हैं।
मैंने मना कर दिया, मुझे पता है कि वे मांस-मच्छी खाते हैं, मीणा हैं और
जीजाजी तो प्याज भी नहीं खाते।
फिर साहब चले गए और हम खाना खाने बैठे।
होटल मालिक भी हमारे साथ ही बैठा, उसने जीजाजी को बीयर को पूछा। मैंने
जीजाजी की तरफ देखा, जीजाजी ने मना कर दिया।
होटल वाला हंसा- कहीं आप साली जी से तो नहीं डर रहे हैं?
उन्होंने कहा- नहीं !
होटल वाला भी बड़ा आदमी था, उम्र में भी मुश्किल से 25 साल का था और मेरी
बहुत इज्जत करता था।
खाना खाने के बाद उसने पान का पूछा, उसको भी हमने मना कर दिया।
फिर उसने कहा- जीजाजी, आप मैडम के जीजाजी हैं तो हमारे भी जीजाजी हैं आप
आज यहीं सो जाओ मेरे होटल में ! मैडम का कमरा तो छोटा है !
तब मैं बीच में बोली- नहीं, वहाँ मकान मालिक का कमरा ख़ाली है, ये वही सोते हैं।

तो उसने कहा- ठीक है।
उसने खाना खाने आने के लिए जीजाजी को धन्यवाद दिया और कहा- कभी इधर आना
हो तो यहीं आना, आपका स्वागत है।
मुझे भी बड़ी ख़ुशी हुई उसका व्यवहार देख कर ! भले ही वो साहब के कारण था।
फिर हम वापिस अपने कमरे में आ गए। मैं अपनी मैक्सी लेकर बाथरूम में चली
गई बदलने के लिए, तब तक जीजाजी ने भी कपड़े उतार कर लुंगी लगा ली।
मैं भी कमरे में आई और बत्ती बुझा कर लेट गई।
मैंने कमरे में आते ही दरवाजा बंद कर दिया जबकि पिछली रात मैंने पूरा
दरवाज़ा खोल रखा था अपनी असुरक्षा की भावना के कारण।
और जीजाजी ने जबरदस्ती मेरी चूत चाटी तब दरवाजा खुला हुआ ही था पर मेरा
कमरा एक तरफ अलग को था कोई चल कर आये तभी आ सकता है।
जीजाजी ने जब मुझे पकड़ा तो कमरे की रोशनी तो वैसे भी बन्द थी और रात के
दो-ढाई बजे थे, किसी के देखने का कोई सवाल ही नहीं था, पर जब उन्होंने
मुझे चोदना शुरू किया तब उन्होंने गेट को थोड़ा ढुका दिया था। पर आज कोई
ऐसी बात नहीं थी इसलिए मैंने कमरे में आते ही दरवाजा बंद कर कुण्डी लगा
ली थी, जीजाजी उस बिस्तर पर एक तरफ लेटे हुए थे और एक तरफ मैं भी लेट गई।
मैंने जिंदगी में कभी सेक्स के लिए कभी पहल नहीं की थी, अगर वो चुपचाप
रात भर सोये रहते तो भी मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता और मैं भी आराम से सो
जाती।

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मेरी सक्रिय यौन जीवन को काफ़ी साल हो चुके थे पर मैंने अपने पति से भी
कभी पहल नहीं की, सेक्स मुझे कभी अच्छा ही नहीं लगा था।
हाँ जब वो छेड़ना शुरू करते तो उनकी संतुष्टि कराते कराते कभी मुझे भी मज़ा
आ जाता पर मेरे लिए यह कोई जरुरी काम नहीं था।
मैं सीधी सो रही थी कि जीजाजी ने मेरी तरफ करवट ली और मुझे भी अपनी तरफ
मोड़ लिया और बांहों में भर लिया।
मैं थोड़ी कसमसाई, फिर मैंने अपने शरीर को ढीला छोड़ दिया। मुझे पता चल गया
था कि अब इनको नहीं रोक सकती, जहाँ मैं और वो तन्हाई में हैं तो मेरा
विरोध कोई मायने नहीं रखता, रात के अँधेरे में जब दो जवान जिस्म पास हों
तो सारे इरादे ढह जाते हैं।
अब मुझे दीदी नहीं दिख रही थी, जीजाजी नहीं दिख रहे थे दिख रहा तो मेरा
प्यारा आशिक दिख रहा था जिसने मुझे जिंदगी का वो आनन्द दिया था जिससे मैं
अब तक अनजान थी।
जीजाजी मेरे गले गाल और कंधे पर चुम्बनों की बौछार कर रहे थे, उन्होंने
कई बार मेरे लब भी चूसने चाहे पर मैंने उनका मुँह पीछे कर दिया, मुझे ओंठ
चूसना-चुसवाना अच्छा नहीं लगता था, एक तो मेरी साँस रुक जाती थी दूसरा
मुझे दूसरे के मुँह की बदबू आती थी।

जीजाजी मेरे सारे बदन पर हाथ फेर रहे थे। मैंने मैक्सी खोली नहीं थी, ना
ही ब्रेजियर खोला, वो ऊपर से ही मेरे छोटे छोटे नारंगी जैसे स्तन दबा रहे
थे, मेरे शरीर पर बहुत कम बाल आते हैं, मेरे साथ वाली लड़कियाँ पूछती हैं
कि मैंने हटवाए हैं क्या? जबकि कुदरती मेरे बाल कम आते हैं टाँगों पर तो
रोयें भी नहीं हैं थोड़े से जहाँ आते हैं वो ऊपर की तरफ ! चूत तो वैसे भी
मेरी चिकनी रहती है।
मेरे जीजाजी मेरे चिकने बदन की तारीफ करते जा रहे थे और हाथ फेरते जा रहे
थे। उनका हाथ मेरे चिकने बदन पर फिसल रहा था, मेरी मेक्सी कमर पर आ गई
थी, उनकी लुंगी भी फिसल कर हट गई थी, वे सिर्फ चड्डी पहने हुए थे।

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फिर वे थोड़ा ऊँचे हुए और अपनी अंगुली से मेरा छेद टटोला और अपना सुपारा
छेद पर भिड़ा दिया।
मैंने भी उनके लण्ड को अपनी चूत में लेने के लिए अपनी चूत को ढीला छोड़ा
और थोड़ी अपनी गाण्ड को ऊँची की, मेरी दोनों टांगें तो पहले से ही ऊँची
थी।
जीजाजी ने अपने दोनों हाथ मेरे चूतड़ों के नीचे ले जाकर मेरी चूत को और
ऊँचा किया और एक ठाप मारी।
थूक से और मेरे पानी से गीली चूत में उनका लण्ड गप से आधा घुस गया। मुझे
थोड़ा दर्द हुआ क्योंकि मेरी चूत के पपोटे पिछली चुदाई की वजह से थोड़े
सूजे हुए थे। पर जब लण्ड अन्दर घुस गया तो फिर मेरा दर्द भी ख़त्म हो गया
और मेरे बदन में आनन्द की हिलोरें उठने लगी।
जीजाजी ने हल्का सा लण्ड पीछे खींचा और फिर जोर से धक्का मारा, मैं सिहर
उठी, उनका सुपारा मेरी बच्चेदानी से टकरा गया। उनका लण्ड झड तक मेरी चूत
में घुस चुका था, उन्होंने पूरा घुसा कर राहत की साँस ली और मैंने अपनी
चूत का संकुचन कर उनके लण्ड का अपनी चूत में स्वागत किया जिसे उन्होंने
अपने लण्ड पर महसूस किया। जबाब में उन्होंने एक ठुमका लगाया।

मैंने साँस छोड़ कर उनको स्वीकृति का इशारा दिया और उन्होंने घस्से लगाने
शुरू कर दिए। मैंने अपनी आँखों पर वहीं पड़ी अपनी चुन्नी ढक ली और आनन्द
लेने लगी, मुँह ढक लेने से शर्म कम लगती है।
और चुन्नी के अन्दर से उनको कभी कभी चूम भी लेती थी। उन्होंने कस कर दस
मिनट तक धक्के लगाये, फिर मेरी टांगें सीधी कर दी, अपने दोनों पैर मेरे
पैरों पर रख दिए और अपने पैर के अंगूठों से मेरे पैर के पंजे पकड़ लिए और
दबादब धक्के मारने लगे। दोनों पैर सीधे रखने की वजह से मेरी चूत बिल्कुल
चिपक गई थी और उनका लण्ड बुरी तरह से फंस रहा था।
थोड़ी देर में ही उन्हें पता चल गया कि इस तरह तो वो जल्दी स्खलित हो
जायेंगे तो उन्होंने फिर से अपने पैर मेरे पैरों से हटा कर बीच में किये
और मेरे कूल्हे पर हल्की सी थपकी दी। मैं उनका मतलब समझ गई और फिर से
अपनी टांगें ऊँची कर दी।
इतनी देर की चुदाई के बाद मेरा पानी निकल गया था और फिर उन्होंने अपना
लण्ड फिर से बाहर निकाला और अपनी थूक से भरी जीभ मेरी चूत पर फिराई।

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मैंने कहा- धत्त ! बड़े गंदे हो ! अब वहाँ मुँह मत लगाओ !
तो उन्होंने कहा- पहले लगाया तब?
मैंने कहा- अब आपका लण्ड घुस गया है, अब नहीं लगाना !
उन्होंने कहा- मैंने पहले तेरी चूत चाटी, अब अपने लण्ड का भी स्वाद ले रहा हूँ !
पर मैंने कहा- नहीं अब आप मुझे चूमना मत !
उन्होंने कहा- मुझे तो चोदना है, चूमने की जरुरत नहीं है।

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मैंने कहा- ठीक है !
एक बार फिर उन्होंने अपना लण्ड मेरी चूत में फंसा दिया। सुपारा घुसा तब
थोड़ा दर्द हुआ फिर सामान्य हो गया।
अचानक मुझे याद आया, मैंने पूछा- कंडोम लगाया या नहीं?
उन्होंने कहा- नहीं !
मैंने उचक कर कहा- तो फिर अपना लण्ड बाहर निकालो और कंडोम पहनो !
उन्होंने हंस कर कहा- अभी पहन लिया है, चैक कर लो !
मैंने कहा- मुझे आपकी बात का विश्वास है !
उन्होंने कहा- नहीं, चैक करो !
और चोदते हुए उन्होंने मेरा हाथ पकड़ा और मेरी अंगुलियों से अपने लण्ड को
छुआ दिया। कंडोम पहना हुआ थाम मेरी अंगुली आधे लण्ड को छू कर रही थी और
अंगुली से घर्षण करते हुए उनका लण्ड मेरी चूत में दबादब जा रहा था।
उन्होंने कहा- अपने हाथ से चूत पर पहरा रखो कि यह अन्दर क्या घुस रहा है !
मैंने कहा- मेरे हाथ से तो अब यह घुसने से नहीं रुकेगा !

हालाँकि उनके कहने से मैंने हाथ थोड़ी देर अपनी चूत के पास रखा। फिर मुझे
उनकी बातों से आनन्द आने लग गया और मैंने उनको कमर से पकड़ लिया।
करीब बीस मिनट से वो मुझे लगातार चोद रहे थे पूरी गति से ! उनके माथे से
पसीना चू रहा था जिसे वो अपनी लुंगी से पौंछ रहे थे पर कमर लगातार चला
रहे थे।मेरी चूत में जलन होने लगी थी और मैं उन्हें अपना पानी जल्दी
निकाल कर मुझे छोड़ने का कह रही थी। वे भी मुझे बस दो मिनट- दो मिनट का
दिलासा दे रहे थे पर उनका पानी छुटने का नाम भी नहीं ले रहा था।
मैंने उन्हें धक्के देने शुरू किये तो वो बोले- अपना पानी निकले बिना तो
लण्ड बाहर निकालूँगा नहीं ! और तू ऐसे करेगी तो मुझे मज़ा नहीं आएगा और
सारी रात मेरा पानी नहीं निकलेगा।

तो मैं डर गई, मैंने कहा- मैं क्या करूँ कि आपका पानी जल्दी निकल जाये?
तो वो बोले- तू नीचे से धक्के लगा और झूठमूठ की सांसें-आहें भर तो मेरा
पानी निकल जायेगा।मरता क्या ना करता ! उनके कहे अनुसार करने लगी। उन्हें
जोश आया और वे तूफानी रफ़्तार से मुझे चोदने लगे। अब वे भी कुछ थक गए थे
और अपना पानी निकालना चाहते थे। मेरी झूठ-मूठ की आहें सच्ची हो गई और
मुझे फिर से आनन्द आ गया, मैं जोर से झड़ने लगी और मैंने उन्हें जोर से
झकड़ लिया।

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