मेरी मकान मालिक की बेटी

(Meri Makan Malik Ki Beti)

हेलो सभी दोस्तों को, मेरा नाम प्रवीन है  मेरी उम्र अभी 25 साल की है। ये मै अपनी पहली स्टोरी लिख रहा हु अगर कोई ग़लती हो तो माफ करना दोस्तो। मैं अपनी कहानी आपको तब की बता रहा हु  जब मैं नये शहर जयपुर आया था । मेरा एडमिशन यह कालेज में हो गया था ।

तो चलते हैं आज से 6 साल पहले जब मेरी ये कहानी शुरू होती है।

दोस्तो, सबसे पहले आपको बता दूँ अपने बारे में … मैं नार्मल सा देखता  हूँ  मेरा रंग रूप सामान्य है. मेरी लम्बाई जरूर असमान्य है. मैं 5 फुट 11 इंच का हूँ । मेरा लण्ड 6 इंच ओर 2.5 इंच मोटा है, ज्यादा मोटा ओर लम्बा नही है ।

अब ज्यादा बात को न भूमा कर बताता हूं उस लड़की के बारे मैं उस का नाम था रिया , जैसा नाम बेसा उस का हाल हर जगह से एक दम बम, संगीता और मेरा एक कनेक्शन ये भी था कि अनजाने मैं ही सही बो मेरी मकानमालिक की बेटी थी । ।

उस का फिगर तो एक एक पार्ट मस्त करने वाला था, उस की बॉल्स तो एक नंबर के थे 32 कि बॉल और 34 कि उस गांड ओर कमर 30 की कुल मिलाकर (32 30 34)चेहरे से लेकर निचये तक कमाल थी।

अब बात सुरु होती है जब हमारे कॉलेज ईयर के फाइनल एक्सेनमेन्ट सममित होने थे, एक दिन बो मेरे रूम पर आ कर कहती है प्रवीन मरे प्रोजेक्ट्स बना दो मेरा कुछ भी नही हुआ है एक्सेनमेन्ट तो बना लिए मैन पर मैने क्या देखता हूं कि ….

बो एक लोवर ओर टीशर्ट मै मेरे रूम के गेट पर है और मैं उस को बहुत गूर के देख रहा हु तो बोली क्या हुआ ऐसे क्या देख रहे हो कभी कुछ देखा नही है क्या ,

मेरी तो हालत खराब हो गई अचानक मेरे मुंह से निकल गया नही देखा तुम  दिखा दो।

अब तो मेरी हालत गंभीर हो गए और डर भी लगने लगा पर उस ने खुद ही कह दिया अभी तक किसी ने देखा ही नही तुम कभी भी देख लेना , पता नही क्या हुआ कि …..

मैंने उसके सिर को पकड़ा और अपने नाजुक होंठ उसके होठों पर रख कर उसे किस करने लगा, तो उस  का पूरा बदन थरथरा रहा था, फुल एसी में भी उसे पसीना आ रहा था। उसने होश में आते ही मुझे पीछे धकेल दिया और ज़ोर से साँस लेने लगी, मैं उसके साथ गेट के पीछे हो कर  सीट पर बैठा दिया।

“ये … क्या … कर रहे … हो तुम?” वह अब भी शॉक में थी।

“ओह … पुअर बेबी … क्या तुम्हें सच में यह नहीं चाहिए.” कहते हुए मैंने अपने हाथों से उस के दोनों स्तनों को हाथों से पकड़ कर उसके मुँह के सामने दबाने लगा।

मेरी हरकत देख कर वह शॉक हो गयी थी, पर अब धीरे धीरे उत्तेजित होने लगी थी। शॉक की वजह से उसका मुँह खुला ही रह गया था और वह बिना पलकें झपकाए अपने स्तनों की ओर देख रही थी ।

“क्या हुआ …  कुछ छूना है तुम्हें?” मैं अपने बदन को अजीब  ढंग से हिलाकर उसे और उत्तेजित करते हुए बोला

आखिरकार उस  का डर थोड़ा कम हुआ और उसने हाँ में सर हिलाया।

“तो छू लो इसे अपने लण्ड को आगे करते हुए बोला” कहकर मैं उस के स्तनों को उसके सामने ले आया .

उसने डरते हुए ही अपने हाथ मेरी पैंट के ऊपर रखने के लिए आगे की साइड किये तो मैने अपने हाथ उस के स्तनों पर रख दिये।

“उफ …” बहुत दिनों बाद किसी ने मेरे लण्ड को छुआ था, उसका हाथ अभी भी थरथरा रहा था।

उस के  स्तन बिल्कुल उसके मुँह के सामने थे थोड़ी देर उन्हें मसलने के बाद उसका डर खत्म हो गया और उसने ऊपर मेरी तरफ देखा, उसकी आँखों में भी वासना का नशा चढ़ने लगा था। मैंने नीचे झुकते हुए उसके होठों पर अपने होंठ रख दिये, हम दोनों की आँखें अपने आप बंद हो गयी और हम किस करने लगे।

उसके हाथ अभी भी मेरे लण्ड को मसल  रहे थे, मेरे हाथ रिया के बदन को सहलाने लगे। उसके सीने को सहलाने हुए मैं धीरे धीरे नीचे की ओर जाने लगा . जैसे ही मेरा हाथ पेट के नीचे चला गया, मेरा हाथ उसकी पेंटी से टकराया। मैंने उस  को उठाया और अंदाजे से आगे बेड पर फेंक दिया. उस की आँखें अभी भी बंद थी और हम दोनों एक दूसरे के होठों को चूसे जा रहे थे।

मैंने धीरे से अपनी जीभ को उसके मुँह में डाल दिया, उसने भी अपना मुँह खोल कर मेरी जीभ का स्वागत किया। हमारी जीभ एक दूसरे से द्वंद्व खेल रही थी, उसके हाथ मेरे लण्ड को मसलने में व्यस्त थे और मेरा हाथ उसके बूब्स के काफी करीब पहुँच गया था। मैंने अपना हाथ उस की चूत के ऊपर हटा  लिया , उस पर  लंड से  रखा और हल्का सा दबाया, मेरे छूने से उसके बदन में थरथराहट हुई और उसकी जांघें अपने आप खुल गई।

बो मेरी बेल्ट और पैंट खोलने की कोशिश करने लगी, पर उस एक हाथ से यह बहुत मुश्किल था। तभी रिया ने किस तोड़ी और अपने हाथ से मेरी बेल्ट और पैंट खोली। यह करते हुए वह बार बार लड़खड़ा रही थी, शायद उसे भी अब कंट्रोल नहीं हो रहा था।

उसने मेरे लंड को लॉली पॉप की तरह डायरेक्ट अपने मुँह मैं लेकर टोपा हल्का चॉकलेटी रंग का है  और नींबू की तरह फूला हुआ था। मैंने हाथ से उसको अपने नीचे खींचा. मेरा इशारा समझते हुए उसने अपनी पैंट और अंडरवियर अपने कूल्हों के नीचे से उतारकर घुटनों के नीचे तक ले आया। उसकी पैंट अब मैट पर थी और उसके पैर अभी भी उसके पैंट के अंदर ही थे.

बो बाल रहित लंड को मंत्रमुग्ध होकर देख रही थी।

अब बेड से नीचे उतरी की मैट पर घुटनों के बल बैठ गयी, उस की हाइट कम होने की वजह से बहुत आगे खिसकी हुई थी और  मेरे हाथ उस के पीछे बहुत आसानी से चूत के पास की जगह पहुँच रहे थे ।

उस ने लंड के नजदीक जाते हुए अपनी उंगलियाँ उसके बॉल्स से होते हुए उसके टोपे तक घुमाई।

“आह …” मेरे  मुँह से एक सिसकारी निकली और आगे क्या होने वाला है इस उत्सुकता से मेरी  तरफ देखने लगी

“चलो अब  मैं तुम्हारा  लेती हूं.” कहकर  उसके गर्म लंड को अपनी मुठ में पकड़ा और उसे ऊपर नीचे करने लगी।

” मैंने उस से पूछा … लंड की मोटाई और लंबाई कैसे नापते है?”

“आह … टेप से … ओह …” संगीता ने मुश्किल से बोला।

“गलत जवाब!” मैं उसके बॉल्स को दबाते हुए बोला।”आह … सॉरी …” वह दर्द से चिल्लायी।

मैं नीचे झुकते हुए बोला- पहले लंड की मोटाई नापने के लिए उसके टोपे पर इस तरह जीभ घुमाते हैं.” कहकर मैंने अपने  सूखे टोपे पर उस की  जीभ को चारों तरफ से घुमाई और उसे पूरा गीला कर दिया- फिर लंड को ऐसे मुँह में लेकर उसकी लंबाई नापते है

कह कर मैं धीरे धीरे अपना  लंड उस के मुँह में देकर चूसाने लगा. मैं उस के  पूरा लंड मुँह मैं दे कर  अंदर देने  की कोशिश कर रहा था

जैसे जैसे मेरा  लंड उस के  मुँह में घुस रहा था वैसे वैसे मेरा मुँह भरने लगा था, लंड अब गले को टकरा रहा था।

इसलिए मैंने उसको चूमना जारी रखा. वो बार-बार मुझे ना करती रही लेकिन उसकी हर ना मुझे हां छुपी हुई दिखाई दे रही थी. मैं उम्र में उससे छोटा जरूर था लेकिन औरतों के बारे में इतना अनुभव तो मुझे भी हो ही चुका था.

मैं उसके सीने को चूमने लगा. उसकी गर्दन को किस करने लगा. उसकी छाती से मैंने ब्लैक कलर ब्रा को हटा दिया. ब्रा हटते ही उसके चिकने गोरे-गोरे उभार दिखने लगे, मेरे तो मुंह में जैसे पानी आ गया ।

मैंने किसी तरह अपना को सरका कर लन्ड बाहर निकाला। वो बोल तो कुछ नहीं रही थी अब, लेकिन अपने हाथ पांव से मुझे रोकने की कोशिश भी नहीं कर रही थी। मैंने भी पूरा जोर लगा कर उसके दोनों हाथों को उसके सिर के पास ऊपर बिस्तर पर रखा और एक ही हाथ से उसे दबाए रखा। फिर अपना लन्ड दूसरे हाथ से पकड़ कर उसकी चूत ढूंढने लगा. चुत ऐसे तैयार थी जैसे आज पूरा प्लान कर के आयी हो एक दम मैदान क्लियर ।

मैं तो पहले से ही उसकी जांघों के बीच में था। किसी तरह मुझे उसकी चूत का रास्ता मिल ही गया। उसकी चूत के पास मुझे एकदम गर्म गर्म महसूस हुआ

मैंने उसकी चूत को एक हाथ से फैलाया. एकदम गुलाबी और गीली थी भीतर से। मैंने एक उंगली डाल कर उसमें अपनी उंगली को अंदर बाहर किया और फिर अपनी जीभ से उसके दाने को सहलाने लगा।

वो एकदम मदहोश होकर मजे से मेरे सिर के बालों को सहलाने व नोंचने लगी. साथ ही उसके मुंह से मादक सिसकारियां निकलनी शुरू हो गयीं।

थोड़ी देर बाद मैंने उसकी चूत में जीभ घुसा-घुसा कर चाटना शुरू किया तो वो पागल हो गयी और मुझे कहने लगी- बस करो प्लीज, बस करो।

किंतु मैंने ठान लिया था कि आज इसको संतुष्ट किये बगैर नही जाने दुगा। इसमे गलती मैं नहीं चाहता था और अगर मुझे आगे भी मजा लेना है तो इसे अपने काबू में करना ही होगा।

वो शायद अब झड़ने को थी, तभी पूरी ताकत से उसने मेरे बालों को नोंचते हुए अपनी जांघों से मेरे सिर को दबा लिया. मैं जोर लगा कर उसकी चूत को चाटता रहा. मैंने उस पर कोई रहम नहीं किया जब तक कि उसने मुझे झटक कर अलग न कर दिया।

वो झड़ चुकी थी और हांफ रही थी.

मैंने फ़ौरन उसे वापस पकड़ा और उसके होंठों को चूमते हुए मैंने अपने एक हाथ से अपनी पैंट की जिप खोल कर लन्ड बाहर निकाल लिया और उसके एक हाथ में थमा दिया। उसने मेरा लन्ड मुट्ठी में भर लिया और तेजी से हिलाने लगी। मेरा लन्ड तुरंत खड़ा हो गया.

थोड़ी देर उसके होंठों को चूसने के बाद मैंने उसे इशारा किया कि वह भी मेरा लंड चूसे . मैंने उठ कर जबरदस्ती अपना लंड उसके मुंह के पास उसके गालों पर रगड़ना शुरू कर दिया. वो तब  मानी तो मैं अपना लंड उसके मुंह में घुसाने की कोशिश करने लगा.

वो कहती रही कि उस से अब नही होगा. मगर मैं उसके मुंह में लंड को देना चाहता था. मैंने कहा- तुम बस एक बार मुंह खोल लो और बाकी का काम मैं खुद कर लूंगा.

उसने काफी कहने के बाद अपना मुंह खोला और मैंने अपना लंड उसके मुंह में घुसा दिया.

फिर उसके मुंह में ही लन्ड पेलने लगा। उसका मुंह पूरा थूक से भर गया और लार किनारों से चूने लगी। सच में ही उसे लन्ड चूसना नहीं आता था. मैंने बस अपने तरीके से उसके मुंह को चोद कर छोड़ा और फिर तैयार हो गया।

मैंने सोच लिया था कि अब लम्बी पारी खेलनी है. उसकी गांड के नीचे तकिया पहले से ही था. मुझे केवल उसकी जाँघें फैला कर बीच में जाने की देरी थी। आराम से मैंने आसन लिया और फिर लन्ड हाथ से पकड़ कर उसकी चूत पर टिका कर हल्का सा धकेलते हुए उसके ऊपर लेट गया.

लन्ड की एक-एक नस और चमड़ी खिंचते हुए पीछे की तरफ जा रही थी. मेरा पूरा सुपारा खुल कर लंड भीतर चला गया. उसके चेहरे पर अजीब सी तड़प थी मानो कि वो भी इसी पल के इंतजार में थी.

मैं पूरे यकीन के साथ कह सकता हूं कि रिया को मेरे लंड से आनन्द मिल रहा था.

पूरा लंड घुसने के बाद मेरा चेहरा उसके चेहरे के बिल्कुल पास आ गया. उसने बड़े ही प्यार से मेरे होंठों को चूमा और अपने दोनों हाथों से मुझे पकड़ लिया. उसने अपनी गांड थोड़ी सी उचकाई और फिर अपनी टांगें मेरी जांघों के ऊपर रख कर अपनी चूत को फैलाते हुए अपने आप को उसने मेरे हवाले कर दिया.

मैंने लंड को उसकी चूत में दबाते हुए पूछा- कैसा लग रहा है मेरी जान?

वो एक लम्बी सी सांस भरते हुए बोली- बस पूछो मत, ऐसे ही प्यार करते रहो मुझे।

बस मुझे इतना ही तो सुनना था. मैंने अपने होंठ उसके होंठों से चिपकाए और चूमते हुए उसकी चूत में धक्के देने लगा. मेरे धक्के बहुत ही हल्के थे लेकिन फिर भी रिया के मुंह से सिसकारी निकल रही थी. मैं भी महसूस कर पा रहा था कि बरसों के बाद उसकी चूत को आज लंड का सुख मिल रहा है.

मेरे धक्के धीरे-धीरे बढ़ते गए और हम दोनों के बदन गर्म होने लगे. मेरी छाती से उसकी छाती, मेरे पेट से उसका पेट और मेरी जांघों से उसकी जांघें चिपक गईं और बीच में पसीना आना शुरू हो गया था. उसकी चूत से पानी इस तरह रिस रहा था कि मुझे ये पता भी नहीं लग रहा था कि मेरा लंड चूत की चमड़ी में रगड़ खा रहा है या कहीं मक्खन में घुसा जा रहा है.

वो पूरी मस्ती में आ गयी थी. वो भी मुझे चूमने और नोंचने लगी. कभी-कभी अपनी गांड को इस तरह उचकाती थी कि ऐसा लगता था कि मेरे लंड को और अंदर तक लेना चाहती हो. उसके बाद कुछ पल तक शान्त हो जाती और फिर से मेरा साथ देने लगती.

बीस मिनट से ज्यादा समय हो गया था उसकी चूत चोदते हुए मुझे।  इसलिए मेरा जोश इतनी जल्दी ठंडा होने वाला नहीं था.

मगर थकान तो महसूस होने लगी थी. लगातार धक्के मारने की वजह से मेरी कमर में अकड़न सी महसूस होने लगी थी.

मैंने उसे बोला- चलो, अब तुम ऊपर आ जाओ!

उसने जरा सा भी नखरा नहीं दिखाया और फ़ौरन मेरे उठने के बाद वो भी उठ बैठी। मेरा लन्ड एकदम टनटना रहा था और चिपचिपे झाग की तरह हो चुके पानी में डूबा हुआ था। रिया ने अपनी टांगें पहले थोड़ी सीधी कीं फिर मेरे ऊपर टांगें फैला कर आ गयी। मैं समझ सकता था कि उसकी जांघों में भी अकड़न हो गयी होगी इतनी देर फैलाये रखने में।

मगर अभी भी वो गर्म थी, वरना ज्यादातर लड़कियां  सुस्त होकर लेट जाती हैं। उसकी चुत  पूरी तरह से भीग गयी थीं और चूत के किनारे गोल आकार में आ गये थे. मैंने उसकी लोबर से लन्ड पौंछा और उसने भी अपनी चूत पौंछी, फिर सीधा मेरे लन्ड को पकड़ कर अपनी चूत की तरफ करके बैठ गयी।

मेरा लन्ड थोड़ा खिंचाव सा महसूस करता हुआ उसकी चूत में घुस गया। हम दोनों को हल्का सा दर्द महसूस हुआ. मगर जब वो दो-तीन बार उछली तो मजा आ गया. अब लगने लगा था कि चमड़ी से चमड़ी रगड़ा खा रही है.

वो सिसियाते हुए धक्के मार मार कर चुदवाने लगी। मस्त तरीके से आगे की तरफ धकेल रही थी अपनी चूत मेरे लन्ड पर। मुझे कुछ गोल मांस का छोटा सा टुकड़ा लन्ड पर महसूस हो रहा था जब जब वो अपनी चूत को आगे धकेलती थी और हम दोनों मजे से एक दूसरे को पकड़ते हुए जोर लगा रहे थे.

इतना मजा मुझे चआज तक किसी चीज में नही  आया था जितना इसके साथ आ रहा था। वो भी मस्ती से भर गई थी और थोड़ी ही देर में उसे जैसे मर्ज़ी होती थी वैसे धक्के मारते हुए अपनी चूत में लंड को मस्ती से लेने लगती थी.

अब मेरी हालत ऐसी हो गयी थी मानो कि अब किसी भी समय मैं वीर्य की पिचकारी छोड़ दूंगा। मैंने किसी तरह खुद को रोके रखा था.

और फिर जब वो बहुत ज्यादा थक गयी तो मैंने अपना आसन बदलने की सोची। वो हल्के-हल्के सुस्त होने लगी थी और बीच-बीच में पूछने लगी थी कि मेरा निकला या नहीं, मैं हर बार उसको बोलता था कि निकलेगा तो तुम्हें पता चल ही जायेगा।

मैंने उसे उठने को कहा और बोला- झुक कर गांड उठा लो।

उसने कहा- थोड़ा रेस्ट  लेने दो!

मेरे लिए भी सही मौका था कि थोड़ा रुक कर चोदने से और अधिक देर चुदाई होगी।

इसलिए मैंने अपना लन्ड उसके हाथ में थमा दिया. उसने अपनी लोबर से उसे पोंछा और लेट कर लन्ड को सहलाती रही।

कुछ देर के बाद उसने खुद ही बोला- कर लो जल्दी से, नहीं तो कोई भी आ सकता है ।

मैं तो कब से तैयार ही था बस उसके कहते ही मैंने उसे घोड़ी की तरह झुकने को कहा और उसने झुक कर अपनी गांड उठा दी।

इस स्थिति में उसकी चूत कितनी मस्त लग रही थी. मानो दो पाव रोटी जांघों के बीच फंसी हो।

मैंने अपने फनफनाते हुए लन्ड को सीधा उसकी चूत में घुसेड़ दिया और कमर पकड़ कर उसे फकाफक चोदना शुरू कर दिया।

एक तरफ मेरे धक्कों से थप-थप-थप की आवाजें निकल रही थीं तो दूसरी तरफ उसके मुंह से आह उम्म्ह… अहह… हय… याह… ओह्ह … ओह्ह की आवाज निकल रही थी।

मैं उसकी बात को नजरअंदाज करता रहा और काफी देर उसे ऐसे ही चोदता रहा.

वो कहने लगी- अब मुझे परेशानी हो रही है.

मगर उसकी गांड देख कर मेरा रुकने का मन नहीं कर रहा था. वो जोर देकर अपनी जगह से उठने लगी. मैंने उसे उठने दिया और फिर बिस्तर पर से नीचे खड़ी कर दिया और एक टांग बिस्तर पर चढ़ा कर फिर से उसे पीछे से चोदना शुरू कर दिया।

रिया  का शायद अब मन भर गया था और वो थकान महसूस करने लगी थी इस वजह से वो मेरा अब खुल कर साथ नहीं दे रही थी।

5 मिनट की चुदाई में वो चिड़चिड़ी होने लगी और मुझे जल्दी झड़ने को कहने लगी। मैं उसे थोड़ा और थोड़ा और कह कर चोदता रहा. फिर मैं भी थकने लगा था. उसे बिस्तर पर सीधा लिटा दिया पहले की तरह और उसके ऊपर चढ़ गया। मैंने उसकी जाँघे फैला कर जैसे ही अपना लन्ड घुसाने की कोशिश की तो वह बोली- कितना करोगे, मार ही डालोगे क्या मुझे?

मैं बोला- बस अब निकलने वाला है.

और लन्ड झट से उसकी चूत में घुसा कर धक्के मार-मार कर उसे चोदना शुरू कर दिया।

थोड़ी ही देर की चुदाई में उसके चेहरे के आव-भाव और हाथो पैरों की हरकतें बदल गयीं। वो मुझे फिर से कस के पकड़ने लगी और मुंह से सिसकारियां निकलने लगीं। मैं समझ गया कि इसे बहुत मजा आ रहा है अब और मैं तेज़ी से उसे चोदने लगा.

उसकी आंखें नशीली सी होने लगीं और मुंह से गर्म सांसें छोड़ने लगी वो। मैंने इतनी मस्ती में किसी लड़की  को आज तक नहीं सोचा था ना ही देखा था. उसे अब इतना मजा आने लगा था कि वो मुझे बार-बार चूमने लगी और प्यार करने लगी. मेरा बांध भी अब टूटने की कगार पर था तभी वो अपनी टांगें मेरी गांड के ऊपर रख कर दोनों टांगों को लपेट मेरी गांड पर रखते हुए मुझसे चिपकने लगी.

अपने हाथों में उसने मुझे कस कर भींच लिया और अपनी गांड उछालने लगी. उसकी ऐसी हालत देख कर अब मैं भी खुद को रोक नहीं पा रहा था. मैंने पूरी ताकत लगा कर धक्के मारना शुरू किया और वो चिल्लाने लगी। मेरा मन अब ऐसे होने लगा कि अब इसकी चूत फाड़ ही डालूं, वो दर्द में भी मजे लेने लगी.

और अचानक मेरा वीर्य अंडों से तेज़ी से निकलते हुए लन्ड के रास्ते सीधा उसकी चूत में उतर गया। मैं तब तक उसकी चूत में धक्के मारता रहा जब तक कि मेरे वीर्य की आखरी बूंद उसकी चूत में न झड़ गई.

मैं पूरी तरह झड़ चुका था और उसके ऊपर निढाल हो कर गिर पड़ा था। मैं शांत हो गया मगर रिया अभी भी कराह रही थी।

जैसे जैसे मैं ढीला पड़ता गया वैसे वैसे उसका भी कराहना कम होता चला गया।

5 मिनट के बाद मुझे होश आया तो मैंने अपना सिर उठा कर उसे देखा, वो भी मुझे देख कर मुस्कराते हुए शर्म सी महसूस कर रही थी.

मैंने उससे पूछा- मजा आया या नहीं?

उसने शर्माते हुए बताया- बहुत मजा आया, आज से पहले ऐसा मजा कभी नहीं आया था. ऐसा लग रहा है मानो तुमने मेरा पूरा बदन तोड़ कर रख दिया है। मगर जब उस ये कहा पहले कभी नही आया तो मुझे समझने मैं देर नही लगी पर बो बात कभी बाद मे कोई टाइम पर शेयर करुगा ।

ये कहते हुए हम दोनों ने फिर से एक दूसरे को थोड़ी देर चूमा और फिर उसको  जल्दी से जाने को कहा। उसका वो गोरा बदन छोड़ कर जाने देने का मेरा मन अभी भी नहीं कर रहा था लेकिन मुझे मजबूरन उठना पड़ा. वो उठ कर मेरे वीर्य को साफ करने जाने लगी ।

बिस्तर की हालत भी बुरी हो चुकी थी. जिस जगह पर उसकी गांड टिकी हुई थी वहां से पूरा बिस्तर गीला हो गया था. जाते हुए उसने बताया कि वो कई बार झड़ गई है. मैंने समय का अन्दाजा लगाया तो लगभग डेढ़ घंटे हमारी चुदाई चली.

इसमें करीब पौन घण्टा तो कम से कम मैंने लन्ड उसकी चूत में रखा ही होगा। ये भी पता चला कि जब जब वो पूरे जोश में मुझे पकड़ कर अपने चूतड़ हिला रही थी, तब-तब वो झड़ रही थी.

रिया  की चुदाई करने के बाद अब मेरा रास्ता साफ हो गया था. अब मैं जब चाहूं उसकी चूत को आकर चोद सकता था. लेकिन फिर भी मौके की तलाश तो करनी ही पड़ती थी. बाद मैं कैसे उस की गाण मारी ।

आपको मेरी यह कहानी पसंद आई या नहीं … मुझे अपनी प्रतिक्रिया दें ताकि मैं अपने जीवन के कुछ और रोचक किस्से आप सब के साथ बांट सकूं.

मैं प्रवीण कुमार फिर से किसी रोचक घटना को लेकर आऊंगा. आप मुझे मेल कर के जरूर बता सकते है ।

Rituss150614@gmail.com

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