नवरात्रि में आंटी के साथ संभोग-1

Navratrime aunty ke sath sambhog-1

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम करण है. यह कहानी मेरी और मेरी आंटी की बीच में घटी एक सच्ची घटना है, जिसको मैंने अपने घर में ही चोदा. दोस्तों मेरी आंटी की उम्र 33 साल है और वो एक बच्चे की माँ है. वैसे में गुजरात का रहने वाला हूँ और गुजरात की आंटियों की गांड बहुत सेक्सी होती है और वैसी ही मेरी आंटी की भी थी. उनका फिगर का आकार 36-32-36 और में शुरू से ही उनकी गांड का बहुत दीवाना था, वो दिखने में बहुत सुंदर और उनका गोरा रंग गदराया हुआ बदन मुझे हमेशा अपनी तरफ आकर्षित करता था और अब ज्यादा समय ना बर्बाद करते हुए सीधा में अपनी कहानी पर आता हूँ.

दोस्तों मेरी अपनी आंटी से मुलाक़ात करीब एक साल पहले हुई थी. वो हमारे पड़ोस वाली बिल्डिंग में रहती थी और में उनको अपनी बालकनी से बहुत बार कपड़े सुखाते हुए देखा करता था और वो मेरी इस हरकत पर गौर भी करती थी और मेरे पापा हमारी बिल्डिंग की सोसाईटी के प्रेसीडेंट थे तो हमारी वहां पर बहुत इज़्ज़त थी. मेरी और आंटी की हर दिन मुलाक़ात होती थी और हम हर रात को हमेशा साथ में घूमने जाते थे और ऐसे ही घूमते हुए बातचीत करते करते हमारी दोस्ती अब बहुत अच्छी हो गई थी और अब में उनका मूड देखकर उनसे बातें करते समय कभी कभी ऐसे वैसे मज़ाक भी कर लेता था. उनसे दो मतलब की बातें भी करता, लेकिन वो मुझसे कुछ ना कहते हुए शरारती स्माईल देती थी.

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दोस्तों गुजरात में नवरात्रि सबसे बड़ा पर्व है और उस त्यौहार को यहाँ के लोग बहुत धूमधाम से मनाते है और बहुत अच्छी रोनक होती है. फिर वो समय भी नवरात्रि का था, इसलिए मेरे घर वाले भी उस दिन कुछ जरूरी काम से सभी लोग तीन दिनों के लिए कहीं बाहर गये हुए थे और मेरे लिए यही एक बहुत अच्छा समय था, जिसमें में आंटी के साथ वो सब कुछ कर सकता था, क्योंकि में बहुत समय से आंटी को चोदना चाहता था, इसलिए वो सभी बातें सोचकर पूरा विचार बनाकर में अब मन ही मन बहुत खुश था.

दोस्तों आंटी के पति हर दिन बहुत दारू पीते थे और इस वजह से आंटी और अंकल के बीच हमेशा हर कभी बहुत झगड़ा होता था और यह बात मुझे भी पता थी. फिर उस रात को में और आंटी गरबा खेलकर फ्री हुए थे और रात बहुत हो गई थी और अब हम दोनों बहुत थक भी गये थे और हांफ रहे थे, पसीने से पूरे भीगे हुए थे, क्योंकि उन दिनों गरमी भी बहुत थी. फिर मैंने सही मौका देखकर आंटी को मेरे घर पर चलने के लिए कहा और वो भी मेरा कहा तुरंत मान गयी और फिर हम दोनों वहां से चुपके से किसी को बिना बताए अपने घर चले गये और घर में जाते ही मैंने सबसे पहले ए.सी. चालू कर दिया था और फिर कुछ देर में रूम एकदम मस्त ठंडा हो गया.

फिर आंटी अपने बाल ठीक कर रही थी, जो कि पूरे गीले हो गये थे और मेरा यह सब देखकर और भी दिमाग़ खराब हो गया. में जैसे तैसे वहां से अपना खड़ा लंड लेकर दूसरे रूम में गया और फिर मैंने अपने कपड़े बदल लिए और अब पजामे में बाहर आ गया. फिर मैंने देखा कि आंटी किचन में कुछ कर रही थी और उन्होंने भी ज्यादा गरमी होने की वजह से अपनी चुनरी को खोल दिया था. अब वो केवल मेरे सामने ब्लाउज और पेटिकोट में खड़ी हुई थी.

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अब में उनको घूर घूरकर देख रहा था और मुझे बिल्कुल भी पता नहीं चला कि आंटी ने कब मुझे चार बार आवाज़ दी और फिर मैंने होश में आकर सुना. उन्होंने मुझसे बोला कि ऐसे घूरकर क्या देख रहे थे. मैंने तुम्हें कितनी बार आवाज लगा दी? तो मैंने कुछ जवाब नहीं दिया और फ्रीज़ से में एक ठंडे पानी की बोतल लेकर बाहर हॉल में आ गया. उसके बाद में बैठकर पानी पी रहा था और तभी आंटी ने मेरे पास आकर मुझसे पूछ लिया कि तुम्हारी क्या कोई गर्लफ्रेंड नहीं है? अब मैंने उनको तुरंत ना का जवाब दे दिया तो उन्होंने दोबारा पूछा कि क्यों? फिर मैंने बोल दिया कि मुझे अब तक आपके जैसी कोई मिली ही नहीं.

दोस्तों मेरे मुहं से यह बात सुनकर आंटी शरमा गयी, लेकिन थोड़ी उदास भी हो गई थी, वो अब अपना उदास सा चेहरा बनाकर नीचे देखने लगी. तब मैंने उनसे पूछा कि आपको क्या हुआ है, आपका चेहरा एकदम से इतना क्यों उतर गया? तो उन्होंने मुझसे बोला कि तेरे अंकल को मेरी कोई भी परवाह नहीं है. वो हर दिन दारू पीकर आते है और वो मुझसे बहुत झगड़ा करते है और फिर वो इतना कहते हुए रोने लगी. फिर मैंने तुरंत उनका गोरा, मुलायम हाथ पकड़कर उसे थोड़ा सा समझाया और फिर मैंने उनको अपनी टी-शर्ट और शॉर्ट्स को बदलने के लिए दे दिया और सो गये, क्योंकि हम घर पर बिल्कुल अकेले थे, इसलिए हम एक ही रूम में सो रहे थे.

मैंने रात को उठकर देखा कि उनकी टी-शर्ट पूरी ऊपर थी और उन्होंने उसके अंदर ब्रा भी नहीं पहनी थी और उनके बड़े बड़े 36 के बूब्स अब बाहर आकर झूल रहे थे, जिनको देखकर में जोश में आ गया और मैंने थोड़ी हिम्मत की और एक हाथ उनके बूब्स पर रख दिया और फिर धीरे धीरे दबाने लगा और कुछ देर बाद मैंने महसूस किया कि वो सोने का नाटक कर रही थी, लेकिन उसने मुझे रोका नहीं और तब में समझ गया कि वो आग अब दोनों तरफ बराबर लगी हुई है. फिर मैंने सही समय देखते हुए उस मौके का फायदा उठाना उचित समझा और अब में धीरे धीरे आगे बढ़ते हुए उनकी चूत पर अपना हाथ ले गया और फिर मैंने अपनी एक उंगली को जल्दी से अंदर डाल दिया.

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कहानी जारी है….

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