रास्ते में मारी रोशनी की चूत

Raste me mari roshni ki chut

कहानी तब की है जब मैं पूना में जॉब करता था।

मैं कॉर्पोरेट में काम करता था।

बातों-बातों में वहां एक पड़ोसी लड़की से पहचान हो गयी, उसका नाम था रोशनी।

रोशनी पूना में डी.एड. कर रही थी।

बेसिकली वो भी हमारे अहमदनगर की ही थी।

तो हमारी अच्छी जमने लगी थी।

रोज शाम को हम दोनों कोथरुद के एक होटेल में चाय पीने जाते थे, ऐसा कुछ १ महीने तक चलता रहा।

पर अचानक मुझे जॉब छोड़कर अहमदनगर आना पड़ा, और यहीं जॉब करके रहना पड़ा।

इस बीच में मेरी ओर रोशनी की सिर्फ़ फोन पर ही बातें होती थीं।

धीरे-धीरे हम मिलने के लिए बेकरार होने लगे।

लेकिन आख़िरकार जैसे-तैसे भगवान ने हमारी सुन ली।

उसकी छुट्टियाँ लगने वाली थीं, तो मैं उसे पूना लेने गया।

अहमदनगर से पूना का अंतर १२० किलोमीटर है, तो में उसे बाईक पर लेने गया।

मैं जब तक उसके हॉस्टिल पर पहुंचा तब तक वो तैयार हो चुकी थी, वो भी मिलने के लिए बेकरार थी।

फिर थोड़ा सा खाना खाकर हम लोग घर के लिए निकल पड़े।

वो मेरे पीछे गाड़ी के दोनों ओर दो पैर करके बैठी थी और अपना एक हाथ मेरे कंधे पर और दूसरा हाथ मेरी कमर से आगे पेट पर रखा हुआ था।

वैसे तो में गाड़ी धीरे-धीरे ही चला रहा था।

बस यू मानो कि मैं रोशनी की शरारतों का आनंद ले रहा था।

बीच-बीच में वो मेरे कानों के पास आकर गरम हवा से मुझे छेड़ती तो कभी अपनी गुलाबी जीभ मेरी गर्दन पर घुमाकर मेरे लन्ड़ को बेताब करती।

उसकी इन हरकतों को मेरे लिए सहन करना मुश्किल था।

अब तक हम पुणे से ६० दूर आ चुके थे।

बीच में एक गाँव आता है शिरूर, जहाँ हम चाय पीने के लिए रुके।

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बातों-बातों में मैंने रोशनी से कहा – अब तो मुझसे बिल्कुल भी कंट्रोल नही हो रहा है, क्यूँ ना हम कहीं रुक जाए?

पहले तो उसने थोड़ी सी आनाकानी की मगर फिर मान गयी।

शिरुर से थोड़ा बाहर आते ही एक लॉज है, जहाँ हमने कुछ घंटे बिताने के बारे में सोचा।

हम रूम में पहुँचे और हम दोनों फ्रेश होकर वहाँ के बेड पर बैठ गये।

रोशनी – रोहित, इस पल का तो मैंने कब से इंतजार किया है कि कब मैं तुम्हारे साथ एकांत में बैठ सकूँ।

बस इतना कहना ही था कि मैं उसकी आँखों में देखते-देखते कब उसे गोद में लेकर बैठ गया पता ही नहीं चला।

उसकी आँखों में देख कर उसके गुलाबी और मुलायम होंठों को अपने होंठ से किस करने लगा।

वो मेरा पहला एहसास था, मैं अपने आपको भूल गया।

फिर मैंने रोशनी को बेड से उठा कर खड़ा किया और उसको अपने बाहों में लेकर किस करने लगा।

उसके गाल आँखें, होंठ, गर्दन मैंने ऐसी चाट ली जैसे की मलाई हो।

फिर मेरे आगोश में आकर रोशनी भी बड़बड़ाने लगी – और करो ना जान और मुझे बहुत अच्छा लग रहा है।

अब मैंने उसका टॉप उपर से निकाल कर फेंक दिया।

अब रोशनी कसकर मुझे उसकी ओर खींचने लगी।

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वो एहसास ही अलग होता है जब हमे किसी लड़की के चुचों की गरमी मिले।

मैं झट से अपने घुटनों पर बैठ गया और उसकी नाभि और पेट को चूमने लगा।

उसके मुँह से आवाज़ आने लगी – उउफ़फ्फ़ ओ ओ।। जान, प्लीज़ कुछ करो मेरे पेट में कुछ तो हो रहा है, अहाआ ।।

पेट को चूमते-चूमते मैंने उसकी जींस खोलकर नीचे कर ली और उपर से ही उसकी चिकनी जांघें और जन्नत का दरवाजा चाटने लगा।

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रोशनी ने मेरे सिर को पकड़ा और उपर से ही उसकी चूत मेरे मुँह पर रगड़ने लगी।

फिर उसने मुझे उठाया और मेरी शर्ट को निकाल फेंका।

अब घुटनों पर बैठकर उसने मेरी पैंट को निकल फेंका। अब हम दोनों लगभग नंगे ही थे आमने-सामने।

फिर मैं उसे उठाकर बेड पर ले गया और उसको पेट के बल लेटाया।

अब मेरे दोनों घुटने उसके दोनों नितंब कि ओर रखकर उसके पीठ को ऐसे सहलाने लगे जिससे कि बीच-बीच में खड़ा हुआ ६ इंच का लंड उसकी गांड को उपर से छू जाए।

फिर मैंने पीछे से उसकी ब्रा का हुक खोलकर ब्रा निकाल दी और उसकी पूरी पीठ को मेरी जीभ से चाटने लगा।

जैसे ही मेरी जीभ उसे छूती उसमें एक अलग ही सनसनी उठती – सस्ससा!! सस्सस्स!! आआआअ!! उफफफफ्फ़!! ओह हो, जानू कुछ करो, चोदो मुझे आज बड़ी प्यास लगी है, मेरी इस मुनिया की आग बुझा दो प्लीज़ रोहित, फक मी, फाड़ दो मेरी गांड।

मैं तो ऐसी बातों को सुनकर और तेज हो गया।

फिर मैंने उसे सीधा लेटा दिया और उसकी चुचों को चूसने लगा।

एक हाथ से एक बोबे को दबाता और दूसरे को मुँह मे लेकर चूसता।

करीब १५ मिनट तक यही चला, फिर में उसे चूसते-चूसते थोड़ा नीचे पेट पर गया फिर उसकी लाल सेक्सी निकर उसके शरीर से अलग कर दी।

अब मेरी रोशनी मेरे सामने बिल्कुल नंगी थी।

बिना देर करते हुए मैंने अपने जीभ से उसकी चूत चूसना शुरू किया।

इस दौरान वो ऐसे कर रही थी जैसे उसकी गांड में कोई बॉम्ब फट रहा हो, उसने अपने दोनों हाथों से मेरा सिर पकड़कर उसकी चूत में दबा लिया।

उसके दोनों पैर मेरे कंधे पर थे जो मुझे ज़ोर से दबा रहे थे।

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जैसे ही उसने मेरे लंड को देखा भूखी शेरनी की तरह टूट पड़ी।

रोशनी ने मेरा पूरा लंड अपने मुँह में लिया और चूसने लगी।

बहुत देर चूसने के बाद वो बोली – जानू, अब रहा नहीं जाता, अब आओ मेरी इस चूत की खुजली का इलाज करो, आज फाड़ दो इसे, बड़ी तंग करती है।

अब मैंने उसे सीधा लेटा कर पैर फैला दिए और मैं अपने घुटनों पर बैठ गया।

बिना देर किए अपना लंड उसकी चूत पर टिका कर एक जोरदार धक्का लगाया और रोशनी की चीख निकल गयी – ओफफफफ्फ़।। मर गयी, फट गयी आज मेरी चूत।

मैंने अपने होंठ उसकी मुँह में डाल दिए और धीरे-धीरे चूसना शुरू किया।

मेरा एक हाथ उसकी गर्दन के नीचे था और एक हाथ उसकी गांड को दबा रहा था।

अब तो रोशनी को भी मज़ा आ रहा था, वो भी उसकी गांड उठा कर मेरा साथ देने लगी।

अगले १५ मिनट तक मैं लगातार चुदाई करता रहा, इस दौरान रोशनी तीन बार झड़ चुकी थी।

अब बस मैं भी मेरे अंतिम चरण पर था।

मैंने अपने दोनों हाथों से रोशनी को कस कर पकड़ा और ज़ोर-ज़ोर के ४-५ झटके लगाए।

अगले १५-२० मिनट तक हम ऐसे ही पड़े रहे, फिर तैयार होकर हम अहमदनगरके लिए निकल पड़े.

अब तक रात के ७ बाज चुके थे, मैंने उसको उसके घर पर छोड़ा और अपने घर निकल गया.

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