पिंकी की बेटी सोनिया-1

(Pinki Ki Beti Soniya- Part 1)

मेरी साली पिंकी-3

से आगे

पता नहीं साली किस मिट्टी से बनी थी, मैंने पूरा उतार दिया और रगड़ने लगा। साथ साथ वो खुद अपनी चूत के दाने को मसल रही थी और मैं उसकी चूचियों को और गाण्ड को दबा कर चोद रहा था। पूरी रात हमने नज़ारे लूटे !

सुबह जब उसकी आँख खुली तो खुद को पूरी नंगी मेरे साथ चादर में पाया तो मेरी भी आंख खुल गई।

मैंने उसको खींच लिया।

जीजू, यह क्या हो गया?

उसकी गालें शर्म से सुर्ख लाल होने लगी, वो आँख मिलाने से बचना चाहती थी।

मैंने उसको दबोच कर उसके होंठ चूम लिए ताकि उसकी शर्म उतरे और वो आगे भी मेरी सेवा करती रहे।

मुझे शर्म आती है ! वो उठी, कपड़े पहनने लगी, बोली- जीजू सर चकरा रहा है, बदन टूट रहा है। यह क्या हो गया?

जो हुआ, सही हुआ !

उसने कपड़े पहन लिए। मैंने उसको बाँहों में ले लिया और कहा- जान, मैं तुझे बहुत प्यार करता हूँ। तुम नहीं जानती कि कब से मैं तुझे चाहता था लेकिन रिश्ते की मर्यादा नहीं लांघना चाहता था, पर यह सारी मर्यादा नशे के सामने घुटने टेक गई। चलो नशे ने हमें एक तो किया।

ऐसे जिंदगी चलने लगी, मौका देख हम एक होने लगे। दो साल ऐसे ही बीत गए, मैं भी एक बेटे का बाप बन गया और उसकी देख-रेख के लिए मेरी साली आती जाती रहती।

मौका मिलता तो हम आउट हाउस में मिल कर मजे लूटते।

बेटा एक साल का हुआ, जश्न मनाया गया, उसका पहला जन्मदिन मनाया गया।

मेरी साली की बेटी जिसका मेरे पत्नी से बहुत प्यार था वो अक्सर छुट्टी वाले दिन हमारे यहाँ रहने आ जाती। फिर मेरी पत्नी दूसरी बार गर्भवती हो गई।

उधर अचानक से मेरी साली का अपने पति के साथ काफी बड़ा बवाल हो गया, काफी झगड़ा हुआ, बेटा उसने अपने पास रख लिया और मेरी साली बेटी को लेकर मायके रहने लगी।

इस बार लड़ाई काफी बड़ी हुई लगती थी, हम बीच-बचाव में आये भी, सुलह-सफाई करवाई मगर कुछ दिन असर रहता फिर से दोनों अलग !

वजह थी कि उसकी नौकरी छूट गई क्यूंकि वो कहता था कि उसकी पत्नी बदचलन है, अय्याश है, उसके यारों के नीचे लेटती है, वजह भी बताई जिससे उसको शक हुआ, कहता कि मैं एक महीना घर नहीं था, लेकिन जिस दिन घर आया, घर के पीछे वाले लॉन में ताज़ा बरता हुआ कंडोम देखा, एक नहीं और भी देखे।

लड़ाई अब ज्यादा थी, साली को मेरा लौड़ा भी मिलता था, शायद औरों का भी मिलता था। वो मस्त थी, मायके बैठी रहती, कभी हमारे यहाँ रहने आती, सोनिया को हमारे घर के पास वाले स्कूल में डाल दिया और वो हमारे यहाँ रहने लगी। तब तक भी उस पर मेरी गंदी नज़र नहीं थी। मेरी पत्नी के साथ काम-वाम भी करती, उस पर जवानी एकदम से आने लगी, उसके उभार बहुत तेज़ी से विकसित हो रहे थे। यह मुझे उस दिन एहसास हुआ जब मैं बाथरूम में नहा रहा था, मुझे पीछे ब्रा टंगी हुई दिखी। वो मेरी पत्नी की नहीं हो सकती थी, उसके तो मम्मे बड़े थे, फिर मुझे याद आई सोनिया, सोचा- इतनी बड़ी हो गई है कि ब्रा पहनने लगी है?

मुझे तो एहसास नहीं था, मैंने बात दिमाग से निकालने की काफी कोशिश की, वो मेरे बेटे के साथ जब खेलती तो जब भागती तो उसकी चूचियाँ हिलती।

यह मैं तब देखने लगा जब से उसकी ब्रा देखी। मेरा भी दिल बासी खा खा कर उब चुका था, काफी देर से कोई कुंवारी नहीं ठोकी थी।

था तो पाप ! मगर क्या करता? लौड़ा है कि मानता नहीं।

मुझे यह इल्म नहीं था कि सच में एक दिन वो मेरे से चुद भी जायेगी।

एक दिन मैं एक दुकान पर खड़ा था, उसी वक़्त स्कूल से छुट्टी हुई। सोनिया घर के लिए निकली। कुछ लड़के बाईक पर उसके आसपास धीरे धीरे चलते हुए फ़िकरे कस रहे थे।

मुझे गुस्सा आया, सोचा कि सरफिरों की माँ ही चोद दूंगा, आसपास मेरी बल्ले बल्ले है।

लेकिन जब मेरा ध्यान सोनिया के चेहरे पर गया तो मैं हैरान रह गया, वो मुस्कुरा कर मुंह नीचे कर लेती।

उस दिन शाम की बात है, मैं जब घर आया मेरी पत्नी डॉक्टर के पास गई हुई थी, सोनिया अकेली घर थी। जब मैंने दरवाज़े पत घण्टी बजाई, वो अंदर से भागी भागी आई, उसकी उछलती चूचियाँ देख मैं फिर से सोचने पर मजबूर हो गया।

मुझे शरारत सूझी।

वो रसोई में खड़ी थी, मैं जाकर उसकी बगलों में हाथ डाल उसको गुदगुदी करने लगा।

अह ! मौसा जी, बहुत गुदगुदी होती है !

अच्छा जी !

वो निकल भागी, मैं पीछे भागा, वो जाकर दीवान पर गिर गई। मैंने उसको दबोच लिया और गुदगुदी के बहाने से मैंने उसके दोनों मम्मो को पकड़ लिया और दबाने लगा।

मौसा जी, छोड़ो ना ! बहुत गुदगुदी होती है !

मैंने बहाने से उसके मम्मों का जायजा लिया, उसके मुंह से सिसकी भी निकल आई थी, लेकिन उसने खुद को कण्ट्रोल किया। मैंने उसकी टीशर्ट में ही हाथ घुसा कर दबा दिए, शायद उसको मजा आने लगा था।

तभी गेट खटका, मैंने उसको छोड़ा, हमने अलग हुए।

मैंने देखा- मेरा सांडू था।

सोनिया को लेने आया हूँ ! हमारा कनाडा का फॅमिली वीसा आ गया है, मैंने टिकट भी करवा लिए हैं और अब मैं भी अपने परिवार के साथ रहूँगा।

मैं बहुत उदास हो गया। क्या कर सकता था मैं !

वो उसको अपने साथ ले गया। मैं बहुत उदास हो गया कि कबूतरी हाथ लगी थी, कुछ दिनों की मेहनत के बाद में उसको चोद भी लेता जिस तरह मैंने उसको लड़कों को मुस्कुरा के दिखाना देखा था।

ऊपर से दोहरी उदासी थी कि पिंकी, मेरी साली भी हाथ से जा रही थी।

वो लोग चले गए, समय निकला, वहाँ जाकर वो सात महीने तो आराम से रहे लेकिन फिर से वहाँ दोनों का झगड़ा हो गया और फिर अलग हुए।

सोनिया माँ के साथ ही रही, वो पिंकी को बहुत परेशान करता था, उधर पिंकी का फ़ोन आया कि बच्चे वहाँ रह कर हाथ से फिसल रहे हैं।

इधर मैं अब दो बच्चों का बाप बन गया था, उसने वहाँ से आ रहे एक बुजुर्ग जोड़े के साथ सोनिया को भेज दिया। मैं उसको दिल्ली एअरपोर्ट लेने गया। उसके रंग ढंग सब ही बदले पड़े थे। कैपरी और नाभि से ऊपर तक ही कसा हुआ मस्त टॉप ! उसके तो मम्मे और भी सेक्सी हो गये थे। इतनी जल्दी वो इतनी बदली सिर्फ सात महीनों में !

वो अपने साथ अपना लैपटॉप खरीद कर लाई थी उस में लगी रहती। उसके कपड़े देखने वाले थे लेकिन मेरी पत्नी उसको सुधारना चाहती थी, उसको दुबारा स्कूल में डाला, उसका लैपटॉप कब्ज़े में लिया, उसका मोबाइल फ़ोन कब्ज़े में लिया, जिस पर लड़कों के कनाडा से फ़ोन आते थे।

एक दिन साली का फ़ोन आ रहा था, पत्नी दूसरे कमरे में बैठ बात करने लगी, इधर का फ़ोन मैंने उठा लिया।

कह रही थी- मोना, इसको तू ही सुधार ! यहाँ तो यह हाथ से फिसल रही थी।

वो कैसे हुआ? क्या था? क्या किया था इसने?

बोली- हम शिफ्ट पर थे, वहाँ काम से इधर-उधर का नहीं हो सकता इसलिए यह अपने हिसाब से सोच कर यह फायदा उठाने लगी थी। इसको किसी ने बीच पर एक गोरे लड़के के साथ बिकनी पहने उससे लिपटे हुए देखा। यह बात मुझे नीचे फ़्लैट में रहने वाली मेरी पाकिस्तानी आंटी जिससे मेरा काफी मेलजोल है, उसने मुझे बताई थी। मोना इसी लिए मैंने इसको यहाँ से निकाला है, अब तुम और जीजा जी को इसको ठीक करना है।

मेरा तो लौड़ा खड़ा हो गया सुनकर, मैंने धीरे से तार निकाली और फ़ोन रख दुबारा तार लगा दी।

समझ गया। मुझे मालूम था मुझे क्या करना है।

जिस दिन से उससे लैपटॉप और मोबाइल छीना था, वो अपसेट थी, अपनी मौसी से बहुत खिझी हुई थी।

मेरी पत्नी भी जॉब करती है, मैं दोपहर को घर आता हूँ। एक दिन मैंने उसको फिर से गुदगुदी की, वो भागी, मैंने फिर से पकड़ा और उसके मम्मे दबाये। इस बार वो खीज गई, समझ गया कि क्या हुआ। सोनिया, तुम इतनी खिझी कब से हो गई?

सब कुछ छीन लिया मौसी ने ! इतनी पाबंदी लगा दी है, इतना मजा आता था कनाडा में लाइफ जीने का !

ओह हो ! मुझे बता ना ! चल मौसी घर नहीं है !

मैंने उसको अपना लैपटॉप दिया, बहुत खुश हुई।

लगता है काफी बॉय फ्रेंड बनाएँ हैं तुमने फेसबुक पर !

वो बहुत खुश थी, मैं जानता था कि उसको क्या चाहिए – आजादी !

वो बहुत खुश हुई। मैंने उसको गुदगुदी निकाली, वो भागी और आज बेडरूम की तरफ भागी, जाकर बैड पर गिर गई।

मैंने उस पर छलांग लगाई और उसकी जांघों पर बैठ गया और उसकी बगलों में हाथ घुसा कर गुदगुदी करने लगा। मैं अपने हाथ उसके मम्मों पर ले जाकर दबाने लगा।

छोड़ो-छोड़ो करते उसने मुझे पलटा दिया। अब मैं नीचे था, वो ऊपर मुझे गुदगुदी करने लगी।

मैंने उसको अपने ऊपर खींच लिया वो मुझे लेकर रोल हुई और वो मेरी बाँहों में कसी पड़ी थी।

मैंने उसके मम्मे खूब दबाये।

तो बोली- मौसा जी, क्या यह गुदगुदी है?

उसके चेहरे पर शरारत भरी मुस्कान थी।

क्यूँ? तुझे क्या लगा? बता दे !

नहीं, ठीक है ! कुछ नहीं ! गुदगुदी ही है ! मुझे छोड़ोगे भी? या अपने ही नीचे डाले रखोगे? अगर गुदगुदी ख़त्म हुई हो तो?

आगे क्या कुछ हुआ? अगले भाग में !

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