रेखा- अतुल का माल-3

(Rekha Atul Ka Maal-3)

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लेखिका : उषा मस्तानी

रेखा सीधी होकर पलंग पर बेसुध होकर लेट गई। अतुल भी बेसुध हो रहा था, मेरा लण्ड खाली हो गया था लेकिन मुझे लग रहा था कि मुझे रेखा की गाण्ड और चोदनी चाहिए।

मेरा लण्ड चुदी हुई रेखा को देखकर दुबारा खड़ा हो रहा था।

सरीना बोली- रेखा और अतुल, आप आराम करिए मैं और राजीव आपके लिए अनार का जूस लाते हैं।

मैं और सरीना जूस लेने बाहर आ गए।

सरीना और मैं नंगे थे। सरीना ने रसोई में आते ही मेरा लण्ड मुँह में ले लिया और चूसते हुए बोली- पहले तुम मुझे चोद दो ! मेरी चूत चुदाई देख देख कर बहुत खुजला रही है।

किचन के पत्थर पर टाँगे चौड़ी करके सरीना इस तरह झुक गई कि उसकी चूत में आराम से घुसाया जा सकता था। मेरी चोदने की इच्छा तो रेखा की थी पर सरीना को मैं नाराज नहीं कर सकता था। मैंने अपना आठ इंची लण्ड सरीना की चूत में डाल दिया और सरीना को चोदने लगा। चुदते चुदते सरीना अनार के दाने निकालने लगी और जूस बनाने लगी। सरीना को पता था कि कैसे चुदा जाता है। किसी भी मर्द को इस तरह चुदाई की गुरु औरत चोदने में दुगना मज़ा देती है। मुझे भी उसे चोदने में मस्त मज़ा आ रहा था। जूस तयार होने के पाँच मिनट बाद मेरा लण्ड उसकी चूत में खाली हो गया।

सरीना और मैं चार ग्लास जूस बना कर कमरे में आ गए। हम सब नंगे थे, शर्म सबकी छूट गई थी, सबने साथ साथ जूस पिया।

रेखा ने उठकर सरीना को बाँहों में भरा और बोली- सरीना, सच बहुत मज़ा आया, आप नहीं होतीं तो यह अतुल कुत्ता गाण्ड का मज़ा न खुद लेता और न मुझे दे पाता। सच आज जन्नत का मज़ा आया जब अतुल ने मेरी गाण्ड में शताब्दी दौड़ाई तो मुझे ऐसा लगा कि गाण्ड मरवाते मरवाते मर ही न जाऊँ ! सच, बता नहीं सकती कि कितना मज़ा आ रहा था। सरीना, सच मेरी प्यारी सरीना, आज तुम न होतीं तो इतना मज़ा नहीं आता।

सरीना रेखा की चूचियाँ सहलाती हुई बोली- अरे रानी, सेक्स में बहुत मज़ा है ! अभी तो तुमने दो लण्डों का स्वाद थोड़ा सा ही चखा है। जब साथ साथ चूत और गाण्ड में घुसेंगे, तब देखना कितना मज़ा आएगा। अभी तो और मज़े करवाऊँगी बस तू रण्डी बन कर मज़े ले।

अतुल बोला- सरीना जी, मेरा लण्ड तो इसकी गाण्ड में घुस कर चोट खा रहा था, देखिये पूरा लाल हो रहा है।

सरीना ने एक पप्पी अतुल के सुपारे पर ली और बोली- राजा, मज़े भी तो खूब लिए हैं। थोड़ी चोट लग भी गई है तो क्या हुआ। अभी तो इसे रात भर बैटिंग करनी है। रेखा जी भी जब चलेंगी तो इनकी गाण्ड दुखेगी।

रेखा के चुचक नोचते हुए सरीना बोली- राजीव जी का लण्ड गाण्ड में और डलवा लेना फिर कभी गाण्ड फटवाने में दर्द नहीं होगा।

रेखा बोली- नहीं बाबा नहीं ! राजीव का लण्ड अगर घुस गया तो मैं तो मर जाऊँगी।

सरीना हँसते हुए बोली- लण्ड से औरतें मरने लगतीं तो दुनिया कब की खत्म हो गई होती, चलो अब गर्म पानी से नहा लो। रात में दोनों यहीं रुकना, पति का फोन आएगा तो बाथरूम में जाकर सुन लेना।

दोनों रात को रुकने के लिए राज़ी हो गए। रेखा नहाने चली गई।

नहा कर जब रेखा बाहर आई तो बोली- सरीना जी, सच मेरी गाण्ड तो बहुत दुःख रही है, हाय, मुझे तो एसा लग रहा है 2-3 दिन मैं ठीक से नहीं चल पाऊँगी।

सरीना मुस्कुराते हुआ बोली- रेखा जी, आप सही कह रही हैं, यह दर्द 5-6 दिन में सही होगा। और कोई भी औरत जो गाण्ड मरवाती होगी दूर से आपकी चाल से समझ जाएगी कि आपकी गाण्ड मारी गई है। इस दर्द को थोड़ा कम करने के लिए मेरी समझ से आप अपनी चूत किसी लबे और मोटे लण्ड से मरवाएँ लेकिन प्यार से। अगर आप बुरा न मानें तो रात को राजीव जी के साथ सोयें वो प्यार से रात में आपकी सिर्फ चूत मारेंगे और सुबह आपको दर्द कम लगेगा।

रेखा बोली- राजीव जी का लण्ड बहुत सुन्दर है। मेरा खुद उनसे और चूत मरवाने का मन कर रहा है। अपने पति के अलावा अब तक मैंने सिर्फ़ चार लण्डों से चुदवाया है। उन सब में राजीव का लण्ड बहुत सुन्दर और सबसे बड़ा है। सच सरीना जी, मुझे चुदवाओ, आज मैं सारे मज़े लेना चाहती हूँ, कल हो या न हो, मेरे पति भी दस दिन बाद आएँगे, फिर पता नहीं इतनी आज़ादी कब मिलेगी !

और रेखा चूत मरवाने को राजी हो गई।

सरीना ने मुझे समझा दिया कि रात मैं सोने के समय रेखा की प्यार से कई आसनों से चूत मारूँ और सुबह 5 बजे तक प्यार से चोदूँ और अपने लण्ड को रेखा की चूत में ज्यादा से ज्यादा घुसा कर रखूँ ।

सरीना अतुल से बोली- अतुल जी, आपको गाण्ड मारने के अभी और गुर सिखाने हैं, आज रात मुझे आपके साथ सोना पड़ेगा नहीं तो अकेले में आप किसी औरत की गाण्ड नहीं मार पाएंगे। आप तो रेखा की चूत पिछले एक साल से मार रहे हैं, आज इस कुतिया को थोड़ा राजीव जी से बज लेने दें।

अतुल बोला- सरीना, मुझे गाण्ड मारना सीखना है मुझे आपके साथ ही सोना है।

सरीना और अतुल दूसरे कमरे में चले गए। मैं रेखा के साथ था। रेखा अब मेरे बेडरूम में थी।

उनके जाते ही वो पलंग पर लेट गई और मैं भी उसके बगल में लेट गया।

मुझसे चिपकते हुए बोली- राजीव जी, गाण्ड बहुत दुःख रही है हम दोनों ने करवट ली और एक दूसरे के होंठों में होंठ डालकर चूसने लगे। मेरा लण्ड उसकी चूत के होंठों पर छू रहा था। रेखा को प्यार से मैंने भींच लिया उसकी चूत के होटों को छू-छू कर मेरा आठ इंच लम्बा लण्ड पूरा कड़क हो रहा था।

मैंने रेखा को सीधा किया और धीरे धीरे से पूरा लण्ड उसे चूमते हुए उसकी चूत में सरका दिया। अब मेरा लण्ड उसकी चूत में घुसा हुआ था। रेखा की चूत थोड़ी फटी हुई थी इसलिए लण्ड आराम से घुस गया।

रेखा मेरे होंठ चूसते हुए बोली- सच, आज तो बहुत मज़ा आ रहा है। मेरी कामवाली उमा ने मुझे चुदने का शौकीन बनाया है, बिना चुदे नहीं रह पाती। अतुल से उमा ने ही मेरी दोस्ती कराई थी। सच अतुल ने ही मुझे सिखाया है कि असली चुदाई क्या होती है। हम दोनों महीने में दो बार उमा के घर पर चुदाई का मज़ा लेते हैं। उमा ने अपने नासिक वाले भाई से भी मुझे 2-3 बार चुदवाया है। मेरा पति चोदता तो अच्छा है लेकिन 4-5 साल एक ही लण्ड से चुदने से मैं बोर हो गई थी।

रेखा अब खुल गई थी, मस्ती में बोलती जा रही थी- एक दिन उमा ने मुझे चूत में बैंगन करते हुए देख लिया तब मैंने उसे बताया की मेरी चूत कुछ नया मज़ा चाहती है। इसके बाद उमा ने मेरी दोस्ती अतुल से कराई। 3-4 महीने दोस्ती के बाद पहली बार अतुल से चुदी। मेरी यह पहली गेर मर्द से चुदाई थी। सच, इनसे छुप छुप कर चुदवाती हूँ, इसका अलग ही मज़ा है। एक बार मेरा कुछ अलग मज़ा करने का मन कर रहा था तो उमा मुझे कल्याण अपने मौसाजी के पास ले गई, वहाँ पर उसके मौसाजी ने उमा और मुझे 4-5 घंटे अपने बिस्तर पर नंगा लेटाया और हम दोनों की चूत मारी। सच बुड्ढे 55 साल के मौसा से चुदवाने का अलग ही मज़ा आया।

इसके बाद उसने कहा- राजीव जी, आपका लौड़ा बहुत सुंदर है, इसे मेरी चूत में घुसाए रखो ! सच में बड़ा मज़ा आ रहा है।

मेरा लण्ड रेखा की चूत फाड़े हुए था। मेरा मन अब उसकी सुरंग में धक्के मारने को कर रहा था। रेखा भी आगे पीछे होकर चुदने का मज़ा ले रही थी एक शांत चुदाई सी चल रही थी।

थोड़ी देर बाद रेखा बोली- राजीव, पीछे से अपने शेर को चूत में घुसा दो और इसे चोद दो ! अब रहा नहीं जा रहा है !

मैंने रेखा को घुमा के तिरछा किया और दोनों हाथों से उसकी चूचियाँ दबा ली और चूत में पीछे से लण्ड घुसा दिया। मेरा लण्ड उसकी चूत में घुस गया था। धीरे-धीरे से उसकी छोटी छोटी चूचियाँ दबाते हुए मैंने रेखा की चूत चोद रखी थी। आनन्द से भरपूर उसकी सिसकारियाँ गूँज रही थी।

इस बीच रेखा का मोबाइल बजा।

रेखा बोली- मेरे पति का है !

मैंने लण्ड बाहर खींच लिया तो रेखा बोली- घुसाए रखो ! निकालते क्यों हो? तुमसे चुदते हुए पति से बतियाने का मज़ा ही अलग है।

मैंने उसकी चूत में लण्ड दुबारा घुसा दिया, धीरे धीरे मेरा लौड़ा उसकी चूत चोद रहा था। रेखा ने फ़ोन उठा लिया।

रेखा फ़ोन पर बोली- डार्लिंग कैसे हो?

रेखा ने स्पीकर फ़ोन ऑन कर दिया था। उधर से एक पप्पी की आवाज़ आई और उसके पति ने कहा- रानी, मुझे तो तुम्हारे बिना नींद नहीं आ रही ! लौड़ा हाथ में पकड़े हुए हूँ। तुम क्या कर रही हो? रेखा बोली- चुदवा रही हूँ ! चूत में लण्ड डलवा रखा है ! मज़े कर रही हूँ !

कहानी जारी रहेगी।

आपकी उषा

 

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