मेरी नैनीताल वाली दीदी की चुदाई -3

Meri Nainital Vali Didi ki chudai-3

दीदी- तुम्हें कैसे पता की बुर चिकनी होता है और बाल वाली भी?

मैंने कहा- वो मैंने अपनी नौकरानी की बुर तीन चार बार देखी है। उसके बुर में एकदम से घने बाल हैं। उसकी बुर तो काली भी है। तुम्हारी तरह सफ़ेद बुर नहीं है उसकी।

दीदी- अच्छा, तो तुमने अपनी नौकरानी की बुर कैसे देख ली?

मैंने कहा- वो जब भी मेरे कमरे में आती है ना तो अगर मुझे नहीं देखती है तो मेरे शीशे के सामने एकदम से नंगी हो कर अपने आप को निहारा करती है। उसकी यह आदत मैंने एक दिन जान ली। तब से मैं जानबूझ कर छिप जाता हूँ और वो सोचती थी कि मैं यहाँ कमरे नहीं हूँ, वो वो नंगी हो मेरे शीशे के सामने अपने आप को देखती थी।

दीदी- बड़े शरारती हो तुम।

मैंने कहा- वो तो मैंने दूर से काली सी गन्दी सी बुर को देखा था जो घने बालों के कारण ठीक से दिखाई भी नहीं देती थी लेकिन आपकी बुर तो एकदम से संगमरमर की तरह चमक रही है।

दीदी- वो तो मैं हर इतवार को इसे साफ़ करती हूँ। कल ही इतवार था, कल ही मैंने इसे साफ़ किया है।

अब मुझसे रहा नहीं जा रहा था। समझ में नहीं आ रहा था कि कहाँ से शुरु किया जाए ? मुझे कुछ नहीं सूझा तो मैंने दीदी को पहले अपनी बाहों से पकड़ कर बिस्तर पर लिटा दिया ।

अब वो मेरे सामने एकदम नंगी पड़ी थीं। पहले मैंने उनके खूबसूरत जिस्म का अवलोकन किया, दूध सा सफ़ेद बदन। चूचियों का सौन्दर्य देखते ही बनता था। लगता था संगमरमर के पत्थर पे किसी ने गुलाब की छोटी कली रख दिया हो। चुचूक एकदम लाल थे, सपाट पेट, पेट के नीचे मलाईदार सैंडविच की तरह फूली हुई बुर ! बुर का रंग एकदम सोने के तरह था।

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उनकी बुर को हाथ से खोल कर देखा तो अन्दर लाल लाल तरबूज की तरह नज़ारा दिखा। कहीं से भी शुरू करूं तो बिना सब जगह हाथ मारे उपाय नहीं दिखा। सोचा ऊपर से ही शुरू किया जाए।

मैंने सबसे पहले उनके रसीले लाल ओठों को अपने ओठों में भर लिया, जी भर के चूमा।

इस दौरान मेरे हाथ दीदी की चूचियों से खेलने लगे। दीदी ने भी मेरे चुम्बन का पूरा जवाब दिया। फिर मैं उनके ओठों को छोड़ उनके गले होते हुए उनकी चूची पर आ रुका। काफ़ी बड़ी और सख्त चूचियाँ थी, एक बार में एक चूची को मुंह में दबाया और दूसरी को हाथ से मसलता रहा। थोड़ी देर में दूसरी चूची का स्वाद लिया। चूचियों का जी भर के रसोस्वदन के बाद अब बारी थी उनकी महान बुर के चखने की। ज्यों ही मैं उनकी बुर के पास अपना सर ले गया, मुझसे रहा नहीं गया और मैंने अपनी जीभ को बुर के मुंह पर रख दिया, स्वाद लेने की कोशिश की तो हल्का सा नमकीन सा लगा।

मजेदार स्वाद था।

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अब मैं पूरी बुर को अपने मुंह में लेने की कोशिश करने लगा। दीदी मस्त होकर सिसकारी निकालने लगी। मैं समझ रहा था कि दीदी को मज़ा आ रहा है। मैंने और जोर जोर से दीदी की बुर को चुसना शुरू किया। करीब पन्द्रह मिनट तक मैं दीदी की बुर का स्वाद लेता रहा।

अचानक दीदी ज़ोर से आँख बंद करके कराही और उनकी बुर से माल निकल कर उनकी बुर की दरार होते हुए गांड की दरार की ओर चल दिया। मैंने जहाँ तक हो सका उनकी बुर के रस का पान किया। मैंने देखा अब दीदी पहले की अपेक्षा शांत हैं लेकिन मेरा लिंग महाराज एकदम से तनतना गया।

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मैंने दीदी के दोनों पैरों को अलग अलग दिशा में किया और उनके बुर की छिद्र पर अपना लिंग रखा और धीरे धीरे दीदी के बदन पर लेट गया, इससे मेरा लिंग दीदी के बुर में प्रवेश कर गया। ज्यों ही मेरा लिंग दीदी के बुर में प्रवेश किया दीदी लगभग छटपटा उठी।

मैंने कहा- क्या हुआ दीदी? जीजा जी का लिंग तो मुझसे भी मोटा है ना तो फ़िर तुम छटपटा क्यों रही हो?

दीदी- तीन महीने से लिंग बुर में नहीं गया है न इसलिए बुर थोड़ी सिकुड़ गई है। उफ़, लगता नहीं है कि तुम्हें चुदाई के बारे में पता नहीं है। कितनियों की ली है तूने?

मैं बोला- कभी नहीं दीदी, वो तो फिल्मों में देख कर और किताबों में पढ़ कर सब जानता हूँ।

दीदी बोली- शाबाश गुड्डू, आज प्रेक्टिकल भी कर लो। कोई बात नहीं है, तुम अच्छा कर रहे हो, चालू रहो, मज़ा आ रहा है।

मैंने दीदी को अपने दोनों हाथों से लपेट लिया। दीदी ने भी अपनी टांगों को मेरे ऊपर से लपेट कर अपने हाथों से मेरी पीठ को लपेट लिया। अब हम दोनों एक दुसरे से बिल्कुल गुथे हुए थे। मैंने अपनी कमर धीरे से ऊपर उठाया इससे मेरा लिंग दीदी की बुर से थोड़ा बाहर आया। मैंने फिर अपनी कमर को नीचे किया, इससे मेरा लिंग दीदी की बुर में पूरी तरह से समा गया। इस बार दीदी लगभग चीख उठी।

अब मैंने दीदी की चीखों और दर्द पर ध्यान देना बंद कर दिय और उनको प्रेम से चोदना शुरू किया। पहले नौ-दस धक्के में तो दीदी हर धक्के पर कराही लेकिन दस धक्के के बाद उनकी बुर चौड़ी हो गई। तीस पैंतीस धक्के के बाद तो उनकी बुर पूरी तरह से खुल गई। अब उनको आनन्द आने लगा था। अब वो मेरे चूतड़ों पर हाथ रख कर मेरे धक्के को और भी जोर दे रही थी।

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चूँकि थोड़ी देर पहले ही ढेर सारा माल निकल गया था इसलिए जल्दी माल निकालने वाला तो था नहीं, मैं उनकी चुदाई करते करते थक गया।

अगले भाग में कहानी समाप्त-

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