पड़ोसी की नई शादीशुदा बीवी की सील तोड़ी-2

Pados ki new shadishuda biwi ki seal todi-2

फिर रात को में अपने ऑफिस से वापस अपने रूम पर आ गया और जैसे ही मैंने अपने कमरे का दरवाजा खोला, तो वैसे ही शाहबाज़ उसके कमरे से निकलकर बाहर अपने दरवाजे पर आकर खड़ा हो गया और फिर वो मुझसे बोला कि जल्दी से आ जा, में कब से खाना खाने के लिए तेरा इंतजार कर रहा था. फिर मैंने उससे कहा कि ठीक है में थोड़ा फ्रेश होकर अभी कुछ देर में आता हूँ और में अपने रूम में अंदर चला गया और फ्रेश होने लगा. उसके थोड़ी देर बाद में अपने रूम का दरवाजा बाहर से बंद करके उसके घर पर जाने लगा.

फिर मैंने जैसे ही उसके कमरे के दरवाजे के अंदर अपना पहला कदम रखा तो मैंने देखा कि उसकी बीवी यानी सीमा एकदम सामने बैठी हुई टी.वी. देख रही थी और इस बार मुझे उसके चेहरे को देखने का वो मौका मिल गया, जिसके लिए में बहुत बैचेन था उफफफफ्फ़ दोस्तों वो दिखने में बहुत ही सुंदर थी और फिर मेरी नज़र उसके बूब्स पर पड़ी, यानी उसके बूब्स पर मुझे तो मज़ा आ गया और दोस्तों उसने उस समय अपने बदन पर दुपट्टा नहीं रखा था, जिसकी वजह से उसकी छाती आधी उसके कपड़ो से बाहर दिख रही थी और वो बहुत सुंदर नजारा था, में उसे शब्दों में नहीं बता सकता और मैंने जैसे ही वो सब देखा तो में वहीं पर रुक गया और मेरा लंड उसके सेक्सी बदन को देखकर बिल्कुल तनकर खड़ा हो गया.

थोड़ी देर बाद उसकी नज़र मेरी तरफ पड़ी तो वो झट से उठी और वो दुपट्टे से अपना सर छुपाती हुई अपने रूम की तरफ चली गई. अब में अंदर चला गया, लेकिन मेरा खड़ा लंड साफ साफ दिख रहा था, क्योंकि उस समय मैंने अपनी अंडरवियर को उतार रखा था और ट्राउजर पहन रखा था और अब मैंने देखा कि शाहबाज़ उसकी पत्नी के अंदर जाते ही तुरंत अपने रूम से बाहर आ गया और उसने मेरी तरफ देखकर मुझसे कहा कि हाँ आ जाओ, हम दोनों आज यहीं खाना खाते है. फिर मैंने उससे तुरंत हाँ बोल दिया और में अंदर उसके पीछे पीछे उसके रूम की तरफ चला गया.

फिर शाहबाज़ ने अब उसकी बीवी यानी सीमा को आवाज़ लगाकर कहा कि हमारे लिए खाना गरम कर दो, तब तक में थोड़ा बाथरूम से आता हूँ और फिर उसने मुझसे कहा कि में अभी आता हूँ और वो चला गया. दोस्तों मेरा लंड तो अब तक खड़ा हुआ था और वो शांत ही नहीं हो रहा था. मैंने बहुत बार उसको शांत करने की कोशिश की, लेकिन ऐसा नहीं हुआ और अब मैंने उसकी बीवी का वो मस्त फिगर देखकर सोचा कि में अब थोड़ा और देख लूँ, क्योंकि उसकी बीवी बहुत मस्त थी.

दोस्तों अब मेरी नज़र उसे ढूँडने लगी थी और मेरे पैर अपने आप चलने लगे और में उसको ढूँडते ढूँडते उसकी किचन के पास चला गया और वहां पर पहुंचकर मैंने देखा कि सीमा खड़ी हुई थी, लेकिन उसका चेहरा उस समय दूसरी तरफ था और उसके पीछे में खड़ा हुआ था. अब में लगातार उसकी कमर को देख रहा था.

दोस्तों उसकी गांड भी बहुत मस्त थी और वो ना ज़्यादा बाहर और ना ही ज़्यादा अंदर, लेकिन मस्त थी और में उसे देखने सोचते अपने लंड को मसल रहा था. कुछ देर बाद मेरा दिमाग़ अब बिल्कुल पागल होने लगा था और में अब पूरे जोश में आ गया था. अब मेरे कदम अपने आप आगे बढ़ने लगे थे, में बिल्कुल उसके पीछे जाकर खड़ा हो गया और तुरंत मैंने अपने लंड को एक हाथ में पकड़कर उसकी गांड में पीछे से उसके कपड़ो के ऊपर से छूने लगा और फिर जैसे ही मैंने अपने लंड का दबाव उसकी गांड पर बनाया और तभी वो अचानक से छटपटा गई और वो मुझसे थोड़ा दूर चली गई.

दोस्तों उसी समय मेरा नशा टूट गया और मुझे अपने ऊपर बहुत गुस्सा आने लगा, वो भी मेरी तरफ देखने लगी, में अपना सर नीचे किए कुछ देर खड़ा रहा और वो मेरे लंड को देखने लगी. में जल्दी से वहां से निकलकर जहाँ पर हम लोगों ने खाना खाने का प्लान बनाया था और में दोबारा वहीं पर चला गया और अब में मन ही मन सोचने लगा कि मैंने उसके साथ यह क्या किया? मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था, लेकिन सच पूछो तो दोस्तों मुझे ऐसा करने में मज़ा भी बहुत आया था.

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दोस्तों उसकी गांड उफ़फ्फ़ मुझे ऐसा लगा जैसे कि मेरा लंड उसकी गांड के बीच में उसके कपड़ो को फाड़कर अंदर चला जाएगा. फिर थोड़ी देर बाद शाहबाज़ आ गया और उसने दोबारा अपनी बीवी को एक आवाज़ लगाई कि सीमा खाना लेकर आ जाओ, क्या वो गरम हो गया? फिर थोड़ी देर बाद सीमा खाना लेकर आ गई और हमारे लिए वो खाना लगाने लगी, लेकिन तब मैंने देखा कि उसकी नज़र अब भी मेरे लंड की तरफ थी, वो अपनी आंख को बिना पलक झपकाए लगातार मेरे लंड को देखे जा रही थी, जो इस वक़्त भी बिल्कुल तनकर खड़ा हुआ था और वो अब भी सोया नहीं था.

फिर वो कुछ देर बाद हमे खाना लगाकर चली गई. हम दोनों ने अपना अपना खाना खत्म किया और कुछ देर बातें करने के बाद में अपने रूम पर सोने के लिए चला गया, लेकिन मेरा दिमाग़ अब भी उस बात को बार बार याद कर रहा था और उस वजह से मेरा लंड नहीं सो रहा था. दोस्तों इस तरह उसके ख्याल में कई दिन गुजर गये, लेकिन मेरे दिमाग़ से वो बात नहीं जा रही थी.

में तो अब यह सोचने लगा था कि कैसे भी में अब उसको पकड़कर चोद दूँ, मेरे मन में अब बार बार बस वही विचार आ रहे थे और कुछ ही दिन बाद मेरी अच्छी किस्मत से मेरे हाथ एक बहुत ही अच्छा मौका आ गया, उसका पति यानी शाहबाज़ काम की तलाश में इधर उधर भटक रहा था और एक दिन वो सुबह सुबह अचानक मेरे रूम पर आ गया और उसने मुझसे कहा कि मुझे आज एक नई नौकरी मिली है और में उसी के सिलसिले में बाहर जा रहा हूँ, इसलिए तू भी प्लीज मेरे साथ चल, तेरे साथ मुझे अच्छा लगेगा. दोस्तों तभी तुरंत मेरा शैतान दिमाग़ दौड़ा और मैंने उससे कहा कि मेरी तबियत आज थोड़ी ठीक नहीं है और इस वजह से में आज अपने ऑफिस भी नहीं गया, तू मुझे माफ़ कर देना भाई, तू अकेला ही चला जा.

//क्रमशः//