पडोस के लड़के से तोड़वाई अपनी सील-1

Pados ke ladke se tudwaai apni seal-1

हेल्लो दोस्तों, मेरा नाम अंकिता मिश्रा है। मै जौनपुर की रहने वाली हूँ। आज मै आप लोगो को अपने पड़ोस के लड़के के साथ चुदाई की कहानी सुनाने जा रही हूँ। मेरी उम्र 18  साल होगी। मै दिखने में बहुत स्मार्ट और सेक्सी हूँ। मेरे मोहल्ले के लड़के मुझे बहुत लाइन देते है लेकिन मै केवल एक ही लड़के को लाइन देती थी। वो मेरे घर के बगल में ही रहता था। उसका नाम प्रतीक गुप्ता था। उसकी उम्र भी लगभग 19 साल होगी। वो दिखने में बहुत स्मार्ट और उसका कद 5.11  फीट है। उसके पीछे बहुत सी लड़कियां पागल है, लेकिन वो किसी को भी भाव नही देता है। मै भी किसी से काम नही हूँ, मेरे गोल और बड़ी बड़ी आंखे, गाजर की तरह लाल लाल गाल, और रसीली और पतले होठो को देख कर हर कोई मेरा दीवाना हो जाता था। मेरे मम्मो की बात करे तो क्या गजब के मम्मे है, रवा की तरह गोरे गोरे, बड़े और बहुत मुलायम बिल्कुल ब्रेड की तरह। मुझे अपने मम्मो को सहलाने और दबाने में बहुत मजा आता है।

जब मै रोज नहाने जाती थी तो मै अपने मम्मो को खूब दबाती थी। इसीलिए मेरे मम्मे जल्दी बड़े हो गये थे। अब मैंने अपने मम्मो को दबाना बंद कर दिया है। मेरा फिगर तो कमाल का है, उस गाने की तरह, ऊपर के 32, नीचे का 36, बीच का 24, बुझाता की ना। मेरी चूत तो बहुत ही रसीली और कड़क थी। मेरी चूत को पहले किसी ने छुआ है। मै सोचती थी की मै केवल अपने पति से चुदवाउंगी, लेकिन प्रतीक के ऊपर दिल आने के बाद मैंने सोच लिया था पहले प्रतीक से फिर अपने पति से चुदवाउंगी।

बचपन में मै और प्रतीक साथ में ही खेलते थे, और भी बहुत काम साथ में करते थे। लेकिन तब मुझे ये सब मालूम नही था। अब मुझे उससे प्यार हो गया है तो साथ नही रह सकते थे क्योकि हम बड़े हो गये थे। मै हमेसा उसके घर जाया करती थी। लेकिन वो मेरे घर कभी नही आता था।

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मै तो हमेसा उसके पास जाने का मौका ढूंढा करती थी। कुछ दिन पहले की बात है, मै प्रतीक के घर गई थी, सुबह का समय था वो बाथरूम से नहा कर निकाला था। उसका अंडरवेअर पानी से भीगा हुआ था और भीगे हुए अंडरवेअर में उसका लंड पूरा का पूरा जान पड़ रहा था। मै तो उसके लंड को देख कर उसकी दीवानी हो गई थी। उसका लंड बहुत मोटा और बड़ा था, मुझको देख कर प्रतीक शर्मा गया। वो जल्दी से वहां से चला गया। मैंने उसके लंड को देखने के बाद सोच लिया था की मुझे किसी भी तरह से उससे चुदना है। प्रतीक पढ़ने में बहुत तेज था इसलिए मैंने अपनी मम्मी से कहा – “मम्मी मुझे पढाई में कुछ चीजे नही आती है और प्रतीक को सब आता है। आप उसकी मम्मी से बात कर लो तो प्रतीक मुझे पढ़ा दिया करे’’।  मम्मी ने कहा – ठीक है मै बात कर लूँगी। मम्मी की ये बात सुन कर मेरे मन में अभी से ही लड्डू फूटने लगा था।

मम्मी ने प्रतीक के मम्मी से बात की और प्रतीक को मुझे पढाने के लिये राजी करवा लिया। ये सब तो एक बहाना था प्रतीक से खुद को चुदवाने का। प्रतीक मुझे अगले दिन से पढाने वाला था उसने मुझे शाम को 7 से 8 पढ़ने को कहा। मेरा घर दो मंजिल का था और मेरा कमरा दूसरे मंजिल पर था। मैंने मम्मी से कहा- “मम्मी नीचे सब लोग शोर करेंगे इसलिए मै ऊपर अपने कमरे में ही पढ़ लूँगी”। मम्मी ने कहा – “ठीक है अपने कमरे में ही आराम से पढ़ना”।  मैंने पूरा प्लान बना लिया था बस अब किसी तरह से प्रतीक को पटाना था।

शाम हुआ प्रतीक मुझे पढाने के लिये मेरे घर आया। उसने मेरी मम्मी से पूछा – “आंटी अंकिता कहा है। मम्मी ने कहा – “वो अपने कमरे में है वहीँ जाके उसे पढ़ा दिया करो”।  उसने कहा ठीक है।

मै उसका इंतज़ार अपने कमरे में कर रही थी, थोड़ी देर में वो मेरे कमरे में आया। मैंने उसके लिये एक कुर्सी लगाई और खुद मै अपने बेड पर बैठ गई। उसनें मुझे पढाना शुरू किया – मै तो उसको ही देखे जा रही थी। आज वो मुझे भौतिक विज्ञान पढ़ा रहा था, उसने मुझसे कुछ सूत्र पूछे जिसके मैंने जवाब दे दिए। उसने मुझसे कहा – तो तुम घर पर पढाई करती हो। मैंने कहा – हाँ खाली समय में पढाई ही करती हूँ। उससे पढते हुए एक घंटा कैसे बीत गया कुछ पता ही नही चला। मैंने रात भर उसके भर उसके बारे में सोचा।

अगले दिन मैंने जान कर एक खूब ढीला टॉप पहना और अंदर ब्रा भी नही पहना। जिससे जब मै झुकती तो मेरी आधी चूची बाहर निकाल आती थी। शाम को जब प्रतीक मुझे पढ़ने आया तो मैंने अपने कमरे की जानकर के झाड़ू लगाने लगी। मै झुक कर अपने कमरे की झाड़ू लगा रही थी, जिससे मेरे टॉप से मेरी आधी चूची बाहर निकली हुई थी और प्रतीक की नजर मेरी चूची पर पड़ गयी। मेरी चूची को देख कर प्रतीक का भी लंड खड़ा हो गया और वो अपने हाथो से अपने लंड को दबा के छुपाना चाहता था।

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झाड़ू लगाने के बाद मैंने प्रतीक से पढ़ना शुरू किया, उसने मुझसे कहा – तुम ऐसे कपडे क्यों पहनती हो अच्छे नही लगते है?? मैंने पूछा – क्यों इसमें क्या बुराई है?? मै जान गई की उसने मेरी चूची को देख लिया है। उसने कहा – बुराई कुछ नही है लेकिन अच्छा नही लगता है। इतने में मैंने जानकर अपना पेन गिरा दिया और उठाने के लिये झुकी तो मेरे बूब्स फिर से बाहर निकाल आये। जिसको देख कर प्रतीक के मन में चुदाई की ज्वाला भडक उठी। उसने मुझसे कहा –“यार तुम आज से इस टॉप को मत पहनना”।  मैंने फिर से पूछा – क्यों ?? तो उसने कहा – मै तुम्हारे बूब्स को देख कर पागल हो जाता हूँ। मैंने शर्माने की एक्टिंग की ताकि उसे पता ना चले। मैने कहा ठीक है। ये कहानी आप HotSexStory.xyz पर पढ़ रहे है, और अगर कही और पढ़ रहे है तो, उसने मेरी कहानी चोरी की है.

उस दिन तो प्रतीक भी मेरे बूब्स को देख कर पागल हो रहा था। इसी तरह से कुछ दिन बीता   मै और प्रतीक और भी करीब आ गये थे। एक दिन मैंने प्रतीक से पूछा – तुम किसी लड़की को लाइन क्यों नही देते हो?? तो उसने मुझसे कहा – “यार किसी लड़की को पहले पटाने के लिये पहले उसके आगे पीछे घूमो, फिर पटाने के बाद देर तक उनसे फोन पर बातें करो और साथ में रिचार्ज भी करवाओ। और उससे मिलता क्या है – कुछ किस और सेक्स। मुझे इन सब चीजो में कोई इंटरेस्ट नही”। मैंने उससे पूछा – अगर तुम्हारे पीछे कोई भागे तो ??

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तो उसने कहा – तब एक बार सोच सकता हूँ। ये सुनकर मै खुश हो गई मैंने सोचा चांस है।

अगले दिन मेरा जन्मदिन था, लेकिन मेरे घर में मनाया नही जाता था इसलिए आज भी प्रतीक मुझे पढाने आया। मैंने उससे कहा – यार आज मेरा जन्मदिन है मुझे विश नही करोगे क्या?? उसने कहा – मुझे पता नही था। उसने मुझे विश क्या और मुझसे पूछा – गिफ्ट में क्या चाहिए??

मैंने उससे कहा – जो मांगू वो दे सकते हो?? उसने कहा – ‘अगर मेरे बस में होगा तो जरुर दूँगा”।

मैंने बिना कुछ सोचे समझे उससे कहा मुझे तुम चाहिए। मै तुम से प्यार करती हूँ। क्या तुम भी मुझसे प्यार कर सकते हो?? तो उसने कहा – मै तुम्हे निरास ही करूँगा, अगर तुम्हारा जन्मदिन ना होता तो शायद मना कर देता लेकिन ये तुम्हारा गिफ्ट है तो पूरा करना ही पड़ेगा।

उसने मुझे अपने बाँहों में भर लिया और मुझसे कहने लगा – यार मैं भी तुम्हे लाइक करता था लेकिन मुझे लगता था,  कि कहीं तुम मुझसे नाराज हो गई तो जो दोस्ती वो भी चली जायेगी।

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