मेरी साली ने अपनी चूत चुदाई नौकर से-1

(Meri Sali Ne Chut Chudai Naukar Se-1)

प्यारे दोस्तो तथा सहेलियो, मैं फिर से हाजिर हूँ एक क्रास कनेक्शन की आप बीती लेकर!
उसी साली की आगे की कहानी पढ़ें!
हुआ यूँ कि मैंने अपनी साली ममता को फोन किया कि थोड़ा हाल चाल भी जान लूँ और कह भी दूँ कि हम लोग गर्मियों की छुट्टियों में बेगूसराय आ रहे हैं, आप अपने जंगलों को साफ कर लें, मेरा शेर आकर सीधे गुफा में जाने के लिए तैयार है।

पर हुआ कुछ उल्टा फोन शायद एकतरफा हो गया मैं उसकी आवाज तो सुन रहा था पर वह मेरी आवाज नहीं सुन पा रही थी।
उसने हैलो हैलो बोला लेकिन मेरी आवाज उसे सुनाई नहीं ड़े रही थी तो उसने मुझे फोन कह दिया कि आधे घंटे में वो कॉलबैक करेगी।
इतना कह कर उसने फोन रख दिया पर गलती से फोन काटना भूल गई।

वह अपनी सहेली अर्पणा के साथ गप्पें लड़ा रही थी, दोनों के बीच किसी चुदाई का किस्सा चल रहा था।
ममता और अर्पणा मौसरी बहनें हैं, ममता एक दो माह बड़ी है तो उसकी दीदी थी पर सखी पक्की थी दोनों, सभी बात शेयर करती थी।
दीदी- आज महेश को खा कर आयी हूँ।
“अरे कैसे? वो भी इतने लोगों के बीच में नौकर से चुद गई?”
अब मुझे समझ में आया महेश को खाने का मतलब!

“मैं नहीं बताती… आप ने अपनी बात भी तो नहीं बताई।”
“कौन सी बात मैंने नहीं बतायी तुमको? एक तुम्ही तो हो जिससे मैं सारी बात शेयर करती हूँ।”
“छोड़ो, तुम बदल गयी हो दीदी, सच सच बताओ क्या तुम इस बार जीजू को खा कर नहीं आयी हो?”

ममता हकलाने लगी, कहने लगी- अच्छा बाबा, जब चोरी पकड़ी गयी तो अब तुमसे क्या शरमाना और छिपाना!
“नहीं दीदी, दिस इज चीटिंग…(यह धोखा है.) मैं आपनी अपनी सारी बात बताती हूँ और आप इत्ती बड़ी बात छुपा गयी?”
“चलो सॉरी, अपनी बात मैं रात में बिस्तर पर बताऊँगी. एक लंबी कहानी है… पर तुम समझी कैसे कि मैं इस बार जीजू से चुदवा कर आयी?”
“चाल दीदी चाल… कुंवारी लड़की और चूत चुदाई की हुई लड़की के चाल में मामूली अंतर आ जाता है. वो हम लड़कियाँ असानी से समझ जाती हैं।”

“चल अब तो सुना?”
“नहीं दीदी, अब तुम एक्सपर्ट हो गयी हो तो अब रात में घूंस देना पड़ेगा!”
“अब रात में क्या घूंस चाहिए?”
“सोचो दीदी सोचो…”
“चलो मैंने हार मानी!”
“दीदी जिस तरह जीजा ने तुम्हें चोदा, ठीक उसी तरह तुम आज रात मेरी ठुकायी करोगी. बोलो मंजूर या नहीं?”
“बस इत्ती सी बात? मुझे मंजूर है।”
“अब सुना अपनी कि कैसे अपने नौकर से तुम चुद गयी?”

“दीदी जब बुर में सुरसुराहट होती है न… तब दिखाई नहीं देता कि वहा नौकर है या जीजू!”
दोनों बहनें खिलखिला कर हँसने लगी।आप इस कहानी को HotSexStory.Xyz में पढ़ रहे हैं।

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“हुआ यूँ कि रात में एक चौकी पर मैं सोयी थी तो पलंग पर मम्मी पापा सोये थे। रात काफी बीत चुकी थी, मैं शायद खर्राटा मार मार कर सो रही होऊँगी। न जाने कैसे नींद टूट गयी। थोड़ी देर में आँख अंधेरा में देखने को अभ्यस्त हो गयी तो क्या देखती हूँ कि पापा का मूसल पावर हवा में लहरा रहा है। मम्मी अपने हाथों से उपर नीचे कर रही थी और सर मेरे तरफ घुमा कर आश्वस्त होना चाह रही थी कि मैं उठ तो नहीं गयी।
बीच बीच में मैं जानबूझ कर खर्राटा लेती रही।

जब मम्मी पूरी तरह से समझ गयी कि मैं गहरी नींद में हूँ तो उन्होंने आगे का खेल जारी रखी।
मम्मी तेजी से पापा के लंड को उपर नीचे मुठ मार रही थी, सूखा रहने के कारण पापा को थोड़ी तकलीफ हो रही होगी, मम्मी को समझते देर न लगी, वह उठी और पापा के मूसलचंद को मुँह में लेकर चूसने लगी और ढेर सारा लार लंड पर छोड़ती भी जा रही थी, एक हाथ से सुपारे के नीचे वाले भाग ऊपर नीचे कर रही थी, थोड़े देर में बोली ‘अब पूरा गीला तथा चिकना हो गया है।’
पापा उठे, एक बार मेरे तरफ देखा, मैं जोर जोर से खर्राटा मार रही थी.
मम्मी बोली ‘अरे उसकी नींद बहुत गहरी होती है अभी बारात भी बगल से गुजर जाए तो भी वह उठेगी नहीं!’
मुझे तो हँसी आ गयी, किसी तरीके से अपनी हँसी पर काबू पाया।

उन्होंने कार्यक्रम जारी रखते हुए पापा अपने जीभ से मम्मी के कान के पीछे चाटना शुरू किया मम्मी तुनक कर बोली- आप तो पूरे शरीर को ही झूठा कर देते हैं।
पापा शरारत से बोले- भगवान का दिया प्रसाद है, खाने से तो झूठा होगा ही, प्रसाद न खाऊँ तो भगवान भी बुरा मान जाऐंगे।
दोनों इस बात पर हँस पड़े।
कान के नीचे से जीभ को ले जाते हुए दोनो उरोजों के चारों तरफ से चाटते हुए चूची की घुंडी को पहले अपने होंठों से फिर होंठ और दांत से चूसने लगे।
मम्मी की चूची को पापा अपने दोनों हाथों से पकड़ कर पूरी चूची को अपने मुँह में घुसाने की कोशिश कर रहे थे। मम्मी को पापा के इस प्रयास में मजा आ रहा था, मम्मी भी अपने कंधे उचका कर चूची को पापा के मुँह में घुसाने की कोशिश कर रही थी तथा दूसरे हाथ से चूची को ठेल कर मुँह के अंदर कर रही थी। मम्मी की आधी चूची मुँह के अंदर थी और भीतर में जीभ चूची और चूचक के साथ अठखेलियाँ कर रहा था।

मम्मी कसमसा रही थी, बर्दाश्त की सीमा को पार करते ही मूठ मारना छोड़ पापा के सिर को पकड़ कर अपने चूची के ऊपर दबाने लगी, इतना जोर से दबाया कि एक समय पापा सांस के लिए अकबका गये।
फिर यही अत्याचार दूसरी चूची पर भी हुआ।

मम्मी पापा का लौड़ा छोड़ अपने चूत को सहलाने लगी, चूत के दोनों ओर उठे चमड़ों को दोनों अंगुलियों से पकड़ पकड़ के खींच रही थी अपने फुद्दी को सहला रही थी।
पापा अपने जीभ से चाटते हुये नाभि को पूरा गीला कर दिया और अचानक से मम्मी का हाथ फुद्दी पर से हटाते हुए पूरे चूत को चूसना शुरू कर दिया। उस समय तक मम्मी की चूत काफी पानी छोड़ चुकी थी, पापा चूत को इस रफ्तार से चूत चूस रहे थे और आवाज निकाल रहे थे मानो कि कोई बिल्ली रात में पानी सरप सरप कर पी रही हो।

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