निशिका ने गाँड़ मारी मेरी

Nishika ki gaand mari

यह मैं आपको एक सच्ची घटना बताने जा रहा हूँ, आप पहले विश्वास नहीं करेंगे पर जब आप अंत तक पढ़ेंगे तो आप समझ पाएंगे कि यह एकदम सच्ची बात है और फिर यह कहानी दुबारा पढ़ेंगे। पर विनती है, अभी ही अंतिम पैरा मत पढ़ें।

चलिये कहानी पर आता हूँ। अवन्तिका मेरी पड़ोसन है और मेरी पर्सनल रांड है। खिलंदर चुदक्कड़ औरत। उसका पति गल्फ में गाँड़ घिसकर कमाता है और उसकी बीवी की गाँड़ यहाँ मैं मारता हूँ। गोरी, गोल-मटोल, बड़ी-बड़ी मोटी गाँड़ और तरबूज जैसी चूची। ऐसे बदन पर चिपकी हुई जीन्स और टॉप पहनकर जो निकलती है मादरचोद, लोग घूर-घूर कर उसको आँखों से चोदते रहते हैं पर वह बैठती है बस मेरे लण्ड पर। अवन्तिका को देखकर आपका लौड़ा लाल-लोहा न हो जाय तो कहना।

उस दिन मैं अवन्तिका को एकदम चोदने के मूड में उसके घर गया था। दोपहर के दो बज रहे होंगे। सेक्सी औरत को दिन-दुपहरिये बूर और गाँड़ में चोदने का एक खास मजा है दोस्तों। आप जरूर ट्राय करना। उसने दरवाजा खोला उससे पहले ही मैं अपना लौड़ा पैंट से निकाल लिया था। दरवाजे पर ही उसको बिठाकर पहले अवन्तिका के सुन्दर मुँह की चुदाई की। वह कुछ कहने के लिये बार बार इशारा कर रही थी पर मेरा लौड़ा ऐसा उबल रहा था कि मैंने उसे बोलने का मौका ही नहीं दिया। उसके मूँह की सख्त और डीप चुदाई करता रहा। फिर उसके बाल पकड़कर उसके रूम में ले गया और उसे बेड पर लिटा दिया। खुद नंगा होकर मैं अवन्तिका के मूँह पर अपनी गाँड़ रख दी और वह जीभ फिराने लगी। आह! आपने किसी औरत या लड़की से गाँड़ चटवाई है फ्रेण्ड्स? उससे बड़ा मजा कुछ भी नहीं।

अवन्तिका पहले मेरी गाँड़ पर हल्के-हल्के जीभ फिराती रही फिर गाँड़ की ठीक छेद पर जीभ नुकीला करके मेरी गाँड़ खोदने लगी। उसको पता है मुझे क्या पसन्द है। सेक्स का मजा सिर्फ बूर चोदने में थोड़े न है, लंड और बूर के ठीक नीचे का जो भाग है उसमें सेक्स की बड़ी सेंसिटिव फीलिंग भरी हुई है। अवन्तिका को पता है कि उसे मेरी आँड़ और गाँड़ चाटकर कैसे मुझे मजा देना है। मैं फिर अवन्तिका के फेस पर गाँड़ रखकर हल्के से बैठ गया और उसके फेस पर अपनी गाँड़ रगड़ने लगा। ओह! क्या मादक मजा होता है औरत की फेस पर गाँड़ रगड़ने का। उसके बाद उसका फेस और होठ चूमिये और चूसिये, आपको सेक्स का भरपूर अनुभव होगा।

मुझे तो काफी देर तक अवन्तिका की फेस पर गाँड़ रगड़ने के बाद ही सच्चा सुख मिलता है। फिर मैंने अवन्तिका को नंगा किया और कुतिया बना दिया और पीछे से उसकी गाँड़ और बूर चाटने लगा। अवन्तिका भी सिसक सिसक कर अपनी बूर और गाँड़ पर फिसलते मेरे जीभ का मजा लेने लगी। और क्या सेक्सी स्मेल था क्या बताऊँ! उफ्फ! ओरल सेक्स का मजा ही तब आता है जब औरत की छेद से सेक्सी स्मेल आ रही हो। मन एकदम ठनक कर पागल हो जाता है जी चाहता है चबा लूँ बूर और गाँड़ को। इतने में तो मेरा लण्ड एकदम सख्त होकर झुनझुनाने लगा। अब अवन्तिका की बूर मारने का टाईम आ गया था। अवन्तिका को घोड़ी बनाकर उसकी मोटी गाँड़ पर मैं चढ़ गया और तपाक से अपना लण्ड उसकी बूर में पेल दिया।

एक जोर की सिसकारी ली उसने और मैं सबकुछ भूलकर उसकी गाँड़ पर अपनी चूतड़ पटक पटक कर उसकी बूर चोदने लगा। धप धप जड़ तक अवन्तिका की बूर में लण्ड पेलकर चोदे जा रहा था। तभी मेरी नजर दरवाजे पर गई। ओह! हे भगवान! ये मैं क्या देख रहा था! निशिका खड़ी थी! और उसका लौड़ा एकदम तना हुआ था। अपनी मम्मी की चुदाई देख देखकर आँख बन्द कर के जोर जोर से अपने लौड़े पर मुक्का मार रही थी। मैं थोड़ा रुका तो अवन्तिका ने भी देख लिया। निशिका ने भी हमें आँख खोलकर देखा। हम दोनों तो अवाक रह गये। निशिका को लण्ड कैसे निकल आया, मेरे फेस पर यही सवाल कौंध रहा था। और लण्ड भी ऐसा? मेरे लौड़े से डेढ़ गुना बड़ा और मोटा? पतली दुबली गोरी काया, मुठ्ठी भर की चूच और लण्ड ऐसा गधे जैसा? मेरा कलेजा एकदम कांपने लगा।
“स्कूल नहीं गई ये आज?”

“वही तो मैं कब से कहना चाह रही थी। सुबह सोकर उठी तो मैंने देखा। इसकी चूत की जगह देखो न कैसा लौड़ा निकल गया है। इसी वजह से स्कूल भी नहीं गई। और सुबह से इसका लौड़ा ऐसे ही खड़ा है।”
हमने निशिका को पलंग फर बिठाया। क्या मस्त लग रही थी। चिकना किशोर बदन, छोटी छोटी चूची और जांघों के बीच में ऐसा मस्त लौड़ा। लण्ड भी ऐसा फूलकर खड़ा था कि जैसे छूने भर से झड़ जाएगा। लण्ड का सुपाड़ा एकदम कत्थई लाल ऊपर आधा चमड़ा चढ़ा हुआ। मेरा मन एकदम भन्ना गया, ऐसा लौड़ा तो मैंने देखा भी नहीं था। मैंने निशिका के लण्ड को पकड़ा तो एकदम गर्म और खून की ऐसा प्रवाह था भीतर की धड़ धड़ धड़ धड़क रहा था। निशिका की आँड़ भी वैसी ही बड़ी और एकदम लण्ड के नीचे चिपकी हुई। लण्ड पर हाथ पड़ते ही सिसियाने लगी। लण्ड से पतला पानी रिस रहा था।

“इसकी बूर चोदने के लिये मैं सोच रहा था, पर इसके लण्ड का क्या करें?”
“वही तो! क्या करें?” अवन्तिका ने जवाब दिया।
“चूसो अंकल” इतना ही बोली निशिका और सेक्स की प्यास से काँपने लगी। अपनी चूतड़ उठा उठा कर पटकने लगी। मैंने अवन्तिका की तरफ देखा और निशिका के लौड़े के सुपाड़े को मुँह में भर लिया। निशिका मजे में सराबोर हो गई और मेरा माथा पकड़ कर मेरे मूँह में लौड़ा पेलने लगी। अवन्तिका देख देखकर अचरज कर रही थी।
“मेरी आँड़ को नाखून से खरोंच दो न मॉम!” निशिका बोली।

क्या करती अवन्तिका भी, निशिका की आँड़ सहलाने लगी और नाखून से खरोंचने लगी। निशिका अब जोर जोर से मेरा मूँह चोद रही थी और अवन्तिका एक हाथ से अपना बूर मथ रही थी और दूसरे से निशिका की आँड़ सहला रही थी। फिर निशिका के कहने पर मैं लेट गया और वह मेरे फेस के दोनों तरफ घुटना टिका कर ताबड़तोड़ मेरे मूँह में लण्ड पेलकर चोदने लगी। लण्ड चूसने का मेरा पहला अनुभव था और वह भी अपनी रांड की बिटिया का। ओह! एकदम गरम माहौल था।

“मॉम, मेरी गाँड़ में उंगली पेलो ना प्लीज!” निशिका इतनी बेचारगी से विनती कर रही थी कि अवन्तिका मना नहीं कर पाई और निशिका की गाँड़ में उंगली पेलकर उसकी गाँड़ मारने लगी और निशिका मेरा मूँह चोदती रही। मैं मदमस्त हो रहा था, निशिका सिसक रही थी और अवन्तिका अपना बूर भी मथ रही थी और निशिका की गाँड़ उंगली से चोद भी रही थी।
“आह! अंकल, मुझे तुम्हारा गाँड़ मारने का मन कर रहा है।” निशिका ने मेरे मूँह में जोर से लण्ड पेला और बाहर निकालते हुए कहा। मेरे बदन में झुरझुरी फैल गई। मैंने गाँड़ कभी नहीं मरवाई थी पर एक लड़की से गाँड़ मरवाने की बात सुनकर मैं वासना के समंदर में गोते मारने लगा।

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“अवन्तिका, नारियल तेल लेकर आ” निशिका ने कहा।
“मॉम को अब नाम से बुलाएगी?”
“चुप कर रांड! पापा के बाहर जाते ही घर को रंडीबाग बना रखा है तूने और मेरे से बहस करती है मादरचोद! आने दे पापा को, पहले पापा की गाँड़ मारुंगी और फिर तेरा चरित्र बताउंगी उनको। मैंने वीडियो बना रखे हैं कई। अब जा और निरियल तेल लेकर आ। भोसड़चोदी।”
निशिका गुस्से से तमतमा रही थी और फिर मेरी तरफ मुड़ी और मेरी गाँड़ फैलाकर देखने लगी।
“सॉलिड गाँड़ है अंकल आपकी। एक भी बाल नहीं हैं, शेव करते हो क्या? मस्त चोदू गाँड़ है, चिकनी।”
“हाँ निशिका, अवन्तिका को बालों वाली गाँड़ चाटना पसन्द नहीं इसलिये चिकना करके रखता हूँ।
तब तक अवन्तिका नारियल तेल ले आई।

“अवन्तिका, तू अंकल जी की गाँड़ चाटती है? मादरचोद?” और निशिका हँसने लगी।
फिर निशिका ने मेरी गाँड़ पर नारियल तेल लगाया, उंगली गाँड़ में डाल डालकर गीला किया और अपने लौड़े पर भी लगाने लगी।
“गाँड़ में पेलुंगी तो दर्द होगा अंकल, बर्दाश्त कर लेना।”
और मेरे पीछे करवट लेटकर निशिका ने मेरी गाँड़ की छेद पर लण्ड टिका दिया। गाँड़ की छेद पर गरम लण्ड की छुअन से मैं एकदम वासना में लहराने लगा। निशिका मेरा बदन सहलाने लगी।
“गाँड़ मार लूँ आपकी अंकल?”

इससे पहले कि मैं कुछ जवाब देता, एक कस कर धक्का मारा निशिका ने। उसका लण्ड मेरे कुंवारे गाँड़ को चीरता हुआ मेरी गाँड़ की छेद में आधा धंस गया। मैं कराहने लगा और निशिका ने मुझे कस कर दबोच लिया। जाने कहाँ से इतनी ताकत आ गई थी छोकरी को, मैं हिल भी नहीं पा रहा था। इतने में वह मेरी गाँड़ में लण्ड हौले हौले हुचकाने लगी। मैं कराहता रहा पर उसे कोई फर्क नहीं पड़ा, वह तो मेरी गाँड़ मारकर खुद का मजा ले रही थी मेरे पेन से उसे क्या लेना देना। लण्ड हुचकाते हुचकाते बीच बीच में वह कसकर धक्का मारती और लण्ड को मेरे गाँड़ में और अंदर धंसा देती। लगभग पंद्रह मिनट में वह अपना लौड़ा जड़ तक मेरी गाँड़ में उतार चुकी थी।

“मजा आ रहा है अंकल गाँड़ मरवाने में?” निशिका ने लण्ड खींचकर एकबार फिर मेरी गाँड़ के अंदर फिसला दिया।
फिर वह ताबड़तोड़ मेरा गाँड़ मारने लगी। दाँत भींचकर वह ताकत से मुझे पकड़ रखी थी और मेरी गाँड़ मार रही थी। जोर जोर से चीख रही थी काम के आनन्द में निशिका। निशिका के सेक्स का भी पहला अनुभव था।
तभी अवन्तिका बोली, “बेटा धीरे से करो।”
” तू चुप ही रह कुत्ती। तुझे तो मैं देखुंगी बाद में। दिन रात चोदुंगी तुझे कुतिया मॉम। तेरी बूर खोदकर खाई बना दुंगी साली। बक बक करती है, चल लण्ड चूस!”

निशिका ने मेरी गाँड़ से लण्ड खींचकर अवन्तिका के मूँह में पेल दिया। अवन्तिका मेरे गाँड़ से निकला हुआ निशिका का लौड़ा चूसने लगी। थोड़ी ही देर में निशिका फिर से मेरी गाँड़ मारने लगी। इसबार उतना नहीं पेन हुआ पर इसबार निशिका और ज्यादा जोर से पेल रही थी गाँड़ में। अब निशिका ने एक नया पोज बनाया, अवन्तिका को डॉगी बनाकर उसकी गाँड़ में मुझे लण्ड पेलने को बोला। मैं भी एकदम बौखलाया हुआ था, ताबड़तोड़ अवन्तिका की गाँड़ मारने लगा। फिर निशिका मेरे ऊपर चढ़कर मेरी गाँड़ मारने लगी। एक रिदम में दो गाँड़ एक साथ चुदने लगे। हम तीनों वासना के मजे में चीख रहे थे। पूरे कमरे में गाँड़ सेक्स की खुशबू फैली हुई थी।

निशिका अवन्तिका को गंदी गंदी गाली दे रही थी और मैं निशिका को गाली दे रहा था। ठपर ठप ठपर ठप चुदाई की गूंज निकल रही थी। इतने में निशिका मेरे गाँड़ में झड़ने लगी। उसके गरम वीर्य के मेरे गाँड़ में पड़ते ही मैं भी बेकाबू हो गया और अवन्तिका की गाँड़ में अपना वीर्य छोड़ दिया। ऐसा स्खलन मैंने कभी अनुभव नहीं किया था। निशिका ने मेरी गाँड़ से लण्ड निकाला तो गाँड़ की छेद एकदम मुँह बाए वीर्य बाहर उगलने लगी। वैसा ही हाल अवन्तिका का था। पर सबसे मस्त मजा मुझे मिला था, दोनों ओर से। मुझे लग रहा था जैसे किसी ने काफी देर तक बिजली का करंट लगाया हो। उसी मस्ती के आगोश में मैं लेटा हुआ सो गया। लगा कोई मुझे झकझोर रहा था। आँख खोला तो देखा बीवी खड़ी थी। अंडरपैंट भीगा हुआ था और गाँड़ दुख रही थी। मैं बहुत आश्चर्य में पड़ गया।