रूचि की कुंवारी चूत 3

Ruchi ki kunwari chut-3

फिर मैंने उसकी पैंटी के ऊपर से सी ही उसकी चूत को सहला दिया; तो उसे जैसे 440 वॉल्ट का करेंट लगा… !!! और उसने मुझे और ज़ोर से पकड़ लिया और कहा – तुषार, मुझे धोखा तो नहीं दोगे ना; मैं तुम्हारे सिवा किसी और से शादी नहीं कर सकती!!!

मैंने उसे प्यार से समझाया की हम दोनों एक दूसरे के लिए ही बने हैं और समय आने पर शादी भी हो जाएगी पर आज हमारी सुहाग रात है!!!

रूचि मे मुझे अपने ऊपर खींचते हुए कहा – हुमें शादी तक इंतज़ार करना चाहिए… …

तो मैंने उसे कहा – आज हमारा गंधर्व विवाह हो गया है… !!! और आज हमारी सुहाग रात है…

यह कह कर मैंने रूचि की टी-शर्ट पूरी निकल दी; रूचि भी हाथ ऊपर कर निकलवाने लगी और उसने एक ज़ोर की अंगड़ाई ली… !!

उफ़; क्या बात थी!! रूचि के दोनों स्तन जो की 32 साइज़ के होंगे पूरी तरह ऊपर की तरफ उभर आए!!! मुझसे रहा नहीं गया और मैं रूचि के स्तन को धीरे धीरे दबाने लगा, उसका ये रूप आज पहली बार मेरे सामने था… !!!

रूचि की झील सी घहरी आँखे…, सुंदर सा चेहरा…, सुराही दार गर्दन…, उस पर उसके उभरे हुए स्तन…, और उसके दोनों निप्पल पूरी तरह खड़े हो गये थे… !!!

रूचि का रंग गेहुआ था इसीलिए उसके निप्पल डार्क ब्राउन कलर के थे!!!

रूचि के स्तन से लेकर नाभि तक एक समान सपाट पतली कमर और पेट था… जो की बूरी तरह ज़ोर ज़ोर से साँसें लेने से ऊपर नीचे हो रहा था!!! !!

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अब रूचि सिर्फ़ पैंटी में थी और फिर रूचि को भी जोश आया और उसने मेरे कपड़े उतारने शुरू किए… पहले मेरी जैकेट, फिर टी-शर्ट…

जैसे ही उसने मेरे लोवर में हाथ लगाया; उसकी नज़र मुझसे और उसका हाथ मेरे लण्ड से टकराया… !!! वो आज पहली बार मेरे लण्ड को हाथ लगा रही थी… !!!

मैंने स्माइल देते हुए प्रशन वाचक नज़ारे की… ?? तो रूचि बूरी तरह शर्मा गई और अपने आप को मेरी चौड़ी छाती में छुपाने लगी!! !!!

अब धीरे से, मैंने अपना लोवर उतार कर अलग किया… मुझे जॉकी पहनने की आदत है सो मेरा लण्ड पूरा का पूरा खड़ा हुआ अलग सा बाहर आने के लिए चिल्ला रहा था… !!!

रूचि भी लण्ड महाराज के दर्शन करने के लिए किसी ना किसी बहाने उसे जॉकी के अंदर से ही निहार रही थी; तब मैंने रूचि को सीधा पीठ के बल लिटाया और उसके पैरों के उंगलियो को चूमना और चूसना शुरू किया… …

रूचि इससे बूरी तरह उतेज़ित हो कर कांपने लगी और अपने होश खोने लगी!!

मैं धीरे धीरे उसके पैरों को चूमता हुआ उसकी चूत की तरफ बढ़ने लगा…

रूचि ने अब तक अपने सारे हथियार डाल दिए थे और वो भी हमारी सुहाग रात एंजाय करने लगी थी!!! !!

मैंने उसकी चूत जो दोनों पैरों के बीच बंद थी; उसे पैंटी के ऊपर से ही चूम लिया…

उसकी चूत से अलग सी खुश्बू आ रही थी!! अब तक रूचि की चूत पूरी तरह सी गीली हो गई थी!!!

सो मैंने धीरे धीरे उसकी पैंटी नीचे खींचनी शुरू की; तो रूचि ने दोनों पैर ज़ोर से जोड़ लिए…

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मैं ज़बरदस्ती नहीं करना चाहता था, इसलिए उसे मैंने अपने लण्ड महाराज के दर्शन कराने की सोची और मेरी जॉकी निकाल दी… जैसे ही मेरा 7 इंच लंबा लण्ड खड़ा हुआ बाहर आया; वो सीधा छत की तरफ देख कर सलामी देने लगा… … और मैंने भी तुरंत रूचि का हाथ पकड़ कर उसे अपने लण्ड पर ले जाकर रख दिया!! !!!

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अब अचानक उसकी आँखे खुल गईं और वो मेरे लण्ड को मंत्रमुग्ध हो कर निहारने लगी!!…

कुछ देर के लिए तो वो बस देखती ही रही!! फिर मैं रूचि को देख कर मुस्करा दिया तो उसे खायल आया की वो क्या कर रही है… !!

वो फिर से शर्मा गई और लण्ड से हाथ हटाने लगी पर मैंने उसे ऐसा करने नहीं दिया और उसके हाथ से लण्ड को थोड़ा मसल दिया…

फिर मैने रूचि को लण्ड को सही तरह से पकड़ना सिखाया और ऊपर नीचे करके हस्तमैथुन करना सिखाया…

वो भी कुछ ही देर में एक्सपर्ट की तरह ये काम करने लगी…!!!

अब मेरी बारी थी, मैंने थोड़ा ज़ोर लगा कर रूचि की पैंटी नीचे खींची और उसकी छोटी छोटी झांटे दिखने लगीं… …

रूचि ने थोड़ा सा विरोध किया पर वो मेरे लण्ड को नहीं छोड़ना चाहती थी; इस बात का फ़ायदा उठा कर मैंने रूचि की पैंटी पूरी नीचे खींच दी और उसे उसके घुटनों तक ले आया… …

इस पर अचानक उसने उठ कर पैंटी वापस खींचनी चाही; पर मैंने उसे झट से वापस लिटा दिया और उसकी चूत पर अपने होंठों को लगा दिया… !!!

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मेरी इस हरकत से रूचि पूरी तरह से तड़प उठी और अपने दोनों पैर अलग कर लिए और मुझे “खुली जन्नत” के नज़ारे दिखा दिए…

लगभग दो दिनों पहले साफ़ की हुई नाज़ुक सी दो गुलाब की पंखुड़ियो की तरह उसकी चूत पूरी तरह से फूली हुई थी!! !!!

अब तक उस में से नमकीन पानी का रिसाव काफ़ी बढ़ गया था…

रूचि ने पहली बार अपनी “कुंवारी चूत” किसी के लिए खोली थी… !!

“कुंवारी चूत” सुनने में जितना आसान है; मिलना उतना ही मुश्किल… … …

मुझे लगता है “कुंवारी चूत” मिलना आज कल ऐसा है; जैसे किसी को कहीं गड़ा हुआ खजाना मिलना, यानी लगभग नामुमकिन!! !!!

खैर, आप में से मेरे कई साथी इस वक़्त मुझसे जल रहें होंगे पर आपके मेल लगातार मेरा उत्साह बड़ा रहें हैं…

एक बार फिर सभी पाठकों के साथ “एम एस एस” और कामिनी जी का धन्यवाद…

जल्द ही पेश करूँगा कहानी का चौथा भाग; लेकिन हाँ भूलिएगा नहीं, यह बताना की मेरी कहानी ने आपके लण्ड में और लड़कियों की चूत में खलबली पैदा की या नहीं…??

जवाब के इंतज़ार में…

आपका दोस्त –
तुषार… …

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