सावन में मस्ती..-2

Saavan me masti-2

मैं भी दीदी के साथ जाना चाहती थी पर जैसे ही मैं उठने लगी तो उसने मेरा हाथ पकड़ कर वापिस बैठा दिया। हम दोनों में से कोई भी कुछ नहीं बोला।

कुछ देर के बाद दीदी चाय ले आई और फिर हम सब चाय पीकर बहुत देर तक बातें करते रहे। वो बहुत खुशदिल था तो मैं उस पर मर मिटी थी। शाम का समय हो गया था तो दीदी ने उसको कहा- अजय, जाओ, लक्ष्मी को खेत दिखा लाओ। मेरे दीदी के घर के पीछे ही उनके खेत थे जहा वो सब्जियाँ उगाते थे। वो तो जैसे तैयार ही बैठा था। और सच कहूँ तो मैं भी उस से अकेले में मिलने को बेचैन हो गई थी।

हम लोग बाहर आये तो बाहर बादल छाये हुए थे, दीदी बोली- लक्ष्मी, बारिश आने वाली है तो जल्दी घर आ जाना।

मैंने भी हाँ में सिर हिलाया और अजय के साथ चल दी। खेत में सब्जियाँ देखते हुए हम खेत में घूमते रहे और फिर खेत के कौने में बने एक झोंपड़े में चले गए। इस दौरान वो मुझे दो तीन बार आई लव यू बोलने को कह चुका था पर मैं हर बार उसकी बात को टाल रही थी और मुस्कुरा कर उसके दिल पर छुरियाँ चला रही थी। उसको तड़पाने में मुझे बहुत मज़ा आ रहा था।

अभी हम झोंपड़े के पास पहुँचे ही थे कि बारिश शुरू हो गई। मैं घर की तरफ भागी पर उसने मुझे पकड़ कर झोपड़े में खींच लिया। तभी बारिश भी पूरे वेग से होने लगी।

“अजय, घर चलते हैं…. कोई क्या सोचेगा…” यह कहानी आप HotSexStory.xyz पर पढ़ रहे हैं।

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पर उसने कोई जवाब नहीं दिया बस मुझे अपनी बाहों में भर लिया और अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए। मैंने छुटने की थोड़ी कोशिश की पर उसकी पकड़ बहुत मजबूत थी और कुछ देर के बाद मैं अपनेआप में नहीं रही। अब तो मैं भी उसमें समा जाने को बेताब हो उठी।

उसने मेरी कमीज को ऊपर करना शुरू किया तो दिल जोर से धड़का पर उसकी मर्दानगी के आगे मैं लाचार थी। कुछ ही क्षण में उसने मेरी कमीज को मेरे बदन से अलग कर दिया । शमीज में कसी मेरी चूचियाँ देख कर वो पागल सा हो गया। उसने मेरी शमीज को ऊपर उठाया और मेरी गोरी गोरी चूचियों को देखने लगा। मैं तो मदहोश हो गई थी और मेरी आँखें बंद थी। तभी मुझे अपनी चुचूक पर उसके होंठों का एहसास हुआ। मेरा तो सारा शरीर झनझना उठा। वो मेरी चूची को मुँह में भर भर कर चूस रहा था और दूसरी को मसल रहा था।

एक बारिश तो बाहर हो रही थी और दूसरी मेरी पेंटी के अंदर। मेरी चूत पानी पानी हो रही थी। मेरी होंठ और चूचियों को चूसने के बाद अजय के होंठ नीचे बढ़ने लगे। पहले मेरी नाभि को चूमते हुए उसने मेरी सलवार के नाड़े को खोल दिया। सलवार अगले ही पल मेरे पाँव चूम रही थी। अजय पेंटी के ऊपर से ही मेरी चूत को सहलाने लगा और चूमने लगा।

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मेरे अंदर एक आग सी भरती जा रही थी। दिल कर रहा था कि अजय जल्दी से मेरी चूत में कुछ घुसा दे। तभी अजय ने मेरी पेंटी भी नीचे खींच दी। अब मैं बिल्कुल नंगी उसके सामने खड़ी थी।

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अजय ने मुझे वही पर पड़ी एक चारपाई पर लेटाया और मेरी टाँगें खुली करके मेरी चूत को चाटने लगा। चूत पर जीभ के एहसास मात्र से ही मेरी चूत झड़ गई। ये सब अति-उतेजना के कारण हुआ। अजय मेरी चूत से निकले सारे रस को पी गया। तभी अजय खड़ा होकर अपने कपड़े उतारने लगा। मैं उसको नंगा होते हुए देख रही थी। उसने अपनी कमीज और बनियान उतारी तो उसके बदन को देख कर उसकी मजबूती का एहसास हो रहा था। फिर जब उसने अपनी पैंट उतारी तो उसके अंडरवियर पर मेरी नजर गई। उसके अंडरवियर में बनी गाँठ को देख कर मैं सिहर उठी। गाँठ से उसके मोटे लण्ड का अंदाजा लग रहा था।

जब उसने अपना अंडरवियर उतारा तो उसके लम्बे और मोटे लण्ड को देख कर मेरे मुँह से “हाय राम” निकला तो वो हँस पड़ा। उसका लण्ड सात-आठ इंच लम्बा और तीन-चार इंच मोटा था। तन कर खड़ा लण्ड बहुत भयानक लग रहा था। मुझे चुदाई का कुछ भी पता नहीं था पर शादी वाले दिन और अपनी सहेलियों से जो पता लगा था उसके अनुसार तो यह मोटा सा लण्ड मेरी छोटी सी चूत में घुसने वाला था।

अजय आगे आया और उसने अपना लण्ड मेरे मुँह की तरफ किया और मुझे चूसने के लिए बोला। पर मैंने पहले कभी ये नहीं किया था तो मैंने मना कर दिया और बहुत कहने पर भी मैंने वो अपने मुँह में नहीं लिया। जब मैं नहीं मानी तो अजय फिर से मेरी जांघों के बीच बैठ कर मेरी चूत चाटने लगा। मैं तो जैसे मस्ती के मारे मरी जा रही थी।

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बाहर बारिश अभी भी पूरे जोर से हो रही थी।

कुछ देर मेरी चूत चाटने और चूसने के बाद अजय ने थोड़ा सा थूक मेरी चूत और अपने लण्ड पर लगाया और अपना लण्ड मेरी चूत पर रख दिया। गर्म लोहे की छड़ जैसा लण्ड महसूस होते ही एक बार फिर से मेरा सारा शरीर झनझना उठा। दिल भी कर रहा था कि अजय पूरा घुसा दे, पर पहली बार था तो डर भी बहुत लग रहा था।

तभी अजय ने लण्ड जोर से चूत पर दबाया तो मुझे दर्द का एहसास हुआ। मैं डर के मारे अजय को अपने ऊपर से दूर धकेलने की कोशिश करने लगी। पर अजय पक्का खिलाड़ी था। उसने मुझे हिलने भी नहीं दिया और एक जोरदार धक्का लगा कर लण्ड का मोटा सुपारा मेरी चूत में घुसा दिया। सुपारा अंदर जाते ही जैसे मेरी तो जान ही निकल गई। लण्ड की मोटाई के लिए मेरी चूत बहुत तंग थी। अभी मैं संभल भी नहीं पाई थी कि अजय ने एक और जोरदार धक्का लगा कर करीब दो इंच लण्ड मेरी चूत में फंसा दिया। मेरी चीख निकल जाती वो तो अजय ने एक हाथ से मेरा मुँह दबा लिया।

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