रज़िया की रसीली चूत

Razia ki rasili chut

मेरा नाम मैडी है, मेरी उम्र २६ साल है और मैं इलाहाबाद का रहने वाला हूँ।

बहुत दिनों से कहनियाँ पढ़ रहा था तो मैंने सोचा क्यों न अपनी असली कहानी आप सभी से शेयर करूँ।

पहले मैं आप सभी को अपने बारे में बता दूँ। मैं थोडा सा हेल्दी हूँ, मेरे लंड का साइज़ ६ इंच है। बहुत मोटा नहीं है लेकिन लड़कियों और भाभियों को अपनी स्टेमना से इतना ज्यादा खुश कर देता है कि पुछो मत।

फिलहाल ज्यादा समय न लेते हुए अब मैं अपनी कहानी पर आता हूँ।

मैं शुरू से ही बहुत शर्मीले स्वभाव का रहा हूँ। मेरा लडकियों के साथ रहना तो था लेकिन मैं उनसे ज्यादा बोलता नहीं था, इसीलिए शायद लड़कियाँ मेरे ऊपर फ़िदा रहती थीं।

बात उस समय कि है, जब मैं बारहवीं में था। मेरे ही क्लास में एक लड़की थी जिसका नाम था रजिया (नाम बदला हुआ), देखने में बहुत सुन्दर थी।

पूरी क्लास उस पर फ़िदा थी लेकिन मुझे उससे कोई मतलब नहीं था।

हमारा विषय जीव-विज्ञानं था, जिसमे मैं बहुत ही तेज था और वो कमज़ोर, वो अक्सर मेरे नोट्स ले जाया करती थी और मैंने उसे कभी उस नज़रो से नहीं देखा था।

एक दिन स्कूल के बाद सभी घर चले गए थे और केवल मैं और रजिया ही बचे थे। उसका घर मेरे घर से पास था, हम दोनों साथ-साथ पैदल घर की ओर निकल पड़े।

कुछ देर शांत रहने के बाद उसने मुझसे पूछा – क्या, तुम मुझे बायो पढ़ा दिया?

मैंने हाँ कह दिया। फिर हम इधर-उधर की बातें करने लगे, इतने में उसका घर आ गया और वो जाते समय एक प्यारी सी स्माइल देकर चली गयी।

अगले दिन वो क्लास में आई और मेरे नोट्स मुझे दे कर चली गयी। मेरे नोट्स में उसने एक लव लैटर रखा था।

मैंने उसे पढ़ा। उसने मुझसे उसका जवाब माँगा था। मैंने उसे हाँ कह दिया, और उस दिन के बाद हम अक्सर मिलते थे और घंटों बैठ कर बातें किया करते थे और साथ ही घर जाते थे।

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मैंने उसे कभी गलत नज़रों से नहीं देखा था। लेकिन एक दिन अचानक बारिश होने लगी और रुकने का नाम नहीं ले रही थी।

हम दोनों एक साथ घर की ओर निकल पड़े, बारिश में भीगा हुआ उसका जिस्म देखकर मेरे दिल में कुछ-कुछ होने लगा, जिसका असर मेरे लंड पर हो रहा था शायद उसने तिरछी नज़रों से देख लिया और मुस्कराने लगी।

मैंने उसे उसके घर छोड़ा और जाने लगा तो उसने कहा – काफी भीग गए हो, अंदर ही आ जाओ और पानी सुखाकर चाय पी लो, शायद तब तक बारिश थम जाये। फिर चले जाना।

मैं भी उसे माना नहीं कर पाया और उसके घर पर ही रुक गया। उसके घर वाले बाहर गए थे और घर में केवल काम वाली थी।

रजिया ने काम वाली को चाय बनाने को कहा और हम दोनों उसके कमरे में चले गए।

रजिया पहले बाथरूम में घुसी और दरवाजा नहीं बंद किया।

मैं अपने आपको रोक नहीं पाया और बाथरूम के दरवाजे से उसके बदन को देखने लगा, उसकी निम्बू जैसी चुचियों को देखकर मेरे लंड में खून की धार और तेज़ हो गयी और लंड में दर्द सा होने लगा।

तभी रजिया ने मुझे उसके बदन को निहारते हुए देख लिया और मुझे बहुत ही गुस्से से कहा – तुम क्या देख रहे हो? मैं तुम्हे ऐसा नहीं समझती थी।

मैं बहुत ही उदास हो गया और उस से माफ़ी मांगने लगा।

वो हँसने लगी और कहा – तुम बुद्धू हो, तुमने आज तक मुझे नहीं छुआ। मैं तुम्हे ही अपना सब कुछ मानती हूँ और मेरे शरीर पर तुम्हारा ही अधिकार है।

इतना कहते ही उसने मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिये।

लेकिन तभी दरवाजे पर खटखटाने की आवाज़ हुई। हम दोनों तुरंत अलग हो गए और रजिया ने मुझे दरवाजा खोलने के लिए कहा और बाथरूम के अंदर जा कर दरवाजा लॉक कर लिया।

मैंने देखा तो काम वाली चाय लेकर आई थी। मैंने उसे चाय टेबल पर ही रखने को कहा। वो टेबल पर चाय रखकर चली गयी।

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रजिया ने बाथरूम से निकल कर कमरे का दरवाजा बंद कर दिया और हम दोनों के होंठ एक बार फिर एक हो गए।

हम लगातार एक-दूसरे को चूसे जा रहे थे। मैंने उसे चूमते हुए अपना एक हाथ उसकी चूची पर ले गया और धीरे-धीरे दबाने लगा।

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क्या एहसास था वो, मानो एक दम रुई का गोला आपको दबाने को मिल गया हो।

उसने धीरे से मेरी शर्ट उतारने को कहा। मैंने अपनी शर्ट उतर दी और पैंट भी।

अब हम दोनों के केवल गुप्तांग ही ढके हुए थे। मैं उसे उठाकर बेड पर ले आया और उसे बेतहाशा चूमने लगा।

मैंने उसके शरीर के एक-एक अंग को जमकर चूसा और चाटा। मैंने धीरे से एक हाथ उसकी पैंटी में घुसा दिया और उसकी चूत को जैसे ही छुआ वो एक दम से मचल उठी।

उसकी चूत एक दम गरम भट्टी की तरह सुलग रही थी।

मैंने धीरे से एक उंगली उसकी चूत में घुसा दी और वो सी सी सी करने लगी।

मुझे चुदाई के बारे में बहुत कुछ नहीं मालूम था लेकिन ब्लू-फिल्म्स में जैसा देखा था उसी तरह से करने की कोशिश कर रहा था।

मैंने उसे अपना लंड मुँह में लेने को कहा, लेकिन उसने मना कर दिया।

लेकिन मेरे जोर देने पर उसे मुँह में लेकर चूसने लगी। फिर हम 69 की पोजीशन में आ गए और मैं उसकी चूत को चाटने लगा।

वो दो बार झड चुकीं थी और मेरा भी निकलने वाला था। मैंने उससे कुछ नहीं कहा और उसके मुँह में ही झड गया।

वो एक दम से शहद समझ कर एक-एक बूंद चाट गयी।

फिर हम वैसे ही लेट गए, कुछ देर बाद धीरे-धीरे उसने मेरे लंड को सहलाना शुरू किया तो मेरा लंड फिर से सलामी देने लगा।

इस बार मैं सीधे उसके ऊपर आ गया और उसकी चूत पर अपना लंड रगड़ने लगा, वो मुझे अपनी ओर खींचने लगी।

मैं समझ गया कि लोहा गरम है। मैंने दो बार डालने की कोशिश की लेकिन नाकाम रहा।

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मैंने उससे तेल की शीशी पूछी तो उसने मेज की तरफ इशारा किया।

मैंने मेज से तेल की शीशी उठाकर काफी सारा तेल उसकी चूत में डाल दिया और अपने लंड पर भी लगाया और एक बार फिर डाला।

इस बार जैसे ही मेरे लंड का सूपड़ा उसकी चूत में घुसा वो चिल्ला उठी।

मैंने उसके मुँह पर अपने होंठ रख दिए, वो दर्द से तड़पने लगी और मुझे धकेलने लगी।

लेकिन मैंने धीरे-धीरे उसकी चुचियों को सहलाना शुर कर दिया और उसके होंठो को चूमने लगा।

वो धीरे-धीरे सामान्य होने लगी और कमर उठाकर मेरे लंड का स्वागत करने लगी। मैंने एक जोरदार झटके के साथ पूरा लंड अंदर घुसेड दिया। वो एक दम से बेहोश सी होने लगी।

मैंने फिर उसकी चुची को मुँह में लेकर चूसना शुरू किया और कुछ देर बाद वो अपनी कमर उठाने लगी तो मैंने भी धक्के लगाने शुरू कर दिए।

वो आह उह्ह शीईईईई की आवाज़ के साथ चुदवाने लगी और कहने लगी कि आज मेरा सपना पूरा हो गया, मेरे राजा और तेज़ी से उह्ह्ह अह्ह्ह्ह शीई तेज करो, और तेजी से।

मैंने भी धक्को की रफ़्तार बड़ा दी और वो एक झटके के साथ अकड़ने लगी।

मैं समझ गया कि वो झड़ गयी लेकिन मेरा अभी भी बाकी था। जब मैं झड़ने को हुआ तो मैंने पूछा – कहाँ निकालूँ तो उसने कहा – मेरे अंदर ही निकाल दो, मैं पूरा मज़ा लेना चाहती हूँ। मैं पिल्स ले लूँगी।

उस दिन मैंने उसे एक बार और घोड़ी बनाकर कर चोदा।

उसके बाद मैंने उसकी नौकरानी और उसकी कई सहेलियों को भी चोदा, लेकिन वो सब बाद में।

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