मुस्लिम आंटी की चुदाई – एक घमासान चुदाई कथा!-2

Muslim Aunty ki Chudai Ek Ghamasaan Khatha-2

Muslim Aunty Ki Chudai

उसके बाद मैंने देखा कि मां के पेट के पास कुछ हलचल हो रही है, क्योंकि मैं और माँ ने एक ही चद्दर ओढ़ रखी थी इसलिए मैंने थोड़ा सा चद्दर को ऊपर उठाकर मां के पेट की तरफ देखा जिसके अंदर मैंने देखा कि शायद सूरज ने अपने मां का हाथ मा के पेटीकोट के अंदर डाल दिया था!

उस समय तो मुझे यह ज्यादा कुछ अजीब नहीं लगा लेकिन जब मैंने अब ऊपर की तरफ नजर करके देखा तो मैंने देखा कि माँ ने अपना ब्लाउज उतार रखा था और सूरज उसमें से दूध पी रहा था!

वैसे उस वक्त मुझे अजीब लगा था कि उस वक्त सूरज 18 साल का हो गया था और माँ तो मुझे भी दूध पीने नहीं देती थी लेकिन क्योंकि मां मुझे और सूरज के बराबर प्यार करती थी तो मुझे उस वक्त भी यह ज्यादा अजीब नहीं लगा शायद मैं ही मुर्ख था की इतनी बड़ी बात में उस वक्त नहीं देख पाया।

– – प्रेजेंट टाइम में आते हुए

यह सब सोचते सोचते मैंने देखा कि मेरे लंड में बहुत तेज तनाव आ गया था, मैंने अपने लंड पर हाथ लगाया और यह सोचने लगा कि क्या मैं अपनी मां को चुदते हुए सोचकर क्या मेरा लंड खड़ा हो गया! मैं मन ही मन सोचने लगा कि मैं किस तरीके का बेटा हूं, मैं मन ही मन यह सोच रहा था कि क्या मैं अंदर जाऊं और जाकर आसिफ से लडूं और अपनी मां को रंगे हाथ पकड़ लूं!

पता नहीं मेरे मन में क्या आया और मेरे दिल के अंदर से आवाज आई नहीं रुक जा और आज देख ले की क्या होगा फिर बाद में जाकर मैं मां से कंफर्म कर लूंगा! मैंने आधे मन से फिर से अपनी आंखों से छेद में लगाई हो जहां से अंदर का ही नजारा देखने लगा और अब तो और बुरा हाल था मेरा तो एकदम मेरा दिल जला देने वाला था!

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मेरी मां अपने प्यारे-प्यारे होठों से उस आसिफ का काला लंड अपने मुंह में भर रही थी, मेरी माँ ने गुलाबी रंग की लिप्स स्टिक लगा राखी थी, अब आसिफ का लंड भी गुलाबी रंग से रन्ग गया था| उधर आंटी भी आसिफ को किस कर रही थी , आसिफ आंटी की जीभ को अपनी जीभ में भर रहा था | लेकिन मेरी नज़र तो सिर्फ मेरी रंडी माँ पर था , माँ आसिफ के टट्टे अपने हाथ में रख के उनसे खेल रहो थी।

आसिफ को मज़ा आ रहा था, वो भी माँ के सर को अपने लंड पे लगा रहा था, माँ की साँस अटक रही थी उसका लंड लेने में क्योकि वो उसका लंड अपने गले में ले रही थी .. जब माँ ने उसका लंड अपने मुह से निकला तब उसका लंड पूरा थूक में सरोबआर हो गया था , माँ के मुह से भी थूक की बहार आ रही थी।

माँ ने अब अपने हाथ को भी काम पे लगाया और उसके लंड को ऊपर निछे करने लगी और थोड़ी देर में ही आसिफ ने माँ के मुह में ही झाड दिया था, मुझे ताजुब हुआ क्यों की पिछली बार तो आसिफ ने इतनी जल्दी माल नहीं गिराया था, और गिरता भी था तो मुह में नहीं डालता था बल्कि शारीर पे गिरता था, तो माँ पे इतनी महरबानी क्यों? शायद मेरी माँ ही इतनी बड़ी रांड है की आसिफ उसके मुह के गर्मी को बर्दास्त नहीं कर पाया |

अब आसिफ ने आंटी को साइड किआ और बोला की तुम लोग रुको कुछ ख़ास लोग आने वाले है तुम लोगो से मिलने, अब तो मै भी सोच में पड़ गया था की क्या मेरी माँ इतनी बड़ी रंडी है की किसी से भी चुद लेती है. अब गेट पे नॉक होता है, और नंगा आसिफ गेट खोलने जाता है , और वहा से दो और लोग आते है.. मतलब आज वहा पे ग्रुप सेक्स होने वाला था|

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उतने में उसमे से एक लड़के ने बोला ‘मैंने कुछ मिस तो नहीं किया’ तभी आसिफ बोला नहीं भाई..मुझे उसकी आवाज़ सुनी सी लग रही थी उसने माँ को खड़ा किआ और चूमने लगा मुझे उसका मुँह नहीं दिख रा था , अब आसिफ ने गाना स्लो किआ और सुजाता आंटी को सोफे पे पटक दिया | आसिफ उनकी पीठ चाटने लगा उनमे से एक नाम तो निक्कू था , क्यू की आसिफ ने उसे बियर लेन को बोलै था , but दूसरा वाला कौन था उसने भी माँ को सोफे पे गिराया तब मैंने उसका मुँह देखा और मुँह खुला खुला ही रह गया।

वो मेरा पुराण दोस्त रमीज़ था , उससे मेरी लड़ाई हो गई थी तो मैंने उसे दोस्ती तोड़ ली थी। मुझे नहीं लगा था की इतने सालो बाद वो मेरी माँ को चोद रहा होगा रमीज़ बोला ‘ जाने मन तुझे कबसे चोदने का प्लान बनाया था

अगर तेरा बीटा दोस्ती न तोड़ता तो अपने लंड की सील तुझ से ही तुड़वाता , माँ सेक्सी आवाज़ में बोली मै भी तुझसे चुदवाना चाहती थी तू इतना गोरा चिट्टा ,है तो तेरा लंड मै जरूर लेना चाहती थी अब तो मेरा सर झुक गया था, मुझे रोना भी आ रा था। तभी निक्कू ने सुजाता आंटी के पास आया और उनके मुह में अपना लंड डाल दिया।

उधर आसिफ ने आंटी को पूरा नंगा कर के बूब्स चुसना चालू कर दिए था और बोलै आज तो हमारी पार्टी है और आंटी की चूत में ऊँगली दाल दी आंटी आहे भर रही थी – ‘आह, उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ ओहूऊ ‘ इधर

रमीज़ बोला – ‘जो मैं तब नहीं कर पाया अब करूँगा और अपना लंड निकाल लिया और मम्मी ने झट से उसे चूस लिया माँ बोली अरे तेरे याद में गाजर भी लिया था एक बार।

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रमीज़ बोला – अपने बेटे से नहीं चुदवाया आज तक , माँ बोली नहीं और कभी चुद्वौंगी भी नहीं |

मै डिसअप्पोइंटेड हो गया ,तभी आंटी शायद झड गयी और आसिफ चूत चाट के निकला , उधर निक्कू ने आंटी की चूत में लंड डाल के चोदना शुरू भी कर दिए था और घमासान चुदाई चल रही थे – अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह्हह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह एरर ऑरररर!!!

तेज़्ज़ज़ फड़द मेरी चुतको आंटी ये सब बोल रही थी, मै एक दम गरम हो चूका था और लंड निकल के हिलने लगा इधर माँ भी रमीज़ का लुंड चूस रही थी और घुप घुप की आवाज़ हर जगह आ रही थी माँ ने रमीज़ को बोला ‘अब मत तड़पा और चढ़ जा मुझपे’। रमीज़ ने माँ की चूत पे लंड रखा करीब 7 इंच लम्बा और 4 इंच मोटा था उसका लंड, माँ की चूत एक दम गीली थी और रमीज़ ने एक दक्के में ही लंड पूरा अंदर दाल दिया ,माँ की चीख निकल गयी अहह मेरी मय्या, उफफ्फ्फ्फ़ अज से मेरी सिर्फ तेरी हु, चोद मुझे

अपनी बीवी के तरहरमीज़ ने माँ की चूत पे लंड रखा करीब 7 इंच लम्बा और 4 इंच मोटा था उसका लंड, माँ की चूत एक दम गीली थी।

निक्कू उठा और अपना लंड सुजाता आंटी के मु में डाला रखा आसिफ आंटी की बड़ी तेज़ चुदाई कर रा था और थोड़ी देर में आसिफ झाड़ गया और जाके सोफे में लेट गया, अब निक्कू ने थूक माला और आंटी की चूत पे लंड रखा उसका 6 इंच का था शायद सबसे छोटा।

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