मम्मी की चूत का भोसड़ा बनवाया-3

Mummy ki choot ka bhosda banwaya-3

तभी मोहित ने अचानक से अपना पूरा लंड अंदर घुसा दिया, जिसकी वजह से वो ज़ोर से चिल्लाई, आईईईईईई माँ फट गयी रे मेरी चूत क्या घुसाया है दूसरी ही बॉल पर छक्का मार दिया रे?

मोहित ने उनकी मस्ती को देखते हुए अपनी स्पीड को बढ़ा दिया और माँ को मज़ा आने लगा तो वो बोल उठी और ज़ोर से डाल फाड़ डाल, क्या मस्त चोदता है, ऐसा मज़ा तो पहली रात को भी नहीं आया और माँ बोली कि मेरी चूत का तो आज भोसड़ा बनेगा, क्योंकि मेरी चूत बहुत तंग है और मम्मी झड़ गयी. फिर थोड़ी देर आराम करने के बाद माँ बोली कि आज लगता है कि चूत पूरी तरह से फट जाएगी और फिर अनिल बोला कि भाभी अब मेरी बारी है.

माँ बोली कि हाँ में तैयार हूँ और फिर वो अपने दोनों हाथों से माँ के बूब्स को मसल रहा था और पेट पर लेटकर मम्मी की नाभि को चूस रहा था और 5-6 मिनट तक नाभि को चूसने के बाद उसने माँ की चूत को मसलना शुरू किया और मसल मसलकर माँ की चूत को लाल कर दिया.

तब मम्मी बोली कि प्लीज अब चोद दो मुझे. दोस्तों उसका तना हुआ लंड एकदम माँ की चूत के छेद पर था और वो चोदने को तैयार होने लगा और माँ कहने लगी उफफ्फ्फ्फ़ माँ में मर गई, यह क्या हो रहा है ओफफफ्फ़ अब और सहन नहीं होता, प्लीज अब डाल दे मेरे राजा. फिर उसने पूछा क्या डालूं मेरी जान? वो बोली कि तेरा मोटा लंड डाल दे मेरी चूत में और इसे फाड़ दे.

फिर वो बोला ले यह डाल दिया और अब बताना कितना चाहिए नहीं तो यह चूत फट जाएगी, अनिल ने आधा ही डाला था और माँ बोली बस, तो अनिल लंड को अंदर बाहर करने लगा और कुछ देर बाद उसने एक साथ अपना पूरा लंड उनकी चूत में डाल दिया तो मम्मी उूईईईईई फट गईईई और माँ की चूत की ऐसी घिसाई की जिससे चूत का पानी निकल गया और अनिल ने अपने वीर्य से माँ की नाभि को भर दिया और फिर एक उंगली नाभि में डालकर नाभि की मालिश करने लगा.

अब कमल चाचा की बारी थी. फिर अनिल और मोहित माँ के बूब्स को मसलने लगे और कमल चाचा आंटी की चूत की मालिश करने लगे, वो माँ की चूत की फांको को अपने हाथों से मसल रहे थे और माँ के मुहं से ऊऊऊऊऊऊ ओह्ह्ह हाँ ऐसे ही अब थोड़ा ज़ोर से और तेज की आवाज़ आने लगी और फिर कमल अंकल ने अपना तना हुआ मोटा लंड मम्मी की चूत से रगड़ने लगे और फिर अंकल ने अपने लंड को पकड़कर मम्मी की चूत पर चाबुक की तरह मारने लगे जैसे ही अंकल का हथियार माँ की चूत से टकराता पटकककक पटकककक की आवाज़ आती और कुछ देर में मम्मी की चूत लाल पड़ गई.

फिर माँ बोली कि प्लीज अब डाल दो मेरे राजा मुझे और मत तरसाओ चीर दो इस चूत को, फाड़ दो मेरी भोसड़ी को, कमल अंकल बोले कि भाभी जी आज आपकी कुतिया यानी चूत को तो फाड़ दूंगा, तो माँ हंसने लगी और बोली कि चूत के नसीब में एक दिन फटना ही लिखा है, चलो अब फाड़ दो तुम मेरी चूत को.

फिर वो भी तैयार हो गए थे और उन्होंने अपना लंड माँ की चूत पर रखकर धक्का लगाया, लेकिन वो नहीं घुसा तो उन्होंने धीरे से अपने लंड के टोपे को चूत में घुसाया और फिर पूरी जान से एक झटका मारा और उनका पूरा लंड माँ की चूत में डाल दिया और वो चीखने लगी और थोड़ी देर में माँ का दर्द गायब हो गया और अब माँ को भी मज़ा आने लगा.

फिर माँ ने अपनी कमर को ऊपर नीचे करना शुरू कर दिया और अंकल अपने लंड को अंदर बाहर करने लगे और माँ ने भी जोरदार धक्का देना शुरू कर दिया और जब अंकल का लंड माँ की चूत में होता तो वो उसे कसकर पकड़ लेती और अपनी चूत को सिकोड़ लेती.

अंकल ने भी पूरी जान से धक्का मारा और मम्मी की लंड से पकड़ छूट गई और लंड माँ की चूत की गहराई तक चला गया और वो पूरा कमरा चुदाई की आवाज़ से भर गया था, आहहह ऊओऊऊहह हाँ मेरे राजा मर गई रे उईईईईईई माँ फट गई रे और कुछ देर लंड माँ की चूत में अंदर गया और बाहर निकला और फिर ढेर सारा वीर्य माँ की चूत में निकल गया और फिर कुछ देर तक अंकल माँ के ऊपर ही लेते रहे और फिर वो हट गये और कहने लगे कि वाह मज़ा आ गया मेरी रानी.

अब मम्मी कह रही थी कि मुझे भी बहुत मज़ा आया और फिर माँ उठकर नहाने चली गई और जीतू भी बाथरूम में चला गया और उसने मम्मी के बूब्स चूत पर साबुन लगाकर बहुत मालिश की उसके बाद वो मम्मी को नहलाने लगा, वो माँ की चूत पर पानी की धार मार रहा था. फिर कुछ ही देर में मम्मी की चूत एक बार फिर से खिल उठी और इधर जीतू का लंड भी तन गया. फिर माँ बोली कैसे इसको तड़पा रहा है?

वो बोली कि चल इधर आ उसके बाद उन्होंने जीतू का लंड भी अपनी चूत में ले लिया और अंकल ने माँ की चूत को बहुत खोल दिया था, इसलिए अब जीतू का लंड भी बड़े आराम से माँ की चूत में आ गया और वो कब झड़ गया मम्मी को पता भी नहीं चला.

फिर उसके बाद माँ और जीतू नहाकर बाथरूम से बाहर आ गए और माँ ने अपने कपड़े पहने और फिर हम सभी खाना खाने को टेबल पर बैठ गये. उसके कुछ देर बाद माहोल रंगीन हो गया और खाना खाने के बाद हम लोग वहां से आने को तैयार हुए.

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फिर कमल अंकल माँ के बूब्स को दबाते हुए बोले कि अब जल्दी आना मेरी जान मुझे तुम्हारी बहुत याद आएगी और तब माँ बोली कि हाँ मेरे राजा हम दोबारा जरुर मिलेंगे और फिर अंकल माँ की नाभि की गोलाई पर अपनी उंगली फेरने लगे, जिसकी वजह से माँ उूउईई उउस्स्सुससू करने लगी और वो बोली कि प्लीज अब जाने दो.

फिर अंकल बोले कि हाँ ठीक है, लेकिन में पहले आपकी नाभि का मोती तो लगा दूँ और अंकल ने इतना कहते हुए माँ की नाभि में वो मोती जड़ दिया, जिससे बहुत खुश होकर माँ ने भी अंकल के होंठो को चूम लिया. उसके कुछ देर बाद मम्मी और जीतू घर के चल दिए और वो वहां पर पहुंचते ही सो गए, क्योंकि माँ और जीतू दोनों ही उस चुदाई की वजह से बहुत थक गये थे.

फिर अगली सुबह 12 बजे माँ की नींद खुल गई और वो उठकर फ्रेश होने चली गई. फिर थोड़ी देर बाद माँ नीचे आई तो उन्होंने नारंगी रंग की साड़ी पहन रखी थी और उन्होंने अपने पल्लू की गोल रस्सी को पीछे की तरफ डाल रखी थी, जिससे माँ के बूब्स की पहाड़ियाँ अलग अलग बटी हुई थी और वो दिखने में बहुत सुंदर आकर्षक लग रही थी और मम्मी के गोरे पेट, पतली कमर के बीचो बीच गोल और गहरी नाभि पर एक काले रंग का टेटू लगा था, जो उनके गोरे और मखमली जिस्म और भी ज्यादा निखार रहा था.

अब बाबा मम्मी को देखते हुए बोला वाह क्या बाला की सुन्दरता है तो माँ उसके मुहं से अपनी तारीफ को सुनकर मुस्कुराने लगी. अब माँ ने और उन दोनों ने एक साथ लंच किया. उसके बाद बाबा बोला कि चले आंटी तो माँ उससे पूछने लगी क्या तुम भी मेरी चुदाई करवाओगे? तो बाबा और जीतू माँ की उस बात को सुनकर हंस दिए और उनके साथ साथ मम्मी भी हंसने लगी.

फिर बाबा बोला कि आंटी हम थोड़ा सा मज़ा मस्ती करेंगे, आपको बहुत मज़ा आएगा. फिर माँ पूछने लगी क्यों थोड़ा सा या पूरा? तो बाबा बोला कि पूरा तो माँ बोली कि फिर तो ठीक है. अब बाबा और मम्मी बाबा के दोस्तों के यहाँ पर पहुंच गए. वहां पर मुझ सहित 5 लोग थे और वो सब के सब चूत लेने के लिए बड़े बेकरार थे, वो सभी माँ को बहुत जमकर चोदने वाले थे, उनको इस दिन का बहुत इंतजार था.

फिर वो लिफ्ट से उनके फ्लेट तक पहुंच गये और अब बाबा ने अपना एक हाथ तो मम्मी की कमर में डाल दिया और अंगूठे के पास वाली उंगली को उसने मम्मी की नाभि में घुसा दिया, जिसकी वजह से मम्मी के पेट पर एकदम से गुदगुदी होने से मम्मी ने अपनी नाभि को अंदर खींच लिया और वो हंसते हुए बोली कि बाबा तुम भी ना बड़े वो हो और तभी दरवाजा खुल गया.

फिर बाबा मम्मी संग संग कमरे के अंदर चले गये, वहां पर सभी लोग माँ की जवानी को घूर रहे थे. कोई उनके कसे, तने हुए बूब्स को देख रहा था तो कोई माँ की नाभि में घुसी हुई बाबा की उंगली और फिर तभी बाबा ने माँ की नाभि से अपनी उंगली को बाहर निकाल लिया और वो अपनी ऊँगली को माँ की नाभि की गोलाई पर घुमाने लगा और मम्मी भी उनके पेट पर गुदगुदी होने की वजह से अपने पेट को अंदर बाहर कर रही थी.

फिर कुछ देर बाद बाबा ने मम्मी से सभी लोगों का परिचय करवाया तो वो बोला कि यह मेरा चचेरा भाई राज है, यह राजीव, यह दिनेश और यह कुमार है. माँ ने सब लोगों से हाए कहा और उसके बाद बाबा ने माँ की नाभि से अपनी उंगली को जैसे ही बाहर निकाला तो तभी उन सभी की निगाहे माँ के गोरे पेट और पतली कमर के बीच में बने उस गोल गहरे गड्ढे पर चली गई और उन सभी के लंड कुछ ही सेकिंड में तनकर खड़े हो गये.