पूजा की चूचियों का अमृत

Pooja ki chuchiyon ka amrit

नमस्कार दोस्तो!!

मैं हूँ योगीश, उम्र 22 साल। मेरे दोस्त मुझे योगी बुलाते हैं। मैं जयपुर का रहने वाला हूँ।

मैने एम एस एस पर बहुत कहानियाँ पढी हैं। मेरी भी इच्छा हुई इस पर कहानी भेजने की…

तो दोस्तो, आज मैं अपनी जिंदगी की सच्ची घटना आपको बताने जा रहा हूँ। उम्मीद करता हूँ आपको पसन्द आयेगी!!

दोस्तो, कहानी शुरु करने से पहले मैं आपको बता दूँ कि ये मेरी जिन्दगी की पहली और आखिरी घटना है, जिसने मेरी जिंदगी ही बदल दी!!!

तो मैं अब अपनी कहानी पर आता हूँ।

ये घटना, उस समय की है जब मैं दसवीं क्लास पास करके आगे पढने के लिए कोटा गया था।

मैंने एक रुम किराये पर ले लिया। मेरी पढाई अच्छे से चलने लगी थी। रोज़ाना स्कूल जाना और स्कूल के बाद खेलना। समय अच्छे से कट रहा था।

मेरे मकान मालिक की एक लडकी थी। उसका नाम था पूजा।

दिखने में बहुत ही खूबसूरत थी। वैसे तो वो मुझसे एक साल बढी थी पर मुझको पसन्द थी।

उसको देखते-देखते मुझे एक साल निकल गया, यानि मेरी 11वीं क्लास खत्म हो गई। वैसे तो हम आपस में बातें किया करते थे पर मैंने उससे कभी कुछ नहीं कहा।

वो छ्त पर कपड़े सुखाने आती थी।

एक दिन, मैं अपने रुम में पढ रहा था तभी वो मेरे पास आयी और उसने एक लोकेट मेरे हाथ में दिया और कहा – इसको रख ले और किसी को मत बताना और कहकर चली गई।

उस समय मेरे कुछ भी समझ नहीं आया और मैंने चुपचाप वो रख लिया।

उस दिन मुझे इतनी खुशी हो रही थी, जितनी मुझे अपनी जिंदगी में कभी नहीं हुई। मैं बहुत खुश था। और हूँ भी क्यों नहीं, जिस लडकी को मैं एक साल से चाहता था और वो ही आकर मुझे गिफ़्ट देकर जाती है तो खुश तो होना ही था।

अगले दिन मैंने उससे पूछा तो उसने बताया कि मेरा मन कर रहा था कि मैं तुझे कुछ गिफ़्ट दूँ।

मैंने सोचा कि अगर अब मैं इसको गिफ़्ट नहीं देता हुं तो ये सोचेगी कि गिफ़्ट ले तो लिया पर दिया नहीं। तो दूसरे दिन मैं उसके लिये गिफ़्ट ले आया और उसको दे दिया।

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पहले तो वो लेने से मना करने लगी पर जब मैंने जोर दिया तो उसने ले लिया।

अब मेरे दिन उससे बात करने में ही गुजरने लगे। सच तो ये था दोस्तो, मैं उसको प्यार करने लगा था… वो भी हद से भी ज्यादा। जब तक उससे बात नहीं कर लेता तब तक कुछ भी करने का मन नहीं करता था।

शायद उसका भी यही हाल था। कभी हममें लडाई हो जाती तो फ़िर दूसरे दिन एक दूसरे को मनाते।

अभी तक हमने एक दूसरे को आई लव यू नहीं कहा था।

ऐसे करते करते फ़रवरी आ गई। मैंने उससे कहा कि मैं एक बार तुम्हारे मुंह से आइ लव यू सुनना चाहता हूँ…

बस फ़िर क्या था, तब उसने वो ही लडकियों वाला कथन मुझे सुना दिया – “नहीं यार योगीश हम सिर्फ़ दोस्त हैं। ऐसा कुछ नहीं है हमारे बीच। तुम मुझे गलत समझ रहे हो। मैं तो तुमको अपना दोस्त मानतीं हूँ।”

बस फ़िर क्या था, मेरा दिमाग खिसक गया। ये सब सुनते ही मैं उसके पास से आ गया और अपने कमरे में आकर सो गया।

अगले दिन उसने मुझको बुलाया और कहा कि यार हम दोस्त बनकर भी रह सकते हैं तो मैंने उससे कहा कि ठीक है, हम दोस्त बनकर ही रहेंगे पर तुमको मुझ पर हक जमाने की जरुरत नहीं है.

इतना कहकर मैं वहाँ से उसके पास से आ गया। बस फिर एक साल और निकल गया।

मैंने उससे कहा – अब मैं यहाँ नहीं रह सकता, मैं जा रहा हूँ। तो उसने मुझे रोकने की बहुत कोशिश की… तो मैंने कहा कि मैं केवल दोस्त बनकर नहीं रह सकता।

मैंने उससे नजदीक आने को कहा, तो वो मेरे पास आ गई। मैंने उससे अपनी आँखें बन्द करने को कहा तो उसने आँखें बन्द कर ली और उसके आँखें बन्द करते ही मैंने अपने प्यासे होठों को उसके रसभरे होठों पर रख दिया और उसको अपने आगोश में ले लिया।

ऐसा करते ही उसकी धडकनें बढ गई और मुझसे दूर हट गई। मैं उसी पल को याद करते हुए वहाँ से अलग शिफ़्ट हो गया।

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अब हमारी सिर्फ़ फ़ोन पर ही बात होती थीं। मेरा कुछ सामान वहाँ रह गया था तो मैंने उसको बताया और उसने मुझे आने के लिये समय बता दिया।

मैं गया तो वो मेरे ही रुम में पढ रही थी। मैंने उसका हाथ पकडा और उसके होठों का रसपान करने लगा और वो भी मेरा साथ देने लगी। उस दिन मैं उसके होठों को पन्द्रह मिनट तक चूसता रहा। फ़िर आ गया।

अब मेरा मन नहीं लग रहा था तो मैंने उसकी मम्मी से फ़ोन पर बात करके फ़िर से उसके मकान में रुम ले लिया और फ़िर शुरु हुआ दो जिस्मों का खेल।

अब तो हमको जब भी मौका मिलता, हम बस एक दूसरे के होठों को चूसने लग जाते थे।

काफ़ी दिनों तक यही सब चलता रहा।

फ़िर एक दिन उसके मम्मी और पापा को किसी काम से बाहर जाना पड गया। घर पर उसके भाई और भाभी ही रह गये। वो अकेली सोती थी तो मैंने रात को मिलने का मन बनाया और वो तैयार हो गई।

वैसे भी हम दिन में मिल नहीं पाते थे। रात को मैं उसके फ़ोन का इन्तजार करने लगा।

ग्यारह बजे उसका फ़ोन आया और मैं तुरन्त उसके रुम में पहुँच गया।

जैसे ही मैं उसके कमरे में पहुँचा तो वो मेरा इन्तजार कर रही थी।

दोस्तो, मैं आपको बता दूँ वो रात मेरी जिंदगी की सबसे हसीन रात थी।

हम एक दूसरे से नाग और नागिन की तरह लिपटे हुए होठों का रसपान कर रहे थे और मेरे हाथ उसकी चूचियों को उसके सूट के ऊपर से ही दबा रहे थे।

इस खेल में हमको लगभग एक घन्टा हो गया। अब मैंने उसके सूट को उतार दिया और उसने मेरी टीशर्ट उतार दी। अब हम दोनों के जिस्म एक दूसरे को महसूस कर रहे थे।

मैंने पहली बार किसी लडकी के शरीर को स्पर्श किया था।

अब मैं उसकी चूचियों को अपने मुँह से चूस रहा था। मुझे इतना आनन्द मिल रहा था जैसे कि मैं अमृत का सेवन कर रहा हूँ। अब धीरे धीरे मेरा हाथ उसकी योनि तक पहुँच गया।

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जैसे ही मैंने उसकी योनि को छुआ तो उसकी एक सीत्कार निकल गई। उसकी योनि पानी से गीली हो चुकी थी।

उसने मुझे बताये बिना ही अपना हाथ मेरे लिंग पर रख दिया। मेरे सारे शरीर में बिजली सी कौंध गई। मेरे पूरे शरीर में एक लहर सी दौड गई।

मेरा लिंग उफ़ान भरने लगा। वो एक लोहे की सरिया की तरह हो गया। फ़िर मैं आगे बढने लगा।

मैंने अपना लिंग उसकी योनि पर रख दिया और एक जोर का धक्का लगाया जो काफ़ी नहीं था।

उसकी दर्द से चीख निकल गई और उसकी आँखों में आँसू आ गये। उसने मुझे अब नहीं करने को कहा तो मैं उसको मनाने लगा पर वो तैयार नहीं हुई।

मुझे बहुत बुरा लगा पर मैं उसको रोता हुआ भी नहीं देख सकता था इसलिए मैंने ज्यादा जबरदस्ती नहीं ये सोचकर कि आज नहीं तो कल कर लेंगे। और फिर हम ऐसे ही बातें करते रहे और सुबह तीन बजे मैं आ गया।

पर सुबह मेरे साथ जो हुआ उसकी मुझे उम्मीद नहीं थी। सुबह पूजा मेरे पास आयी और अपनी कसम देकर मुझसे एक वादा करवाने लगी।

उसने अपनी कसम देकर मुझसे कहा कि हम कभी भी सेक्स नहीं करेंगे। तो मैंने उससे वादा कर दिया।

उसके बाद हम कई बार इस स्थिति तक पहुँचे पर मैंने कभी सेक्स नहीं किया। आज पूजा की शादी हो चुकी है।

मैं आज भी उसे उतना ही प्यार करता हूँ।

दोस्तो मैंने उससे अपने आप पर कन्ट्रोल करना जरुर सीख लिया। अब वो मेरी जिंदगी में नहीं है इसलिए मैंने अपने आपको पूरी तरह बदल लिया है।

अब मैंने अपने आपको कालबाय बनाने का फ़ैसला कर लिया है।

तो दोस्तो, कैसी लगी मेरी कहानी?

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मुझे जरुर बताना।

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