प्यार के नाम पर लोग करते है काम वासना

Pyar ke naam par log karte hai kam vasna

अब नील की शादी हो गई थी। जब नील शादी के बाद नील का मेरे पास फ़ोन आया !
नील- हेलो ! पहचाना मुझे?
मैं- ओ आई सी… हाय नील ! कैसी हो और कहाँ हो?
नील- मैं भी यही पूछ रही हूँ कैसे हो और कहाँ हो..
मैं- ऑफ़िस में हूँ..
नील- क्या प्रोग्राम है?
मैं- तुम बताओ डियर !
नील- चलो चलते हैं।

उसके बताये स्थान पर मैं पहुँच गया और वो अपने साथ अपनी सहेली को भी लेकर आई थी, उसकी सहेली बड़ी ही सुंदर थी और उसके साथ उसका बॉयफ्रेंड अपनी कार लेकर आया था…
मैंने सबसे हेल्लो की और हम सभी कार में बैठ गए और मैं पूछने लगा- क्या प्रोगाम है?
तो नील ने बताया कि ये दोनों अकेले में मिलना चाहते हैं और हम बाहर बैठ कर बात कर लेंगे…
मैंने बोला- यार नील, इतने दिन के बाद मिली हो, अब भी बात करोगी? कुछ और नहीं करना क्या?
वो बोली- पहले ये मौज मस्ती कर लें, फिर हम भी देख लेंगे ! अभी कौन सी भागी जा रही हूँ मैं ! तुमको तो ठण्डा कर के ही जाऊँगी…
मैं हंस दिया और बोला- जैसे तुम्हारी मर्जी ! चलो तो यहाँ से, सूरज कुंड चलते हैं !
और हम सब सूरजकुंड की तरफ निकल लिए, नील की सहेली का बॉयफ्रेंड मुझसे बोला- यार, मेरे पास पैसे कम हैं रूम लेने के लिए…
मैं बोला- चल कोई नहीं ! देखते हैं।

और मैंने कुछ पैसे मिला दिए और रूम की प्लानिंग कर ली।
वो बोला- मेरा तो पहली बार है, पता नहीं देगी या नहीं…
और बोला- मैं थोड़ी देर बाद बाहर आ जाऊँगा, फिर तुम नील को लेकर रूम में चले जाना !
पर मुझको तो पता था कि सिंगल एंट्री होती है !
वो अपनी गर्लफ्रेंड को लेकर रूम में चला गया ! हम दोनों पार्क में बैठ कर बातें करने लगे- नील, तुम बहुत सुंदर लग रही हो ! देखो तुमको देखकर लौड़ा खड़ा हो गया है मेरा ! नील, तुम अभी तो कुछ नहीं कर सकती पर इसको कैसे दिलासा दी जाये कि इसको आज चूत मिलेगी या नहीं?
नील बोली- सबर रखो, सब हो जायगा ! पर पहले उसको तो बाहर आने दो !
उनको गए हुए दो घंटे हो रहे थे और अब हमारा सबर का बांध टूट रहा था। मुझको तो पता था कि सूरजकुंड होटल में बहुत सारी लड़कियाँ अपनी चूत शांत करने आती हैं, मैंने नील से बोला- देख यह साला बूढ़ा कितनी जवान लड़की की चूत मार कर ले जा रहा है !
तो नील बोली- तुमको कैसे पता कि यह इसकी चुत मार कर ले जा रहा है?

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मैंने कहा- और कौन सी इस बूढ़े की होटल में मीटिंग चल रही है? यही करने आया है। देख इससे चला भी नहीं जा रहा !
वो जोड़ा दिखने में बीस की लड़की और पचास का बुड्ढा था।
हम बातों-2 में काफी गरम हो गये कि तभी नील की सहेली का बॉयफ्रेंड निकलकर आया वो उदास था और मुझको इशारा किया कि अभी चुपके से तुम चले जाओ, पीछे से नील चली जाएगी। होटल वाले ऐसे जाने नहीं देते और यदि कोई कुछ कहे तो कुछ दे देना, काम हो जाएगा !
मैं और नील छुपते छुपाते रूम में चले गए और नील की सहेली को बाहर निकाल दिया।
वो रो रही थी, मैंने उसको समझते हुए कहा- बाहर बात करेंगे !
और जैसे ही वो निकली, नील मेरे से लिपट गई, हमारी चूमा-चाटी शुरु हो गई जो ढाई घंटे से कण्ट्रोल कर रहे थे, अब नहीं रुका जा रहा था, नील के पीछे खड़ा होकर मैंने नील को बाहों में लिया और उसके कान को चूसना शुरु कर दिया और नील के बुब्बे अपने हाथ में ले लिए।
नील तो अब बस सिसकारियाँ लिए जा रही थी और बोल रही थी कि बहुत दिन के बाद मिले हो, अपने प्यार के साथ जो करना है, कर लो…
“ओ नील ! तू कितनी अच्छी है ! इस मादरचोद लंड ने कितने दिन से परेशान कर रखा है ! तू चीज बड़ी मस्त है।”
और नील खड़े खड़े मेरा लंड दबा कर बोली- राज, आज इसको मुझको दे दे ! निकालने दे इसका रस ! मेरा भी गला गीला होने दे ! मेरा गला बहुत दिन से प्यासा है तेरे लंड के लिए…
और धीरे-2 मैं नील पर हावी होने लगा और नील भी जोश में थी, हम दोनों बेड पर चले गये और मैंने नील के एक एक करके कपड़े उतारने शुरु कर दिए। नील भी मेरा साथ दे रही थी अपने कपड़े उतारने में !
मैंने नील के ऊपर के सारे कपड़े उतार दिए, नील अब ब्रा और पेंटी में थी, मुझसे बोली- आप किस खुशी में दुल्हे बन कर खड़े हो? जब दुल्हन तुम्हारे सामने इस अवस्था में है?
मैं बोला- जो दुल्हन को लेना है ले ले ! मैंने कौन सा रोका है?

इस पर नील भूखी शेरनी की तरह लपकी और मेरे कपड़े उतारने लगी। तभी मेरी निगाह मेज पर रखे वोदका और गिलास पर गई, गिलास तो हैं पर बोतल खुली नहीं…
मैंने नील को इशारा किया तो नील ने भी इशारा किया कि दो दो पैग हम ले लेते हैं, क्या सोचना उनके बारे में…
मैंने दोनों गिलासों में वोदका डाली और खींच ली एक ही बार में, फिर अपने काम में लीन हो गए।
नील ने मेरा लंड पकड़ लिया और चूसने लगी, मुझे जोश आने लगा तो मैं बोला- नील हम 69 की पोजीशन में आ जायें?
नील मेरी बात मान गई और नील ने खूब लंड चूसा, मैंने नील की चूत के होंठ खोल कर चूस चूस कर खूब लाल कर दी।
अब नील पूरे जोश में थी, मैं भी अपने जोश में था, हम दोनों पागल होते जा रहे थे और एक दूसरे को माँ की चूत अंट-शन्ट बोले जा रहे थे और वोदका का नशा भी चढ़ रहा था !
और आग लगाने के लिए मैंने नील की चूत में वोदका डाल दी और उसको पूरा अंडर तक चाटने लगा नील में इससे बहुत उत्तेजना आ गई और दोनों ने अपना माल निकाल दिया। मैंने नील का सारा का सारा रस चूस लिया और नील ने मेरा लंड चाट चाट कर साफ कर दिया !

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हम आपस में फिर गले मिले और नील बोली- राज एक पटियाला और होना चाहिए ! उसके बाद घर भी जाना होगा !
मैंने दोनों का हेवी पेग बनाया और नील को दिया, पेग लेने के बाद फिर खेलने लगे, लंड अभी खड़ा नहीं था तो नील बोली- अब मैं तुम्हारे ऊपर लेट कर लंड चूसूँगी जब तक लंड खड़ा नहीं हो जाता !
थोड़ी देर के बाद लंड खड़ा हो गया और होता क्यूँ नहीं, नील लंड चूसने में अब परफेक्ट हो जो गई है। फिर मैंने नील को कुतिया बनाया और नील के पीछे से जाकर बड़े प्यार से चूत में लंड डाल दिया। नील लंड को लेकर कसमसाई और बोली- धीरे से राजा ! आज इसका बजा देना बाजा ! बहुत दिन से सूखी हुई है, तुमसे चुदने में बहुत मज़ा आता है !
और कहने लगी- प्लीज़, जब भी मैं बुलाऊँ तुमको तो मुझे चोदने आ जाना ! हम्म !
और मैं नील को बराबर चोदता रहा और नील की भाषा गालियों में बदल गई- हम्म ! मेरे कुत्ते, इस कुतिया को चोद ! तूने ही मुझको लंड का चस्का लगाया है… हरामी माँ की चूत चोद रे ! कुत्ते…
“ले रंडी ! अब तो मेरे लंड की रंडी बन गई तू ! ले और चुद…!”
झटकों का बराबर जोर चल रहा था उधर नील नशे में पागल थी, दोनों तरफ आग लगी थी।
फिर मैंने नील को सीधा लिटा दिया और उसकी टांगों को अपने कंधे पर रख कर एक जोरदार झटका दिया, लंड सीधा बच्चेदानी से टकरा गया।
नील ने जोर से शोर मचा दिया, बोली- आराम से राजा !

उसके बाद नील अपने चूतड़ उछाल उछाल कर मेरे लंड का जबाब दे रही थी, नशे में होने के कारण चुदाई लम्बी चली और बीस तीस झटकों खाने के बाद नील बोली- राज, मैं अब तुमको चोदूंगी ! निकलना मत अभी !
और नील ने मुझको नीचे गिरा दिया और फट से मेरे लंड पर आकर बैठ गई और वो शॉट लगाए नील ने ! दबादब चूत और लंड के घमासान मिलन का रस बह रहा था !
और नील ने मेरी काफ़ी चुदाई की, बोली- मैं आने वाली हूँ राज ! तुम भी मेरे साथ आओ !
मैं उसके हर धक्के का जबाब धक्के से दे रहा था और काफ़ी देर के बाद हम दोनों एक साथ खल्लास हुए.. नील मेरे ही ऊपर पड़ी रही और मैं नील के चूतड़ों पर हाथ फेरता रहा।
हमने भी बहुत टाइम ले लिया चुदाई करने में और वो लोग हमको फ़ोन करते जा रहे थे। वैसे हमने अपना मोबाइल साइलेंट पर डाल दिया था !
मैंने नील को बोला- नील, अब देर तो हो गई है, क्यूँ ना इस गांड का भी बाजा बजा दिया जाये?
तो नील बोली- अब टाइम नहीं है राज ! वो लोग भी हमारा इंतजार कर रहे हैं और घर भी जाना होगा !
वो बोली- फिर कभी कर लेंगे ! अभी मुझे एक महीना रहना है !मैं बोला- जैसी तुम्हारी मर्जी !
और उधर मुझे भी अपने ऑफिस लौटना था, मैं बोल कर आया था कि किसी काम से जा रहा हूँ, जल्दी लौट आऊंगा।
फिर नील और मैंने अपने कपड़े पहने और गले मिले, फिर से जीभ में जीभ डालकर दो मिनट तक चूमाचाटी की और निकल लिए और जब बाहर आये तो वो लोग अपनी कार में बैठे हमारा इंतजार कर रहे थे और दोनों एक दूसरे से नाराज थे।

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जब हम दोनों भी बैठ गए तो नील की सहेली ने कहा- इसी को तुम सच्चा प्यार बोलते हो?
तो मैंने जबाब दिया- नहीं ! मैं तो धूप बत्ती जला कर आया हूँ ! नील की पूजा की रूम में !
इस पर नील हंसने लगी और नील ने अपनी दोस्त को समझाया- जब राज अपना समय मेरे साथ बिताता है तो चोदने के लिए तेरे पास आएगा क्या?
इस पर नील की सहेली और उसका बॉयफ्रेंड खुश हो गए और हमने प्रॉमिस करवाया अब कि बार जब तुम्हारा बॉयफ्रेंड तुम्हें लेकर आये तो करने देना !

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