निःसंतान भाभी के साथ सेक्स करके मां बनाया-1

Nisantan bhabhi ke sath sex karke ma banaya-1

Devar Bhabhi xxx, मेरी सच्ची सेक्सी कहानी हिन्दी में पढ़ें कि कैसे मेरे दोस्त ने पढ़ाई के लिए कमरा किराये पर लिया. वहां पर उसने माकन मालकिन भाभी के साथ सेक्स करके उसका घर बचाया.

नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम अंकित है. मैं 23 साल का हूँ और मेरा लंड लगभग 6.5 इंच का हैं. मैं अन्तर्वासना का कोई नियमित लेखक नहीं हूँ. बस मुझे भी अपनी सच्ची सेक्सी कहानी हिन्दी में आप लोगों के सामने रखने का मन किया, जो मुझे मेरे दोस्त ने मुझे बताई थी.

आप लोगों के सामने सेक्स कहानी रख रहा हूँ, अगर कोई गलती दिखे, तो माफी चाहूँगा. आप मेरे दोस्त की सच्ची सेक्सी कहानी हिन्दी में को उसी की भाषा में सुनिए.

मैंने उस समय अपनी बारहवीं की परीक्षा पास कर ली थी और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अपने शहर से बाहर कोटा पढ़ने के लिए गया था. कोटा में मैंने रहने के लिए किराये का मकान ले लिया था.

उस मकान के मकान मालिक एक दूसरे समुदाय से थे और उनका परिवार भी उसी मकान में रहता था.
वे लोग व्यवहार के बहुत अच्छे थे. उनके परिवार में फरहान भाई, उनकी पत्नी शबाना और उनकी अम्मी थीं. वो लोग नीचे रहते थे और ऊपर का कमरा मुझे किराए पर मिल गया था. मैं रोज सुबह अपनी कोचिंग जाता था और दोपहर तक वापस कमरे पर आ जाता था.

फिर धीरे-धीरे मेरी थोड़ी बहुत बोलचाल भी सभी से होने लगी थी. शबाना भाभी भी बहुत अच्छी थीं. उनकी उम्र 27 साल की रही होगी.

एक दिन मैं जब कोचिंग से आया, तो घर का माहौल कुछ उदासी का था. भाभी भी काफी दुखी दिख रही थीं.

खैर मैंने उस समय कुछ बात पूछना सही नहीं समझा और अपने कमरे में आ गया.

शाम को दादी (फरहान भाई की अम्मी) की तबीयत थोड़ी खराब थी, तो भाई उन्हें डाक्टर के पास ले गए थे.

तब भाभी ऊपर छत पर आईं. उस समय भी उनका चेहरा दुखी सा लग रहा था.
मैंने सोचा क्यों न भाभी से थोड़ी बात कर लूं … हो सकता है कि उससे शायद उनका मन कुछ हल्का हो जाए.

मैं भी छत पर चला गया, तो भाभी कुर्सी पर बैठी थीं … और शायद रो रही थीं.

उन्होंने मुझे देखकर अपने आंसू पौंछ लिए और झूठी मुस्कान के साथ कहने लगीं- अरे अंकित तुम यहां कैसे … आओ बैठो.

बस भाभी जी मुझसे मेरा हाल चाल और पढ़ाई के बारे में पूछने लगीं.

मैंने भी कहा- मेरा तो सब ठीक चल रहा है भाभी जी … पर आप बताइए … आप बड़ी दुखी लग रही हैं … और दोपहर को जब मैं घर आया था, तो घर का माहौल भी दुखी सा लग रहा था. क्या हुआ … कुछ बताइए ना? शायद मैं कुछ कर सकूँ.
पर उन्होंने कहा- नहीं … ऐसा कुछ नहीं है … बस ऐसे ही घर में कभी कभी तो कुछ अनबन हो ही जाती है.

इतना कहते हुए भी भाभी की आंखें भर आईं.

मैंने कहा- आपकी आंखों के आंसू तो कुछ और कह रहे हैं भाभी जी … प्लीज बताइए ना … आखिर क्या ऐसा हुआ है?
तब उन्होंने कहा कि तुम्हें क्या बताऊं … तुम अभी नहीं समझ पाओगे.
मैंने कहा- फिर भी आप बताइए तो … हो सकता है मैं कुछ कर सकूं.

तब उन्होंने रोते हुए कहा कि मेरी शादी को 6 साल से ऊपर होने वाले हैं … और मैं अभी तक अपने शौहर को एक औलाद नहीं दे पाई. इसी बात पर अम्मी मुझ पर नाराज हो रही थीं … और तुम्हारे भाई भी इसी बात से कुछ गुस्सा थे. अम्मी कह रही थीं कि तू औलाद नहीं दे सकती, तो मैं फरहान की दूसरी शादी कर दूंगी. इसीलिए आज घर का माहौल ऐसा हो रखा था … और मैं भी इसलिए बहुत दुखी हूँ.

मैंने कहा- ऐसा क्यों हो रहा है? क्या भाई और आप में वो सब नहीं होता?
तो भाभी बोलीं- तुम मुझसे ये बात मत करो.
फिर मैंने कहा- माफ करना भाभी … पर कुछ तो कारण होगा?
तो उन्होंने कहा कि सब होता है … पर पता नहीं क्यों मैं हमल से नहीं हो पाती.

मैंने कहा- तो आप डाक्टर के पास गईं कभी?
उन्होंनें कहा- नहीं, तुम्हारे भाई नहीं मानते हैं.
तब मैंने कहा- अगर कोई समस्या है, तो उसका इलाज तो कराना ही पड़ेगा. अगर भाई नहीं जाते, तो कम से कम आप तो जाओ. क्या पता कुछ रास्ता मिल जाए. वरना ऐसे तो आप का परिवार ही टूट जाएगा.

इस पर भाभी मान गईं … और मुझसे बोलीं- क्या तुम भी मेरे साथ चल सकते हो?
मैंने कहा- हां चलूंगा.

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फिर तीसरे दिन किसी काम से भाई शहर से बाहर गए थे. भाभी तबीयत खराब का बहाना बना कर मेरे साथ डाक्टर के पास आ गईं. जहां डाक्टर ने उनका चैकअप किया और अगले दिन रिपोर्ट देने को बोला.
उधर से फुर्सत होकर मैं भाभी के साथ घर आ गया.

भाभी काफी परेशान थीं.
मैंने कहा- फिक्र मत कीजिएगा … सब ठीक हो जाएगा.

अगले दिन रिपोर्ट लेकर मैं घर आया. भाभी को रिपोर्ट में क्या निकला, ये बताने के लिए मैंने उनको छत पर बुलाया.

भाभी छत पर आईं और पूछा- क्या निकला रिपोर्ट में?
तो मैंने भाभी को बताया- भाभी, आपकी रिपोर्ट एकदम ठीक है. आप मां बन सकती हो.

तब भाभी ने कहा- ऐसा कैसे हो सकता है. जब मैं ठीक हूँ, तो मैं मां क्यों नहीं बन पा रही हूँ?
तब मैंने धीरे से कहा- भाभी शायद समस्या भाई को है.

भाभी इस पर रोने लगीं और बोलीं- अगर ऐसा है, तो वो कभी नहीं मानेंगे कि उनमें कोई कमी है. अगर अम्मी ने उऩ्हें शादी करने के कहा, तो वो तो दूसरी शादी के लिए भी मना नहीं करेंगे. अब मैं क्या करूं. कैसे अपनी शादी को बचाऊं? अगर उनकी दूसरी शादी हो गई तो मेरे पास मरने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा.

मैंने कहा- आप ऐसा क्यों बोल रही हो. ऐसा कुछ नहीं होगा. आप बात करके तो देखो.
भाभी ने कहा- मैं बाद में बात करती हूँ … अभी तुम मुझे अकेला छोड़ दो.

मैं वहां से नीचे कमरे में चला आया.

इस बात को एक महीना हो गया. फिर एक दिन सभी लोगों को शायद किसी रिश्तेदार के यहां निकाह में जाना था. लेकिन जाने के समय भाभी की तबियत खराब हो गई, तो वे जाने से मना करने लगीं.

भाई ने कहा- कोई बात नहीं … तू यहीं रूक जा. हम लोग 3 दिन में आ जाएंगे.

भाई ने मुझसे कहा- अंकित थोड़ा ध्यान रखना … हमारा जाना भी जरूरी है … क्योंकि रिश्तेदारी का मामला है.
मैंने कहा- ठीक है भाई, आप आराम से जाओ … फिक्र की कोई बात नहीं है … मैं ध्यान रखूँगा.

फिर अम्मी और भाई चले गए. भाभी अपने कमरे में आराम करने चली गईं. मैं बाहर से खाना लेकर आया और भाभी के कमरे में खाना लेकर गया.

मैंने भाभी से कहा- आप खाना खा लो … और आपकी तबियत कैसी है?
भाभी ने कहा- मेरी तबियत ठीक है. मैंने तो बहाना बनाया था. तुम यहां आ जाओ, खाना यहीं खा लेते हैं.
तो मैंने कहा- ठीक है.

मैंने खाना लगा दिया और उनसे पूछा- आप बहाना बना कर क्यों रूकीं?
तो उऩ्होंने कहा- रूको … खाना खाने के बाद बात करूंगी. कुछ बहुत जरूरी था इसलिए बहाना बनाया है.

खाना होने के बाद मैंने पूछा- अब बताइए?
उन्होंने कहा कि मैं तुमसे जो बात करूंगी … वादा करो, किसी को नहीं बताओगे … और तुम मेरी मदद करोगे.
मैंने कहा- बताइए तो सही.
उन्होंने कहा- पहले वादा करो … और तुम्हें मेरी कसम है.
मैंने कहा- ठीक है भाभी बताइए.

उन्होंने कहा- अम्मी मेरे शौहर के लिए लड़की पसन्द कर रही हैं. … और ऐसा हुआ, तो सब तबाह हो जाएगा. अब बस सिर्फ तुम मेरी मदद कर सकते हो.
मैंने कहा- कैसी मदद?
भाभी बोलीं- तुम मुझे मां बना दो. बस मेरे पास ये 3 दिन ही हैं … तुम मना मत करना क्योंकि तुम ही मेरी आखिरी उम्मीद हो.
मैं सोचने लगा.

तो उन्होंने कहा- तुमने मदद का वादा किया है.
मैंने कहा- ठीक है, पर भाई को शक हो जाएगा तो?
उन्होंने कहा- नहीं होगा … मैंने एक महीने से झूठा बहाना बना रखा है कि मैं एक हकीम की दवा ले रही हूँ. आप कोशिश करो … शायद इस बार ऊपर वाला हमारी सुन ले.

भाभी की बात सुनकर मैंने कहा- ठीक है भाभी … पर मैं कैसे कर सकता हूँ?
वो बोलीं- क्यों नहीं कर सकते? क्या मैं तुम्हें अच्छी नहीं लगती … क्या मैं खूबसूरत नहीं हूँ … क्या तुम्हें चुदाई करने का मन नहीं करता? तुम अगर मेरे साथ चुदाई करोगे, तो मेरी जिन्दगी बच जाएगी और तुम्हारे अलावा मैं किसी और पर भरोसा भी नहीं कर सकती.

मैंने भाभी की तड़फ देख कर हामी भर दी. मेरे हामी भरते ही वो मेरे गले लग गईं और मेरे होंठों को चूमने लगीं.

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