रिक्शे वाले ने बारिश में चोदा-2

Rikshawale ne barsat me choda-2

में : म्‍म्म्ममस्सस्स.

लखन : साली मज़ा आने लगा. आ गयी तू लाइन पर.. ये कहकर उसने टी-शर्ट के उपर से ही मेरे बूब्स के बीच मुँह रगड़ दिया.

लखन : ब्ब्ब्बररररराआाहह. फिर मेरी पिचकारी छूट पड़ी.

लखन : पसंद आ रही है साली रंडी.

में : ओह हाँ… पर यहाँ कोई देख लेगा.. कहीं और चलो.

लखन : देख लेगा तो क्या? वेसे भी यहाँ कई रंडियां चुदती है कोई कुछ नहीं कहता.

में : अरे पर में रंडी थोड़ी ही हूँ.

लखन : जो भी हो.. तू माल तो अच्छा है. उसने मेरी टी-शर्ट उपर की और अपना मुँह जितना खुल सके.. उतना खोलकर मेरे सीधे वाले बूब्स पर चिपका दिया और खूब ज़ोर ज़ोर से चूसने लगा.. लग रहा था कि आज तो दूध ही निकल आयेगा. चूसते चूसते उसने अपने दोनों हाथ मेरे चूतड़ पर दबा दिए और जानवरों की तरह दबाने लगा.

में : प्लीज़.. साईड में चलो.. में मना थोड़ी कर रही हूँ.. जो चाहो कर लेना लेकिन उस झाड़ी के पीछे चलो.

फिर लखन मुझे झाड़ी के पीछे ले गया.. मुझे पीछे से दबोच कर जिससे कि उसका लंड मेरी गांड मे चुभ रहा था. झाड़ी के पीछे आते ही उसने मेरी टी-शर्ट निकालकर साईड में फेंक दी.

में : अरे क्या कर रहे हो.. मुझे जाना भी है कही गंदा मत करो. लखन मेरे बूब्स पर चींटे की तरह मुँह लगाकर चिपका हुआ था और ऐसे ही में टी-शर्ट उठाने लगी. फिर बड़ी मुश्किल से टी-शर्ट उठाकर साईड में रखी.. अब में ऊपर से नंगी थी और मेरा एक बूब्स लखन खा रहा था और एक लटक रहा था.

मुझे अंदाज़ा हो गया कि ये बड़ा भूखा है.. आज तो हालत ख़राब कर देगा. फिर मैंने सोचा जल्दी ख़त्म करते है.. मैंने झट से अपनी जीन्स का बटन खोल दिया और उतारकर साईड में रख दी.. लखन खड़ा होकर खुशी से देखने लगा.

लखन : अपनी ठुकाई की तैयारी खुद ही कर रही है.

में : हाँ.. नहीं तो तुम तो सारा दिन बूब्स ही चूसते रहोगे.. और मैंने दोनों बूब्स को पकड़कर हिला दिया और फिर झट से पेंटी उतारी और ज़मीन पर ही कुत्तिया बन गई. मुझे लगा कि लखन अपना लंड डालेगा.. देसी आदमी वेसे भी सिर्फ़ चुदाई ही जानते है.. मुझे लगा पर वो भूखे शेर की तरह मेरी चूत पर मुँह लगाकर जूस चूसने लगा.. मेरी चीख निकल गयी.. सुनने वालों ने कई दूर से सुन ली होगी.. ऐसी चीख थी.

हिंदी सेक्स स्टोरी :  सुमित की शादी का सफर-3

में : क्या कर रहे हो.. खा ही जाओगे क्या?

लखन : इतनी सुन्दर चूत है तेरी.. खानी ही पड़ेगी. ऐसी चूत तो सिर्फ़ विदेशी फ़िल्मो में देखी है.

में : तुम्हे पसंद आई?

लखन : दिखाता हूँ कितनी पसंद आई. उसने फिर एक थप्पड़ घुमाकर मेरी चूत पर मारा और में एकदम से उछल गई.

में : आअहह.. जानवर ही हो क्या?

लखन : शेर हूँ शेर.

में : शेर का तो लंड छोटा होता है.. काफ़ी बड़ा तो गधे का होता है और में हंस पड़ी. लखन ने मुझे बाल पकड़कर उठाया.. शायद वो समझ चुका था कि मुझे काबू करना आसान है और में ज़्यादा कहूँगी नहीं.. मुझे उसने घुटनो के बल बैठाया और अपना पेंट खोल दिया. उसका लंड ज़्यादा बड़ा नहीं था.. पर उसकी हेल्थ के हिसाब से काफ़ी ज़्यादा मोटा था.

में : वाउ.. ये तो काफ़ी मोटा है..

इतना बोलते ही उसने अपना लंड मेरे मुँह में घुसेड़ दिया और ज़ोर ज़ोर से चूत की तरह चोदने लगा.. लंड मेरे गले तक घुस रहा था.. वो चोदे जा रहा था.. मेरा चिपचिपा थूक निकलकर लंड पर लग गया. जिससे कि वो और चिकना हो गया और सरर सररर मुँह में अंदर बाहर होने लगा. में मुँह साईड में करने की कोशिश कर रही थी लेकिन उसने मुझे कसकर बालों से पकड़ा हुआ था.. पर आख़िर में मुँह साईड में करने में कामयाब हो गई और वो रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था.

मेरे गले की जगह वो मेरे गाल को अपने मोटे लंड से चोद रहा था.. गाल ऐसा लग रहा था कि फट ही जायेगा.. उसने खूब मुँह को चोदा. फिर जल्दी से मुझे मोड़ा और फिर से कुत्तिया बना दिया और ज़ोर से मेरी चूत में लंड डाल दिया.

लखन : साली रांड़ कितनो से चुदवा चुकी है.. चूत तो खुली है तेरी.. पर काफ़ी टाईट है .

में : आअहह ऊऊ.. मेरे बॉयफ्रेंड से ही बस.

लखन : मेरा लंड केसा लगा तुझे.

में : मज़ेदार आआआअहह है काफी मस्त है लंड तुम्हारा.. पर थोड़ा और लंबा होता तो और गहरा उतर जाता.. हहस्सस्स.

यह कहानी आप HotSexStory.xyz में पढ़ रहें हैं।

लखन : गहरे का क्या है? ये देख.. लखन ने मेरी चूतड़ पर थप्पड़ मारा और पूरी जान लगाकर अपनी कमर हिलाने लगा.. लग रहा था कि लंड नहीं खंजर हो.. जो मेरी चूत में अंदर बाहर हो रहा है. इतना मज़ा आ रहा था कि क्या बताऊँ.. में वहां पड़े पड़े ही मज़े ले रही थी.. इतने में फोन बज पड़ा.

हिंदी सेक्स स्टोरी :  अनजान औरत को परिवार का सदस्य बनाया

पायल : ओये कहां है तू?

में : यहीं हूँ.

पायल : बारिश तो कब की बंद हो गयी.. कब आयेगी.

में : अरे बस निकल रही हूँ.

लखन : भोसड़ी की कौन है ये जो चुदाई में बाधा डाल रही है. मैंने पीछे मुड़कर इशारा किया चुप होने का.. लखन मेरी पीठ से चिपक गया और मेरे उपर लगभग लेट गया और चोदना चालू रखा.

पायल : अरे यार तेरे चक्कर में कब से खड़ी हूँ.. तू अब जल्दी आजा.

में : बस पहुँच रही हूँ.. उऊऊइीईईई.

पायल : ये तेरी आवाज़ को क्या हुआ.. लखन धीरे से मज़े लेता हुआ कहता है.. चूत चुद रही है रंडी की.

में : उउंम्म रोड़ पर गड्डे है यार काफी.. रिक्शे वाले धीरे चलाओ.. उउउइई माँआआ.

पायल : कौन से रास्ते से आ रही है तू.. खेर जल्दी आजा.

में : ठीक है.

में : फिर बच गई.. लखन अब खूब तेज़ झटके मार रहा था. उसने अपनी दोनों हथेली मेरी पीठ पर रखी.. हाथ सीधे किए और ज़मीन पर सिर्फ़ उसके पंजे थे.. जैसे मेरी पीठ को दबा रहा हो और फिर वो हथेली और पंजो के सहारे ही बेलेंस बनाकर जोरदार झटके मारने लगा. उसके झटके तेज़ हो रहे थे.. में समझ गई कि इसका निकलने वाला है.. में एकदम से आगे हुई और उसका लंड बाहर आ गया.. पर वो झटका मार रहा था और इसलिये बाहर आते ही लंड मेरी गांड के छेद में ज़ोर से लगा.

लखन : माँ की लोड़ी आने वाला है.. क्या कर रही है? में एकदम से घुटनो के बल बैठी और अपने दोनों बूब्स में उसका लंड समेट कर ऊपर नीचे करने लगी. उसने मुझे धक्का दिया और में पत्तो पर पीठ के बल गिर गई और वो मेरे उपर चड़ गया और मेरे पेट पर बैठकर अपना लंड मेरे बोबो के बीच फंसाकर आगे पीछे घिसने लगा. थोड़ी देर में उसकी पिचकारी मेरी गर्दन पर और बोबो पर बिखर गई.. मैंने मज़े लेकर उसका माल उंगली से चाटा.. वो मेरे उपर ही लेट गया और लिपट गया.

में : ले लिए मज़े अब तो.

हिंदी सेक्स स्टोरी :  सुमित की शादी का सफर-2

लखन : अभी कहां.. अभी तो असली काम बाकी है.

में : वो क्या?

लखन : में तेरी मोटी गदराई गांड पर फिदा हूँ.. वो लेनी है.

में : ओह नो.. नहीं प्लीज़… अभी नहीं.. अभी मुझे जाना पड़ेगा.. में बाद में मिलूंगी कभी तो वो भी ले लेना.

लखन : चल ठीक है कहां भागेगी.. अब तो तू मेरी रंडी है.

में : हाँ हाँ हाँ… फिर में उठी और लखन ने अपना लंड चुसवाकर साफ करवाया. फिर अपने आपको लखन की चड्डी से साफ किया और अपने कपड़े पहने. फिर में झाड़ी से बाहर आई.. तो देखा उसी रोड़ पर दूसरी साईड में ऑटो आ रहा था. उस ऑटो में पायल बैठी थी और मुझे देख रही थी.. उसने ऑटो रुकवाया.. पर ऑटो कुछ आगे जाकर रुका. लखन पेशाब करके मेरे पीछे से निकला और रिक्शे पर बैठ गया.. पायल उसे मेरे पीछे से निकलते नहीं देख पाई थी.

लखन : चलो मेडम.

में : ओह रूको.. मेरी दोस्त यहाँ है.

लखन : चलो.. तो फिर अपना नम्बर तो बता दो.. मैंने लखन का नम्बर लिया और फिर रिक्शे में बैठकर ही उसी साईड चल दी जहाँ से आई थी.. वेसे लखन को भी वापस जाना था.. वहीं आगे में ऑटो के पास उतरी और ऑटो में बैठने लगी.

पायल : अरे पैसे तो दे दे बेचारे को.. में सोच रही थी कि चूत और मुँह तो दे ही दिया है और ऊपर से पैसे भी दूँ.

आपने HotSexStory.xyz में अभी-अभी हॉट कहानी आनंद लिया लिया आनंद जारी रखने के लिए अगली कहानी पढ़े..

लखन : अरे नहीं नहीं.. मेडम का ख़ाता है मेरे साथ.. कोई बात नहीं.. बाद में ले लूँगा.. जब कभी दिखेंगी. पायल ने कहा.. ओके और हम दोनों चल दिये.. पायल ने रास्ते में कहा.. मुझे सब पता है किस खाते की बात हो रही थी. मेरी आँखे फटी की फटी रह गयी कि इसे कैसे पता चला? फिर होस्टल पहुँचने पर उसने बताया कि तुझे जो झटके लग रहे थे.. वो चुदाई ही हो सकती थी.. फिर मैंने आँख मारी और कहा कि क्या करूँ? चूत के लिए ये सब करना पड़ता है.

HotSexStory.xyz में कहानी पढ़ने के लिये आपका धन्यवाद, हमारी कोशिश है की हम आपको बेहतर कंटेंट देते रहे!