सावन में मस्ती..-3

Saavan me masti-3

मेरी आँखों से आँसुओं की धार बह निकली थी। सच में बहुत दर्द महसूस हो रहा था।

अजय थोड़ा रुका और मेरी चूची को अपने मुँह में लेकर चूसने लगा और मुझे समझाने लगा कि कुछ ही देर में दर्द खत्म हो जाएगा। बस थोड़ा सा सहन करो फिर बहुत मज़ा आएगा। पर मेरी चूत तो जैसे दो हिस्सों में फटने को हो रही थी। लग रहा था कि जैसे कोई चूत को किसी धारदार चीज से चीर रहा हो।

अजय के रुकने से दर्द कुछ कम हुआ ही था कि अजय ने लण्ड थोड़ा बाहर को खींचा और फिर एक जोरदार धक्के के साथ दुबारा चूत में घुसा दिया। धक्का इतना जबरदस्त था कि मुझे मेरी चूत फटती हुई महसूस हुई। मेरी चूत से कुछ बह निकला था।

अजय ने बेदर्दी दिखाई और दो धक्के एक साथ लगा कर आधे से ज्यादा लण्ड मेरी चूत में डाल दिया। मैं दर्द से दोहरी हो गई।

“हाय…. फट गईई मेरी तो…. मुझे नहीं करवाना….बाहर निकल अपना…. निकाल कमीने…मैं मर जाऊँगी…” मैं चिल्ला रही थी पर अजय तो जैसे कुछ सुन ही नहीं रहा था। बस वो तो मुझे मजबूती से पकड़ कर मेरे ऊपर लेटा हुआ था। जैसे ही मैं थोड़ा शांत हुई बेदर्दी ने दो धक्के फिर से लगा दिए और पूरा लण्ड मेरी चूत में घुसा दिया। मेरी हालत हलाल होते बकरे जैसी हो रही थी।

पूरा लण्ड घुसाने के बाद अजय बोला- बस मेरी रानी हो गया, अब दर्द नहीं होगा… अब तो बस मज़ा ही मज़ा… पहली बार इतनी मस्त कसी चूत मिली है…”

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वो मेरे ऊपर लेटा मेरी चुचूक मसल रहा था और दूसरे को मुँह में लेकर चूस रहा था और दांतों से काट रहा था। कुछ देर ऐसे ही रहने से मुझे दर्द कुछ कम होता लगा। चूत में दर्द के साथ साथ एक अजीब सी गुदगुदी होने लगी थी। दिल मचलने लगा था कि अजय लण्ड को अंदर-बाहर करे। जब अजय ने कुछ नहीं किया तो मैंने ही अपनी गाण्ड थोड़ा हिलाई। अजय को जैसे मेरे दिल की बात पता लग गई और उसने धीरे से लण्ड को बाहर निकाला और फिर एकदम से अंदर ठूस दिया।

चूत एक बार फिर चरमरा उठी। पर अब अजय नहीं रुका और उसने लण्ड को धीरे धीरे अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया।

लण्ड जब भी चूत में जाता तो दर्द तो होता ही पर पूरे शरीर में एक अजीब सी गुदगुदाहट सी भी होती। दिल करता कि अजय और अंदर तक डाल दे। अजय धीरे धीरे स्पीड बढ़ा रहा था। करीब पाँच मिनट की चुदाई के बाद लण्ड ने अपने साईज के अनुसार चूत को फैला दिया था और अब लण्ड थोड़ा आराम से अंदर-बाहर हो रहा था। अब चूत ने भी पानी छोड़ दिया था जिस से रास्ता चिकना हो गया था।

अब दर्द लगभग खत्म हो गया था बस जब अजय कोई जोरदार धक्का लगाता तो थोड़ा दर्द महसूस होता पर अब दिल कर रहा था कि अजय ऐसे ही जोर जोर से धक्के लगाए। मेरी चूत में सरसराहट बढ़ गई थी। लग रहा था कि जैसे कुछ चूत से निकल कर बाहर आने को बेताब हो। अभी कुछ समझ ही नहीं पाई थी कि मेरी चूत से झरना बह निकला। मैं झड़ रही थी।

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मेरा पूरा शरीर अकड़ रहा था और मैंने अपने दोनों हाथो से अजय की कमर को पकड़ लिया था और उसको अपने ऊपर खींच रही थी। दिल कर रहा था कि अजय पूरा का पूरा मेरे अंदर समा जाए। इसी खींचतान में अजय की कमर पर मेरे नाख़ून गड़ गए।

अजय क्यूंकि अभी नहीं झड़ा था तो वो अब भी पूरे जोश के साथ धक्के लगा रहा था। पर मैं झड़ने के बाद कुछ सुस्त सी हो गई थी। अजय के लण्ड की गर्मी और धक्कों की रगड़ ने मुझे जल्दी ही फिर से उत्तेजित कर दिया और मैं फिर से गाण्ड उठा उठा कर लण्ड अपनी चूत में लेने लगी। फिर तो करीब बीस मिनट तक अजय और मैं चुदाई का भरपूर मज़ा लेते रहे और फिर दोनों ही एक साथ परमसुख पाने को बेताब हो उठे। अजय का लण्ड भी अब चूत के अंदर ही फूला हुआ महसूस होने लगा था।

अजय के धक्कों की गति भी बढ़ गई थी। तभी मैं दूसरी बार पूरे जोरदार ढंग से झड़ने लगी। अभी मैं झड़ने का आनन्द ले ही रही थी कि अजय के लण्ड ने भी मेरी चूत में गर्म गर्म लावा उगलना शुरू कर दिया। कितना गर्म गर्म था अजय का वीर्य। मेरी पूरी चूत भर दी थी अजय ने। मैं तो मस्ती के मारे अपने होश में ही नहीं थी, दिल धाड़-धाड़ बज रहा था। मैं तो जैसे आसमान में उड़ रही थी, भरपूर आनन्द आ रहा था। बिल्कुल वैसा ही जैसा मैंने मेरी सहेलियों और भाभियों से सुना था। दिल कर रहा था कि अजय ऐसे ही लण्ड को अंदर डाल कर लेटा रहे।

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बाहर अब भी जोरदार बारिश हो रही थी। अंदर तो भरपूर बारिश हो चुकी थी, चूत भर गई थी। जैसे ही होश आया तो मैं शर्म के मारे लाल हो गई। अजय ने अपना लण्ड बाहर निकाला और पास पड़े एक कपड़े से साफ़ कर लिया और फिर मुझे दे दिया चूत साफ़ करने के लिए। मैंने भी अपनी चूत साफ़ की। चूत में दर्द हो रहा था। खड़ी होकर मैंने अपने कपड़े पहने। तब तक अजय भी कपड़े पहन चुका था। अजय ने मेरी तरफ देखा तो मैं भी शरमा कर उसकी बाहों में समा गई।

“आई लव यू लक्ष्मी…”

“तुम बहुत बेदर्द हो !”

लड़खड़ाते कदमो से मैं बाहर आई तो अभी भी सावन की फुव्वारे मौसम को रंगीन बना रही थी। जब बारिश की बूँदे मेरे ऊपर पड़ी तो एक नयी ताजगी सी महसूस हुई।

उसके बाद मैं तीन दिन तक दीदी की ससुराल में रही और दो बार मैंने चुदाई का भरपूर आनन्द लिया। वहाँ से आने के बाद मुझे चुदाई का मज़ा नहीं मिला और मैं आज भी अपनी चूत के लिए एक मोटे से लण्ड की तालाश में हूँ…

आप सब के मेल का इन्तजार रहेगा..

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