पड़ोसी की बीवी को ट्रेन में चोदा-2

Padosi ki biwi ko train me choda-2

अब ट्रेन की रफ़्तार के साथ-साथ मेरी दोनों उंगलियाँ उसकी चूत में अंदर बाहर हो रही थी. अब समीना सिसकारियाँ भरने लगी थी और अपना एक हाथ मेरी पेंट की चैन के पास लाकर चैन खोलने लगी थी. फिर मैंने भी चैन खोलने में उसकी मदद की और अपना लंड समीना के हाथ में दे दिया तो वो मेरे लंड के सुपाड़े को सहलाने लगी और उसको मेरा लंड सहलाने में बहुत मज़ा आ रहा था.

अब में उसकी चूत में इस बार अपनी 3 उँगलियाँ एक साथ डालने लगा था. अब उसकी चूत से काफ़ी सारा पानी गिरने लगा था, जिससे मेरा हाथ और उसकी पेंटी पूरी भीग गयी थी, लेकिन इस बार मेरी तीनों उँगलियाँ उसकी चूत में नहीं जा रही थी तो में थोड़ा और ज़ोर लगाकर अपनी तीनों उँगलियाँ एक साथ उसकी चूत में डालने लगा.

फिर समीना मेरा हाथ पकड़कर अपनी चूत से हटाने लगी, शायद इस बार उसकी चूत मेरी तीनों उँगलियों से दर्द करने लगी थी, लेकिन में उसके होंठ अपने मुँह में लेकर चूसने लगा था. अब में अपने पूरे जोश में आ गया था और समीना की पेंटी को एक साईड में करके अपना लंड उसकी चूत के ऊपर रख दिया था, तो उसने अपने दोनों हाथों से अपनी चूत फैला दी.

अब ट्रेन की रफ़्तार से पूरा डब्बा हिल रहा था, अब मुझे तो बस थोड़ा ज़ोर लगाना पड़ा तो मेरे लंड का सुपाड़ा उसकी चूत को चीरता हुआ अंदर समा गय. तब समीना मेरे कान में कहने लगी कि धीरे-धीरे डालो विशाल भाई जान, मेरी चूत दर्द कर रही है, क्योंकि तुम्हारा उनसे काफ़ी बड़ा और मोटा है. फिर मैंने थोड़ी सी पोज़िशन लेकर उसके चूतड़ो को अपने लंड पर दबाया तो मेरे लंड का आधा हिस्सा उसकी चूत में अंदर घुस गया.

अब में उसे ज़्यादा परेशान नहीं करना चाहता था तो मैंने सोचा कि अपना पूरा लंड उसकी चूत में डाल दूँ, लेकिन उसके मुँह से चीख निकलेगी और लोग जाग भी सकते है, इसलिए में अपने लंड का आधा हिस्सा ही उसकी चूत में अंदर डाले रहा और अंदर बाहर करने लगा.

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अब उसकी पेंटी के साईड का कपड़ा मेरे लंड पर घिस रहा था, इसलिए मुझे उसे चोदने में थोड़ी तकलीफ़ के साथ-साथ मज़ा भी आ रहा था. अब समीना भी मेरी चुदाई की रफ़्तार बढ़ने से मेरा साथ देने लगी थी. अब उसकी पेंटी के घर्षण से मेरा लंड भी उसकी चूत में पानी छोड़ने के लिए तैयार हो चुका था.

फिर मैंने उसकी कमर को कसकर अपनी कमर से चिपकाया और फिर मेरे लंड ने उसकी चूत में ढेर सारा लंड रस डालकर लबालब भर दिया, जिससे उसकी पेंटी पूरी गीली हो गयी, शायद अब उसे सर्दी के कारण ठंड लगने लगी थी.

फिर उसने धीरे से अपनी पेंटी उतारकर उसी से अपनी चूत साफ करके अपनी पेंटी अपने हेंड बैग में रख दी थी. फिर में और समीना एक दूसरे से चिपककर सो गये, लेकिन अब हम दोनों की आँखों में नींद नहीं थी. फिर मैंने समीना के कान में कहा कि कुतिया बनकर कब चुदावाओगी? तो तब समीना कहने लगी कि घर चलकर जैसे चाहो वैसे चोदना, यहाँ तो बस धीरे-धीरे मज़ा लो. अब हम दोनों ने शॉल से अपना पूरा बदन ढक रख था. अब समीना फिर से मेरे लंड को पकड़कर मसलने लगी, तो में भी उसकी चूत के दाने को मसल-मसलकर मज़ा लेने लगा था. अब समीना मुझसे काफ़ी खुल चुकी थी और अब वो मेरे होंठो को चूसते हुए मेरे लंड को मसले जा रही थी. अब उसके हाथों की मसलन से मेरा लंड फिर से खड़ा होने लगा था और देखते ही देखते मेरा लंड उसकी मुट्ठी से बाहर आने लगा था.

अब समीना ने बहुत गौर से मेरे लंड की लम्बाई-चौड़ाई नापी और मेरा लंड देखकर हैरान होकर मेरे कान में बोली कि इतना मोटा-लंबा लंड तुमने मेरी चूत में कैसे घुसा दिया? तो मैंने कहा कि अभी पूरा लंड कहाँ घुसाया है मेरी रानी? अभी तो सिर्फ़ आधे हिस्से से काम चलाया है, में पूरा लंड तो तब डालूँगा, जब तू घर में कुतिया बनेगी और में कुत्ता बनकर डॉगी स्टाईल में तुझे पूरे लंड का मज़ा चखाऊँगा. अब इस पर वो ज़ोर-ज़ोर से मेरे गालों पर अपने दाँत से काटने लगी.

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फिर मैंने उसके कान में धीरे से कहा कि समीना तुम ज़रा करवट बदलकर सो जाओ, तुम अपनी गांड मेरे लंड की तरफ करके सो जाओ. अब उस पर वो धीरे से फुसफुसाकर कहने लगी कि नहीं बाबा गांड मारनी हो तो घर में मारना, यहाँ में अपनी गांड मारने नहीं दूँगी. फिर मैंने उससे कहा कि नहीं रानी में तुम्हारी गांड नहीं मारूँगा, में तो तुम्हें बस चूत और लंड का ही मज़ा दूँगा. फिर उसने करवट बदल दी, तो मैंने समीना के दोनों पैरों को मोड़कर समीना के पेट की और कर दिया, जिससे उसकी चूत पीछे से मेरे लंड को रास्ता दिखाने लगी.

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फिर मैंने उसकी गांड अपने लंड की तरफ खींचकर पहले अपनी दो उँगलियाँ डालकर उसकी चूत के छेद को थोड़ा फैलाया और फिर अपनी दोनों उँगलियाँ उसकी चूत में डालकर अपनी उँगलियों से उसकी चूत को चोदने लगा, तो समीना उस पर थोड़ा चीखी.

फिर में उसके गाल पर एक चुम्मा लेकर अपने लंड को समीना की चूत में धीरे-धीरे घुसाने लगा और बहुत कोशिश करने के बाद भी में केवल अपना आधा लंड ही उसकी चूत में घुसा पाया. में उसको ज़्यादा से ज़्यादा मज़ा लेना और देना चाहता था, इसलिए में बहुत धीरे-धीरे और आराम से अपना लंड उसकी चूत में डालकर अपने एक हाथ से उसकी चूची को मसलने लगा था. फिर मैंने देखा कि अब समीना भी अपनी गांड मेरे लंड की तरफ दबा रही थी.

फिर कुछ ही मिनटों में समीना की चूत पानी छोड़कर झड़ गयी, जिससे मेरा लंड बिल्कुल गीला और चिपचिपा हो गया, जिस कारण मेरा लंड का उसकी चूत में केवल आधा हिस्सा ही घुस सका था और अब में धीरे-धीरे अपनी कमर ट्रेन की रफ़्तार और बोगी के धक्को के साथ हिलाने लगा था. फिर वो भी अपनी गांड को मेरे लंड की और दबाते हुए चुदाई का मज़ा लेने लगी थी और इस बार काफ़ी देर तक हम दोनों चोदा–चोदी करते रहे.

फिर ट्रेन ने एक बार सिग्नल नहीं मिलने के कारण ऐसा ब्रेक मारा कि समीना के चूतड़ो ने पीछे की तरफ मेरे लंड की और दबाव डाला, जिससे मेरा पूरा लंड झट से उसकी चूत की गहराई में घुसता हुआ उसकी बच्चेदानी से जा टकराया.

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अब समीना के मुँह से भयानक चीख निकलने ही वाली थी कि मैंने अपने एक हाथ से समीना का मुँह बंद कर दिया. अब में तो ट्रेन पर उसके साथ ऐसा नहीं करना चाहता था, लेकिन ट्रेन के अचानक ब्रेक लगने के कारण ऐसा हुआ. अब वो धीरे-धीरे सिसक रही थी.

फिर मैंने अपने लंड को स्थिर रखकर पहले समीना की दोनों चूचियों को कस- कसकर मसला और जब उसे कुछ राहत मिली तो वो खुद ही अपनी कमर आगे-पीछे करने लगी, शायद अब उसे दर्द की जगह पर ज़्यादा मज़ा आने लगा था.

फिर कुछ ही देर के बाद मैंने मेरे लंड पर उसकी चूत की सिकुड़न महसूस की, तो में समझ गया कि वो दूसरी बार झड़ रही थी. फिर मैंने भी कुछ ही देर के बाद उसकी चूत में अपने लंड की पिचकारी मारकर उसकी चूत को लबालब भर दिया और उठकर अपने कपड़े ठीक किए.

फिर समीना बोली कि विशाल में पेशाब करके आती हूँ और फिर वो पेशाब करके वापस आई और उसके बाद में भी पेशाब करने चला गया. फिर जब टायलेट में मैंने अपनी अंडरवियर में से अपना लंड बाहर निकाला तो मैंने देखा कि मेरे लंड पर समीना की चूत रस के साथ-साथ उसकी चूत का कुछ-कुछ खून भी लगा था. फिर मैंने पेशाब करके अपने लंड को धोया और फिर वापस आकर हम दोनों सो गये. फिर सुबह करीब 9 बजे हमारी आँखे खुली तो मालूम हुआ कि आधे घंटे में हमारा स्टेशन आने वाला है, तो हम फटाफट से सामान पैक करके तैयार हो गये.

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