Papa Ki Randi Beti Lund Chus Rahi Hai Papa Ka-1

(Papa Ki Randi Beti Lund Chus Rahi Hai Papa Ka-1)

मेरा नाम कंचन है, में बनारस की रहने वाली है। आज में आप सभी को मेरे पापा के साथ की पहले सेक्स एक्सपीरियन्स की स्टोरी बताने जा रही हूँ, जो कुछ महीने पहले हुई। अब में आपको ज्यादा बोर ना करते हुए सीधी अपनी स्टोरी पर आती हूँ। मेरा नाम कंचन है, मेरी उम्र 25 साल है और में दिखने में बिल्कुल अमीशा पटेल की तरह हूँ, मेरी हाईट 5 फुट 2 इंच और वजन 48 किलोग्राम है, मेरा फिगर साईज 36-26-36 है। यह बात 3 महीने पहले की है, जब मेरी मम्मी 1 महीने के लिए मेरे नाना जी के वहाँ गयी थी। अब घर में मेरे पापा और में ही थे, यह रविवार रात की बात है जब बनारस में 24 घंटे से लाईट नहीं आ रही थी और शायद अमावस्या की रात थी, बिल्कुल काली और बादलों से घिरी हुई और बीच-बीच में बादल गरज रहे थे। Papa Ki Randi Beti Lund Chus Rahi Hai Papa Ka.

मेरा छोटा भाई भी छुट्टियों मे मम्मी के पास नाना जी के यहाँ गया था और वो सोमवार को आने वाला था। अब यूँ तो मेरे पापा 6 बजे तक घर आ जाते है, लेकिन ना जाने क्यों रात के 10 बज गये थे? और पापा का अता पता नहीं था, उनका मोबाईल भी बंद था और मेरी बहुत कोशिश के बाद भी उनका कुछ पता नहीं चल पा रहा था। फिर मैंने उनके ऑफीस फोन किया, तो वहाँ भी कोई टेलिफोन नहीं उठा रहा था। अब में परेशान थी और मोमबत्ती की रोशनी में पढ़ने का मन लगा रही थी, लेकिन बादलों की घरघराहट से मेरा मन बार-बार कांप उठता था। अब बाहर ग़ज़ब की बरसात हो रही थी और बार-बार बादल डरा रहे थे। अब 11 बजने को थे कि अचनाक दरवाजे की घंटी (बेट्ररी वाली) बजी, तो मैंने खिड़की खोलकर देखा तो दरवाजे पर रिक्शे खड़ा था तो में डर गयी और भगवान से प्रार्थना करने लगी कि रक्षा करना पता नहीं कौन है?

फिर मैंने टॉर्च की रोशनी में देखा तो मेरे पापा थे और एक रिक्शेवाला उन्हें रिक्शे से उतारने की कोशिश कर रहा था। फिर मैंने आगे बढ़कर दरवाजा खोला और रिक्शे से पापा को उतारा, वो बिल्कुल भीगे हुए थे और वो बेहोश थे और उनका शरीर बुखार से तप रहा था और उनके मुँह से शराब की दुर्गंध आ रही थी। अब में हैरान थी, क्योंकी मैंने मेरे पापा को कभी इस हालत में नहीं देखा था। फिर में पापा को लेकर अंदर आ गयी और अपने कमरे में बैठाया और एक-एक करके उनके कपड़े उतारने शुरू किए। फिर मैंने उनकी शर्ट और बनियान उतारकर उनके बदन को टावल से रगड़-रगड़कर सुखाया और अचानक से उनकी पेंट की चैन खोल दी। अब वो इतने नशे में थे कि उनको पता ही नहीं चल रहा था कि में क्या कर रही हूँ?                         “Papa Ki Randi Beti”

फिर उनकी चैन खोलने के बाद मैंने उनकी पेंट को नीचे उतार दिया, तो मैंने देखा कि उनका अंडरवेयर भी बिल्कुल भीगा है तो मैंने उसको भी उतार दिया, तो मैंने जो अंदर देखा उससे मेरे बदन में 880 वॉल्ट का करंट दौड़ गया और अजीब सी सुरसुरी होने लगी। अब जैसे ही में उनके बदन और टांगो को पोछ रही थी, तो मेरा हाथ आगे बढ़कर उनके लंड पर चला जाता, जिससे उनका लंड खड़े होने की तरफ बढ़ने लगा और देखते ही देखते वो पूरे शबाब पर आ गया और मेरे सामने तनकर खड़ा हो गया। अब में कभी पापा को देखती, जो अभी भी अपने होश में नहीं थे और कभी उनके लंड को देखती, जो पूरा सीधा खड़ा था और खंबे की तरह तनकर खड़ा था। अब मेरा मन ललचाने लगा था और रिश्ते को भूलकर मेरा मन हो रहा था कि में उनके लंड को सक और लीक करने लगूं, लेकिन वो मेरे बाप थे और में उनकी लड़की थी। अब मेरा ऐसा कर पाना संभव नहीं था इसलिए मैंने अपने मन को मारने की कोशिश की, लेकिन अंत में सेक्स जीत गया और में उनके लंड को अपने मुँह में लेकर उसे अंदर बाहर करने लगी।                 “Papa Ki Randi Beti”

अब धीरे-धीरे मेरी अंदर बाहर करने की स्पीड बड़ने लगी थी और देखते ही देखते करीब 10 मिनट के बाद मुझे लगा कि मेरे मुँह में मेरे पापा का वीर्य था, जो करीब 50 ग्राम तो होगा ही। अब मेरा पूरा मुँह उनके वीर्य से भर गया था और में उनके वीर्य को निगलने लगी थी। अब मुझे बहुत ही मज़ा आ रहा था, क्योंकि मैंने ज़िंदगी में पहली बार क़िसी मर्द के वीर्य को देखा और मुँह में लिया था। उनके वीर्य का अजीब सा स्वाद था ना बहुत मीठा ना बहुत तीखा, बिल्कुल बेस्वाद सा था, लेकिन मुझे निगलने में ही अच्छा लगा तो मैंने निगल लिया। अब में पूरी तरह से सफाई कर पापा को वापस से कपड़े पहनाने लगी थी और इस पूरी प्रतिक्रिया में मेरा क्या हाल था? में आपको नीचे बताती हूँ। अब मेरे शरीर का एक-एक अंग हिला जा रहा था और मेरे निपल्स बिकुल कड़क थे और मेरी चूत का हाल बुरा था, वो तप-तपकर गर्म हो रही थी, लेकिन अब में क्या कर सकती थी? पहले अपने बाप को ठीक कर लूँ फिर अपनी सुध लूँगी, क्योंकि अब तो पापा का लंड भी ढीला पड़ गया था इसलिए चुदने का तो कोई चान्स ही नहीं था।                         “Papa Ki Randi Beti”

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फिर में पापा को पज़मा और ऊपर शर्ट पहनाकर किचन में चली गयी और जल्दी से कुछ खाकर पापा के पास आ गयी और उनकी देखभाल के लिए उनके पास ही बैठ गयी। फिर लगभग करीब 2 घंटे हो गये होगें की मेरी आँख लग गयी और में पापा पर ही बेहोश या बेसूध होकर पड़ गयी। फिर जब मुझे होश आया, तो पापा को भी होश आ चुका था और वो कुछ-कुछ होश में आ रहे थे, लेकिन अब इस हादसे के बाद मेरी हालत खराब थी। फिर मैंने पापा को जगाया और पूछा कि क्या हाल है? तो वो धीरे से बोले कि ठीक है और इतना सुनते ही में पलटी और अपने रूम की तरफ जाने लगी। तो पापा ने कहा कि आज इधर ही सो जाओ, तो में पापा के पास ही लेट गयी और पापा का एक हाथ अपने सिर के नीचे रख लिया। फिर थोड़ी ही देर मैंने देखा कि पापा का एक हाथ मेरी खड़ी चूचीयों को सहला रहा था और धीरे-धीरे मसल रहा था।                           “Papa Ki Randi Beti”

कहानी जारी है तीन पार्ट में-

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