बॉयफ्रेंड ने पहले खूब चोदा फिर रंडी बनाया और बाजार में बेचा-2

मालकिन ने नीरजा से आज 5 हजार से ज्यादा कमाये। कुछ कस्टमर 200 पर राजी हुए कुछ 300 पर। रात के 2 बजे चकलाघर बन्द हुआ। सभी रंडियों ने खाना खाया पर नीरजा ने एक निवाला भी ना तोडा। उसे अपनी फूटी किस्मत पर यकीन नही हो रहा था। ये सब बुरी घटना किसी बुरे सपने से कम ना थी। कहाँ नीरजा सत्तीश के साथ शादी करके सुखद जीवन की कामना कर रही थी और कहाँ आज वो 20 20 कस्टमर से रोजाना चुदती थी।

हर कस्टमर उसे नंगा करके उसके जिस्म को नोचता था। कोई कोई कस्टमर तो गोलियां खाकर आते थे। चोद चोदकर चूत का चबूतरा बना देते थे। ये सब नीरजा के लिए मरने से ज्यादा बुरा था। रिकसेवाले, मजदूर, तो कच्ची पीकर आते थे। उनके मुंह से बहुत बदबू आती थी पर फिर भी नीरजा को चुदवाना पड़ता था। 20 दिन धंधा करने के बाद नीरजा चुदवाने की आदी हो गयी। अब उसे कुछ पता नही चलता था कि वो 20 के साथ बैठी या 30 के साथ। नीरजा को पूरे एक साल इस रन्दीखाने में रहना था। जब जाकर मालकिन उससे 8 लाख कमा पाती।

अब नीरजा एक प्रोफेशनल रंडी बन गयी। वो कस्टमर को हँस कर पटाने लगती। कस्टमर पटा कर उसके पैसे कॉउंटर पर जमा कराती। उसे अंदर ले जाती और जमकर चुदवाती। कुछ कस्टमर को वो बिस्तर पर लेटा देती। खुद उनके लौड़े पर बैठ जाती और गाड़ भीच कर खूब कस्टमर को चोदती। गाड़ भिचने से लगता कि कस्टमर किसी नई रंडी को चोद रहा है। कई कस्टमर गैंग बैंग करना चाहते तो नीरजा तैयार हो जाती और ऊँचे रेट बताती। ऐसे कस्टमर 5 से 10 हजार रुपए एक दो घण्टों के लिए देते। वो अपने 3 4 साथियों के साथ आते और मिलकर किसी रंडी को चोदना खाना चाहते।

नीरजा उनको अंदर ले जाती। ऐसे गैंग बैंग बड़े विकराल चोदूँ होते जो घण्टो घण्टो तक पेलने का दम खम रखते। 10 हजार रुपए जैसी मोती रकम लेने के बाद सब कुछ उनकी मर्जी से ही करना पड़ता। ऐसे कस्टमर 4 5 दोस्तों के साथ आते। सब के सब नंगे हो जाते और बारी बारी से नीरजा से अपना लण्ड चुस्वाते। फिर एक कस्टमर नीरजा को नन्गा बिस्तर पर लेटा देता और चोदना सुरु कर देता। जबकि दूसरा उसका दोस्त नीरजा के मुँह में अपना लण्ड दे देता। तीसरा दोस्त नीरजा के हाथ में अपना लण्ड पकड़ा देता।

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नीरजा अपने गुलाबी ओंठों से जल्दी जल्दी ऊपर नीचे करके लण्ड चुस्ती, जबकि जिसका लण्ड हाथ में होता उसका मुठ मारती, और साथ में नीचे।से दनादन चुदवाती रहती। इस तरह के ग्रुप सेक्स में नीरजा को घण्टों बिना रुके चुदना पड़ता था। इसमें मजा भी खूब मिलता था उसे। एक ही समय में किसी मर्द का लण्ड चूसते चूसते दूसरे मर्द से चुदवाने का मजा ही हटकर था। साथ ही जब सब मिलकर नीरजा को चोदते खाते थे तो इसमें भंडारे जैसा सुख मिलता था।

एक साल तक कलकत्ता के उस रन्दीखाने में धंधा करने के बाद नीरजा को एक कस्टमर से मोहब्बत हो गयी। वो कोई सुन्दर नाम का आदमी था जो कोई सरकारी नौकरी करता था। वो नीरजा के लिए।रसोगुल्ला और पान लेकर आता था। ये दूसरी बार था जब नीरजा ने फिर से किसी आदमी से प्यार किया था। मालकिन के 8 लाख वसूल होने के बाद मालकिन को उस पर तरस आ गया। उसने उसे जाने दिया।

नीरजा ने सुंदर से शादी कर ली। सुन्दर उसे बहुत प्यार करता था। नीरजा को लगा अब उसके दुःख के दिन बीत गए है। सुरु सुरु में सब कुछ ठीक चला। पर सुंदर में एक ऐब था। वो पिता था। 2 सालों बाद सुन्दर कुछ ज्यादा ही पिने लगा। सारी तन्खा शराब में खर्च कर देता। नीरजा उसे दोपहर को खाना देने जाती थी। सूंदर के बॉस हीरालाल जी थे जो सरकारी अधिकारी थे। नीरजा उनको जरूर नमस्ते करती थी। वो नीरजा से बड़े प्यार से बोलते थे।

धीरे धीरे सुन्दर ने अपने बॉस हीरालाल से काफी उधारी ले ली। नीरजा को इस बारे में कुछ नही पता चला। हीरालाल ने जब अपना पैसा माँगा तो सूंदर नही चूका पाया। हीरालाल से उसे कान में कुछ उपाय बताया। सुबह होते ही सुंदर ने बताया कि उसके बॉस हीरालाल ने आज दोनों को दावत पर बुलाया है। नीरजा ने बैंगनी रंग की चटक साडी पहनी। पायल चूड़ियां पहनी सारा मेक अप किया।

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दोनों हाथ रिक्सा पर बैठ हीरालाल के घर पर पहुँच गये। हीरालाल ने दरवाजा खोला और बड़ी जोश से दोनों का स्वागत किया। नीरजा और उसका पति सूंदर मुलायम सोफे पर बैठे।
सूंदर! क्या लोगे भाई व्हिस्की या रम?? हीरालाल बोला
व्हिस्की! सूंदर बोला
नीरजा तुम क्या पियोगी?? हीरालाल ने बड़ी जोश से पूछा।
नही हीरालाल जी, मैं नही पीती! नीरजा ने कहा
अरे ये क्या बात हुई?? आज पहली बार मेरे घर पर आयी हो। अच्छा ठीक है तुम्हारे लिए कोलड्रिंक लाता हूँ हीरालाल बोले।

अंदर से कोकाकोला की बोतल ले आये और ग्लास में डालकर नीरजा दो दे दी। हीरालाल और सुंदर शराब पीने लगे और नीरजा कोल्डड्रिंक। 10 मिनट में ही उसका सिर घूमने लगा। वो बेहोश सी होने लगी। नीरजा की आँखों के सामने सब धुंधला होने लगा। हीरालाल ने इशारा किया। सूंदर कमरे से बाहर चला गया। हीरालाल ने दरवाजा बन्द कर दिया।
अरे मेरी गुलबहार!! जरा अपने रूप का रस।तो पिला।दे! हीरालाल ने आधे होस में आ चुकी नीरजा को सोफे पर लिटा दिया।

उसके ब्लाऊज़ के बटन खोलने लगे। नीरजा सब कुछ देख रही थी पर कुछ नही कर पा रही थी। हीरालाल से उसे ड्रग्स दे दी थी। नीरजा का बदन सुन्न हो गया था। हीरालाल उसकी इज़्ज़त लूटने जा रहा था नीरजा साफ देख रही थी पर उसका शरीर ना हिलता था।
तेरे मर्द को मैंने 50 हजार कर्ज दिया था। वो चूका नही पाया इसलिए अब 50 हज्जार तुझसे वसुलूंगा!! हीरालाल कुटिल हँसी हँसकर बोले

नीरजा के ब्लाऊज़ और ब्रा उतारने के बाद हीरालाल उसके लाल लाल छतियों का रसपान करने लगे। खूब गहराई से नीरजा की जूसी छातियां पिने लगे। नीरजा सब कुछ अपनी आँखों से देख रही थी पर उसका हाथ तक ना हिल रहा था। हीरालाल ने जी भरके नीरजा की जूसी छतियों को पिया। फिर नीरजा की साड़ी निकाल दी। फिर पेटीकोट और पैंटी भी उतार दी। कुछ देर नीरजा की चिकनी चमेली उसकी चूत को चाटते रहे। फिर उनसे रहा ना गया। नीरजा के छेद में ऊँगली करने लगे। फिर उसे चोदने लगे। नीरजा सोई नही थी, उसकी आँख खुली थी।

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पर उसके शरीर का एक अंग भी नही हिलता था। सूंदर के बॉस हीरालाल ने कई घण्टों तक नीरजा का चोदन किया। बीच बीच में शराब के घूँट पीते रहे और नीरजा की चूत मारते रहे। फिर वो और ठरकी हो गए। ऊन्होने थोड़ी व्हिस्की नीरजा की गाड़ पर लगा दी और लण्ड रखकर जोर का धक्का मारा। लण्ड।सीधा गाड़ में घुस गया। और हीरालाल मजे से नीरजा की गाण्ड चोदने लगे।

शाम को सुंदर नीरजा को रिक्शा में बैठकर और।अपने बॉस से सारा दिन चुद्वाकर घर ले आया। रात भर नीरजा अपनी फूटी किस्मत पर रोने।लगे। पहले आशिक़ ने उसे कोठे पर बेचकर रंडी बना दिया, दूसरे आशिक़ से बॉस से उसे चुदवाकर रखेल बना दिया। उसके बाद सुन्दर को जब शराब पीनी होती, हीरालाल से उधार मांग लेता। और बदले में नीरजा को उनके घर लाकर जबरन चुदवा देता। नीरजा ने अब अपनी फूटी किस्मत से समझौता कर लिया था। जब सूंदर उससे हीरालाल के घर कहने को कहता वो चुप चाप साड़ी पहन तैयार हो जाती और चुदवा लेती। अब वो विरोध नही करती।

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