पति से लिया बेज़्ज़ती का बदला-1

Pati se liya bejjati ka badla-1

हैल्लो दोस्तों, में पारुल आज आप सभी चाहने वालों को अपनी एक ऐसी सच्ची घटना सुनाने जा रही हूँ, जिसके मैंने पूरे पूरे मज़े जरुर लिए, लेकिन उसके बाद में मुझे बहुत अफ़सोस भी हुआ, क्योंकि यह सब कुछ मेरे पति की एक बात की वजह से हुआ. दोस्तों अब में सीधी अपनी कहानी पर आती हूँ और वो सारी बातें आप सभी को विस्तार से बताती हूँ.

दोस्तों एक दिन कचरे से भरे बेग को फेंककर जब में पीछे मुड़ी तो हमारी बिल्डिंग के सामने खड़े उस आदमी को देखकर मेरे मन में ना जाने क्यों एक अजीब सी खलबली और डर सा भी लगा. जिसकी लम्बाई 6 फिट, काला बदन, मोटा, काले बालों से ढका उसका पूरा शरीर, राक्षस जैसा रूप.

दोस्तों वो हमारी बिल्डिंग का चौकीदार था और उसने मुझे अपनी खा जाने वाली नजर से देखा. मैंने उसको एक नज़र देखकर अपना पल्लू ठीक किया और सर को झुकाकर कचरे के डब्बे को सख़्त से पकड़ उस कातिल नज़र को पार करती हुई जल्दी से में अपने घर में घुसकर मैंने जल्दी से दरवाजा बंद कर दिया.

दोस्तों वैसे मेरे इन बूब्स ने मुझे बचपन से ही बहुत परेशान किया, मेरे बूब्स का आकार 36 है. में मोटी होती तो फिर भी बात अलग थी, लेकिन इस 26 की पतली कमर पर तो इन दोनों बड़े आकार के आमों को कितना भी ढक लो, यह सभी को अपनी आकर्षित जरुर करते थे, इसलिए हमेशा मैंने इन्हे बचाकर रखा था और सोचा था कि यह जवानी सिर्फ़ में अपनी शादी के बाद अपने पति को दूँगी. मेरा रंग बहुत गोरा और में दिखने में बहुत सुंदर हूँ.

मेरा ऐसा फिगर कि हर कोई मेरी तरफ लट्टू हो जाए. दोस्तों मेरे पापा ने भी उनको इंजिनियर है बताकर उनसे मेरी शादी करवा दी थी, लेकिन सुहागरात को घुसते ही उनका बीज निकल गया. उनका बहुत छोटा सा 4 इंच लंबा पतला गोरा सा लंड. अब मुझे पता चला कि में कोलकाता से इतनी दूर राँची में कितनी अकेली हूँ और पहले पूरे सप्ताह में एक या दो बार ही मेरी अधूरी चुदाई होती, वो सारा दिन काम करते थे इसलिए वो जल्दी थककर सो जाते और में शर्मीले स्वभाव की लड़की उनसे बोलती भी क्या?

दोस्तों मेरी शादी के दो साल ऐसे ही हो गये और वैसे यह चौकीदार तब से यहीं इस बिल्डिंग में है, वो करीब 50-55 साल का तो होगा.

एक बार रात को में करीब एक बजे पेशाब करने के लिए उठी और पेशाब करने के बाद मैंने सोचा कि थोड़ा बालकनी में हवा खा लेती हूँ. मैंने लाईट जलाए बिना ही बालकनी से देखा तो हर रोज की तरह वो चौकीदार और उसके दो शराबी फुटपाती दोस्त रोड़ लाईट के नीचे बैठकर किसी लड़की का मज़ाक बनाकर हंस रहे थे. मुझे उनकी बात सुनने में बहुत मज़ा आता था.

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उनमे से एक : अरे यार तू जब उसका पति नहीं रहेगा तब घुस जाना.

चौकीदार : साली के बूब्स ने मुझे पिछले दो साल से बहुत परेशान कर रखा है.

दूसरा : हाँ तो और कब तक लंड हिलता रहेगा? जाकर चोदकर उसकी चूत की दीवारे छील डाल.

दोस्तों में उनकी बातें सुनकर समझ चुकी थी कि आज इनके बीच में बस मेरी ही चर्चा हो रही है. मुझे उनकी बातें सुनकर बहुत गुस्सा आया, लेकिन में करती भी क्या?

फिर चौकीदार अपने लंड को लूँगी के ऊपर से घिसते हुए उठा और लड़खड़ते हुए पीछे मुड़ा और झट से लूँगी ऊपर करके अपने लंड को बाहर निकाल लिया, में घबरा गई. फिर उस 6 इंच लंबे और 2 इंच मोटे लंड से एक पानी की धार निकलने लगी, वो मुड़ा और अब उसने बोतल को उठाकर लड़खड़ते हुए वो अपनी झोपड़ी की तरफ चल दिया.

तब तक मैंने अपनी मेक्सी के अंदर दोनों पैरों के बीच एक गीलापन महसूस किया जो बालकनी की हवा से ज्यादा ठंडी महसूस हो रहा था और फिर में जाकर अपने पति के पास लेट गई और अपनी आखों को बंद किया, लेकिन यह क्या? वो काला लंड फिर मेरी आँखों के सामने था.

में किसी तरह उसको भुलाने की कोशिश करते करते सो गई और सुबह उठी और पति को खाना बनाकर ऑफिस भेजकर में बाज़ार निकली. नीचे जाते ही वो आदमी मुझे दिखा.

चौकीदार : मेडम क्या बाज़ार चली?

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में अंदर तक काँप गई, लेकिन फिर भी मैंने हिम्मत जुटाकर कहा कि हाँ और वहां से निकल गई. आख़िर अगर आपको पता हो कि एक आदमी आपके बूब्स का दीवाना है और आपको घूरता है तो आप कैसे उससे बात कर पायेंगे.

फिर जब में लौटी तो वो फिर से खड़ा हो गया और मेरे पास आकर बोला कि लाइये मेडम जी मुझे दे दीजिए, लेकिन मैंने पिछले बार की तरह उसे वो सामान नहीं दिया. उसने बहुत बार माँगा, लेकिन मैंने उससे मना करती हुई अपने घर में चली गई.

फिर मुझे डर लगा कि हे भगवान मैंने यह क्या किया? कहीं उसे शक तो नहीं हो गया कि में उसके इरादो को जान गई हूँ और में यह सोचते हुए खिड़की से उसे देखने लगी. जैसे ही मैंने पर्दे के एक हिस्से को साइड में किया तो झट से उसे वापस मुझे गिरना पड़ा, क्योंकि वो साला अब इसी तरफ देख रहा था.

दोस्तों पता नहीं उसके बाद मुझे क्यों ऐसा ख्याल आता रहा कि वो मोटा काला लंड जिसके ज्यादा घुँगराले गंदे बाल है जो नसो से जकड़ा हुआ है वो मेरी गोरी और साफ चूत में बहुत बेरहमी से अंदर घुस और बाहर निकल रहा है और मुझे कभी कभी ख्याल आता था कि शायद वो मुझे एक बार मेरे घर में ज़बरदस्ती घुसकर मेरे बूब्स और चूत का सही इस्तेमाल करे, मेरी इन आकर्षक निप्पल जो गुलाब जैसी लाल है इन्हे अपने मुहं में लेकर अपने काले होठों से खेले, लेकिन यह सब भारत में संभव नहीं है और यह बात सोचकर में अपनी इच्छाओ को दबा देती, लेकिन वो मेरे पीछे ही पड़ा रहता और अब धीरे धीरे उसकी हिम्मत बढ़ती ही जा रही थी. कभी में बाज़ार से आती तो मेरा बेग लेने के बहाने वो मेरे हाथ पकड़ लेता और में डरकर उसे बेग दे देती. में कचरा फेंकने जाती तो खुले आम मेरे बूब्स को घूरता और नज़र जाने पर जानबूझ कर अपनी जीभ को होंठो पर फेरता तो में शरमाकर घर भाग आती, लेकिन यह सब अब मुझे एक सुंदर अनुभव लगने लगा था.

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एक बार में जब बालकनी से कपड़े लेने गई तो मेरी एक ब्रा खो चुकी थी और अगले दिन जब में कपड़े धो रही थी तो मेरे पति भी उस समय ऑफिस में थे और तभी दरवाजे की घंटी बजी. दरवाजा खोला तो वो आदमी खड़ा मुस्कुराता हुआ बोला कि मेडम जी यह लीजिए आपकी ब्रा. अब मैंने गौर से देखा तो वो मेरी ब्रा थी.

मैंने हाथ बढ़ाकर ले लिया और धन्यवाद बोलकर दरवाजा बंद कर दिया. फिर गौर से देखा तो उस हरामी ने उसमे जानबूझ कर माल फेंका था. बिल्कुल चादर में जैसे मेरे पति का वीर्य का दाग होता है वैसा ही उसमे एक कड़क धब्बा था. मैंने गुस्से में उसको कचरे में फेंक दिया, लेकिन मुझे फिर उसके लंड की याद आ गई और में चुदने के लिए तड़प उठी.

मेरे पति ने मुझे 10 दिन से छुआ भी नहीं था, जबकि मेरी जवानी जबर्दस्त चुदाई की हकदार है तो पति के घर आने से पहले में बहुत सजने लगी और मैंने एक हॉट सी मेक्सी पहनी और तभी घंटी बजी और दरवाजा खोला तो वो मेरे पति थे, लेकिन वो बहुत थके हुए अंदर आए, वो बैठे और उन्होंने मुझसे पानी माँगा तो मैंने उनको लाकर दे दिया और प्यार से उनके पीछे से जाकर उनको पकड़ा और अपने बूब्स को उनकी गर्दन के दोनों तरफ फंसाया और उनके सर को चूमा.

फिर अचानक से उन्होंने मुझे एक धक्का दे दिया और कहा कि यह क्या बचपना है, मुझे कुछ देर शांति से बैठने भी नहीं देती. दोस्तों उनके इस व्यहवार से मुझे बहुत गुस्सा आ गया और मैंने भी उनसे झगड़ा किया. मैंने उनसे कहा कि तुम ने पिछले दो सप्ताह से मुझे एक बार छुआ तक भी नहीं, ऐसा ही था तो तुमने मुझसे शादी क्यों की? लेकिन उन्होंने मुझसे बातों ही बातों में कहा कि तुम एक ठरकी औरत हो और तुमसे शादी करके में खुद फंस गया हूँ.

दोस्तों उनके मुहं से यह बात सुनकर में एकदम से चौंक गई और अब में उनसे कुछ ना कह सकी और वो बिना खाना खाए सो गये. में भी सोफे पर जाकर रो रही थी और अपनी किस्मत को कोस रही थी और ना जाने कब मेरी भी नींद लग गई और जब मेरी नींद खुली तो मैंने देखा कि वो अपने ऑफिस जा चुके थे, लेकिन मुझे उनकी ठरकी वाली बात काट रही थी और अब में सोच रही थी क्या मैंने इसी दिन के लिए अपनी जवानी इस चूतिये के लिए संभालकर रखी थी? मुझमे एक गुस्सा उमड़ा कि में अपने मायके कोलकाता चली जाऊँ.

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तभी मैंने बालकनी से झाँका तो चौकीदार नीचे बैठकर अपनी धुन में कोई बिहारी गाना गा रहा था और मुझे एक तरकीब सूझी जिससे मेरे इस झगड़े की वजह ही नहीं रहेगी और में अपने पति की इस बदसलूकी का बदला भी ले सकूँगी.

अब मैंने अपनी कचरे की बाल्टी उठाई और में बिना चुन्नी के मेक्सी में नीचे जाकर बोली कि चौकीदार ज़रा यह कचरा फेंक आना, वो मुझे इस हालत में देखकर चौंकते हुए हाँ जी मेडम और कचरा फेंककर आने के बाद वो मुझे वहां पर नहीं पाकर मेरे घर के पास आया तो उसने देखा कि मेरा दरवाजा पहले से ही खुला हुआ था इसलिए वो मेडम आपकी कचरा दानी लीजिए यह बात बोलकर जैसे ही उसने दरवाजा खोला, तो मैंने किचन से आवाज़ देकर कहा कि हाँ तुम उसे अंदर रखकर बैठो और चाय पीकर जाना, यह बात कहकर मैंने अपनी मेक्सी के सारे ऊपर के बटन खोल दिए और मेरी ब्रा के चंगुल में फंसकर मेरे दोनों बूब्स मिलकर एक मस्त नजारा बना रहे थे.

फिर में किचन से बाहर निकली तो मैंने देखा कि वो काला लंबा आदमी कुर्सी के पास खड़ा है और मैंने उसको बैठने के लिए कहा और अब जैसे ही मैंने उसके सामने झुककर उसे चाय दी तो मैंने उसकी सबसे पसंदीदा जगह को उसे दिखा दिया. में उसको बहुत अच्छे से अपने बड़े बड़े बूब्स को दिखाकर खड़ी हुई और फिर उससे मुस्कुराकर पूछा कि बताइए कैसा है?

दोस्तों वो तो बहुत ही शातिर निकला और बोला कि पहले मन भरकर पी तो लूँ और में मुड़कर वापस आने लगी. तभी एक डर ने मुझे हिला दिया कि यह में क्या कर रही हूँ? एक झगड़े के लिए में अपनी सारी शादीशुदा जिंदगी दांव पर लगा रही हूँ और तभी वो पीछे से बोला कि मेडम जी में क्या आपसे एक बात कहूँ? तो मैंने कहा कि हाँ कहो, तो वो बोला कि कल रात को आपके पति का आपके साथ जो कुछ भी झगड़ा हुआ था वो सब कुछ मैंने सुना है.

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