मस्त पड़ोसन ने मेरा बड़ा पाइप माँगा-1

Real Sex Story : Mast Padosan Ne Mera Bada Pipe Manga-1

आप सभी को मेरा नमस्कार..
दोस्तो, मेरा नाम विपुल है और मैं देहरादून का रहने वाला हूँ. मैं HotSexStory,xyz का नियमित पाठक हूँ. यहाँ की सभी सेक्स स्टोरी तो नहीं लेकिन जब भी समय मिलता है, HotSexStory.xyz पर प्रकाशित मादक कहानियों का मजा जरूर लेता हूँ. काफी दिनों से मेरे मन में भी था कि मैं भी अपने जीवन की सच्ची कहानी आप लोगों के सामने रखूं ताकि आप लोग भी इस कहानी का आनन्द ले सकें. दोस्तो ये मेरी पहली कहानी है, हो सकता है मन की बात शब्दों में लिखने में कुछ गलतियां हो जाएं तो स्वीकार कर लीजिएगा और मुझे अवगत भी कराना ताकि गलतियों को सुधार सकूं.

मैं गुड़गांव में एक ऑटोमोबाइल कम्पनी में नौकरी करता हूँ और अपने परिवार के साथ यहीं रहता हूँ. जहां मेरा घर है, उसी के पड़ोस में एक घर है, जो कि किराये के लिए ही बनाया हुआ है. उसमें हिसार का एक परिवार रहता है.

उस परिवार में एक लड़की जो की MBBS कर रही थी और एक लड़का बीटेक कर रहा था. वे दोनों घर से बाहर ही रहते थे, उनके माता पिता ही यहां रहते थे. दो युवा बच्चों के बाद भी मेरी पड़ोसन का बदन एकदम मस्त था, जो भी उसको देखता वह उसको चोदने की जरूर सोचता. दोस्तो जो मेरी पड़ोसन थी बिल्कुल कयामत थी, उसको देखते ही मेरा लंड खड़ा हो जाता था और दिल करता था कि अभी उसकी चुत में लंड डाल दूँ. वह है ही इतनी सुंदर कि मन बिना चुदाई की बात सोचे रह ही नहीं पाता था.

उसका नाम अंजलि (बदला हुआ नाम) था. अब मैंने उसको हर हाल में चोदने की सोच लिया था. पड़ोसी होने के नाते अंजलि का मेरे घर आना जाना था और वो मेरी बीवी के पास आती रहती थी, जिस वजह से मेरी उससे थोड़ी बहुत बात हो जाती थी.

बातों बातों में मैं ये जान चुका था कि अंजलि भी चुदने को जल्दी ही मान जाएगी.

अब मैं अंजलि को चोदने की तरकीब सोचने लगा. सन 2015 में दीपावली से 2 दिन पहले यानि के धनतेरस के दिन मैं अपने घर के मेन गेट को पानी से धोकर साफ़ रहा था. तभी अंजलि आई और बोली- तुम अपना पाईप दे दो, मुझे भी गेट धोना है. तुम्हारा पाईप बड़ा है और मेरे पास जो पाईप है वो जरा छोटा है.
यह कह कर वो हंसने लगी.
मैं समझ गया कि अंजलि बात कहीं और की ही बोल रही है.

मैंने लंड पर हाथ फेरते हुए अंजलि से बोला- कोई बात नहीं मेरा पाईप बड़ा है, तुम ले लो और जब भी जरूरत हो आगे भी ले लेना.

दोस्तो जब हमारी ये बातें हो रही थीं, तब मेरा लंड खड़ा हो गया. मैंने देखा कि अंजलि की नजर भी मेरे लंड पर थी. मैंने पूछा- क्या देख रही हो?
तो वो शरमा गई.
अब मुझे यकीन हो गया था कि अंजलि भी मेरे लंड से चुदने को तैयार है.

चूंकि अंजलि मेरे बगल के घर में ही रहती थी, जिससे कि अंजलि का मेरे घर आना जाना कुछ ज्यादा ही था. अंजलि का मोबाइल नम्बर भी मेरी बीवी के पास था तो मुझे उसका नम्बर पाने में कोई परेशानी नहीं हुई.
एक दिन मैंने अंजलि को फोन किया और बोला कि मुझे तुमसे मिलना है और कुछ बात करनी है.
पहले तो अंजलि ने मना कर दिया लेकिन मेरे ज्यादा कहने पर बोली कि ठीक है मैं रात को 8 बजे छत पर आ जाउंगी, तुम भी आ जाना.

उसके घर और मेरे घर की छत दोनों मिली हुई थीं तो कोई परेशानी भी नहीं थी. अब मैं रात के 8 बजने का इन्तजार करने लगा. उस समय मेरा दिल जोर जोर से धड़कने लगा.

जैसे ही मैं छत पर गया, अंजलि छत पर ही थी. मैं उसी की छत पर चला गया. उस समय मेरी जो हालत थी दोस्तो, आप समझ सकते हैं. मेरी गांड फट रही थी कि कोई देख ना ले. मैंने जाते ही उसको पकड़ कर एक किस किया. थोड़ा तो उसने नाटक किया.. फिर मैंने उसको अपनी बांहों में भर लिया.

इसके बाद मैंने 5 मिनट तक अंजलि को चूमता रहा. उस समय मेरा लंड लोअर में बिल्कुल खड़ा हो गया था. अंजलि ने मेरा लंड पकड़ लिया और मुझे पागलों की तरह चूमने लगी. फिर उसने मेरे लोअर में हाथ डालकर लंड पकड़ लिया. उसने लंड क्या पकड़ा, मैं तो पागल हो गया.

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अब मैंने अंजलि को वहीं पानी की टँकी के बाजू में बिठा लिया और उसकी कमीज को ऊपर करके दोनों चूची ब्रा से बाहर निकाल लीं. अंजलि की चूची बहुत ही टाइट थीं, मुझे यकीन ही नहीं हो रहा था कि 2 बच्चों के बावजूद भी उसकी चूचियां इतनी टाईट थीं.

मैंने उसके एक निप्पल को अपने मुँह में ले लिया और दूसरे को दोनों उंगलियों के बीच में लेकर मींजने लगा. अंजलि भी आहें भरने लगी. मैं अपना दूसरा हाथ उसकी सलवार में डालकर चुत को सहलाने लगा.
अंजलि ने पेंटी नहीं पहनी थी. उसकी चुत से पानी निकलने लगा. मैंने एक उंगली चुत में डाल दी. मेरी उंगली भी गीली हो गई.

इतनी देर में मेरी बीवी ने आवाज आई- कहां हो?
मैं डर गया कि कहीं ऊपर ही ना आ जाए. मैं अंजलि को नीचे आ गया और बोला कि मैं छत पर घूम रहा था.
इस वक्त मेरा लंड खड़ा था तो मैं आराम से सोफे पर बैठ गया और नॉर्मल होने का इन्तजार करने लगा.

अगले दिन कम्पनी आकर मैंने फोन किया और अंजलि को बोला कि चूत कब दोगी?
वह बोली कि सही समय आने पर दे दूंगी.

अब में सही समय का इन्तजार करने लगा. जल्द ही सही समय भी मुझे मिल ही गया. आख़िर वो दिन भी आ ही गया दिसम्बर में कम्पनी का शट डाउन आ गया और मेरी बीवी और बच्चे नानी के घर चले गए थे. जो लोग अंजलि के मकान में किराये पर रहते थे, वो भी परिवार घर चला गया था. अंजलि का पति भी सुबह 9 बजे चला जाता था.

जैसे ही अंजलि का पति निकला, क्योंकि मैं तो उसके जाने का इंतजार कर रहा था, मैंने अंजलि को फोन किया. उसने बोला कि मैं नहा लूँ.

मेरा लंड तो उसको नंगी सोच कर ही खड़ा हो गया था. बस 9.30 बजते ही मैं छत से कूद कर अंजलि के घर चला गया. तब तक अंजलि नहा चुकी थी और उसने गाउन पहना हुआ था. मैं जाते ही उसको चूमने लगा.
अंजलि बोली कि मैं नीचे गेट को अन्दर से बन्द करके आती हूँ.