प्यासी की प्यास बुझाई-2

(Pyasi Ki Pyas Bujhai-2)

प्रथम भाग से आगे :

उसने बताया कि पहले तो वह मुझे चूमता रहा, फिर उसने मुझे बिस्तर पर पटक दिया और अपने सारे कपड़े उतार दिए। जैसे ही उसने अपना अण्डरवीयर निकाला तो उसका 5 इंच का लण्ड निकल बाहर आ गया। लण्ड ज्यादा मोटा नहीं था और ज्यादा लम्बा भी नहीं था, इसे औसत लण्ड कह सकते हैं। उसने पहले कभी लण्ड नहीं देखा था इसलिए काफी घबराई हुई थी। फिर उसके पति ने उसके कपड़े उतारने शुरू किए और एक-एक करके सारे कपड़े उतार दिए। फिर वह उसके स्तनों के साथ खेलने लगा, उसे जोर-जोर से मसलने लगा और चूमने लगा। फिर उसने अपना लण्ड मुँह में लेने के लिए कहा, उसने इसका प्रतिकार किया लेकिन बाद में मजबूरन ले ही लिया। वह लण्ड को धीरे-धीरे चाटने लगी फिर दो-तीन मिनट के बाद उसके लण्ड ने पिचकारी छोड़ दी और पूरा वीर्य उसके मुँह में छोड़ दिया।

और इस तरह उसके पति ने उसे दूध पिलाया और उसने अपना दूध अपने पति पिलाया।

फिर मैंने उससे पूछा- आगे क्या हुआ?

तो उसने कहा- आगे की बात, कभी मिलो तो बताती हूँ।

मैं समझ चुका था कि अब कुछ न कुछ अच्छा जरूर होने वाला है।

फ़िर उसने मुझे एक दिन अपना नम्बर दिया और मैंने भी अपना नम्बर उसे दिया। अब हमारी बातें फोन पर ही ज्यादा होने लगी थी।

करीब तीन महीनों की बातचीत और मशक्कत के बाद उसने मुझे मिलने का निमन्त्रण दे ही दिया। उसने मुझे अन्धेरी स्टेशन पर मिलने बुलाया।

मैं अँधेरी स्टेशन पर पहुँच गया पर मन में डर था कि वह कैसी होगी। फिर भी जब मिलना ही था तो मिल ही लिया।

मैंने उससे फ़ोन पर पूछा कि वह कहाँ है तो उसने बताया- मैं नीले रंग के चूड़ीदार में हूँ !

वह मेरे बिल्कुल सामने वाले एक नंबर प्लेटफ़ॉर्म पर खड़ी थी। और मैं प्लेटफ़ार्म नंबर तीन पर था, इसलिए ज्यादा साफ नहीं देख सका।

मैंने उससे कहा- पाँच मिनट इन्तज़ार कीजिये ! मैं आपके पास आता हूँ।

और जब उससे सामना हुआ तो क्या बताऊँ यारो ! मेरे तो होश ही उड़ गए !

वह एक दम गोरी सी थी मानो कि दूध से नहा कर आई हो !

और फिगर के मामले में तो वह करीना के साइज़ ज़ीरो को भी पीछे छोड़ दे !

उसे देखकर मैं तो कुछ बोल ही नहीं पाया।

उसने पूछा- क्या हुआ?

तो मैंने कहा- कभी इतनी सुन्दर लड़की देखी ही नहीं तो इसलिए मुँह से कुछ शब्द नहीं निकल रहे हैं।

उसने हंसकर बोला- हट बुद्धू ! इतनी भी सुन्दर नहीं हूँ।

फ़िर हम एक होटल में गए, वहाँ नाश्ता किया।

फिर मैंने चाय का आर्डर देने के लिए वेटर को बुलाया तो उसने कहा- चाय का आर्डर मत दो ! चलो, मेरे घर चल कर ही चाय पीते हैं।

मैंने कहा- वहाँ आपके ससुराल वाले होंगे ?

तो उसने कहा- मैं अकेली ही रहती हूँ, मेरे पति की अपने घर वालों से जमती नहीं है, इसलिए हमने अलग से अपना एक फ्लैट ले लिया है।

फिर हमने रिक्शा पकड़ी और उनके फ्लैट के लिए रवाना हो गये।

घर पहुँच कर उसने घर का दरवाजा बंद किया, मुझे अन्दर बुलाया और दरवाजा बंद कर दिया, जैसे कि मैं उनके घर का ही सदस्य हूँ।

फिर उसने रसोई में जाकर चाय बनाई। फिर हम लोग चाय पीते हुए गप्पें मारने लगे। बात-बात में मैंने उनसे उनके पति के बारे में पूछा कि आप तो इतनी सुन्दर हैं, आपके पति तो आपसे बहुत खुश रहते होंगे?

तो उसने कहा- हाँ, वह तो खुश रहते हैं, लेकिन मैं तो आधी-अधूरी ही खुश हूँ !

मैंने पूछा- वो क्यों ?

उसने बताया- सुनील, मैं तो तुम्हें सब बता चुकी हूँ ! तो अब क्या शर्माऊँ ! तुम तो जानते ही हो, मैंने तुम्हें बताया था कि मेरे पति का लण्ड 5 इंच ही है और ज्यादा मोटा भी नहीं है, और वो जल्दी ही झड़ जाते हैं और मेरी प्यास अधूरी ही रह जाती है। अब तो उनकी नौकरी दुबई में है और वो साल में दो या तीन बार ही घर आते हैं। बस उन दो-तीन दिन ही चुदाई होती है। वो भी रात में एक-एक बार ! अब तुम ही कहो कि मैं कैसे खुश हो सकती हूँ? मेरा तो कोई दिल बहलाने वाला भी नहीं है, कोई बच्चा होता तो उससे दिल बहल जाता।

उसने मुझसे कहा- जबसे तुमसे बातें होती हैं तो मेरा दिल थोड़ा बहल जाता है।

मैंने कहा- ऐसी कोई बात नहीं है ! मैं हूँ ही ऐसे सबको खुश रखने वाला !

तो उसने कहा- सुनील मैं भी खुश होना चाहती हूँ ! मुझे भी खुश कर दो ! और ऐसा खुश करना कि मेरी ख़ुशी की याद सालों सालों तक मेरे दिल-ओ-दिमाग में बनी रहे।

मैं उसकी भावनाओं को समझ चुका था, मुझे पता चल गया था कि वह मुझसे चुदवाना चाहती है। लेकिन फिर भी मैं भोला बना रहा और कहा- मैं कुछ समझा नहीं !

तो उसने कहा- अब नहीं समझोगे तो कब समझोगे ? मेरा मतलब है कि मैं अपनी चूत की प्यास बुझाना चाहती हूँ तुम्हारे लण्ड से।

पहले तो मैंने इन्कार किया लेकिन उसने अचानक मुझे अपने सीने से लगा कर जकड़ लिया, मुझे सोफे पर धकेल कर मुझ पर चढ़ गई और मेरे गालों को चूमने लगी।

अब मुझे तो यही चाहिए था तो मैंने भी उसे जोर से जकड़ लिया और उसे चूमने लगा। उसे लगा कि उसकी वजह से मैं गर्म हो गया। उसे क्या पता कि मेरा लण्ड तो स्टेशन से ही खड़ा था।

अब हम दोनों एक दूसरे को खूब जोर जोर से चूमने लगे। मैंने अपने होंठ उसके होंठों से सटा दिए और चूसने लगा।

हाय ! क्या रसीले होंठ थे ! जैसे गुलाब जामुन हो !

मैंने उसे खड़ा किया और हम दोनों अब खड़े होकर ही चूमने लगे। फिर वो मुझे अपने कमरे में ले गई, अपने बिस्तर पर लिटा कर एक एक करके मेरे सारे कपड़े निकाल फेंके। जैसे ही उसने मेरा अण्डरवीयर उतारा तो मेरा सात इंच का लण्ड बाहर निकल आया जिसे देखकर वह थोड़ी डर सी गई।

अगले भाग में समाप्त

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